नशे से परिवार और गांव को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी: प्रियंक कानूनगो
• बंडा शराबकांड में राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, पुलिस को 24 घंटे में बयान लेने के निर्देश
तीनबत्ती न्यूज: 15 सितम्बर, 2026
सागर। बंडा शराबकांड को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो मंगलवार को सागर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित ग्रामों का दौरा कर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और पूरे मामले की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्रवाई की समीक्षा की और दोषी कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
प्रियंक कानूनगो ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य ओंकार सिंह, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति के सदस्यों के साथ ग्राम जगथर और गूगरा पहुंचकर मृतकों के परिजनों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि नशे से अपने परिवार और गांव को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। शराबकांड से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के साथ-साथ उन बच्चों की देखभाल भी जरूरी है, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया है।
मृतकों के परिजनों के बयान नहीं लेने पर जताई नाराजगी
पीड़ित परिवारों से बातचीत के दौरान प्रियंक कानूनगो को जानकारी मिली कि कई मृतकों के परिजनों के बयान अब तक पुलिस द्वारा दर्ज नहीं किए गए हैं। उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी ली और कार्रवाई में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मृतकों के परिजनों के बयान 24 घंटे के भीतर लिए जाएं। साथ ही, यदि किसी परिजन द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के लिए रिपोर्ट दी जाती है तो उस पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कानूनगो ने कहा कि पूरे मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या खामी सामने आती है तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
मरणासन्न कथन नहीं लिए जाने पर सवाल
दौरे के दौरान प्रियंक कानूनगो ने यह भी जानकारी ली कि शराबकांड में बीमार हुए और बाद में मृत लोगों के मरणासन्न कथन दर्ज किए गए थे या नहीं। उनके अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि किसी भी मृतक का मरणासन्न कथन दर्ज नहीं किया गया।परिजनों ने बताया कि कई लोग बीमार होने के बाद बातचीत की स्थिति में थे और कुछ समय तक अस्पताल के सामान्य वार्ड में भी भर्ती रहे। बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया और उनकी मृत्यु हो गई।
इस पर कानूनगो ने पुलिस अधिकारियों से सवाल किए कि इतने समय के बावजूद मरणासन्न कथन क्यों नहीं लिए गए। उन्होंने पूरे मामले की जांच में ऐसी किसी भी कमी को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए।
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मृतक की मां की रिपोर्ट पर एफआईआर के निर्देश
ग्राम जगथर में कानूनगो ने मृतक अजय लोधी की मां से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों से पूछा कि शराब कहां से खरीदी गई थी और गांव में शराब कौन बेचता है।
ग्रामीणों द्वारा कुछ लोगों के नाम बताए जाने पर कानूनगो ने मौके पर मौजूद एसडीओपी रोहित लखेर को निर्देश दिए कि मृतक की मां की रिपोर्ट पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शराबकांड में दोषी कोई भी व्यक्ति हो, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़नी चाहिए।
प्रभावित बच्चों के लिए विशेष बेंच लगाने के निर्देश
कानूनगो और ओंकार सिंह ने प्रभावित परिवारों से कहा कि यह घटना बेहद दुखद और हृदयविदारक है। कई परिवारों के बच्चों के सिर से उनके पिता का साया उठ गया है। ऐसे बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी शिक्षा, परवरिश और जीवन-यापन में सहायता दिलाना समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बाल कल्याण समिति के सदस्यों को प्रभावित ग्रामों में विशेष बेंच लगाकर बच्चों एवं परिवारों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
बीएमसी पहुंचकर मरीजों के परिजनों से मिले
सागर दौरे के दौरान प्रियंक कानूनगो बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) भी पहुंचे। उन्होंने वहां उपचाररत मरीजों के परिजनों से मुलाकात कर इलाज और स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने बीएमसी अधीक्षक डॉ. राजेश जैन को मरीजों का बेहतर उपचार सुनिश्चित करने तथा प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
कलेक्टर और एसपी के साथ की बैठक
इससे पहले प्रियंक कानूनगो ने सर्किट हाउस में कलेक्टर प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने बंडा शराबकांड से संबंधित अब तक की कार्रवाई, जांच और प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही सहायता की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामले की जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने तथा बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
प्रियंक कानूनगो ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, समाज और गांव के प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर नशे के खिलाफ जागरूकता और कार्रवाई में भूमिका निभानी होगी।



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