Sagar : बसंत पंचमी पर इकलौते उत्तरमुखी एकल प्रतिमा वाले सरस्वती मंदिर में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़ : तैयारियां हुई पूरी

Sagar : बसंत पंचमी पर इकलौते उत्तरमुखी एकल प्रतिमा वाले सरस्वती मंदिर में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़ : तैयारियां हुई पूरी


तीनबत्ती न्यूज: 22 जनवरी ,2026

सागर: बसंत पंचमी पर मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में इकलौता उत्तरमुखी एकल प्रतिमा वाला सरस्वती मंदिर में 23 जनवरी को पूजा अर्चना और अपनी मन्नतों को पूरा करने लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। वसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026 को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस दिन चंद्रमा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और कुंभ राशि में रहेगा, जिसे ज्योतिष की दृष्टि से बेहद शुभ माना जा रहा है। वसंत पंचमी को मां सरस्वती का प्रकटोत्सव भी कहा जाता है। यही वजह है कि इस दिन विद्या, बुद्धि और वाणी की देवी की खास पूजा होती है।


मखाने बादाम की माला से मनोकामनाएं होंगी पूरी

सागर शहर के प्रमुख मंदिरों, पाठशालाओं और धार्मिक संस्थानों में इस मौके पर विशेष पूजा-पाठ, यज्ञ, संस्कार और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां जोरों पर हैं। पंडित यशवर्धन चौबे बताते हैं कि बसंत पंचमी पर मखाने की माला और बादाम की माला चढ़ाने का भी बड़ा महत्व है। 108 के मनको वाली माला सरस्वती माता को सुबह से लेकर शाम तक चढ़ाई जाती है। जिसमें मखाने की माला विद्यार्थियों के लक्ष्य प्राप्ति के लिए होती है यह मार्ग चढ़ाने से मां सरस्वती की विशेष कृपा होती है।

संस्कार कराएं जाएंगे सम्पन्न

सागर का अनोखा सरस्वती मंदिर और 7 निशुल्क संस्कार सागर के इतवारा बाजार में बुंदेलखंड का इकलौता उत्तरमुखी एकल प्रतिमा वाला सरस्वती मंदिर स्थित है। यहां बसंत पंचमी के दिन सूर्य उदय से सूर्यास्त तक 16 संस्कारों में से 7 संस्कार बिल्कुल निशुल्क कराए जाएंगे। मंदिर के पंडित यशोवर्धन चौबे बताते हैं कि नामकरण, अन्नप्राशन, विद्यारंभ, कर्णवेध, यज्ञोपवीत, वेदारंभ और चूडाकर्म संस्कार पूरे वैदिक विधि-विधान से होंगे। बच्चों के लिए खास तौर पर मोली पूजन और स्लेट-पेंसिल व भोजपत्र से विद्यारंभ संस्कार कराया जाएगा।

बसंत पंचमी पर मखाने की 108 मनकों वाली माला चढ़ाने की परंपरा भी है। यह माला खास तौर पर विद्यार्थियों के लिए मानी जाती है। चाहे बोर्ड परीक्षा हो, प्रतियोगी परीक्षा या कोई बड़ा एग्जाम मखाने की माला चढ़ाने से मां सरस्वती की विशेष कृपा मानी जाती है और मेहनत सफल होती है। शास्त्रों में वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना गया है, यानी बिना पंचांग देखे शुभ काम किए जाते हैं। लेकिन इस साल ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुक्र तारा अस्त रहेगा, इसलिए विवाह जैसे मांगलिक कार्य टालने की सलाह दी गई है। हालांकि विद्या आरंभ, सरस्वती पूजन और साधना के लिए यह दिन बेहद शुभ माना गया है।


इस अनोखे मंदिर में चढ़ावा भी अनोखा है, जहां लड्डू, पेड़ा या मिठाई नहीं, बल्कि पेन, कॉपी और अध्ययन सामग्री प्रसाद के रूप में मां सरस्वती को अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि जो विद्यार्थी श्रद्धा के साथ यहां यह उपाय करता है, वह परीक्षा में कभी असफल नहीं होता। यह मंदिर विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां सरस्वती की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती है।

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