सिंघई परिवार ने पेश की नेत्रदान- देहदान की मिसाल: श्रीमती किरण सिंघई का नेत्रदान और देहदान : तीन साल पहले पति प्रकाश चंद सिंघई का भी हुआ था देहदान
तीनबत्ती न्यूज|12 मई 2026
सागर : सागर का सिंघई परिवार मानवता की सेवा की मिसाल और प्रेरक परिवार बन गया है। सागर के इतवारी वार्ड निवासी श्रीमती किरण सिंघई का निधन हो गया। परिवारजनों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उनका नेत्रदान कराने के बाद बुंदेलखंड मेडिकल कालेज में देहदान कराया। गार्ड आग ऑनर दिया गया। तीन साल पहले श्री मति सिंघई के पति सिंचाई विभाग के रिटायर्ड सब इंजीनियर प्रकाशचंद सिंघई के निधन पर भी देहदान हुआ था। इसमें उनके पुत्र RTI कार्यकर्ता पंकज सिंघई और परिवार की भूमिका अहम रही है।
यह भी पढ़ें: लोकायुक्त सागर की कार्रवाई: कॉलेज के लैब टेक्नीशियन को 1 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा
सागर के इतवारी वार्ड निवासी सिंघई परिवार ने मानव सेवा और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। समाजसेवी RTI कार्यकर्ता पंकज सिंघई की माताजी श्रीमती किरण सिंघई (77 वर्ष) के निधन के बाद परिवार ने उनकी अंतिम इच्छानुसार पहले नेत्रदान कराया और फिर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में देहदान कर मानवता की मिसाल कायम की।
यह भी पढ़ें: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में हुआ देहदान : देहदानी स्व. अमोल रजक को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई श्रद्धांजलि
मंगलवार सुबह करीब 10:15 बजे श्रीमती किरण सिंघई के निधन के तुरंत बाद उनके बड़े पुत्र पंकज सिंघई ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के आई बैंक से संपर्क किया। आई बैंक इंचार्ज डॉ. सारिका चौहान के मार्गदर्शन में मेडिकल टीम उनके निवास पहुंची, जहां परिवार की सहमति से दोनों आंखों के कॉर्निया सुरक्षित निकाले गए। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे ने बताया कि सिंघई परिवार लंबे समय से नेत्रदान के प्रति जागरूक रहा है।
गार्ड ऑफ ऑनर दिया
नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार ने दिवंगत किरण सिंघई के लेकर गए पार्थिव शरीर को अपने निवास से चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को सौंप दिया। मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन के अनुसार, यह महाविद्यालय में नौवां देहदान था, जिसे शासन के निर्देशानुसार राजकीय सम्मान (गार्ड ऑफ ऑनर) के साथ विदाई दी गई।
![]() |
तीन साल पहले हुआ था प्रकाश सिंघई का देहदान
गौरतलब है कि करीब तीन वर्ष पहले 22 फरवरी 2023 को श्रीमती किरण सिंघई के पति एवं सिंचाई विभाग के रिटायर्ड सब इंजीनियर स्वर्गीय प्रकाशचंद सिंघई का भी निधन के बाद देहदान किया गया था। परिवार के सेवा भाव की परंपरा यहीं नहीं रुकी, इससे पहले पंकज सिंघई के ताऊजी का भी देहदान इसी संस्थान में किया जा चुका है।
यह भी पढ़ें: स्व. श्री किशन का देहदान बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज को: गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दिया सम्मान
विधायक पहुंचे बीएमसी
इस अवसर पर विधायक शैलेंद्र जैन, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. ठाकुर, एनाटॉमी विभाग का स्टाफ और परिजन उपस्थित रहे।
डीन डॉ. ठाकुर ने डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे निर्णय समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। सिंघई परिवार न केवल स्वयं अंगदान और देहदान कर रहा है, बल्कि श्री पंकज सिंघई निरंतर समाज को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। दिवंगत श्रीमती किरण सिंघई अपने पीछे पुत्र पंकज सिंघई, आशीष सिंघई, अतुल सिंघई एवं श्रीमती शालिनी सिंघई ,पुत्री संयोगिता डॉ जिनेश जैन , मनोज जैन सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
यह भी पढ़ें: मानवता की सर्वोच्च सेवा: सुगंधी बाई जैन ने मरणोपरांत किया नेत्रदान और देहदान : गार्ड ऑफ ऑनर देकर किया सम्मानित
ये हुए शामिल
उनके निधन पर श्रद्धांजलि देने वालो में विधायक शैलेन्द्र जैन, पूर्व विधायक सुनील जैन, स्वदेश जैन, शरद अग्रवाल, कमलेश बघेल, नीरज मुखारया, विनोद चौकसे,अरविंद चौकसे, बाबू सिंह यादव, चक्रेश सिंघई, नरेश यादव ,राजेश केशरवानी, सिंटू कटारे ,पप्पू गुप्ता, नीलेश राय, संजय जैन पंप, अजय तिवारी ,प्रदीप चतुर्वेदी, सुदेश तिवारी ,गोविंद सरवैया कपिल पचौरी बब्लू टेलर, कमल जैन चेनपुरा प्रफुल चौधरी ,अजित नाहर , कुलदीप भाटिया विनीत ताले वाले सहित जैन समाज और शहर के नागरिक गण आदि शामिल रहे।
यह भी पढ़ें: गवेषणा संवाद:मृत्यु के बाद के विधिक अधिकार: देहदान और अंगदान करने के नियमों के सरलीकरण कराए जाने पर विमर्श
मानवता के हित में निर्णय : रघु ठाकुर
समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर ने शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि अभी कुछ समय पूर्व श्री पंकज सिंघई ने उनकी माता जी और मेरी भाभी जी श्रीमती किरण सिंघई के निधन की दुखद सूचना दी।पंकज सिघई के पिताजी स्व प्रकाश चंद्र सिंघई मेरे सहपाठी व मित्र थे।उनके निधन के बाद सिंघई परिवार ने देह दान की परंपरा शुरू की थी और श्री पंकज सिंघई और सभी परिजनों ने उस परम्प रा कों याद रखते हुए अपनी माता जी श्रीमती किरण सिंघई की देह दान करने का निर्णय किया है। श्री पंकज सिंघई और उनके परिवार को इस मानवता के हित के निर्णय लेने के लिए साधुवाद।
देहदान की परंपरा एक बहुत ही श्रेष्ठ परंपरा है, जहां व्यक्ति मृत्यु के बाद भी दूसरों व समाज के काम आता है।
मैं सागर से बाहर हूं और इस देहदान के समय पहुंचना संभव नहीं। मैं श्रीमती किरण सिंघई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और श्री पंकज सिंघई व उनके परिवार को उनके साहसिक निर्णय के लिए पुनः साधुवाद देता हूं।
-----------------
---------
एडिटर : विनोद आर्य
________






कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें