दिग्विजय सिंह ने बंडा शराब कांड पर सरकार को घेरा, SP हटाने और उनकी EOW जांच की मांग
• बंडा कांड के चार पीड़ित परिवारों को लिया गोद
• कलेक्टर ने नहीं उठाए फोन, करेंगे शिकायत
• भार्गव - भूपेंद्र और गोविंद राजपूत वाली भाजपा में बताया फर्क
तीनबत्ती न्यूज: 13 सितम्बर, 2026
सागर। बंडा शराब कांड को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आज रविवार को सागर में मीडिया से चर्चा की। उन्होंने शनिवार को प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। दिग्विजय सिंह ने सागर के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया को हटाकर एसपी की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से कराने की मांग की।दिग्विजय सिंह ने बुंदेली भाषा में कहा कि वे आज दुखी मन से यहां आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बंडा ही नहीं, पूरे जिले में अपराधियों को प्रशासन और नेताओं का संरक्षण मिल रहा है। उनका सवाल था कि बिना प्रशासन की मदद के इतना बड़ा अवैध शराब का नेटवर्क कैसे चल सकता है।
SP की भूमिका पर उठाए सवाल
दिग्विजय सिंह ने सागर एसपी अनुराज सुजानिया की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुरैना में पूर्व में हुई जहरीली शराब की घटना का भी जिक्र किया। उस समय मुरैना में अनुराग सुजानिया एसपी थे। आज सागर में घटना दोहराई गई। उन्होंने कुछ व्यक्तियों के साथ पुलिस अधिकारियों के कथित संबंधों की जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि एसपी की अवैध वसूली को लेकर भी जनचर्चा है। हालांकि उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से प्रमाण सामने नहीं रखे। उन्होंने कहा कि यदि एसपी पर जो आरोप लगाए है वे प्रमाणित नहीं हैं तो एसपी उनके खिलाफ मानहानि का दावा कर सकते है।अवैध वसूली के आरोपों को वे अदालत में प्रमाणित कर देंगे। उन्होंने कहा कि मेरी सीएम डॉ मोहन यादव से मांग है कि एसपी को हटाकर उनकी जांच eow से कराए।
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बंडा शराब कांड का आरोपी दिवांजय राजपूत का शार्ट इन काउंटर
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‘सागर गोल्ड’ बनाने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया कि अवैध शराब बनाने और सप्लाई करने वालों पर अब तक पर्याप्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जितनी मौतें हुई हैं, उनके अनुरूप मामलों में FIR दर्ज होनी चाहिए और अवैध शराब जहां से खरीदी गई, उस नेटवर्क से जुड़े लोगों को भी आरोपी बनाया जाना चाहिए। जहरीली शराब पीने वालो ने सागर गोल्ड शराब पी है। इसके मालिकों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। शराब ठेकेदार जंडेल सिंह गुर्जर पर भी कोई एक्शन नहीं हुआ।
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उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने में लगी है। उन्होंने यह भी कहा कि खेतों में शराब फेंकने के बजाय यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो वे लोग शराब एसपी के बंगले के सामने फेंकने की बात कहते।
30 परिवारों से मिले, चार परिवारों को गोद लेने की घोषणा
दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने बंडा में करीब 30 प्रभावित परिवारों से मुलाकात की है। उनके अनुसार शराब कांड से प्रभावित परिवार बेहद खराब आर्थिक स्थिति में हैं और कई परिवारों के सामने खाने तक का संकट है। उन्होंने घोषणा की कि वे शराब कांड से प्रभावित चार परिवारों को गोद लेंगे। इन परिवारों को अपनी ओर से 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने तथा बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाने की बात कही।
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उन्होंने चारों पीड़ित परिवारों में प्रत्येक परिवार को 10-10 हजार रूपए की राशि प्रतिमाह देने तथा उनके अनाथ बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने की घोषणा की है।इनमें झोली ग्राम के मृतक भोला अहिरवार, धुरमार ग्राम के रामस्वरूप अहिरवार, खतोरा खुई ग्राम के भोपाली आदिवासी (पत्नी - माया) तथा हनौती ग्राम के -धनसींग आदिवासी ( पत्नी -मीना) शामिल हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से भी अपील की कि वे शराब कांड से प्रभावित परिवारों की जिम्मेदारी लें।
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मृतकों के परिजनों को मुआवजा और नौकरी की मांग
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मृतकों के परिवारों को अभी तक पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिली है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि कितना मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को असंवेदनशील बताते हुए प्रभावित परिवारों को नौकरी देने की मांग की।
कलेक्टर ने नहीं उठाए फोन, करेंगे शिकायत
उन्होंने कहा कि उन्होंने सागर कलेक्टर से फोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। इसकी शिकायत वे मुख्य सचिव से करने की बात कही। उन्होंने प्रभावित करीब 40 परिवारों के सदस्यों को नौकरी देने की मांग रखी।
अवैध शराब और राजनीतिक संरक्षण के आरोप
