वैश्विक मंच पर गूंजी भारत की आवाज: AI का भविष्य ऐसा हो, जिसमें कामगारों के अधिकार सुरक्षित रहें और कोई पीछे न छूटे
• 153वीं IPU असेंबली में सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने रोजगार, कौशल विकास और मानव गरिमा पर दिया संदेश
सागर/आरूशा। तंजानिया के आरूशा शहर में आयोजित 153वीं अंतर-संसदीय संघ (IPU) असेंबली में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं मध्य प्रदेश के सागर लोकसभा क्षेत्र की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने ‘AI और कार्य का भविष्य’ विषय पर भारत का पक्ष रखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोजगार के बदलते स्वरूप और कामगारों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।
डॉ. वानखेड़े ने कहा कि AI का उद्देश्य केवल उत्पादकता बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि विकास को समावेशी बनाना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और मानव गरिमा की रक्षा करना भी होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी बदलाव के दौर में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विकास की प्रक्रिया में कोई भी वर्ग पीछे न छूटे।
AI बदल रही है काम करने का तरीका
डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे काम करने, व्यवसाय संचालित करने और सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के तरीकों को तेजी से बदल रही है। AI के माध्यम से नवाचार, उत्पादकता और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं, लेकिन इसके साथ पारंपरिक नौकरियों और कौशलों के स्वरूप में भी बदलाव आएगा।
ऐसे में कामगारों को नए कौशल उपलब्ध कराना, उन्हें बदलती तकनीक के लिए तैयार करना तथा उनके अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।
AI के क्षेत्र में भारत की पहल का किया उल्लेख
सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि भारत की युवा आबादी, मजबूत तकनीकी क्षेत्र और तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल बुनियादी ढांचा देश को AI आधारित विकास के लिए विशेष अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने इंडिया AI मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत कंप्यूटिंग संसाधनों, अनुसंधान, कौशल विकास और नवाचार में निवेश के माध्यम से एक मजबूत और समावेशी AI व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
AI के विकास के साथ कामगारों के अधिकारों की रक्षा जरूरी
अपने संबोधन में डॉ. वानखेड़े ने सांसदों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ कामगारों, मौलिक अधिकारों और जनहित की रक्षा करना भी आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि भारत में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति AI सहित तकनीक से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा करती है।
उन्होंने Digital Sansad, Parliament Digital Library, National e-Vidhan Application और Sansad Bhashini जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत संसदीय कार्यप्रणाली को अधिक सुलभ, प्रभावी और समावेशी बनाने के लिए भी तकनीक का उपयोग कर रहा है।
डॉ. लता वानखेड़े ने AI को वैश्विक अवसर के साथ-साथ वैश्विक चुनौती बताते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि तकनीक का लाभ किसी एक देश या वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों को तकनीक, कंप्यूटिंग संसाधनों, डेटा और कौशल विकास के अवसरों तक समान और उचित पहुंच मिलनी चाहिए।
उन्होंने भारत में आयोजित AI Impact Summit 2026 का उल्लेख करते हुए AI के युग में मानव कौशल, प्रशिक्षण और नए कौशल सीखने के लिए वैश्विक सहयोग की महत्ता को रेखांकित किया।
अपने संबोधन के समापन में सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि AI का उपयोग नए अवसर पैदा करने, कामगारों के अधिकारों की रक्षा करने और मानव गरिमा को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने जिम्मेदार नवाचार, सही कौशल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भविष्य के कार्यक्षेत्र की प्रमुख आवश्यकताएं बताया।
डॉ. वानखेड़े ने कहा कि तकनीकी प्रगति की वास्तविक सफलता केवल मशीनों की क्षमता या आर्थिक उत्पादकता से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि उसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक कितना पहुंचता है।


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