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मनुष्य को भटकने से बचाता है सत्संग : पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ▪️पूज्य श्री रावतपुरा सरकार के सानिंध्य में प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न : दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर में दर्शन प्रारंभ

मनुष्य को भटकने से बचाता है सत्संग : पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज

▪️पूज्य श्री रावतपुरा सरकार के सानिंध्य में प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न :  दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर में दर्शन प्रारंभ


तीनबत्ती न्यूज: 01 फरवरी, 2026

सागर। सत्संग तो अपने घर से ही प्रारंभ होना चाहिए। जैसे मां भगवती ने प्रश्न किया और भोले बाबा ने पूरी राम कथा सुना दी। सत्संग का अर्थ होता है सत्य का संग। जिस घर में सत्संग का प्रवेश हो जाता है सत्संग का वातावरण बन जाता है वह घर अपने आप  मंदिर के रूप में परिवर्तित हो जाता है। सत्संग मनुष्य को भटकने से बचा लेता है। यह वचन सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन के दूसरे सत्र में पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए व्यक्त किए।  


सरस् श्रीराम कथा गायन के लिए लोक ख्याति प्राप्त प्रेममूर्ति पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह जी  के पावन संकल्प से आयोजित रामकथा गायन के क्रम में कहा कि जो आपके लिए सत्संग का अवसर पैदा कर दे, आपको कथा में पहुंचा दे आपको तीर्थ में जाने का अवसर प्रदान कर दे, उसका भरपूर आदर करना चाहिए।  सत्संग का अवसर देने के लिए भोले बाबा ने मां भगवती की भी खूब प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा कि श्री राम कथा मनुष्य को सुखी जीवन के मार्ग और साधन प्रदान करती है। इस कलिकाल में राम कथा मनुष्य को पाप से बचाने के लिए कलमषी वृक्षों को काटने के लिए कुल्हाड़ी का कार्य करती है। कथा श्रवण करने वाला भटकने से बच जाता है और सत्कर्म में उसकी गति हो जाती है। मनुष्य अगर सत्संग और कथा  में रहते हुए अपने सभी सांसारिक दायित्वों का निर्वाह करें तो उनकी मति और गति अपने आप सत्कर्मों में होने लगती है।


महाराज श्री ने कहा कि भारत की पुण्य भूमि पर ही भगवान का अवतार होता रहा है। कभी अंशा अवतार तो कभी विशिष्ट अवतार और तो कभी पूर्णावतार के रूप में भगवान इस धरती पर आकर इस धरती  को धन्य करते रहे हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि हमने इस धरती पर जन्म लिया है। दुनिया के किसी भी देश में भारत के तरह बच्चों को महत्व नहीं मिल पाता है यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे भारतवर्ष के बच्चे ममता की छांव में पलते हैं। पूज्यश्री ने कहा कि भगवान को तर्क से नहीं जाना जा सकता है। पूज्य महाराज श्री ने कहा कि निरंतर भजन में रहने वाले की कभी मृत्यु नहीं होती है। इसलिए सामान्य व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने जीवन के सभी क्रियाओं में संयुक्त रहते हुए भजन में भी प्रवृत्त हों। महाराज जी का सत्कर्म सोचने से नहीं होता है सत्कर्म के लिए सोचने वाले सोचते रह जाते हैं लेकिन करने वाला तुरंत उस कार्य को पूरा कर लेता है। जीवन में सफल होने का एक महत्वपूर्ण सूत्र यह भी है कि अगर हमारा सोचा हुआ कोई कार्य हो जाए तो उसे हरि कृपा माने और अगर ना हो तो उसे हरि इच्छा मान लें।

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अपने परमार्थ पथ का उत्तराधिकारी कोई-कोई बना पाता है

पूज्यश्री ने कहा कि मनुष्य अपने अर्थ और संपत्ति का उत्तराधिकारी तो बना जाता है लेकिन अपने परमार्थ पथ का उत्तराधिकारी कोई-कोई बना पाता है। प्रेमभूषण जी महाराज ने श्री राम कथा गायन के क्रम में श्री राम के मानव शरीर धारण करने के कारणों और प्राकट्य से जुड़े प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि अपने जीवन काल में ही हमें अपने परमार्थ पथ का उत्तराधिकारी तैयार करने की आवश्यकता है, तभी तो कई पीढ़ियों तक परमार्थ चलता रहता है। महाराज श्री ने कहा कि राम जी की भक्ति प्राप्त करने के लिए हमें शिव जी की कृपा प्राप्त करनी पड़ती है।


पूज्य श्री ने कहा कि जिस विषय का प्रबोधन ना हो उसे विषय में संबोधन नहीं करना चाहिए। उत्तर प्रदेश के एक राजनेता ने रामचरितमानस और तुलसी बाबा की बार-बार निंदा की और कई तरह के कुवचन कहे। जो बोया था आज काट रहे हैं। चारों तरफ थू-थू हो रही है। प्रकृति किसी को भी क्षमा नहीं करती है। सनातन धर्म और संस्कृति किसी एक व्यक्ति की बनाई हुई नहीं है। सबसे अधिक अत्याचार सनातन धर्म पर ही होते आए हैं फिर भी हमारे संस्कृति पूरे विश्व में अपना सर्वोच्च स्थान बनाये रखने में सक्षम है। जीवन में सदा सुखी रहने का सूत्र बताते हुए पूज्य महाराज श्री ने कहा कि जीवन में सुख और शांति चाहते हैं तो हमें भगवान की शरणागति के साथ ही साथ प्रेम और शांति का अनुसरण करना चाहिए। किसी को भी शांत कराया नहीं जा सकता है। शांत केवल खुद के प्रयासों से ही  रहा जा सकता है। जगत के व्यवहार में भी आप कुशलतापूर्वक रहे लेकिन ईश्वर में प्रेम निरंतर प्रगाढ़ होते रहना चाहिए। केवल प्रेम ही राम को प्रिय है। वह राम का स्वरूप भी है, कृष्ण जी का भी स्वरूप है और इसीलिए निर्मल प्रेम ही अलौकिक है।


मंत्री राकेश सिंह ने की आरती

महाराज श्री ने कई सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी, भजनों का आनन्द लेते हुए झूमते नजर आए। इस आयोजन के मुख्य यजमान एवं विधायक भूपेंद्र सिंह जी ने सपरिवार व्यास पीठ का पूजन किया और राज्य के मंत्री राकेश सिंह एवं सागर के विधायक शैलेन्द्र जैन ने भगवान की आरती उतारी। तत्पश्चात युवा नेता अविराज सिंह ने शिवतांडव स्त्रोत को कंठस्थ सस्वर सुनाया।


पूज्य श्री रावतपुरा सरकार की उपस्थिति में प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न, दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर में दर्शन प्रारंभ


