नेशनल मेडिकल कमीशन के रडार पर रहेंगे सरकारी व निजी काॅलेज के डाॅक्टर▪️मेडिकल काॅलेजों के डाॅक्टर, एक साथ दो जगह नहीं दे सकेंगे सेवाएं ,रोज की हाजिरी दिल्ली में दर्ज होगी

 नेशनल मेडिकल कमीशन के रडार पर रहेंगे सरकारी व निजी काॅलेज के डाॅक्टर

▪️मेडिकल काॅलेजों के डाॅक्टर, एक साथ दो जगह नहीं दे सकेंगे सेवाएं  ,रोज की हाजिरी दिल्ली में दर्ज होगी 


" नेशनल मेडिकल कमीशन के रडार पर देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल काॅलेज आ गए हैं। इनमें डाॅक्टरों की रोजाना की हाॅजिरी को एनएमसी के साॅफ्टवेयर से जोड़कर बायोमेट्रिक मशनीनों से कराई जाएगी। सबसे अहम बात कि इस व्यवस्था को आधार कार्ड से लिंक कर दिया गया है।"

सागर।  नेशनल मेडिकल कमीशन ने सरकारी मेडिकल काॅलेजों में ड्यूटी के दौरान डाॅक्टरों की लेट-लतीफी, मनमर्जी से अस्पताल और काॅलेज आने-जाने पर लगाम लगाने, निजी मेडिकल काॅलेजों के डाॅक्टर्स के मान्यता के समय एक से अधिक काॅलेजों में पोस्टिंग दिखाने पर लगाम कस दी है। इसके लिए मप्र सहित देश के तमाम मेडिकल काॅलेजों में बायोमेट्रिक्स मशीन में अंगूठा लगाकर हाजिरी दर्ज कराना होगी। यह मशीनें सीधे एनएमसी के आॅनलाइन साॅफ्टवेयर से 24 घंटे जुड़ी रहेंगी। सबसे अहम बात अटेंडेंस सिस्टम को आधार कार्ड से लिंक किया गया है। 


एनएमसी ने मप्र सहित देश भर के प्रायवेट और सरकारी मेडिकल काॅलेजों की निगरानी खुद करने का फैसला किया है। इसके तहत किस काॅलेज में कौन और कितने फैकल्टी काम कर रहे हैं, वे समय पर काॅलेज और उससे संबंद्ध अस्पताल पहुंच रहे हैं या नहीं इस पर अब नेशनल मेडिकल कमीशन सीधे तौर पर नजर रखेगा। कुल मिलाकर एनएमसी के राडार पर यह 24 घंटे 365 दिन रहेंगे। सबसे अहम बात देश के तमाम मेडिकल काॅलेजों में डाॅक्टरों जिनमें क्लीनिकल और नाॅन क्लीनिकल डाॅक्टर व अन्य महत्वपूर्ण स्टाफ शामिल है, इनकी उपस्थिति अर्थात रोजाना की हाजिरी को आधार नंबर के साथ जोड़ा जा रहा हैं। सबकी अटेंडेंस बायोमेट्रिक्स मशीनों के जरिए कराने को अनिवार्य कर दिया गया है। 


एक फैकल्टी दूसरे काॅलेज में नाम दर्ज नहीं करा पाएंगे 

मेडिकल काॅलेजों को लेकर एनएमसी की इस नई व्यवस्था और निगरानी का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य एक काॅलेज की फैकल्टी का दूसरे काॅलेज में बतौर फैकल्टी के तौर पर नाम दर्ज न करा पाएं, इसे रोकना हैं। दरअसल अभी यह होता रहा है कि प्रायवेट मेडिकल के डाॅक्टर्स अलग-अलग समय पर एक ही शिक्षा सत्र में दो से तीन मेडिकल काॅलेजों में बतौर फैकल्टी शामिल होते रहे हैं। वहीं सरकारी मेडिकल काॅलेजों में शैक्षणिक ड्यूटी, अस्पताल में क्लीनिकल ड्यूटी सहित तैनाती स्थल पर उपस्थिति अनिवार्य और समय पर करने को लेकर यह व्यवस्था दी जा रही हैं। 




बायोमेट्रिक्स मशीन से अटेंडेंस पहले स्वैच्छिक थी, अब अनिवार्य 

एमसीआई के समय सभी मेडिकल काॅलेजों में बायोमेट्रिक मशीनों से हाजिरी लगाने की व्यवस्था की गई थी। इसके किए एमसीआई ने मशीनें उपलब्ध कराई थीं। लेकिन मान्यता के लिए यह अनिवार्य नहीं की गई थीं, लेकिन अब नेशनल मेडिकल कमीशन ने हाजिरी व्यवस्था और फैकल्टी के एक से अधिक काॅलेजों में या पार्ट टाइम फैकल्टी दर्शाने को लेकर आधार बेस अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है। 

आदेश आ गए हैं, 10 नई बायोमेट्रिक मशीनें खरीद रहे हैं 

एनएमसी से बीते दिनों फैकल्टी की बायोमेट्रिक मशीनों से अटेंडेंस को अनिवार्य करने, इसे आधार से लिंक करने को लेकर नए आदेश आए हैं। अभी तक यह व्यवस्था कम्पलसरी नहीं थी, लेकिन अब इसे अनिवार्य करते हुए नियम बना दिया गया है। हमने 10 बायोमेट्रिक मशीनें खरीदने आॅर्डर कर दिया है। इन्हें काॅलेज, अस्पताल, ओपीडी व लैब, आईसीयू में लगाया जाएगा। 

- डाॅ. आरएस वर्मा, डीन, बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज, सागर

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