लोकतंत्र का अपहरण कर उसकी हत्या की गई, लेकिन लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष ने देश को बचा लिया : राजेन्द्र शुक्ला
तीनबत्ती न्यूज: 25 जून, 2026
सागर। राजनीति का आधार सदैव नैतिकता, सुचिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर होना चाहिए। 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के निर्वाचन को निरस्त किए जाने के बादके यदि राजनीतिक नैतिकता का पालन किया जाता तो न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हुए उन्हें पद छोड़ देना चाहिए था, किंतु सत्ता के अहंकार में लोकतांत्रिक परंपराओं को कुचलते हुए 25 जून 1975 को देश पर आपातकाल थोप दिया गया। यह बात मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने सागर में आपातकाल की 51वीं बरसी पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।
कार्यक्रम में सांसद एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. लता वानखेड़े, पूर्व मंत्री एवं खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह, सागर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन, बंडा विधायक वीरेन्द्र सिंह लंबरदार, देवरी विधायक बृज बिहारी पटेरिया, मध्यप्रदेश कुश समाज कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रभुदयाल कुशवाहा, भाजपा सागर ग्रामीण जिलाध्यक्ष रानी कुशवाहा, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, महापौर संगीता तिवारी, नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार, भाजपा की स्थायी आमंत्रित सदस्य सुधा जैन, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य डॉ. विनोद पंथी, पूर्व विधायक पारुल साहू तथा कार्यक्रम जिला टोली संयोजक जगन्नाथ गुरैया मंचासीन रहे।
कार्यक्रम को भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी एवं लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट कृष्णवीर सिंह ठाकुर संभागीय अध्यक्ष मधु गुप्ता ने भी संबोधित किया । इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों ने आपातकाल के दौरान झेली गई यातनाओं, संघर्ष और उस कालखंड के मार्मिक संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों का सम्मान भी किया गया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारतीय राजनीति में नैतिकता और लोकतांत्रिक मर्यादा का सर्वोच्च उदाहरण भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रस्तुत किया, जिन्होंने सत्ता के लिए कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इसके विपरीत आपातकाल के दौरान न्यायपालिका की अवमानना की गई, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई, संविधान में संशोधन कर न्यायपालिका के अधिकार सीमित किए गए तथा हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक नेताओं और लोकतंत्र समर्थकों को रातों-रात गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया। यह केवल लोकतंत्र की हत्या नहीं थी, बल्कि पहले लोकतंत्र का अपहरण किया गया और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। उन्होने ने कहा कि भारत को विश्वगुरु और आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा आवश्यक है। "वसुधैव कुटुम्बकम्" की भावना से प्रेरित भारत विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों एवं मीसाबंदियों के त्याग, संघर्ष और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनका योगदान सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।
कार्यक्रम अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट कृष्णवीर सिंह ठाकुर ने कहा कि 25 जून भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। भारत सरकार द्वारा इस दिन को "संविधान हत्या दिवस" के रूप में घोषित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि 25-26 जून 1975 की मध्यरात्रि को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक स्वतंत्रताओं पर अभूतपूर्व प्रहार किया गया था।
एडवोकेट कृष्णवीर सिंह ठाकुर ने कहा कि आपातकाल लोकतांत्रिक संस्थाओं को नियंत्रित करने की एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति थी। नागरिकों के मौलिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता तथा न्यायपालिका की प्रभावी भूमिका को सीमित कर पूरे देश को भय और दमन के वातावरण में बदल दिया गया। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के उस विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान कितना भी श्रेष्ठ क्यों न हो, यदि उसे संचालित करने वालों की नीयत और नीति ठीक न हो तो वह देश की रक्षा नहीं कर सकता और आपातकाल इस सत्य का सबसे बड़ा उदाहरण है।
स्वागत उद्बोधन में भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला दिवस है, जब लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मर्यादाओं पर गंभीर आघात किया गया। भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोकतंत्र सेनानियों एवं मीसाबंदियों के संघर्ष को स्मरण कर उनका सम्मान कर रही है। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी नई पीढ़ी को आपातकाल के संघर्ष, त्याग और बलिदान से परिचित कराने तथा लोकतंत्र की रक्षा के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। लोकतंत्र सेनानियों के संस्मरण युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और संविधान की मर्यादा बनाए रखने की प्रेरणा देंगे।
जिला मीडिया प्रभारी श्रीकांत जैन ने बताया कि आपातकाल की 51वीं बरसी के अवसर पर संभागीय भाजपा कार्यालय में आपातकाल के काले कालखंड पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने किया तथा लोकतंत्र सेनानियों, मीसाबंदियों एवं उनके परिजनों के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र पर हुए प्रहार, प्रेस पर सेंसरशिप, नागरिक अधिकारों के दमन तथा लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को चित्रों एवं ऐतिहासिक दस्तावेजों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी का अवलोकन करते समय उस दौर की भयावह घटनाओं और यातनाओं से जुड़ी स्मृतियाँ एक बार फिर जीवंत हो उठीं। अनेक लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों की आँखें नम हो गईं।
कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी श्री कृष्णवीर सिंह ठाकुर, श्री ज्ञानचंद जैन, श्री विनोद तिवारी, श्री किशन तिवारी, श्री महेन्द्र कुमार गुप्ता, श्री धीरज सिंह लोधी, श्री रामसेवक शाण्डिल्य,श्री परसराम श्याममानी, श्री ऋषभ कुमार जैन,श्री अब्दुल शमीम महेन्द्र सराफ लक्ष्मी नारायण नामदेव तथा दिवंगत लोकतंत्र सेनानी स्व.अमर सिंह, स्व. कोमल भंडारी, स्व.जमुना मिस्त्री, स्व. श्रीनाथ शर्मा, स्व. शिवराज सिंह राजपूत, स्व.मु.इंशाम राही, स्व. सुशील सोनी, स्व.इदरीश खान, स्व. मु.युनुस राही, स्व.स्वतंत्र सिंह चौहान, स्व. यशवंत गौर, स्व.डॉ. आनंद नवाथे एवं स्व. श्यामलाल के परिजनों का शॉल-श्रीफल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम प्रभारी विक्रम सोनी सह प्रभारी सुमित यादव आभार वरिष्ठ नेता रामकुमार साहू ने व्यक्त किया । संगोष्ठी में भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहें।




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