प्रातः काल से आरंभ हुए प्राण-प्रतिष्ठा के अनुष्ठानों के पश्चात रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में नवनिर्मित श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी की अलौकिक मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूरे विधि विधान से पूज्य संत श्री रविशंकर जी महाराज रावतपुरा सरकार की उपस्थिति में संपन्न हुआ। मंदिर के शिखर पर क्रेन के द्वारा धर्म ध्वजा स्थापित की गई। पूज्य पं प्रेमभूषण महाराज जी,श्री रावतपुरा सरकार जी, मुख्य यजमान पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने परिजनों व श्रद्धालुओं सहित दक्षिण मुखी हनुमान जी मंदिर के दर्शन किए। इस प्रकार सभी श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ हनुमान जी मंदिर खोल दिया गया जिसमें पहले ही दिवस हजारों की संख्या में भक्तों ने दर्शन किए और प्रसादी ग्रहण की।



श्रीराम कथा आयोजन के द्वितीय दिवस हनुमानजी के परमभक्त पूज्य श्री रावतपुरा सरकार जी स्वयं कथा श्रवण हेतु मंच पर विराजमान रहे। उन्होंने व्यासपीठ को प्रणाम किया। कथावाचक पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने उनका अभिनंदन करते हुए कहा कि यह दूसरा कथा आयोजन है जिसमें ऐसा सुअवसर आया है जब श्री रावतपुरा सरकार जी उनकी कथा श्रवण हेतु पधारे हैं।

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ये हुए शामिल

मध्यप्रदेश शासन के पीडब्ल्यूडी मंत्री  राकेश सिंह, मप्र पिछड़ा भाजपा वर्ग मोर्चा अध्यक्ष पवन पाटीदार, सागर के विधायक  शैलेन्द्र जैन, बंडा विधायक  वीरेंद्र सिंह, बीना विधायक निर्मला सप्रे, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, पूर्व विधायक श्रीमती पारुल साहू केसरवानी, कुरवाई से पूर्व विधायक श्री वी सिंह पवार, महापौर प्रतिनिधि डा सुशील तिवारी, संजय बापट बीना, खुरई नपा अध्यक्ष श्रीमती नन्हीं बाई अहिरवार, मालथौन नपं अध्यक्ष जयंत सिंह बुंदेला, जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमती संध्या भार्गव, संदीप सिंह बासोदा नपा उपाध्यक्ष, खुरई नपा उपाध्यक्ष राहुल चौधरी, समाजसेवी अनिरुद्ध पिंपलापुरे, डा निकिता पिंपलापुरे, डा अनिल तिवारी, नीरज मुखारया, किन्नर समाज मुखिया रानी ठाकुर, राजकुमार सिंह धनौरा, रुद्रप्रताप सिंह, लक्ष्मण सिंह, आशीष पटेरिया सहित बड़ी संख्या में अतिथि गण एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।



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Surya Gochar In Kumbh Rashi 2026 : 13 फरवरी 2026 को सूर्य का कुंभ राशि में प्रवेश : इन राशियों पर पड़ेगा असर

Surya Gochar In Kumbh Rashi 2026 : 13 फरवरी 2026 को सूर्य का कुंभ राशि में प्रवेश : इन राशियों पर पड़ेगा असर


तीनबत्ती न्यूज: 01 फरवरी, 2026

वर्तमान में सूर्य मकर राशि में चल रहे हैं  । मकर राशि में सूर्य का प्रवेश 14 जनवरी को प्रातः काल 3:06 पर हुआ था  ।  यह दिन मकर संक्रांति कहलाता है । चिंता हरण जंत्री के अनुसार मकर राशि से सूर्य का कुंभ राशि में प्रवेश 13 फरवरी को प्रातः काल 4:08 पर होगा । लाला रामस्वरूप पंचांग के अनुसार यह प्रवेश 13 फरवरी को 8:26 दिन से होगा  । पुष्पांजलि पंचांग के अनुसार सूर्य का कुंभ राशि में प्रवेश 13 फरवरी को प्रातः 4:05 पर होगा । हम सभी जानते हैं कि विभिन्न पंचांगों में यह समय अलग-अलग होगा । उस समय कुंभ राशि में पहले से ही बुध ,  शुक्र और राहु विराजमान होंगें । इन सब का मिला-जुला असर आप पर और विश्व पर पड़ेगा । 

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कुंभ राशि का स्वामी शनि है जो की भगवान सूर्य के पुत्र हैं  ।  परंतु उनसे शत्रु भाव रखते हैं । जिसके कारण कुंभ राशि में सूर्य काफी कमजोर होंगे  । इसी राशि में राहु के भी  होने के कारण सूर्य पर ग्रहण भी पड़ेगा तथा वे  और कमजोर हो जाएंगे । सूर्य के इस गोचर का विभिन्न राशियों पर क्या असर पड़ेगा उसको मैं पंडित अनिल पांडे अब आपको बताने जा रहा हूं । इस वीडियो के अंत में सूर्य के कमजोर होने से होने वाले नुकसान से बचने के उपाय के बारे में चर्चा कीजाएगी ।

मेष राशि:-

धन आने का मामूली योग है । संतान को लाभ हो सकता है। संतान का आपके सहयोग मिल सकता है । 

वृष राशि:-

आपके माता जी को स्वास्थ्य लाभ हो सकता है ।  पिताजी को कष्ट संभव है । कार्यालय में आप सावधान रहे। 

मिथुन राशि:-

भाग्य से मिलने वाले लाभ के बारे में कमी आएगी आपके पराक्रम में और क्रोध में वृद्धि संभव है ।

कर्क राशि:-

धन आने का योग है । दुर्घटनाओं से आपको सतर्क रहना चाहिए  ।  

सिंह राशि:-

आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा ।  

जीवनसाथी के स्वास्थ्य में समस्या हो सकती है  ।

कन्याराशि:-

कचहरी के कार्यों में सावधानी पूर्वक कार्य करने से लाभ हो सकता है परंतु आपको रिस्क नहीं लेना चाहिए । शत्रु बढ़ेंगे ।

तुला राशि:-

धन आने की उम्मीद है । आपके संतान को कष्ट हो सकता है । संतान का सहयोग आपको प्राप्त नहीं हो पाएगा । 

वृश्चिकराशि:-

कार्यालय में आपको लाभ हो सकता है।  प्रतिष्ठा में कमी संभव है । माता जी को कष्ट हो सकता है ।

धनु राशि:-

 भाग्य से मदद मिल सकती है। क्रोध में वृद्धि होगी । भाइयों से तनाव संभव है ।

मकर राशि:-

दुर्घटनाओं से आपका बचाव हो सकता है ।  धन आने की मात्रा में कमी होगी । 

कुंभ राशि:-

आपके जीवनसाथी के स्वास्थ्य में लाभ हो सकता है ।  आपके आत्मविश्वास में कमी आएगी । आपको मानसिक कष्ट के प्रति सावधान रहना चाहिए । 

मीन राशि:-

शत्रु शांत रहेंगे। अगर आप विशेष प्रयास करेंगे तो पराजित भी कर सकते हैं । कचहरी के कार्यों में आपको रिस्क बिल्कुल नहीं लेना चाहिए ।

अब मैं आपसे सूर्य के कुंभ राशि में गोचर के कारण होने वाले कष्टों को समाप्त करने या कम करने के लिए उपाय बताता हूं ।  इसके लिए आपको आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए  । इसके अलावा तांबे के पात्र में जल अक्षत और लाल पुष्प लेकर भगवान सूर्य को जल अर्पण करना चाहिए । किसी अच्छे ज्योतिषी से सलाह लेकर आपको माणिक्य  धारण करना चाहिए ।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है  । अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए । मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें।


