'योग द्वारा तनाव प्रबंधन' पर आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला का समापन


'योग द्वारा तनाव प्रबंधन' पर आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला का समापन
सागर । डॉ हरीसिंह गौर केंद्रीय वि.वि.. सागर  के योग विभाग द्वारा आयोजित   'योग रो तनाव प्रबंधन' विषय  पर सात दिवसीय  कार्यशाला का आज समापन हुआ।समापन।  समारोह कुलपति प्रो0 आर पी तिवारी के मुख्य आतिथ्य एवं यूजीसी के  मानव संसाधन विकास केन्द्र के निर्देशक प्रो० आर टी बेंद्रे  एवं शिक्षा  अध्ययनशाल के अधिष्ठाता प्रोफेसर गणेश
शकर गिरी की उपस्थिति में हुआ। इसके विशेष अथिति योगाचार्य विष्णु आर्य, आयुर्वेदाचार्य राजेश शुक्ला, पूर्वयोगविभागाध्यक्ष प्रो0 यु एस गुप्ता, मनोविज्ञान विभाग के ज्ञानेश तिवारी  उपस्थित थे
कुलपति प्रो० तिवारी  ने स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन पर  कहा कि हमारे अन्दर विधमान
क्षमताओं, विशेषताओं आदि का ज्ञान न होना ही मानसिक अस्वस्थता एवं तनाव का प्रमुख कारण है। इन चुनौतियों को ध्यान में रखतेहए ही योग में अनेक उपायों का वर्णन किया गया है ।जो हमारी चित्त शुद्धि एवं आत्मज्ञान प्राप्त करने की भारतीय परातन विधा है।जिसके द्वारा सकरात्मक विचार एवं आत्मसम्प्रत्य का निर्माण, मानसिक शान्ति की प्राप्ति, तनाव च चिन्ता आदि मानसिक रोगों सेमुक्ति, विभिन्न परिस्थियों के साथ सामंजस्य की स्थिति, शरीर, मन एवं आत्मा का  संतुलन, वैयक्तिक उर्जा का वैश्विक या दिब्य उर्जासे समन्वय आदि की प्राप्ति सम्भव  है। 
         योगविभागाध्यक्ष प्रो गणेश शंकर गिरि ने अपने वक्तव्य में कहा कि तनाव प्रबंधन आधुनिक समय में विश्व शान्ति हेतु अत्यन्त उपयोगी हो गया है क्योंकि प्रत्येक प्राणी ने भौतिकीकरण के कारण समर स्वारस्य का अभाव होता जा रहा है इसका निदानयोग में वर्णित विभिन्न उपायों जिनमें पमुख रूप से व्यवस्थित दिनचर्या, सदाचार, सव्यवहार एवं योगाभ्यास आदि के पालन से ही संभवइ है ।ईनके पालन से जीवन में किसी भी प्रकार के तनाबका प्रबंधन सभव है। इस कार्यशाला का उददेश्य प्रत्येक व्यक्ति केशरीर और मन और उनसे जुड़ी तनाव जनित समस्याओं एवं उनके निराकरण करना था। 
              डा0 बेंद्रे ने योग को एक जीवन शैली के रूप में अपनाने की चर्चा करते हुए योग को पित्त का विज्ञान बताया।उन्होंने ने अपने वक्तव्य में योग परपरा एव इसके आईनिक महत पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि योग द्वारा व्यक्ति कासर्वगीण विकात अनेक प्रकार की साधनाओं एवं नैतिक मूल्यों के द्वारा किया जा सकता है।
कार्यशाला  का  महेन्द्र शर्मा ने  संचालन किया एवं डा.आर०टी० बेन्द्र ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में तनाव प्रबंधन पर आधारित माईम की प्रस्तुति ज्योति, ऋशिता एवं महादेवी द्वारा दी गई। योगाभयास का प्रदर्शन  किया गया। कार्यकम में अरुण साव, मधुकर, दयानन्द प्रकाश, प्रेरणा, दशरथ, किरण,बाबुराव, अजय, निहारिका, अविनाश, राज भाउ, रामकृष्ण, प्रमोद, मालवी, राजेन्द्र, अकिंत कोमल, दिनेश, ज्योति, प्रवेश व नवीन आदि
विश्वविद्यालय के अध्यापक एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें