मनुष्य को भटकने से बचाता है सत्संग : पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज
▪️पूज्य श्री रावतपुरा सरकार के सानिंध्य में प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न : दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर में दर्शन प्रारंभ
तीनबत्ती न्यूज: 01 फरवरी, 2026
सागर। सत्संग तो अपने घर से ही प्रारंभ होना चाहिए। जैसे मां भगवती ने प्रश्न किया और भोले बाबा ने पूरी राम कथा सुना दी। सत्संग का अर्थ होता है सत्य का संग। जिस घर में सत्संग का प्रवेश हो जाता है सत्संग का वातावरण बन जाता है वह घर अपने आप मंदिर के रूप में परिवर्तित हो जाता है। सत्संग मनुष्य को भटकने से बचा लेता है। यह वचन सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन के दूसरे सत्र में पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए व्यक्त किए।
सरस् श्रीराम कथा गायन के लिए लोक ख्याति प्राप्त प्रेममूर्ति पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह जी के पावन संकल्प से आयोजित रामकथा गायन के क्रम में कहा कि जो आपके लिए सत्संग का अवसर पैदा कर दे, आपको कथा में पहुंचा दे आपको तीर्थ में जाने का अवसर प्रदान कर दे, उसका भरपूर आदर करना चाहिए। सत्संग का अवसर देने के लिए भोले बाबा ने मां भगवती की भी खूब प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा कि श्री राम कथा मनुष्य को सुखी जीवन के मार्ग और साधन प्रदान करती है। इस कलिकाल में राम कथा मनुष्य को पाप से बचाने के लिए कलमषी वृक्षों को काटने के लिए कुल्हाड़ी का कार्य करती है। कथा श्रवण करने वाला भटकने से बच जाता है और सत्कर्म में उसकी गति हो जाती है। मनुष्य अगर सत्संग और कथा में रहते हुए अपने सभी सांसारिक दायित्वों का निर्वाह करें तो उनकी मति और गति अपने आप सत्कर्मों में होने लगती है।
महाराज श्री ने कहा कि भारत की पुण्य भूमि पर ही भगवान का अवतार होता रहा है। कभी अंशा अवतार तो कभी विशिष्ट अवतार और तो कभी पूर्णावतार के रूप में भगवान इस धरती पर आकर इस धरती को धन्य करते रहे हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि हमने इस धरती पर जन्म लिया है। दुनिया के किसी भी देश में भारत के तरह बच्चों को महत्व नहीं मिल पाता है यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे भारतवर्ष के बच्चे ममता की छांव में पलते हैं। पूज्यश्री ने कहा कि भगवान को तर्क से नहीं जाना जा सकता है। पूज्य महाराज श्री ने कहा कि निरंतर भजन में रहने वाले की कभी मृत्यु नहीं होती है। इसलिए सामान्य व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने जीवन के सभी क्रियाओं में संयुक्त रहते हुए भजन में भी प्रवृत्त हों। महाराज जी का सत्कर्म सोचने से नहीं होता है सत्कर्म के लिए सोचने वाले सोचते रह जाते हैं लेकिन करने वाला तुरंत उस कार्य को पूरा कर लेता है। जीवन में सफल होने का एक महत्वपूर्ण सूत्र यह भी है कि अगर हमारा सोचा हुआ कोई कार्य हो जाए तो उसे हरि कृपा माने और अगर ना हो तो उसे हरि इच्छा मान लें।
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अपने परमार्थ पथ का उत्तराधिकारी कोई-कोई बना पाता है
पूज्यश्री ने कहा कि मनुष्य अपने अर्थ और संपत्ति का उत्तराधिकारी तो बना जाता है लेकिन अपने परमार्थ पथ का उत्तराधिकारी कोई-कोई बना पाता है। प्रेमभूषण जी महाराज ने श्री राम कथा गायन के क्रम में श्री राम के मानव शरीर धारण करने के कारणों और प्राकट्य से जुड़े प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि अपने जीवन काल में ही हमें अपने परमार्थ पथ का उत्तराधिकारी तैयार करने की आवश्यकता है, तभी तो कई पीढ़ियों तक परमार्थ चलता रहता है। महाराज श्री ने कहा कि राम जी की भक्ति प्राप्त करने के लिए हमें शिव जी की कृपा प्राप्त करनी पड़ती है।