जय मां शारदा।

 निवेदक:-

पण्डित अनिल कुमार पाण्डेय

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता

प्रश्न कुंडली  और वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ

साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया , 

सागर  (मध्य प्रदेश) , पिन कोड:-470004

मोबाइल नंबर :-8959594400

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Horoscope Weekly : साप्ताहिक राशिफल : जानिए कैसा रहेगा यह सप्ताह : 02 फरवरी से 08 फरवरी 2026 तक ▪️पंडित अनिल पाण्डेय

Horoscope Weekly : साप्ताहिक राशिफल : जानिए कैसा रहेगा यह सप्ताह : 02 फरवरी से 08 फरवरी 2026 तक

▪️पंडित अनिल पाण्डेय


तीनबत्ती न्यूज: 01 फरवरी, 2026

प्रयागराज के संगम तट तथा अन्य पवित्र नदियों के  किनारो पर स्नान ध्यान का माघ माह   पर्व का मेला चल रहा है । बसंत पंचमी और माघ पूर्णिमा का स्नान हो गया है।   भक्तगण महाशिवरात्रि के अगले स्नान की तैयारी में हैं । इसी तैयारी के बीच मैं आपको 2 फरवरी से 8 फरवरी 2026 के सप्ताह के साप्ताहिक राशिफल के बारे में बताने जा रहा हूं ।

इस सप्ताह सूर्य और मंगल मकर राशि में रहेंगे । वक्री गुरु मिथुन राशि में , शनि मीन राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे । बुध प्रारंभ में मकर राशि में तथा 3 तारीख के 9:12 रात से कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे । शुक्र प्रारंभ में मकर राशि में रहेंगे तथा 5 तारीख को 12:15 रात से कुंभ राशि में गोचर करेंगे ।आईये अब हम राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं ।

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मेष राशि:-

इस सप्ताह आपका व्यापार अच्छा चलेगा  । अगर आप अधिकारी या कर्मचारी हैं तो कार्यालय में आपकी स्थिति ठीक-ठाक रहेगी  । आपके दबाव में ऑफिस के कर्मचारी  रहेंगे । ऑफिस में आपके स्वभाव में थोड़ा क्रोध आ सकता है । पिताजी के स्वास्थ्य पर ध्यान दें ।  भाई बहनों से संबंध सामान्य रहेंगे ।  इस सप्ताह आपके लिए  2 फरवरी ,  7 फरवरी को दोपहर के बाद से तथा 8 फरवरी कार्यों को करने के लिए उपयुक्त है । 5 , 6 और 7 फरवरी के दोपहर तक आपको सावधान रहने की आवश्यकता है ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप  प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें । सप्ताह का शुभ दिन  रविवार है ।

वृष राशि:-

इस सप्ताह भाग्य से आपको मदद मिल सकती है । गलत रास्ते से धन आने का भी योग है ।  अगर आप अधिकारी या कर्मचारी हैं तो यह सप्ताह आपके लिए ठीक है । व्यापारियों को विभिन्न कार्यालयों के कार्यों में सफलता प्राप्त हो सकती है । इस सप्ताह आपके लिए तीन और चार फरवरी कार्यों को करने के लिए सफलता दायक हैं ।  7 फरवरी की दोपहर से बाद से लेकर और 8 फरवरी को आपको सचेत रहकर  कार्यों को करना चाहिए ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें ।  सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है ।

मिथुन राशि:-

इस सप्ताह भाग्य से आपको थोड़ी मदद मिल सकती है ।  कार्यालय में आपकी स्थिति पहले जैसी ही रहेगी ।  अगर आपको पेट में कोई तकलीफ है तो इस सप्ताह दूर हो सकती है ।  अगर कोई दुर्घटना होती है तो आप उसमें बच जाएंगे ।  इस सप्ताह आपके लिए 5 , 6 और 7 फरवरी  कार्यों को करने के लिए अनुकूल है । सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक हैं ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर वहां पर हनुमान चालीसा का तीन बार पाठ करें ।  सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है ।

कर्क राशि:-

अविवाहित जातिकों के लिए यह सप्ताह उत्तम है  । उनके विवाह के नए-नए प्रस्ताव आएंगे  । युवकों के लिए भी यह सप्ताह ठीक है  ।  उनके प्रेम संबंधों में सुधार आएगा  । नए प्रेम संबंध भी बन सकते हैं । वैवाहिक व्यक्तियों  का इस सप्ताह अपने जीवनसाथी के साथ संबंध अच्छे रहेंगे  ।  कचहरी के कार्यों में थोड़ा सावधान रहें  । भाग्य से आपको सामान्य परंतु एकाएक लाभ मिल सकता है  । इस सप्ताह आपके लिए  2 ,7 और 8 फरवरी कार्यों मैं सफलता प्राप्त करने हेतु सही हैं । सप्ताह के बाकी दिन सामान्य है ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप गरीब बच्चों के बीच में पुस्तकों का दान दें। सप्ताह का शुभ दिन सोमवार है। 

सिंह राशि:-

व्यापारियों के लिए यह सप्ताह ठीक रहेगा । धन प्राप्ति की उम्मीद है इस सप्ताह आप अपने शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं आपका या आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य थोड़ा सा खराब हो सकता है भाग्य से आपको मदद नहीं मिल पाएगी इस सप्ताह आपको अपने परिश्रम पर यकीन करना चाहिए ।  इस सप्ताह आपके लिए तीन और चार फरवरी किसी भी प्रकार के  कार्य को करने के लिए मददगार है ।   दो फरवरी को आपको सचेत होकर कार्यों को करना चाहिए ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का वाचन करें ।  सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है ।

कन्या राशि:-

यह सप्ताह आपके संतान के लिए काफी अच्छा है ।  उसके प्रेम संबंधों में वृद्धि हो सकती है । उसका अपने जीवनसाथी के साथ संबंध अच्छा रहेगा ।  छात्रों को परीक्षा में सफलता मिलेगी ।  आपके शत्रु शांत रहेंगे परंतु परास्त नहीं होंगे ।  कार्यालय में आपकी स्थिति ठीक रहेगी ।  व्यापार ठीक-ठाक चलेगा ।  इस सप्ताह आपके लिए 5-6 और 7 तारीख कार्यों को करने के लिए लाभदायक है ।  तीन और चार तारीख को आपको होशियार रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काली उड़द की  दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें ।  सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है ।

तुला राशि:-

इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है ।  कार्यालय में आपकी स्थिति सामान्य रहेगी । भाग्य से मामूली मदद मिलने की उम्मीद है ।  शत्रु शांत रहेंगे परंतु परास्त नहीं होंगे ।  आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त हो सकता है ।  छात्रों की पढ़ाई में कुछ बाधा आ सकती है ।  इस सप्ताह आपके लिए दो और 7 तारीख के दोपहर के बाद से तथा 8 तारीख कार्यों को करने हेतु फलदायक हैं ।  5 , 6 और 7 तारीख के दोपहर तक का समय जागरूक रहने का है ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें ।  सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है ।

