सागर: 700 वर्ष पुराने ऐतिहासिक कल्पवृक्ष को बचाने की कवायद शुरू, हिंदू संगठनों ने रखी थी मांग

सागर: 700 वर्ष पुराने ऐतिहासिक कल्पवृक्ष को बचाने की कवायद शुरू, हिंदू संगठनों ने रखी थी मांग


तीनबत्ती न्यूज: 03 जुलाई, 2026

​सागर। कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित लगभग 700 वर्ष पुराने और दुर्लभ कल्पवृक्ष को संरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन ने शुक्रवार को एक बड़ी मुहिम शुरू की है। हिंदू संगठनों की लगातार मांग और आंदोलन की चेतावनी के बाद जागे प्रशासन ने विभिन्न विभागों के साथ मिलकर पेड़ को नया जीवन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत शुक्रवार को कल्पवृक्ष की भारी हो चुकी डालों की छंटाई (प्रूनिंग) की गई, ताकि पेड़ का संतुलन बना रहे। अगले चरण में इसे सपोर्ट देने के लिए सीमेंट-कंक्रीट का घेरा बनाया जाएगा। ​पेड़ के संरक्षण के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में नगर निगम, वन विभाग, उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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प्रशासन का पक्ष:

अपर कलेक्टर अविनाश रावत ने बताया कि कल्पवृक्ष के धार्मिक महत्व और पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए जिला प्रशासन इसे बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

जल्द ही दूर होगा झुकाव

सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वनस्पति विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर अजयशंकर मिश्रा ने तकनीकी पक्ष रखते हुए बताया कि भारी डालों की छंटाई होने के बाद पेड़ नए सिरे से विकसित होगा और जो हिस्सा एक तरफ झुक गया था, वह भी धीरे-धीरे सीधा हो जाएगा।

​इस ऐतिहासिक वृक्ष को बचाने के लिए हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश था। शिवसेना के उपराज्य प्रमुख पप्पू तिवारीने बताया कि उन्होंने पेड़ के संरक्षण को लेकर शनिवार से आमरण अनशन पर बैठने का ऐलान कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने समय रहते सकारात्मक पहल की है, जिसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के जिलाध्यक्ष अजय दुबे ने कहा कि चार दिन पहले ही प्रशासन को इस संबंध में ध्यान आकर्षित कराया गया था। 700 साल पुराने इस धरोहर का संरक्षण बेहद जरूरी है।



बढ़ाए जाने चाहिए ऐसे दुर्लभ वृक्ष: कुलपति

​एसवीएन (SVN) यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अनिल तिवारी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कल्पवृक्ष दुर्लभ पेड़ों की श्रेणी में आता है। इसके संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण और धार्मिक महत्व को देखते हुए ऐसे और भी पौधे लगाए जाने की पहल होनी चाहिए।

​पुरोहित पुजारी विद्वत संघ के अध्यक्ष पं. शिवप्रसाद तिवारी ने कल्पवृक्ष के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में से एक कल्पवृक्ष भी था, जिसे देवराज इंद्र को सौंपा गया था। बाद में भगवान कृष्ण इसे धरती पर लेकर आए थे। इसे मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष माना जाता है और हमारे धर्मग्रंथों में इसका विशेष स्थान है।

ये रहे उपस्थित

​पेड़ की छंटाई और निरीक्षण के दौरान नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री, उपायुक्त एस.एस. बघेल, हिंदू धर्मजागरण से उमेश सराफ, पुरोहित पुजारी विद्वत संघ के रामचरण शास्त्री, शिवनारायण शास्त्री, अमित कटारे, कपिल स्वामी, समर्थ दीक्षित, सचिन जैन, विकास यादव, बबलू चौरसिया सहित वन विभाग, उद्यानिकी विभाग और नगर निगम के तमाम अधिकारी-कर्मचारी व हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे।



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