पूज्य श्री ने कहा कि जिस विषय का प्रबोधन ना हो उसे विषय में संबोधन नहीं करना चाहिए। उत्तर प्रदेश के एक राजनेता ने रामचरितमानस और तुलसी बाबा की बार-बार निंदा की और कई तरह के कुवचन कहे। जो बोया था आज काट रहे हैं। चारों तरफ थू-थू हो रही है। प्रकृति किसी को भी क्षमा नहीं करती है। सनातन धर्म और संस्कृति किसी एक व्यक्ति की बनाई हुई नहीं है। सबसे अधिक अत्याचार सनातन धर्म पर ही होते आए हैं फिर भी हमारे संस्कृति पूरे विश्व में अपना सर्वोच्च स्थान बनाये रखने में सक्षम है। जीवन में सदा सुखी रहने का सूत्र बताते हुए पूज्य महाराज श्री ने कहा कि जीवन में सुख और शांति चाहते हैं तो हमें भगवान की शरणागति के साथ ही साथ प्रेम और शांति का अनुसरण करना चाहिए। किसी को भी शांत कराया नहीं जा सकता है। शांत केवल खुद के प्रयासों से ही रहा जा सकता है। जगत के व्यवहार में भी आप कुशलतापूर्वक रहे लेकिन ईश्वर में प्रेम निरंतर प्रगाढ़ होते रहना चाहिए। केवल प्रेम ही राम को प्रिय है। वह राम का स्वरूप भी है, कृष्ण जी का भी स्वरूप है और इसीलिए निर्मल प्रेम ही अलौकिक है।
मंत्री राकेश सिंह ने की आरती
महाराज श्री ने कई सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी, भजनों का आनन्द लेते हुए झूमते नजर आए। इस आयोजन के मुख्य यजमान एवं विधायक भूपेंद्र सिंह जी ने सपरिवार व्यास पीठ का पूजन किया और राज्य के मंत्री राकेश सिंह एवं सागर के विधायक शैलेन्द्र जैन ने भगवान की आरती उतारी। तत्पश्चात युवा नेता अविराज सिंह ने शिवतांडव स्त्रोत को कंठस्थ सस्वर सुनाया।
पूज्य श्री रावतपुरा सरकार की उपस्थिति में प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न, दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर में दर्शन प्रारंभ
प्रातः काल से आरंभ हुए प्राण-प्रतिष्ठा के अनुष्ठानों के पश्चात रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में नवनिर्मित श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी की अलौकिक मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूरे विधि विधान से पूज्य संत श्री रविशंकर जी महाराज रावतपुरा सरकार की उपस्थिति में संपन्न हुआ। मंदिर के शिखर पर क्रेन के द्वारा धर्म ध्वजा स्थापित की गई। पूज्य पं प्रेमभूषण महाराज जी,श्री रावतपुरा सरकार जी, मुख्य यजमान पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने परिजनों व श्रद्धालुओं सहित दक्षिण मुखी हनुमान जी मंदिर के दर्शन किए। इस प्रकार सभी श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ हनुमान जी मंदिर खोल दिया गया जिसमें पहले ही दिवस हजारों की संख्या में भक्तों ने दर्शन किए और प्रसादी ग्रहण की।
श्रीराम कथा आयोजन के द्वितीय दिवस हनुमानजी के परमभक्त पूज्य श्री रावतपुरा सरकार जी स्वयं कथा श्रवण हेतु मंच पर विराजमान रहे। उन्होंने व्यासपीठ को प्रणाम किया। कथावाचक पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने उनका अभिनंदन करते हुए कहा कि यह दूसरा कथा आयोजन है जिसमें ऐसा सुअवसर आया है जब श्री रावतपुरा सरकार जी उनकी कथा श्रवण हेतु पधारे हैं।
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ये हुए शामिल
मध्यप्रदेश शासन के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह, मप्र पिछड़ा भाजपा वर्ग मोर्चा अध्यक्ष पवन पाटीदार, सागर के विधायक शैलेन्द्र जैन, बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह, बीना विधायक निर्मला सप्रे, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, पूर्व विधायक श्रीमती पारुल साहू केसरवानी, कुरवाई से पूर्व विधायक श्री वी सिंह पवार, महापौर प्रतिनिधि डा सुशील तिवारी, संजय बापट बीना, खुरई नपा अध्यक्ष श्रीमती नन्हीं बाई अहिरवार, मालथौन नपं अध्यक्ष जयंत सिंह बुंदेला, जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमती संध्या भार्गव, संदीप सिंह बासोदा नपा उपाध्यक्ष, खुरई नपा उपाध्यक्ष राहुल चौधरी, समाजसेवी अनिरुद्ध पिंपलापुरे, डा निकिता पिंपलापुरे, डा अनिल तिवारी, नीरज मुखारया, किन्नर समाज मुखिया रानी ठाकुर, राजकुमार सिंह धनौरा, रुद्रप्रताप सिंह, लक्ष्मण सिंह, आशीष पटेरिया सहित बड़ी संख्या में अतिथि गण एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।






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