दिग्विजय सिंह ने कुछ शराब कारोबारियों और राजनीतिक लोगों के बीच कथित संबंधों की जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों के खिलाफ मामले दर्ज होने के बाद नाम बदलकर शराब के ठेके लेने की कोशिश की गई। उन्होंने मंत्री गोविंद राजपूत और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह पर भी आरोप लगाए।
भार्गव ,भूपेंद्र और गोविंद राजपूत की भाजपा का फर्क
उन्होंने कहा कि इस समय बुंदेलखंड में भाजपा में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव - भूपेंद्र सिंह वाली भाजपा और पंजा छाप भाजपा यानि गोविंद सिंह राजपूत है। इसमें गोविंद राजपूत पूरे मजे में है। कांग्रेस सरकार में भी परिवहन विभाग लिया और फिर भाजपा में। उन्होंने कहा कि गोपाल भार्गव 1984 में युवा कांग्रेस में थे। उनकी इच्छा रहली से टिकिट की थी। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। अभी भी है। वर्तमान में गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह शुद्ध भाजपाई है। और गोविंद राजपूत पंजा छाप भाजपाई है। राजपूत ने कांग्रेस और अब भाजपा दोनों जगह खूब सुख लिए।
उन्होंने बियर बार और शराब कारोबार से जुड़े लोगों की संपत्तियों एवं कारोबार की जांच की मांग भी उठाई। साथ ही DCR और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने भाजपा विधायक प्रदीप लारिया पर भी शराब ठेकेदारों से सांठगांठ के आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि पूर्व में भी अवैध शराब को लेकर शिकायतें हुई थीं और ग्रामसभा में प्रस्ताव तक पारित किए गए थे, इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। गांव में भाजपा नेता राजेंद्र तिवारी के भतीजे पटवारी ने शराब पीड़ित लोगों की जमीन पर कब्जा कर लिया। ये हाल गांव के।
उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई जरूरी है, लेकिन बड़े अपराधियों तक भी कार्रवाई पहुंचनी चाहिए।दिग्विजय सिंह ने कहा कि केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। आबकारी विभाग, पुलिस और शराब बनाने वाली डिस्टलरीज की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे ऐसी आबकारी नीति के पक्ष में नहीं हैं, जो नशे को बढ़ावा दे। हालांकि जो डिस्टलरीज वैधानिक रूप से शराब का निर्माण कर रही हैं, उनके संबंध में भी नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।दिग्विजय सिंह ने बिना हॉलमार्क या निर्धारित वैधानिक पहचान के शराब की बिक्री को अवैध बताते हुए कहा कि ऐसी शराब की बिक्री पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए और इसके पूरे नेटवर्क की जांच की जानी चाहिए।
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‘जिनसे जांच कराई जा रही है, उन्हीं पर भरोसा नहीं’
दिग्विजय सिंह ने सरकार द्वारा कराई जा रही जांच पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों या एजेंसियों से जांच कराई जा रही है, उन पर उन्हें भरोसा नहीं है। उनका आरोप था कि जांच दोषियों को बचाने के लिए कराई जा रही है। प्रशासन पूरी तरह से आरोपियों को बचाने में जुटा है।
‘सनातन धर्म का अर्थ किसी दूसरे का नाश नहीं’
मीडिया से चर्चा के दौरान दिग्विजय सिंह ने अपनी प्रस्तावित सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यात्रा 20 अक्टूबर से शुरू होगी और उज्जैन से अयोध्या तक जाएगी। यात्रा में प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना है। उन्होंने कहा कि यात्रा में सनातन, बौद्ध, सिख और जैन धर्म सहित विभिन्न धार्मिक परंपराओं पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का अर्थ यह नहीं है कि हिंदुओं की तरक्की हो और बाकी लोगों का नाश हो। उन्होंने सभी को एक बताते हुए कहा कि “सबका मालिक एक है।”
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दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि विचारधारा से है। उन्होंने भाजपा और हिंदू संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए तथा धार्मिक मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल को बंद करने की मांग की।
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राम मंदिर और RSS को लेकर भी सवाल
उन्होंने राम मंदिर निर्माण, प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़े खर्च और चंदे का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की।RSS को लेकर उन्होंने कहा कि संगठन के पंजीयन और कोविड काल में कथित आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सवाल उन्होंने उठाए हैं तथा इस संबंध में सरकार से जवाब मांगा है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि धर्म का इस्तेमाल चुनावी राजनीति के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भी अपनी विचारधारा के साथ जनता के बीच जाना चाहिए।
ये रहे शामिल
इस दौरान जिलाध्यक्ष द्वय भूपेंद्र मोहासा, महेश जाटव, पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी, तरवर सिंह लोधी, आनंद अहिरवार, सुरेंद्र सुहाने, अमित रामजी दुबे, रिचा सिंह, माधवी चौधरी, रेखा चौधरी, सिंटू कटारे, नीरज मुखारया , संदीप सबलोक, आशीष ज्योतिषी, राज कुमार धनौरा, अभिषेक गौर, रामकुमार पचौरी, अवधेश तोमर, शैलेन्द्र तोमर, चंदन सुहाने, शिव शंकर यादव, कपिल पचौरी, बब्बू यादव, विजय साहू, कमलेश तिवारी,आनंद हेला, आदि मौजूद रहे।


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