वृश्चिक राशि:-

इस सप्ताह आपका अपने भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेगा ।  एक भाई को थोड़ी दिक्कत हो सकती है । आपके पराक्रम में वृद्धि होगी।  प्रयास करने पर आप अपने शत्रुओं को पराजित कर सकते हैं । कार्यालय में आपकी स्थिति मजबूत होगी । छात्रों की पढ़ाई ठीक रहेगी ।  परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है ।  आपको अपने संतान से सामान्य सहयोग प्राप्त होगा ।  इस सप्ताह आपके लिए तीन और चार फरवरी विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने हेतु अनुकूल है ।  7 तारीख के दोपहर के बाद से लेकर और 8 तारीख को आपको सावधान रहकर कार्यों को करना चाहिए ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें।  सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है ।

धनु राशि:-

इस सप्ताह आपको  धन प्राप्त होने की उम्मीद है ।  दो विभिन्न स्रोतों से आपको धन की प्राप्ति हो सकती है ।  भाग्य से इस सप्ताह आपको मदद मिल सकती है ।  अगर आपका कोई कार्य भाग्य की वजह से रुक रहा हो तो  उसको करने का कष्ट करें  । आपका , आपके जीवनसाथी का माता जी और पिताजी का स्वास्थ्य तकरीबन ठीक रहेगा ।  आपको थोड़ी परेशानी हो सकती है ।  इस सप्ताह आपके लिए 5 ,  6 और 7 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने के लिए उपयुक्त हैं ।  2 फरवरी को आपको सतर्क होकर अपने कार्यों को अंजाम देना चाहिए ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का  जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है । 

मकर राशि:-

यह सप्ताह सामान्य रूप से आपके लिए ठीक है। आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य थोड़ा खराब हो सकता है ।  भाग्य सामान्य है । आपको अपने परिश्रम पर विश्वास करना चाहिए ।  इस सप्ताह आपको पेट की तकलीफ से  राहत मिल सकती है । इस सप्ताह आपके लिए दो , 7  एवं 8 तारीख कार्यों को करने हेतु अच्छे हैं । 3 और 4 फरवरी को आपको सजग रहना चाहिए ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं ।  सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है ।

कुंभ राशि:-

इस सप्ताह कचहरी के कार्यों में आपको लाभ हो सकता है । परंतु आपको पूरी सावधानी के साथ कार्यौ को करना होगा । आपको या आपके जीवनसाथी को थोड़ा कष्ट हो सकता है । माता और पिताजी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा ।  आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त होगा ।  भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे ।  इस सप्ताह आपके लिए तीन और चार फरवरी परिणाम दायक है । सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधानी पूर्वक कार्यों को करना चाहिए ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पांच या सात बार पाठ करें ।  सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है ।

मीन राशि:-

इस सप्ताह आपके पास धन आना आने की अच्छी उम्मीद है ।  व्यापारियों को लाभ में वृद्धि होगी। कचहरी के कार्यों को सावधानी पूर्वक करें । अगर आप कर्मचारी अधिकारी हैं तो आपको अपने कार्यालय में सावधान रहना चाहिए ।  माता-पिता जी का स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।  आपको अपने संतान से इस सप्ताह सहयोग नहीं मिल पाएगा ।   इस सप्ताह आपके लिए 5 , 6 और 7 की दोपहर तक का समय कार्यों को करने के लिए परिणाम मूलक है ।  सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सतर्क रहना चाहिए ।  इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का  जाप करें । सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है ।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है  । अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए । मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें।


जय मां शारदा।

 निवेदक:-

पण्डित अनिल कुमार पाण्डेय

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता

प्रश्न कुंडली  और वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ

साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया , 

सागर  (मध्य प्रदेश) , पिन कोड:-470004

मोबाइल नंबर :-8959594400

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सामाजिक समरसता: सीखने का नहीं, स्वयं के भाव में लाने का विषय : साध्वी प्रज्ञा सिंह ▪️सागर में हिंदू सम्मेलन आयोजित

Sagar: सामाजिक समरसता: सीखने का नहीं, स्वयं के भाव में लाने का विषय : साध्वी प्रज्ञा सिंह

▪️सागर में हिंदू सम्मेलन आयोजित


तीनबत्ती न्यूज: 31 जनवरी, 2026

सागर: पद्माकर सभागार मोतीनगर में सकल हिंदू समाज रवि शंकर बस्ती द्वारा हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह, मुख वक्त श्रीमती वर्षा सिंह अधिवक्ता, संयोजिका श्रीमती शारदा गुरैया, सहसंयोजीका श्रीमती अंजना घोसी, श्रीमती राजराजेश्वरी पाराशर उपस्थित रही।


मुख्य अतिथि साध्वी प्रज्ञा सिंह ने अपने वक्तव्य में बताया कि संघ ने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में कोई उत्सव नहीं मनाया बल्कि संघ की स्थापना से लेकर आज तक 100 वर्षों की कार्यों का मूल्यांकन किया। उन्होंने संघ की समाज में स्वीकारता पर प्रकाश डाला और सामाजिक समरसता के संबंध में श्री गुरु जी के सामाजिक समरसता के भाव पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि  सामाजिक समरसता सीखने का कोई विषय नहीं है समरसता अपने आप में अपने स्वयं के भाव में लाना चाहिए अपने आप को समरस बनना चाहिए । उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए लव कुश के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा दीक्षा तथा उनका पालन पोषण उन्हीं के द्वारा किया गया के बारे में बताया।  उन्होंने बताया कि मां जब अपने बच्चों की गंदगी साफ करती है  तो  वह शुद्र नहीं बन जाती बल्कि उसमें मातत्व का भाव रहता है अर्थात समरसता स्वयं के भाव में पैदा होना चाहिए। 


कुटुंब व्यवस्था पर जोर

उन्होंने कुटुंब व्यवस्था पर जोर देते हुए बताया कि कम से कम सप्ताह में एक बार परिवार के सभी लोगों के साथ बैठकर भोजन करना चाहिए। माता-पिता का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को संस्कार एवं सनातनी संस्कृति को बताएं।

नागरिक कर्तव्यों के बारे में बताया

मुख्य वक्ता श्रीमती वर्षा सिंह अधिवक्ता ने अपने उद्बोधन में संघ की स्थापना की परिस्थितियों का वर्णन करते हुए पांच परिवर्तन के बारे में बताया। नागरिक कर्तव्यों के बारे में विस्तृत रूप से बताते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को शासन द्वारा बनाई गए नियम कानून का पालन करना चाहिए। सरकारी संपत्ति की सुरक्षा तथा पर्यावरण की रक्षा करना भी नागरिकों का कर्तव्य है।मंच संचालन श्रव्य मेहता और आभार प्रदर्शन श्रीमती नंदिनी चौधरी के द्वारा किया गया।





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तीर्थ दर्शन योजना : कामाख्या देवी जा रहे श्रृद्धालुओं पर पुष्प वर्षा कर मंत्री गोविंद राजपूत ने ट्रेन को किया रवाना

