सीएम डॉ. मोहन यादव का ताबड़तोड़ एक्शन : 1 तहसीलदार, 2 पटवारी समेत 7 अधिकारी-कर्मचारी निलंबित • सीएम डॉ यादव जन विश्वास अभियान के तहत पहुंचे बड़वानी

सीएम डॉ. मोहन यादव का ताबड़तोड़ एक्शन : 1 तहसीलदार, 2 पटवारी समेत 7 अधिकारी-कर्मचारी निलंबित

• सीएम डॉ यादव जन विश्वास अभियान के तहत पहुंचे बड़वानी




तीनबत्ती न्यूज: 14 अगस्त, 2026

बड़वानी/भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत बड़वानी में आयोजित जिला स्तरीय समाधान कार्यक्रम में आमजन की शिकायतें सुनीं। प्रकरणों के निराकरण में लंबे समय तक लापरवाही और देरी सामने आने पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए एक तत्कालीन तहसीलदार, दो पटवारी, दो सीएमओ, एक सहायक यंत्री और एक तत्कालीन सीईओ समेत सात अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए। वहीं संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन इंदौर एसके सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय-सीमा में मिलना चाहिए। शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा, लेकिन लापरवाही करने वालों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई भी होगी।



छह साल तक लंबित रहा नामांतरण, तहसीलदार और दो पटवारी निलंबित

राजपुर तहसील के शिकायतकर्ता अजय-लाल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पंजीयन एवं भुगतान से संबंधित शिकायत के साथ अपने पिता की मृत्यु के बाद नामांतरण में हुई देरी की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में पिता की मृत्यु के बाद नामांतरण के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन प्रक्रिया वर्ष 2022 में पूरी हुई।


नामांतरण में करीब छह वर्ष की देरी को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया। उन्होंने संबंधित अवधि में पदस्थ तत्कालीन तहसीलदार आशा परमार, वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर जिला धार, तथा मामले में दोषी पाए गए पटवारी मांगीलाल नरगांवे और ललित बोरसे को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए।


पीएम आवास की किश्त में देरी पर दो सीएमओ और सहायक यंत्री पर कार्रवाई


प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के मामले में शिकायतकर्ता रुपेश शर्मा ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में आवेदन किया था। वर्ष 2022 में जियो टैगिंग और वर्ष 2023 में किश्त जारी करने की प्रक्रिया हुई, लेकिन प्राथमिकता सूची में नाम नीचे होने के कारण समय पर राशि नहीं मिल सकी। मकान बनने के बाद उन्हें 10 अगस्त को पहली किश्त प्राप्त हुई।


मुख्यमंत्री ने पात्र हितग्राही को समय पर आवास निर्माण की राशि नहीं मिलने को गंभीर लापरवाही माना। उन्होंने संबंधित अवधि में पदस्थ मुख्य नगर पालिका अधिकारी मायाराम सोलंकी, जगदीश धाकड़ और सहायक यंत्री राजू डावर को निलंबित करने के निर्देश दिए। इसी मामले में संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन इंदौर एसके सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।



संबल योजना की सहायता में देरी पर तत्कालीन सीईओ निलंबित


पानसेमल के शिकायतकर्ता हरि निमवा ठाकुर ने संबल योजना के तहत अंत्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता राशि में देरी की शिकायत की। उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल 2019 को सहायता राशि के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन लंबे समय तक भुगतान नहीं हुआ।


जांच में यह भी सामने आया कि प्राथमिकता सूची में नीचे नाम वाले कुछ हितग्राहियों को पहले लाभ मिला। इस तरह के कुल 16 प्रकरण सामने आए। मुख्यमंत्री ने मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अवधि में पदस्थ जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी सौरभ सिंह ठाकुर को निलंबित करने के निर्देश दिए।


बाल आशीर्वाद योजना में देरी की जांच के निर्देश


सेंधवा विकासखंड से संबंधित महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रकरण में मुख्यमंत्री ने शिकायतकर्ता मोहसिन मंसूरी और लाभार्थी मोहम्मद कैफ मंसूरी से चर्चा की। बताया गया कि मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के तहत आवेदन की प्रक्रिया समय पर पूरी कर ली गई थी, लेकिन बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण भुगतान में देरी हुई। बजट मिलने के बाद नौ माह की राशि का एकमुश्त भुगतान किया गया।


मुख्यमंत्री ने भुगतान में देरी के कारणों की जांच कराने के निर्देश दिए।


पशु बीमा राशि में दो साल की देरी पर भी जांच


पशुपालन एवं डेयरी विभाग के पशु बीमा प्रकरण में शिकायतकर्ता भाव सिंह मुवाक्य और लाभार्थी हरी जगन मेहता से भी मुख्यमंत्री ने जानकारी ली। बताया गया कि पशु की मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम और आवेदन की प्रक्रिया दो दिन के भीतर पूरी कर दी गई थी, लेकिन बीमा कंपनी में तकनीकी समस्या के कारण भुगतान में देरी हुई।


लगातार प्रयासों के बाद बीमा राशि का भुगतान किया गया। संपूर्ण प्रक्रिया में दो वर्ष से अधिक समय लगने पर मुख्यमंत्री ने बीमा कंपनी की उदासीनता तथा भोपाल स्तर पर संभावित त्रुटि की जांच कराने के निर्देश दिए। जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।


हर शिकायत का समय-सीमा में हो समाधान


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन को अपने अधिकारों और शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। प्रत्येक शिकायत को संवेदनशीलता और गंभीरता से लेते हुए उसका समय-सीमा में निराकरण किया जाए।


उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान का उद्देश्य शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूत करना तथा आमजन की समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। योजनाओं के क्रियान्वयन और शिकायतों के निराकरण में लापरवाही या अनावश्यक विलंब मिलने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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