डाॅ. हरीसिंह गौर विवि के मानव विज्ञान विभाग का रूस से अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर समझौता

डाॅ. हरीसिंह गौर विवि  के मानव विज्ञान विभाग का रूस से अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर समझौता 


सागर। डाॅ. हरीसिंह गौर  केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर के मानव विज्ञान विभाग के 66 स्थापना दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय तथा रूस के मास्को स्थित पैलियाइथोनोलाॅजी रिसर्च सेंटर के मध्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक एवं शोध कार्यो के लिए समझौता किया गया। एम.ओ.यू. के दौरान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने आॅनलाइन जुड़कर तथा प्रशासनिक भवन में कार्यावाहक कुलपति प्रो. जे.डी. आही अधिष्ठता प्रो. के. के. एन. शर्मा विभागाध्यक्षा प्रो. राजेश कुमार गौतम, प्रो. एच थामस निदेशक रिसर्च एण्ड डेवलमेंन्ट, कुलसचिव संतोष सहगौरा एवं संजायेक डाॅ. सर्वेन्द्र यादव एवं मास्कों से डाॅ. याकूसेव मिखाइल डाॅक्रेटर पी.आर.सी, उपनिदेशक डाॅ. डेनिश पेजेम्स्की, मिस लीलिया, ने एम. ओ. यू. पर हस्ताक्षर कर आपसी सहमति प्रदान की। 
संयोजक डाॅ. सर्वेन्द्र यादव ने इस अंर्तराष्ट्रीय समझौता अभियान के प्रमुख उद्धेश्यों को बताते हुये मानव विज्ञान, पुरातत्व, जैविक (भौतिक) नृविज्ञान और मानव अनुवांशिकी के आँकड़ो के आधार पर यूरेशिया भारत और रूस की प्राचीन और आधुनिक आबदी के नृवंश विज्ञान संबंधी मुद्धो के जटिल अध्ययन के क्षेत्र में सहयोगी परियोजनाओं और कार्यक्रमों के संचालन में मदद कर सकेगा। साथ ही शैक्षिक सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के बीच बातचीत के कुशल तरीकों के लिए आदान-प्रदान और शोध कार्यो में अनुभव सांझा करने से विश्व मानव समुदाय लाभान्वित होगें। साथ ही विद्यार्थी व आमजन शैक्षणिक गतिविधियों और संयुक्त संगोष्ठीयों, सम्मेलनों, कार्याशालाओं में वैज्ञानिक पक्ष को जान सकेंगे। जिसके लिए चुनौतीयाँ बहुत है विश्वविद्यालय के विभाग एवं शोधकर्ताओं, प्रशासनिक सहयोग से ही संभव हो सकेगा। 
डाॅ. डेनिस पेजेम्स्की डाॅरेक्टर मास्कों ने बताया कि यह अभियान वर्ष 2018 में आरंभ हुआ था जिसके तीनों चरण पूरे कर लिये गये है इसे विस्तार देते हुए प्रमुख उद्धेश्य दक्षिण एशिया के लोगों को विशाल क्षेत्र में एक साथ बृहद क्षेत्र के रूप में अध्ययन करना है। जिसमें सांस्कृतिक एवं जैविक विविधता को शामिल किया गया है। 

प्रो. नीलिमा गुप्ता कुलपति ने संबोधित करते हुए कहा कि सागर विश्वविद्यालय के लिए यह गौरव की बात है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे देशों के साथ शैक्षणिक शोध कार्यो के लिए सराहनीय पहल है। उन्होंने रूस के अपने व्यक्तिगत अनुभव साझाा करते हुये बताया कि रूस के वैज्ञानिक एवं अनुसंधानकर्ता सक्रिय, संवेदनशील तथा समर्पित है। जिनका में हदय से सम्मान करती हूँ। उन्होंने विभाग के शिक्षको एवं शोद्यार्थियों से कहा कि प्रस्तावित कार्ययोजना पर चरणबद्ध तरीके से कार्य प्रारंभ करें। इसमें प्रशासनिक स्तर जो भी आवश्यकता होगी मैं पूर्ण करने को तत्पर रहूँगी। कार्यवाहक कुलपति प्रो. जे. डी. आही ने कहा कि दोनों देशों के संस्थान मिलकर प्रस्तावित अभियान पर शोध कार्यो से मिलने वाले परिणामों में छात्र एवं पूरी मानव जाति लाभन्वित होगी।

प्रो. राजेश कुमार गौतम विभागाध्यक्ष कहा कि इस एम. ओ. यू. के पूर्व दो संस्थानों के बीच प्रस्तावित कार्ययोजना तैयार करने के लिए अथक प्रयास किया गया है। उन्होनें ने बताया कि महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश में निवासरत कोरकू जनजाति के सामाजिक, शारीरिक, सांस्कृतिक, इथोनोग्राफिक, जैसे विविध आयामों का अनुसंधान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जाना वृहत कार्ययोजना है इससे प्राप्त होने वाले परिणाम से एक नई दिशा प्राप्त हो सकेगी। मैं दोनों संस्थानों के प्रमुखों का धन्यवाद देता हूँ। जिन्होने विभाग को यह अवसर प्रदत्त किया है। प्रो. के. के. एन. शर्मा डीन ने भी विभाग की गतिविधियों की जानकारी देते हुये कहा कि यह अध्ययन एवं अध्यापन करने वालेे शिक्षक अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हुये है। संचालन डाॅ. अरिबम विजया सुन्दरी देवी ने किया तथा विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव संतोष सहगौरा ने धन्यवाद व्यक्त करते हुये कहा कि दोनो संस्थानों में अपने शैक्षणिक एवं शोध कार्यो की गतिविधियों का अनुबंध किया है यह बहुत अच्छी पहल है इससे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध को बेहतर बनाने में एक अच्छी पहल सिद्ध होगी तथा दोनों देशों के छात्र भी लाभन्वित होगें उन्होंने दोनों देशों के शोधकर्ताओं का भी धन्यवाद व्यक्त किया। प्रमुख रूप से डाॅ. सोनिया कौषल, डाॅ. राकेश सैनी, डाॅ. राजेश यादव, शोद्यार्थी कौशतुव देव शर्मा, अशोक यादव, दीपाजंलि दास, मधुश्री डे, धनसय, बंसत सेन, ज्योति ग्रेवाल, सुमन साहू, सहित आॅनलाइन जुड़े लगभग सौ से ऊपर शिक्षक शोद्यार्थी उपस्थित थे।      




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