बीएमसी सागर की ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि: विश्व विख्यात 'वर्ल्ड जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंट्रोलोजी' में BMC के शोध को मिला स्थान ▪️हेपेटाइटिस-डी पर देश का पहला विस्तृत अध्ययन

बीएमसी सागर की ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि: विश्व विख्यात 'वर्ल्ड जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंट्रोलोजी' में BMC के शोध को मिला स्थान

▪️हेपेटाइटिस-डी पर देश का पहला विस्तृत अध्ययन


तीनबत्ती न्यूज: 06 जून,2026

रिपोर्ट: तीनबत्ती न्यूज़ डेस्क

​सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC), सागर ने चिकित्सा अनुसंधान एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय सफलता हासिल की है। बीएमसी की रिसर्च वैज्ञानिक डॉ. नीतू मिश्रा और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर व एमआरयू (MRU) के को-नोडल अधिकारी डॉ. सुमित रावत सहित उनके शोध दल का शोधपत्र (Research Paper) दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में से एक “World Journal of Gastroenterology” में प्रकाशित हुआ है।

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​गौरतलब है कि 5.4 इम्पैक्ट फैक्टर वाला यह जर्नल चिकित्सा जगत में वैश्विक स्तर पर अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है, जिसमें स्थान पाना किसी भी चिकित्सा संस्थान के लिए बड़े गौरव की बात है।

भारत में हेपेटाइटिस-डी की व्यापकता पर देश का पहला विस्तृत अध्ययन


​यह शोधपत्र “भारत में हेपेटाइटिस-डी वायरस (HDV) की व्यापकता” विषय पर आधारित है। इसके अंतर्गत देश में हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित मरीजों में हेपेटाइटिस-डी संक्रमण की वर्तमान स्थिति का गहन व विस्तृत मेटा-एनालिसिस (Meta-Analysis) किया गया है।

  • तकनीकी सहयोग: यह महत्वपूर्ण अध्ययन 'एपिडेमियोलॉजी स्टडी ग्रुप ऑफ वायरल हेपेटाइटिस' (ESGVH) के तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ है।
  • भविष्य का रोडमैप: इस शोध के निष्कर्ष आने वाले समय में हेपेटाइटिस रोग की समय पर रोकथाम, शीघ्र पहचान (Early Detection) तथा राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर उपचार रणनीति व नीतियां विकसित करने में मील का पत्थर साबित होंगे।

​ गंभीर लिवर रोगों को समझने में मिलेगी मदद: विशेषज्ञ

​मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने इस शोध की क्लिनिकल अहमियत को रेखांकित करते हुए बताया कि हेपेटाइटिस-बी के साथ हेपेटाइटिस-डी का 'को-इंफेक्शन' (Co-infection) मरीजों में लिवर की जटिलताओं को अत्यधिक बढ़ा देता है। बीएमसी की टीम द्वारा प्रस्तुत यह मेटा-एनालिसिस देश में इस मूक बीमारी (Silent Disease) के वास्तविक आंकड़ों और गंभीरता को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। यह वैज्ञानिक शोध क्लिनिकल प्रैक्टिस और भविष्य में मरीजों के उपचार प्रबंधन (Patient Management) को अधिक सटीक बनाने में बेहद मददगार सिद्ध होगा।"

संस्थान के अनुसंधान-अनुकूल वातावरण की सफलता

​इस बड़ी अकादमिक सफलता पर वैज्ञानिक डॉ. नीतू मिश्रा ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इस शोध का श्रेय डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च (DHR), बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर, एमआरयू की नोडल अधिकारी डॉ. श्वेता भटनागर तथा डॉ. सुमित रावत के सतत मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग एवं संस्थान में उपलब्ध रिसर्च-अनुकूल माहौल को दिया।

पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व का क्षण: डीन

​इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। बीएमसी सागर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ उच्चस्तरीय चिकित्सा अनुसंधान (Medical Research) में भी निरंतर नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। इस प्रकार के वैज्ञानिक शोध संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होते हैं।"

इस अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन के साथ ही बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर ने मध्य प्रदेश के अग्रणी सुपर-स्पेशियलिटी और अनुसंधान केंद्रों में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत और सुदृढ़ कर लिया है।

वेबसाइट: teenbattinews.com



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एडिटर : विनोद आर्य

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