गौर उत्सव-पहला दिन : शब्द, चित्र और रंगों से विद्यार्थियों ने उकेरे अपने मन के डॉ. गौर

गौर उत्सव-पहला दिन  : 
शब्द, चित्र और रंगों से विद्यार्थियों ने उकेरे अपने मन के डॉ. गौर  




सागर. 21 नवंबर. गौर उत्सव के पहले दिन विद्यार्थियों ने शब्द, चित्र और रंगों से अपने मन के डॉ. हरीसिंह गौर को दर्शाया. गौरतलब है कि डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के संस्थापक महान शिक्षाविद् एवं प्रख्यात विधिवेत्ता, संविधान सभा के सदस्य एवं दानवीर डॉ. सर हरीसिंह गौर के 152वें जन्म दिवस के उपलक्ष्य में दिनांक 21 नवंबर से 26 नवंबर तक 'गौर उत्सव' का आयोजन किया जा रहा है. पहले दिन महाविद्यालयीन और स्कूल के विद्यार्थियों ने डॉ. गौर की जीवनी और उनके पर केंद्रित निबंध और चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लिया. यह दोनों प्रतियोगिताएं गर्ल्स डिग्री कॉलेज और एमएलबी स्कूल, सागर में आयोजित की गई थीं. आयोजन के सह-संयोजक डॉ. राजेन्द्र यादव ने बताया कि दोनों प्रतियोगिताओं में सौ से अधिक विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की. विश्वविद्यालय के शिक्षकों डॉ. अरविन्द कुमार और अरविन्द गौतम के निर्देशन में ये अओजन संपन्न हुआ.

प्रतियोगिता स्थलों पर पहुँचकर कुलपति ने किया विद्यार्थियों उत्साहवर्धन 


विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने प्रतियोगिता स्थलों पर पहुँचकर प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया. इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव संतोष सोहगौरा और उपकुलसचिव सतीश कुमार मौजूद रहे.
 
गौर उत्सव के पहले दिन बही काव्य-गंगा , 'कुछ मन की, कुछ माटी की' आयोजन में शिक्षकों ने सुनाईं कवितायें 

विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयन्ती सभागार में 'कुछ मन की, कुछ माटी की' शीर्षक से शिक्षकों के काव्य पाठ का आयोजन संपन्न हुआ. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों में अपार प्रतिभाएं हैं, उनकी प्रतिभा के हर क्षेत्र का लाभ विश्वविद्यालय को मिलना चाहिए. साथ ही शिक्षकों को भी अपनी प्रतिभाओं को निखारने का अवसर मिलना चाहिए. विश्वविद्यालय इसके लिए सबसे सुयोग्य स्थल है. यह शिक्षकों का, शिक्षकों द्वारा और शिक्षकों के लिए किया गया आयोजन है. उन्होंने सभी शिक्षक- कवियों को शुभकामनाएं दीं. कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. गौर और मां सरस्वती की प्रतिमा पार माल्यार्पण से हुई और डॉ. अवधेश तोमर ने वंदना प्रस्तुत की. कार्यक्रम के संयोजक प्रो. नवीन कांगों ने स्वागत वक्तव्य दिया.  इस अवसर पर गौर उत्सव के मुख्य समन्वयक प्रो. आर. के. त्रिवेदी भी उपस्थित थे.
कहकशां हूँ मैं, सारे सितारे मुझमें.......बहता दरिया हूँ, सारे किनारे मुझमें......... 

प्रो. नवीन कांगो ने बेहतरीन गजल की प्रस्तुति दी और डॉ. गौर के जीवन-चरित्र पर कविता भी सुनाई. डॉ. राकेश सोनी ने माउथ ऑर्गन बजाते हुए गीतकार संतोष आनंद की रचना 'इक प्यार का नगमा है.....महफ़िल में समां बांधा. सपनों की इस नगरी में, कुछ सपने लेकर आई हूँ, शीर्षक से डॉ. वन्दना राजौरिया ने अपनी रचना का पाठ किया. डॉ. पंकज तिवारी ने डॉ. गौर के अवदान पर केंद्रित कविता पाठ किया. कुलसचिव संतोष सोहगौरा ने महादानी डॉ. गौर पर स्वरचित कविता सुनाई. 



विश्वविद्यालय के शिक्षक-कवियों डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. जी एल पुणताम्बेकर, डॉ. अफरोज, डॉ. अफरीन खान, डॉ. हिमांशु, डॉ. संजय कुमार, प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत, डॉ. कालीनाथ झा, प्रो. बी.के. श्रीवास्तव, डॉ. ललित मोहन, डॉ. किरण आर्या, डॉ. शशि कुमार सिंह, डॉ. रामहेत गौतम, डॉ. नीरज उपाध्याय, डॉ. त्रिलोकी नाथ ने अपनी काव्य रचनाओं का पाठ किया. कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ प्रो. पीपी सिंह, प्रो. पी के कठल, कुलसचिव संतोष सोहगौरा और संयोजक प्रो. नवीन कांगो ने सभी शिक्षक-कवियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और सागर शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और पत्रकार बंधु उपस्थित थे. संचालन सह-संयोजक डॉ. राजेन्द्र यादव ने किया और डॉ. आशुतोष ने आभार ज्ञापन किया.      
  
22 नवंबर 2021 को आयोजित कार्यक्रम 

मीडिया अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल ने बताया कि 22 नवंबर को पूरे दिन खेल-कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है. सुबह 08.30 बजे से विश्वविद्यालय के शिक्षकों और अधिकारियों के बीच 20 ओवर का मैत्री क्रिकेट मैच होगा. 11.00 बजे से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए कबड्डी प्रतियोगिता रखी गई है. इसी के सामानांतर 11 बजे से ही विश्वविद्यालय के विद्यार्थी वालीबाल प्रतियोगिता में भाग लेंगे. 12.00 बजे से विश्वविद्यालय के महिला शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी तथा महिला क्लब के सदस्यों के लिए म्यूजिकल चेयर और दोपहर 01.30 बजे से 'टग ऑफ़ वॉर' प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है. 22 नवंबर को आयोजित सभी प्रतियोगिताएं विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रांगण में संपन्न होंगी. 
 
 
 
 
 

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