तीर्थ दर्शन योजना :  कामाख्या देवी जा रहे श्रृद्धालुओं पर पुष्प वर्षा कर मंत्री गोविंद राजपूत ने ट्रेन को किया रवाना


तीनबत्ती न्यूज:   31 दिसंबर 2026

सागर :  मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत 279 तीर्थ यात्रियों को कामाख्या देवी के दर्शन के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने पुष्प वर्षा कर शुभ कामनाएं देते हुए ट्रेन को रवाना किया। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव श्रवण कुमार की तरह हर बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा करा रहे है। आधुनिक युग में, जहां लोग अपने काम में व्यस्त हैं, इस प्रकार की योजनाएं बुजुर्गों के लिए एक वरदान हैं। मैं आशा करता हूं कि इस योजना का लाभ अधिक से अधिक बुजुर्गों को मिलेगा और वे अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में आकर भी आध्यात्मिक शांति प्राप्त कर सकेंगे। बल्कि उन्हें समाज में सम्मान और आत्मसम्मान भी प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त तीर्थ यात्रा प्रदान करना है। । श्री राजपूत ने कहा कि सरकार, लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, किसान सम्मान निधि, पी.एम.आवास योजना, कन्यादान योजना जैंसी अनेकों योजनाओं से हर व्यक्ति का विकास कर रही है। 


इस अवसर पर सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने सभी यात्रियों को शुभकामनाएं दी। सभी यात्रियों ने मुख्यमंत्री डाॅ.मोहन यादव, मंत्री श्री राजपूत ने सरकार का आभार व्यक्त किया। मंत्री श्री राजपूत ने यात्रियों से कहा कि यात्रा में कोई भी परेशानी हो तो वह उनसे संपर्क कर सकते हैं। सारी सुविधाएं श्रृद्धालुओं के लिए सरकार की तरफ से की गई हैं। 

इस अवसर पर डाॅ.वीरेंद्र पाठक, विनोद कपूर, पार्षद रूपेश यादव, बाबू सिंह, अनिल श्रीवास्तव, शुभम् जैन, रामेंद्र परिहार, अभिमन्यु, अर्पित, राजू पटैल, अजय राजपूत,चंद्रेश ठाकुर टीला सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।


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श्रद्धा और विश्वास है तो जीवन में सब कुछ मिलता है: पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ▪️रुद्राक्ष धाम में सप्त दिवसीय श्री राम कथा शुरू

श्रद्धा और विश्वास है तो जीवन में सब कुछ मिलता है:  पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज

▪️रुद्राक्ष धाम में सप्त दिवसीय श्री राम कथा शुरू


तीनबत्ती न्यूज: 31 जनवरी, 2026

सागर। रामचरित मानस का लाभ प्राप्त करने के लिए मनुष्य के अंदर श्रद्धा भाव सबसे आवश्यक है। मानस जी का प्रारंभ भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के प्रसंग से शुरू होता है। इसके पीछे भी यह सबसे बड़ा कारण है कि भगवान शिव  विश्वास के प्रतीक हैं और माता पार्वती श्रद्धा की प्रतीक हैं। जिस मनुष्य में श्रद्धा और विश्वास का भाव उपस्थित होगा वही रामचरितमानस में गोता लगाकर भगवान का दर्शन प्राप्त कर सकेगा। यह उद्गार सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन प्रारम्भ करते हुए पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए व्यक्त किए।  

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सागर: रुद्राक्षधाम में संत श्री प्रेम भूषण जी महाराज के मुखारविंद से श्री राम कथा शुरू

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सरस् श्रीराम कथा गायन के लिए लोक ख्याति प्राप्त प्रेममूर्ति पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह के पावन संकल्प से आयोजित सात दिवसीय रामकथा गायन के क्रम में कहा कि श्रद्धा और विश्वास नहीं है तो कुछ भी प्राप्ति नहीं होती है। जैसे संशय स्वरूपा माता सती श्रीराम कथा सुनने गई लेकिन कथा उनके कान में नहीं उतरी।  जिसकी जितनी श्रद्धा दृढ़ है उसको उतनी ही भगवद् फल की प्राप्ति है। श्रद्धा में अर्पण और समर्पण हो तो श्रद्धा अवश्य फल प्रदान करती है।


खटपट मिटे तो झटपट दर्शन होगा

पूज्यश्री के अनुसार-हम जो करते हैं उस पर हमें ही विश्वास नहीं होता है तो फिर कैसे भगवान का दर्शन होगा। खटपट मिटे तो झटपट दर्शन होगा। लाख कोई समझाए भटकना नहीं है। जो इष्ट हैं उनमें केवट भैया और शबरी मैया की तरह से निष्ठ रहना है। सुग्रीव जी की तरह नहीं बनाना है। भगवान से मिलने के बाद भी संसार में लिपट कर भगवान को ही भूल  गए। पूज्य महाराज जी ने कहा कि हम जिस युग में जी रहे हैं वहां कोई भी मनुष्य विकारों से दूर नहीं रह पाता है। कामनाओं के मैल मन में तरह-तरह के विकार पैदा करते रहते हैं और इससे मनुष्य का जीवन कष्टमय हो जाता है। अगर हम सहज रहना चाहते हैं, सहज जीना चाहते हैं तो हमारे पास इस कलियुग के मैल को काटने और धोने का एकमात्र साधन है श्री राम कथा। काम, क्रोध, लोभ, मद  और मत्सर आदि विकार कलिमल कहे जाते हैं। इससे बचने का एकमात्र सहज साधन श्री राम कथा ही है। मानस जी में लिखा है इस कथा को जो सुनेगा, कहेगा और गाएगा वह सब प्रकार के सुखों को प्राप्त करते हुए अंत में प्रभु श्री राम के धाम को भी जा सकता है।

पूज्यश्री ने कहा कि जब मन पर कलिमल का प्रभाव हो तो चाह कर भी मनुष्य सत्कर्म के पथ पर आगे नहीं बढ़ पाता है। मनुष्य का मन और उसकी बुद्धि उसके अपने कर्मों के अधीन है। हम जो भी कर्म  करते हैं उसे हमारा क्रियमाण बनता है। यही कर्म फल एकत्र होकर संचित कर्म होता है और फिर कई जन्मों के लिए यह प्रारूप प्रारब्ध के रूप में जीव के साथ जुड़ जाता है। सत्कर्मों से जिसने भी अपने प्रारब्ध को बेहतर बना रखा है, इस जन्म में भी सत्कर्मों में उसी की गति बन पाती है। अन्यथा बार-बार विचार करने के बाद भी हम उस पथ पर अपने को आगे नहीं ले जा पाते हैं।

