पर्यावरण में पादप एवं जैव विविधता का महत्व : गवेषणा संवाद का 26वाँ आयोजन

पर्यावरण में पादप एवं जैव विविधता का महत्व : गवेषणा संवाद का 26वाँ आयोजन


तीनबत्ती न्यूज: 06 जून,2026

सागर :  विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर तिली स्थित जिज्ञासा वाचनालय में “पर्यावरण में पादप एवं जैव विविधता का महत्व” विषय पर ज्ञानवर्धक एवं जागरूकतापरक संवाद आयोजित किया गया। पर्यावरण एवं गरिमापूर्ण मानवीय जीवन को समर्पित संस्था गवेषणा के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन डॉ. चंदन सिंह ने किया। मुख्य वक्ता प्रो. पी. के. खरे थे।

यह भी पढ़ें: सागर में CBI का बड़ा एक्शन: रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर 1 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार

जैव विविधता स्वस्थ पृथ्वी और मानव कल्याण की आधारशिला है :  डॉ.चन्दन सिंह  

विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ. चंदन सिंह ने पर्यावरण संरक्षण तथा वनों के संरक्षण हेतु समय-समय पर बनाए गए कानूनों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जैव विविधता स्वस्थ पृथ्वी और मानव कल्याण की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि मुख्य वक्ता प्रो. खरे ने विश्व प्रसिद्ध गैलापागोस द्वीप समूह का अध्ययन-भ्रमण कर वहाँ की जैव विविधता का गहन अध्ययन किया है। माना जाता है कि इन द्वीपों की विशिष्ट जैव विविधता ने चार्ल्स डार्विन के विकासवाद सिद्धांत को आधार प्रदान किया था।



उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु के कारण भारत विश्व के अनेक क्षेत्रों की तुलना में अत्यंत सौभाग्यशाली देश है, जहाँ जैव विविधता की समृद्ध पूँजी उपलब्ध है : प्रो.पी.के.खरे

उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं अन्य श्रोताओं से संवाद स्थापित करते हुए प्रो. खरे ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न गंभीर चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु के कारण भारत विश्व के अनेक क्षेत्रों की तुलना में अत्यंत सौभाग्यशाली देश है, जहाँ जैव विविधता की समृद्ध पूँजी उपलब्ध है।

यह भी पढ़ें: रजनीश अग्रवाल सागर के पहले नेता जो राज्यसभा में जायेंगे: भाजपा ने रजनीश अग्रवाल को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार ▪️सागर जिले के मंडी बामोरा से रखते हैं संबंध

अपने वक्तव्य में उन्होंने प्रशांत महासागर के ज्वालामुखीय द्वीप समूहों की जलवायु एवं जैव विविधता पर किए गए प्रत्यक्ष अध्ययन के वैज्ञानिक निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

यह भी पढ़ें: सागर को मिली बड़ी रेल सौगात: रीवा–सागर–नागपुर–हैदराबाद नई स्थायी ट्रेन सेवा को मंजूरी : सांसद डॉ लता वानखेड़े

 उन्होंने इन द्वीपों में वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों का रोचक विवरण पॉवर-पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से साझा किया।

प्रो. खरे ने पृथ्वी की पारिस्थितिक सीमाओं की चर्चा करते हुए जल, जंगल, जमीन, वायु, पादपों तथा विलुप्ति के कगार पर पहुँच रही जीव प्रजातियों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि हजारों वर्ष पुराने जीवित वृक्षों के तनों की वार्षिक परतों तथा हिमखंडों की कई किलोमीटर मोटी बर्फीली परतों के अध्ययन से पृथ्वी के प्राचीन जलवायु इतिहास का वैज्ञानिक आकलन किया जाता है।

यह भी पढ़ें: एमपी पुलिस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,08 IPS और 66 राज्य पुलिस सेवाअधिकारियों के तबादले

उन्होंने सागर क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ कल्पवृक्ष के मूल स्थान, आयु तथा उससे जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की जानकारी भी दी। साथ ही ग्लोबल वार्मिंग, एल-नीनो जैसी मौसमीय घटनाओं, कार्बन डाइऑक्साइड एवं मानव गतिविधियों से उत्पन्न अन्य ग्रीनहाउस गैसों के दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इन चुनौतियों के समाधान हेतु व्यापक जन-जागरूकता और जन-आंदोलन की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष डॉ. मनोहर चौरसिया ने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रो. खरे ने वर्षों के श्रमसाध्य अध्ययन और अनुभव को सीमित समय में साझा कर ज्ञान का अमूल्य दान किया है।


ये रहे शामिल

कार्यक्रम में पुरुषोत्तम चौरसिया, हर्ष अहिरवार, सौरभ केशरवानी, तरुण पाल, सत्यम ठाकुर, दीपक विश्वकर्मा, अमन चौरसिया, संदीप पटैल, शैलेन्द्र सिंह, प्रियांश साहू, गौरी, देव सिंह, मुस्कान पटैल, अमित साहू, अभिषेक, तुलसीराम, राज सेन, राजेन्द्र लोधी, शुभम दांगी, दिनेश, निशा कुशवाहा, पुष्पांजलि चौरसिया, प्रांजलि चौरसिया, दीप्ति, शिवकुमार यादव सहित अनेक छात्र-छात्राएँ एवं नागरिक उपस्थित रहे।


------------



---------

एडिटर : विनोद आर्य

________

+91 94244 37885

तीनबत्ती न्यूज़. कॉम की खबरे पढ़ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  फेसबुक पेज ,यूट्यूब, इंस्टाग्राम और X से जुड़ने  लाईक / फॉलो करे
 -----------------------

---------------
--------------------
------------------------


--------------

इंस्टाग्राम : teenbattinews
---------------

---------------

  







कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें