सामाजिक समरसता: सीखने का नहीं, स्वयं के भाव में लाने का विषय : साध्वी प्रज्ञा सिंह ▪️सागर में हिंदू सम्मेलन आयोजित

Sagar: सामाजिक समरसता: सीखने का नहीं, स्वयं के भाव में लाने का विषय : साध्वी प्रज्ञा सिंह

▪️सागर में हिंदू सम्मेलन आयोजित


तीनबत्ती न्यूज: 31 जनवरी, 2026

सागर: पद्माकर सभागार मोतीनगर में सकल हिंदू समाज रवि शंकर बस्ती द्वारा हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह, मुख वक्त श्रीमती वर्षा सिंह अधिवक्ता, संयोजिका श्रीमती शारदा गुरैया, सहसंयोजीका श्रीमती अंजना घोसी, श्रीमती राजराजेश्वरी पाराशर उपस्थित रही।


मुख्य अतिथि साध्वी प्रज्ञा सिंह ने अपने वक्तव्य में बताया कि संघ ने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में कोई उत्सव नहीं मनाया बल्कि संघ की स्थापना से लेकर आज तक 100 वर्षों की कार्यों का मूल्यांकन किया। उन्होंने संघ की समाज में स्वीकारता पर प्रकाश डाला और सामाजिक समरसता के संबंध में श्री गुरु जी के सामाजिक समरसता के भाव पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि  सामाजिक समरसता सीखने का कोई विषय नहीं है समरसता अपने आप में अपने स्वयं के भाव में लाना चाहिए अपने आप को समरस बनना चाहिए । उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए लव कुश के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा दीक्षा तथा उनका पालन पोषण उन्हीं के द्वारा किया गया के बारे में बताया।  उन्होंने बताया कि मां जब अपने बच्चों की गंदगी साफ करती है  तो  वह शुद्र नहीं बन जाती बल्कि उसमें मातत्व का भाव रहता है अर्थात समरसता स्वयं के भाव में पैदा होना चाहिए। 


कुटुंब व्यवस्था पर जोर

उन्होंने कुटुंब व्यवस्था पर जोर देते हुए बताया कि कम से कम सप्ताह में एक बार परिवार के सभी लोगों के साथ बैठकर भोजन करना चाहिए। माता-पिता का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को संस्कार एवं सनातनी संस्कृति को बताएं।

नागरिक कर्तव्यों के बारे में बताया

मुख्य वक्ता श्रीमती वर्षा सिंह अधिवक्ता ने अपने उद्बोधन में संघ की स्थापना की परिस्थितियों का वर्णन करते हुए पांच परिवर्तन के बारे में बताया। नागरिक कर्तव्यों के बारे में विस्तृत रूप से बताते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को शासन द्वारा बनाई गए नियम कानून का पालन करना चाहिए। सरकारी संपत्ति की सुरक्षा तथा पर्यावरण की रक्षा करना भी नागरिकों का कर्तव्य है।मंच संचालन श्रव्य मेहता और आभार प्रदर्शन श्रीमती नंदिनी चौधरी के द्वारा किया गया।





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