माता पिता ही भगवान

पूज्य श्री ने कहा कि अगर हमारे घर में जीवित माता-पिता हैं तो वही हमारे भगवान हैं। माता-पिता की सेवा करके हम वह सब प्राप्त कर सकते हैं जो हम भगवान से चाहते हैं। श्री रामचरितमानस में यह बताया गया है की माता-पिता की आज्ञा मानने वाले, गुरु और अपने से बड़ों की आज्ञा मानने वाले सदा ही सुखी रहते हैं। उन्होंने बताया कि धरती पर तीन प्रकार के लोग होते हैं। एक तो अपने प्रारब्ध के कारण सब कुछ जानने के कारण उचित कार्य ही करते हैं, दूसरे वह है जो दूसरों के अच्छे कार्य को देखकर समझ के कार्य करते हैं। और तीसरे वह हैं जो गलत करते हैं भुगतते हैं और तब उससे सीखते हैं। हमें तीसरा मार्ग अपनाने से बचना चाहिए। महाराज जी ने कहा कि  सत्य मार्ग पर चलकर धन अर्जित करने वाले लोग ही शाश्वत सुख की प्राप्ति कर पाते हैं। छल प्रपंच से धर्म तो अर्जित किया जा सकता है लेकिन उसे सुख की प्राप्ति कदापि संभव नहीं है। अधर्म के पथ पर चलकर धन अर्जित करने वाले जीवन में कभी भी सुखी नहीं हो सकते हैं।  दूसरों को वह दूर से सुखी तो दिखते हैं लेकिन वास्तव में वह सुखी होते नहीं है अगर उनके हृदय का हाल जाना जाए तो पता चलता है कि उनके दुख की कोई सीमा नहीं है।

पूज्यश्री ने बताया कि मनुष्य के जीवन में पूजा पाठ भजन क्यों आवश्यक है? आपने कहा कि जब मनुष्य धर्म कार्यों में पूजा पाठ में संलग्न हो जाता है तो उसके जीवन से भय, विशेषतः मृत्यु का भय बिल्कुल समाप्त हो जाता है क्योंकि तब वह धीरे-धीरे ईश्वर के निकट पहुंचने लगता है। जो व्यक्ति भगवान से संबंध स्थापित कर लेता है तो फिर उसे इस संसार की किसी भी चीज से दुख नहीं पहुंचता। इसीलिए कहा गया है कि जो संत हैं वह दुख या सुख की स्थिति में सम भाव में ही रहते हैं किसी भी परिस्थिति में उनकी मन की स्थिति नहीं बदलती है। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के प्रसंग की चर्चा करते हुए पूज्य महाराज श्री ने कहा कि सनातन धर्म और संस्कृति में विवाह एक मर्यादा महोत्सव है। भगवान को केवल और केवल प्रेम ही प्यारा है बार-बार मानस जी में इसकी चर्चा आई है। यह जरूरी नहीं है कि भगवान भी हम से प्रेम करें हमें भगवान से अवश्य प्रेम करना चाहिए अगर हम भगवान से प्रेम की अपेक्षा करते हैं तो यह व्यापार हो जाएगा, लेनदेन का व्यापार। भगवान से बदले में कुछ चाहना तो व्यापार ही है।उन्होंने कहा कि कल रुद्राक्ष धाम मंदिर में दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा हो जाएगी और स्वयं हनुमान जी कथा श्रवण के लिए प्रांगण में विराजमान रहेंगे।



श्रीराम कथा से भारतीय संस्कृति की आत्मा है : पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह

श्रीराम कथा के प्रारंभ में अपनी बात रखते हुए पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि जब तक भारत में रामकथा जीवित है, तब तक भारतीय संस्कृति सुरक्षित है। कथा सुनने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, क्योंकि जहां-जहां रामकथा होती है, हनुमान जी वहां अदृश्य रूप से उपस्थित रहते हैं। श्रीरामकथा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो पीढ़ियों को जोड़ती है, ‘राष्ट्र चरित्र‘ का आधार है। उन्होंने कहा कि अगर भगवान राम तक पहुंचना है, तो हनुमान जी का पल्ला पकड़ लो। हनुमान जी राम जी के द्वारपाल हैं (‘‘राम दुआरे तुम रखवारे‘‘) उनकी कृपा के बिना राम नहीं मिलते। श्रीराम भारत के आदर्श हैं। वे सत्य के अवतार हैं। सीता भारत की स्त्रियों के लिए धैर्य और पवित्रता का आदर्श हैं। जिस दिन भारत श्री राम और माता सीता के आदर्शों को भूल जाएगा, उस दिन भारत की आत्मा मर जाएगी।‘‘ पूर्व गृहमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रभु श्री राम के बिना भारत की कल्पना करना असंभव है। वे हमारे राष्ट्र-पुरुष हैं। अयोध्या में बना श्री राम मंदिर केवल एक देव मंदिर नहीं, बल्कि ‘राष्ट्र मंदिर‘ है। यह भारत की सांस्कृतिक विजय और स्वाभिमान का सूर्योदय है। हनुमान जी रामकथा के प्राण हैं, बिना उनके कथा अधूरी है। हनुमान जी युवाओं के आदर्श हैं बल, ब्रह्मचर्य, अनुशासन और सेवा का ऐसा संगम कहीं और नहीं मिलता।

धर्मप्रेमी उमड़े कथा सुनने

महाराज श्री ने कई सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी, भजनों का आनन्द लेते हुए झूमते नजर आए। मुख्य यजमान पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह तथा उनके परिवार के सदस्यों ने व्यास पीठ का पूजन किया और भगवान की आरती उतारी। तत्पश्चात पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह,महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, पूर्व मंत्री नारायण कबीर पंथी, एड कृष्णवीर सिंह, प्रभु दयाल पटेल, डॉ. सुशील तिवारी, पूर्व महापौर मनोरमा गौर,अनुराग प्यासी, रिटा. डीएसपी वीरेन्द्र बहादुर सिंह, जिला क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष लखन सिंह ने पं प्रेमभूषण जी महाराज का अभिनंदन किया।

लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री राकेश सिंह होंगे कथा में शामिल

मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री राकेश सिंह का 1 फरवरी 2026 दिन रविवार को सागर आगमन प्रस्तावित। लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री राकेश सिंह 1 फरवरी 2026 को प्रातः 10:45 बजे भोपाल से रवाना होकर दोपहर 1:30 बजे सागर पहुंचेंगे। तत्पश्चात मंत्री श्री सिंह दोपहर 2 बजे बहेरिया रोड बमौरा स्थित रुद्राक्ष धाम मंदिर परिसर में प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होंगे। तत्पश्चात मंत्री श्री सिंह दोपहर 2:45 बजे भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे।



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Sagar: नन्हीं जान, बड़ी जंग और डॉक्टरों का चमत्कार: मौत के दरवाजे से लौट आया मासूम

Sagar: नन्हीं जान, बड़ी जंग और डॉक्टरों का चमत्कार: मौत के दरवाजे से लौट आया मासूम



तीनबत्ती न्यूज: 31 जनवरी, 2026

सागर: बुंदेलखंड संभाग के चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सागर के चैतन्य हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम ने एक मात्र 25 दिन के नवजात शिशु को मौत के मुँह से बाहर निकालकर एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल की है। यह मामला न केवल जटिल था, बल्कि चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सागर संभाग में अपनी तरह का पहला रिपोर्टेड केस है। जब नवजात को अस्पताल लाया गया, तो वह तेज बुखार, पेट में सूजन और गंभीर संक्रमण से जूझ रहा था। विस्तृत जांच में जो सामने आया, उसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया।

शिशु एक साथ चार जानलेवा स्थितियों से लड़ रहा था

मल्टीपल लीवर एब्सेस जिसमें लिवर में मवाद (पस) जमा हो जाना। सेप्टीसीमिया विथ मेनिनजाइटिस जिसमें रक्त में गंभीर संक्रमण के साथ दिमागी बुखार, गंभीर एस्टेट्स (ascites) जिसमें पेट में अत्यधिक तरल पदार्थ का जमा होना जैसी बीमारियों से जूझ रहा था।



सीनियर पीडियाट्रिशियन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने बताया कि दुनिया भर के चिकित्सा साहित्य में इस तरह के बहुत कम मामले दर्ज हैं। ऐसी जटिल स्थिति में जीवित बचने की दर (Survival Rate) महज 50% होती है। 1 माह से छोटे बच्चे पर इतनी जटिल प्रक्रिया करना चिकित्सा टीम के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

कैसे मिली सफलता?

