लोगों को नेत्रदान के लिए प्रोत्साहित करें :कमिश्नर मुकेश शुक्ला

लोगों को नेत्रदान के लिए प्रोत्साहित करें :कमिश्नर मुकेश शुक्ला


सागर । बुन्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के अंतर्गत सेन्ट्रल लायब्रेरी के सभागार में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कमिष्नर श्री मुकेष शुक्ला ने सरस्वती देवी की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर बीएमसी के डीन डा. आरएस वर्मा, अधीक्षक डा. पिप्पल, संयुक्त संचालक डा. नीना गिडयन, नेत्र विभाग के एचओडी डा. प्रवीण खरे, डा. उमेष पटेल, डा. मनीष जैन ,आईएमए अध्यक्ष डॉ एसएस खन्ना, डॉ वंदना गुप्ता, डॉ भरत तोमर ,डॉ अर्चना श्रीवास्तव ,डॉ शीला भार्गव ,डॉ एस एस ठाकुर ,डॉ प्रमोद गोदरे
सहित अन्य चिकित्सक और नागरिकगण मौजूद थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री शुक्ला ने कहा कि आंखे अनमोल हैं। एक पीड़ित व्यक्ति ही इस बात का एहसास कर सकता है कि आंखों का क्या महत्व है। उन्होंने कहा कि लोगों को नेत्रदान के लिए प्रोत्साहित करें। वर्तमान में कार्निया, प्रत्यारोपण के लिए जितनी नेत्रदान की आवष्यकता है, उतनी मिल नहीं पाती हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा कार्य करने की आवष्यकता हैं। और नेत्रदान को लेकर लोगों के बीच जागरूकता लायी जाए। जिससे वे नेत्रदान के लिए आगे आए। उन्होंने ब्लैक फंगस की बीमारी के दौरान नेत्र विभाग के कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में नेत्रदान के क्षेत्र में अच्छा कार्य करने वालों का सम्मान किया गया।

बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के नेत्र रोग विभाग अध्यक्ष डॉ  प्रवीण खरे ने नेत्र रोग विभाग की उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य की कार्य योजनाओं के बारे में बताया एवं सभी से नेत्रदान की जागरूकता हेतु सहयोग मांगा. डॉक्टर सुप्रिया ने नेत्रदान के महत्व को डॉक्टर योगिता और डॉक्टर रंजीत ने नेत्रदान से संबंधित भ्रांतियों को बताया.इस अवसर पर लोगां द्वारा नेत्रदान को लेकर पूछे गए प्रष्नों का जबाव बीएमसी के नेत्र विभाग के चिकित्सकों द्वारा दिए गए। नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों का समाधान भी किया गया। 
कार्यक्रम में आभार डॉ रोशी जैन ने  और संचालन डॉक्टर अंजली विरानी पटेल ने किया.नेत्रदान जागरूकता के लिए पैरामेडिकल छात्रों के द्वारा पोस्टर बनाए गए थे जिसमें प्रथम पुरस्कार मुस्कान को द्वितीय पुरस्कार जया और अनुराधा को तृतीय पुरस्कार वर्षा को दिया गया.



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