MP Cabinet Decisions: 41 हजार करोड़ के फैसले, बीना-खिमलासा-मालथौन 4-लेन को मंजूरी : भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय

मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 41 हजार करोड़ से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी, सागर संभाग को भी बड़ी सौगात


तीनबत्ती न्यूज:1 सितंबर 2026

सागर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास, ग्रामीण रोजगार, सड़क, तकनीकी शिक्षा, डेयरी और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट ने करीब 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों और जनकल्याणकारी निर्णयों को मंजूरी दी।

बैठक में वीबी जी राम जी विकसित भारत ग्रामीण योजना के क्रियान्वयन का अनुसमर्थन करने के साथ ही तीन नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने, पश्चिम भोपाल बायपास और मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग के निर्माण सहित कई प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।


ग्रामीण क्षेत्रों में अब 125 दिन रोजगार की गारंटी


कैबिनेट ने विकसित भारत (ग्रामीण): वीबी जी राम जी विकसित भारत जी राम जी योजना को मध्यप्रदेश में 1 जुलाई 2026 से प्रभावशील किए जाने का अनुसमर्थन किया। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना की अनुमानित लागत 3,183 करोड़ रुपये, जबकि वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल अनुमानित लागत 26,436 करोड़ रुपये होगी।


केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में रहेगी। राज्यांश करीब 10,574 करोड़ रुपये होगा। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को अब प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी।


प्रत्येक ग्राम पंचायत जीआईएस आधारित तकनीक, पीएम गति शक्ति लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करेगी।


हर जिले में होगा लोकपाल


योजना में पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य किया गया है। शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए हर जिले में एक लोकपाल नियुक्त किया जाएगा।


डेयरी विकास के लिए 2,973 करोड़ रुपये


दुग्ध उत्पादकों के हित में कैबिनेट ने 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी है। आगामी पांच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों की संख्या 7,331 गांवों से बढ़ाकर 26 हजार गांवों तक की जाएगी।


दुग्ध संकलन क्षमता को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन और प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। कृत्रिम गर्भाधान कवरेज भी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा।


पश्चिम भोपाल बायपास के लिए 3,225 करोड़ की स्वीकृति


कैबिनेट ने 35.61 किलोमीटर लंबे पश्चिम भोपाल बायपास को 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर बनाने के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये की पुनरीक्षित वित्तीय स्वीकृति दी।


बायपास बनने से जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे यात्रा की दूरी करीब 21 किलोमीटर कम होने की उम्मीद है।


सागर संभाग को बड़ी सौगात: बीना-खिमलासा-मालथौन 4-लेन मार्ग


कैबिनेट ने मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग के 67.116 किलोमीटर हिस्से को 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर बनाने के लिए 2,776 करोड़ 83 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी है।


यह मार्ग बीना को मालथौन में एनएच-44 से जोड़ेगा। बीना में रिफाइनरी, थर्मल पावर प्लांट, रेलवे यार्ड और अन्य उद्योगों के कारण भारी यातायात को देखते हुए इस मार्ग को क्षेत्रीय और औद्योगिक परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके बनने से यह क्षेत्र भविष्य में मजबूत आर्थिक एवं लॉजिस्टिक कॉरिडोर के रूप में विकसित हो सकता है।


भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय


तकनीकी शिक्षा के विस्तार के लिए प्रदेश में तीन अलग-अलग प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने की मंजूरी दी गई है।


भोपाल: मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय


उज्जैन: मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय


जबलपुर: महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय



वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले तकनीकी संस्थानों को संभागवार इन तीन विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में विभाजित किया जाएगा।


महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के क्षेत्र में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के तकनीकी संस्थान शामिल होंगे। तीनों विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए अलग-अलग अधिनियम लागू किए जाएंगे।


स्वास्थ्य संस्थाओं के रखरखाव के लिए 1,404 करोड़ से अधिक


मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा संस्थानों में मशीनों और उपकरणों के रखरखाव के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 488 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति दी।


वहीं विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 915 करोड़ 77 लाख रुपये की मंजूरी दी गई। इसके तहत मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओटी और अन्य चिकित्सा संस्थानों की अधोसंरचना के मरम्मत कार्य किए जाएंगे।


नए जिलों में सामाजिक न्याय विभाग के कार्यालय


मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालयों के लिए कुल 15 नियमित पद सृजित करने और प्रत्येक जिले में दो-दो चतुर्थ श्रेणी मानव संसाधन आउटसोर्स करने की मंजूरी दी गई।


चार जिलों में जिला आयुष कार्यालय


निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए कुल 20 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। प्रत्येक कार्यालय में जिला आयुष अधिकारी सहित सहायक ग्रेड-1, लेखापाल और सहायक ग्रेड-2 के पद होंगे।


मूंग उपार्जन सीमा 25 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत


कैबिनेट ने रबी विपणन वर्ष 2026 में मूंग और उड़द के उपार्जन के लिए मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए निर्णय का अनुसमर्थन किया। पंजीकृत किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग की उपज का उपार्जन 25 प्रतिशत के स्थान पर 60 प्रतिशत तक किए जाने का निर्णय लिया गया है।


कैबिनेट के फैसलों से विकास को मिलेगी गति


कैबिनेट के इन निर्णयों में ग्रामीण रोजगार, किसानों और दुग्ध उत्पादकों के हित के साथ-साथ सड़क अधोसंरचना, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और नए जिलों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। खासतौर पर मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन 4-लेन मार्ग की मंजूरी से सागर संभाग में औद्योगिक और परिवहन गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

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