शिशु की जान बचाने के लिए लिवर से पस निकालना अनिवार्य था। अस्पताल की सर्जिकल और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिकल टीम, जिसमें डॉ. विशाल गजभिये, डॉ. श्रेया ठाकुर और डॉ. सनी गुप्ता शामिल थे, ने एक साहसिक निर्णय लिया। टीम ने यूएसजी (USG) गाइडेंस के तहत लिवर में 'पिगटेल कैथिटर' डालकर सफलतापूर्वक मवाद को बाहर निकाला। यह प्रक्रिया इतने छोटे बच्चे के लिए अत्यंत जोखिम भरी थी, जिसे टीम ने निपुणता से अंजाम दिया। गहन निगरानी और समर्पित उपचार के बाद, बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। परिजनों ने चैतन्य हॉस्पिटल की टीम को 'देवदूत' बताते हुए आभार व्यक्त किया है। 

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संत रविदास जंयती : सागर में अध्योध्या धाम के राम मंदिर में लगे वंशीपहाड़पुर के पत्थरों से देश का प्रथम संत रविदास मंदिर ले रहा है पूर्ण आकार

संत रविदास जंयती : सागर में  अध्योध्या धाम के राम मंदिर में लगे वंशीपहाड़पुर के पत्थरों से देश का प्रथम संत रविदास मंदिर ले रहा है पूर्ण आकार


तीनबत्ती न्यूज 31 जनवरी 2026 
सागर: अध्योध्या धाम के भगवान श्री राम लला मंदिर में लगे राजस्थान के धोलपुर वंशीपहाड़पुर के लाल पत्थरों से देश का प्रथम 101 करोड़ रू. की लागत का संत रविदास मंदिर पूर्ण मूर्तरूप ले रहा है संत रविदास मंदिर 66 फुट ऊंचा होगा। मंदिर के गर्भगृह में किसी भी प्रकार के लोहे का उपयोग नहीं होगा, केवल पत्थर, रेत, गिटटी का उपयोग करते हुए मंदिर को भव्य एवं दिव्य रूप दिया जा रहा है।मंदिर के शुरू होने से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इसके भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। 


कलेक्टर संदीप जी आर ने बताया कि विगत वर्ष संत रविदास जंयती के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के द्वारा 101 करोड रू. की लागत से संत रविदास मंदिर, संग्राहालय की घोषणा की गई थी। जिसका भूमि पूजन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था। उन्होंने बताया कि संत रविदास मंदिर के निर्माण की केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा सतत् मॉनिटरिंग की जा रही है।
कलेक्टर संदीप जी आर ने बताया कि संत रविदास मंदिर एवं संग्रहालय में जो प्रमुख रूप से विशेषताएं रहेगी, उनमें बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी का समय भारत में भक्ति आंदोलन का समय था। मध्यकाल में कई संतों ने सामाजिक समानता और जाति आधारित भेदभाव उन्मूलन पर बल दिया। इनमें रविदासजी महान सुधारक और सत्य के उपदेशक बनकर प्रमुख संत के रूप में प्रतिष्ठित हुए। अपनी रचनाओं के माध्यम से रविदासजी ने ईश्वर के एक रूप का स्वीकार किया, जाति भेद की आलोचना की और समानता का समर्थन किया। ’संत शिरोमणि’ उपाधि प्राप्त गुरु संत रविदास को लोग ’रैदास’ के नाम से भी जानते हैं। संवत 1377, काशी में माघ पूर्णिमा के दिन जन्मे संत रैदास की रचनाएँ आध्यात्मिक एवं सामाजिक रूप से काफी प्रगतिशील रही। रैदासजी ने अपने आचरण तथा व्यवहार से प्रमाणित किया कि मनुष्य जन्म से नहीं अपने कर्मों से महान बनता है।


संत रविदास मन्दिर और संग्रहालय

मध्यप्रदेश सरकार, संत रैदास के सामाजिक परिष्कार एवं एकता के विचार और लोक- परिमार्जन एवं मानवता की वाणी को रक्षित करने का प्रयास करने जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार ने संत रविदास के सराहनीय कार्यों को महान श्रद्धांजलि देने का विचार किया है। साथ ही, संत रविदास की वाणी-विरासत को सुरक्षित रखकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने हेतु मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ’संत रविदास मन्दिर और संग्रहालय’ का निर्माण करने जा रही है। सागर जिले में मन्दिर एवं संग्रहालय का निर्माण श्रद्धेय कवि व समाज सुधारक संत रविदासजी के सत्कार्यों को अंजली देना एवं उनके जीवन-मूल्य व विरासत को उजागर करना है। समानता एवं ईश्वर के प्रति समर्पण भाव इस मन्दिर और संग्रहालय का केन्द्र बिंदु बनेगा।



संत रविदास मंदिर एवं संग्रहालय का भवन 
संत रविदास मन्दिर एवं संग्रहालय’ परिसर विभिन्न सुविधाओं के साथ देश-विदेश के कई साधक, संशोधक एवं भक्तों को आकर्षित करेगा। आधुनिक संसाधन, रोशनी, पेड़-पौधों से परिसर का वातावरण ज्ञान के साथ सुकून का अनुभव करायेगा। साथ ही, इस परिसर की डिज़ाइन वास्तुकला के आधार से तैयार की जायेगी।
संत रविदास मन्दिर एवं संग्रहालय’ 12 एकड भूमि में आकार लेगा। जिसका प्रारूप इस प्रकार है

मन्दिर - इस परियोजना के मध्यस्थ 5500 वर्ग फिट में मुख्य मन्दिर आकार लेगा। मन्दिर नागर शैली से बनाया जा रहा है। मन्दिर में गर्भगृह, अन्तराल मन्डप तथा अर्धमन्डप का सुंदर निर्माण होगा। मन्दिर केवल पूजा का स्थान न बनकर सांस्कृतिक-आध्यात्मिक चर्चाओं का केन्द्र स्थान बनेगा। आगंतुक भारतीय संस्कार व संस्कृति के विषय में विस्तार से जान पायेंगे। आध्यात्मिक विश्वासों पर चिंतन एवं मनन के लिए यह केन्द्र मुख्य आकर्षण बनेगा।



