निर्माणधीन सर्वतो भद्र जिनालय में क्रेन लगी, काम में आएगी तेजी

निर्माणधीन सर्वतो भद्र जिनालय में क्रेन लगी, काम में आएगी तेजी

सागर । जैन आगम के इतिहास में विश्व के सबसे ऊंचे बन रहे चतुर्मुखी सर्वतो भद्र जिनालय का निर्माण कार्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद से धर्म नगरी सागर में हो रहा है। 21 जुलाई को निर्यापक मुनि श्री समयसागर महाराज के ससंघ सानिध्य में एक टावर क्रेन का उद्घाटन किया गया। 
मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि क्रेन लगने के बाद अब मंदिर के निर्माण कार्य में और गति आएगी इस अवसर पर भाग्योदय के प्रमुख ट्रस्टियो देवेंद्र जेना, राकेश पिडरुआ अनूप जैन ताले, ब्र देवेंद्र भैया आदि ने लगभग 80 फुट की ऊंचाई पर पहुंच कर विधि विधान से क्रेन की पूजन की और क्रेन को चालू कराकर पहला पत्थर गर्भ ग्रह के ऊपर रखवाया। इस अवसर पर प्रकाश जैन पारस, राजेश जैन, शुभम जैन, सीए प्रिऐश जैन, नरेन्द्र सूत,दिनेश बिलहरा, कपिल सिंघई, वीरेंद्र मालथौन, ऋषभ बांदरी, ऋतुराज जैन, नमिता जैन, हनी जैन, अभिलाषा जैन, राकेश निश्चय, राजेश जैन रहली, रविन्द्र सुनेली, इंजी. राहुल यादव सहित प्रमुख लोग उपस्थित थे उल्लेखनीय है सर्वतो भद्र जिनालय का शिलान्यास और भूमि पूजन 19 जुलाई 2017 को आचार्य श्री के सानिध्य में किया गया था 21 फुट गहरा गड्ढा 325 चौड़ा × 325 फुट लंबाई का खोदा गया था उसके बाद गिट्टी और चूना से लेयर बाई लेयर भरा गया फिर 15 फीट का प्लेटफार्म तैयार हुआ और उसके ऊपर अब तक 26 फुट की हाइट तक पीला पत्थर कार्विंग किया हुआ लग चुका है। जिनालय का पहला खंड 30.9 फुट का है इसमें 168 पिलर लगना है। उसके ऊपर बीम और छत का कार्य होना है। तीन खंड का बनने वाला यह जिनालय उसके ऊपर 9 शिखर बनेगे। पीला पत्थर भुज,मकराना, आदि स्थानों से यहां पर लाया जा रहा है इस वर्ष के अंत तक पहला खंड बनकर तैयार हो जाएगा मंदिर के अंदर गर्भ गृह का कार्य भी तेज गति से हो रहा है वह भी लगभग 16 फुट की ऊंचाई तक बन चुका है पहले खंड में 108 प्रतिमाएं विराजमान होना है 216 फीट की ऊंचाई वाला यह जिनालय पूर्ण होने के लिए आचार्य श्री ने नवंबर 2023 तक का समय दिया है।

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