जलकुंड - ’संत रविदास संग्रहालय’ (म्यूज़ियम) के प्रवेश द्वार के सामने बड़ा सा जलकुंड आकार लेने वाला है। सुन्दर नक्काशी और मूर्तियों के साथ इस जलकुंड के आसपास पेड़ पौधों की रमणियता प्रदान की जायेगी। जल से पवित्रता का अनुभव होता है, इसलिए कुंड के पास विहार करने योग्य विशाल स्थान बन रहा है।

संग्रहालय - मन्दिर के आसपास वर्तुलाकार की भूमि पर चार गैलेरी बनेगी जिसमें, संत रविदासजी के जीवन को विस्तृत रूप से एवम् आधुनिक संसाधनों की सहायता से प्रस्तुत किया जायेगा। संत रविदास की वाणी, उनके कार्य, सामाजिक प्रदान, भक्ति आंदोलन, आंदोलन में संत रविदास की भूमिका आदि विषयों को कलात्मक रूप से आधुनिक तकनिकों के साथ दर्शाया जायेगा।

पुस्तकालय - दस हजार वर्गफुट में पुस्तकालय और संगत सभाखंड आकार ले रहा है। यहाँ संत रविदास की उपलब्धियाँ और शिक्षाओं को संग्रहीत किया जायेगा। संत रविदासजी के कृतित्व के साथ यहाँ आध्यात्मिक, धार्मिक पुस्तकें भी रखी जायेगी। यह पुस्तकालय एक तरह साहित्य संसाधनों का भंडार बनकर सामने आयेगा। यहाँ संत रविदास के साथ अन्य महान गुरुओं एवं दार्शिनकों के विचार व वाणी को संभाला जायेगा। आगंतुक इस स्थान पर बैठकर पुस्तक पढ़ सके ऐसी व्यवस्था उपलब्ध होगी।

संगत सभाखंड - संगत सभाखंड का आकार फूलों की पंखुडियों जैसा बनेगा। नवीन रूप से निर्माण होनेवाले इस विशाल सभाखंड में संत रविदासजी की वाणी के साथ कई अन्य धार्मिक, आध्यात्मिक, संशोधनलक्षी कार्य होंगे, जैसे व्याख्यान, कार्यशाला, संगोष्ठियाँ। इस स्थान पर आकर लोग अपने विचारों का सरलतम तरीके से आदान- प्रदान कर पायेंगे। संगत सभाखंड सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन स्त्रोत बनेगा


भक्त निवास - भक्त निवास, 12,500 वर्गफुट में निर्मित हो रहा है। यह क्षेत्र विश्वभर से पधारें साधक, भक्त, संशोधक, विद्वान, यात्रियों के निवास की व्यवस्था करेगा। आरामदायक एवं आवश्यक रहने की व्यवस्थाएँ यहाँ उपलब्ध होगी। एयर कंडीशनिंग कमरें, साफ बिस्तर, संलग्न बाथरूम वाले पंद्रह कमरे होंगे। साथ ही, पचास व्यक्तियों के लिए छात्रावास सुविधाएँ भी प्राप्त होगी।

अल्पाहार गृह - मुलाकातियों के लिए पंद्रह हजार वर्गफुट में विशाल अल्पाहार गृह का निर्माण होगा। तम्बू-आकार की डिज़ाइन वाले यह अल्पाहार गृह में नाश्ते-भोजन के साथ अन्य सामग्री परोसी जायेगी। बैठने के लिए पारंपरिक मेज एवं कुर्सियों के साथ बाहरी बैठक व्यवस्था भी बनाई जायेगी। गजेबों - आल्पाहार-गृह के पास दो बैठने योग्य स्थान बनेंगे। मुलाकाती इस स्थान का उपयोग बैठने, पढ़ने, नास्ता करने, विचारों का आदान-प्रदान करने हेतु कर पायेंगे। 1940 वर्गफुट में निर्मित यह क्षेत्र खुला होने के कारण आसपास का प्राकृतिक दृश्य का आनंद लेना सरलतम एवं सुकूनदेह होगा।

संत रविदास मन्दिर एवं संग्रहालय’ के माध्यम से आधुनिक विकास एवं कलात्मकता के साथ संत रविदासजी की शिक्षाएँ व दिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचेगी। यह आध्यात्मिक स्थान समग्र विश्व के विभिन्न संस्कृति के साधकों का स्वागत करेगा और साथ ही रहस्यवाद पथ की गहरी समझ व्यापक बनायेगा।

सौ करोड़ से बन रहा है मंदिर

संत रविदास जी के भव्य मंदिर एवं कला संग्रहालय आदि के निर्माण 11 एकड़ भूमि में किया जावेगा। इस सम्पूर्ण योजना की लागत राशि रु 101 करोड़ प्रस्तावित है। योजना के अंतर्गत विभिन्न घटकों का समायोजन किया गया है, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है- मंदिर - संत रविदास जी का नागर शैली से पत्थरों का एक भव्य मंदिर का निर्माण लगभग 10000 वर्गफिट क्षेत्रफल में किया जा रहा है। इंटरप्रिटेशन म्यूजियम संस्कृति एवं रचनात्मक विशेषता के साथ साथ संत जी के दर्शन को प्रदर्शित करने वाली एक विशेष शैली के इंटरप्रिटेशन म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा म्यूजियम का कुल क्षेत्र फल 14000 वर्गफुट में हो रहा है, जिसके अंतर्गत म्यूजियम में चार गैलरियाँ निर्मित की जा रही है।
 
प्रथम गैलरी- संत रविदास जी के महान जीवन का प्रदर्शन।

द्वितीय गैलरी- संत रविदास जी के भक्ति मार्ग तथा निर्गुण पंथ में योगदान।

तृतीय गैलरी- संत रविदास के दर्शन का विभिन्न मतों पर प्रभाव तथा रविदासिया पंथ।

चतुर्थ गैलरी- संत रविदास की काव्योंचित, साहित्य एवं समकालीन विवरण।
संत रविदास जी के जीवन वृतांत का चित्रण समस्त परिसर में म्युरल स्कल्प्चर के माध्यम से किया जावेगा, मंदिर परिसर में दो भव्य प्रवेश द्वार एवं भव्य पार्किंग, सी.सी.टी.वी., फायर फाइटिंग, लाइटिंग इत्यादि की समुचित व्यवस्थाएँ निर्मित की जावेगी।
श्री मनीष डेहरिया असि. इंजीनियर टूरिजम ने बताया कि मंदिर निर्माण का कार्य शीघ्रता से चल रहा है, जिसमें अभी तक निर्माण एंजेसी यूनिट इंजीवेन्चर कसोटियम एलएलपी नोयडा के द्वारा 25 प्रतिशत किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि मंदिर का फाउंडेशन कार्य पूर्ण तथा म्यूजियम फाउंडेशन का कार्य प्रगति पर है। डोरमेट्री के दो तल, भक्त निवास के दो तल, बाउंड्रीवॉल, कुण्ड कालोनेड स्ट्रक्चर फाउंडेशन का कार्य प्रगति पर है। टायलेट ब्लॉक स्ट्रक्चर, लाईब्रेरी एवं कैफेटेरिया का कार्य पूर्ण हो रहा है।



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