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कभी भी किसी साधु - संत और भगत का अपमान नहीं हो इसके परिणाम भी झेलना पड़ते है : पूज्य श्री प्रेमभूषण जी महाराज ▪️सत्संग की वाणी से मिली अनुभूतियां हमारा सार्मथ्य है : मंत्री प्रहलाद पटेल ▪️पूर्णाहुति की कथा 06 फरवरी को : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान व डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल शामिल होंगे

कभी भी किसी साधु - संत और भगत का अपमान नहीं हो इसके परिणाम भी झेलना पड़ते है : पूज्य श्री प्रेमभूषण जी महाराज

▪️सत्संग की वाणी से मिली अनुभूतियां हमारा सार्मथ्य है :  मंत्री प्रहलाद पटेल

▪️पूर्णाहुति की कथा 06 फरवरी को : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान व डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल शामिल होंगे


तीनबत्ती न्यूज: 05 फरवरी, 2026

सागर: दुनिया में केवल सनातन धर्म ही तप करने की उचित प्रेरणा देता है। हमारे लगभग सभी सद्ग्रंथ यही बताते हैं कि बिना तप के कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। हमारी संस्कृति यह सिखाती है कि तप करने में ही सुख है, भोग में नहीं। मनुष्य की योनि तप करने के लिए ही है। जीव की बाकी की सभी योनियां भोग योनि कही जाती हैं। उक्त बातें मध्य प्रदेश के सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन के छठे सत्र में पूज्य श्री प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए कहीं। छठे दिवस पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा के मंच पर पहुंच कर व्यास पीठ और श्री रामायण जी की पूजन आरती की और अपना उद्बोधन दिया। इस अवसर पर सिरोंज विधायक  उमाकांत शर्मा, बंडा विधायक  वीरेन्द्र सिंह, देवरी विधायक  बृजबिहारी पटैरिया सहित अनेक विधायकों, पूर्व विधायकों, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ पत्रकारों ने कथा श्रवण कर व्यासपीठ व श्री रामायण जी का आरती पूजन किया। पूज्य श्री के मीडिया प्रभारी तारकेश्वर मिश्रा ने बताया कि पूर्णाहुति सत्र की कथा शुक्रवार को सुबह 10ः00 बजे से 1 बजे तक होगी और इसके बाद दोपहर 1 बजे से विशाल भंडारा प्रसादी का आयोजन किया गया है। समापन दिवस पर केन्द्रीय कृषि कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सहित अनेक अतिथि कथा आयोजन में शामिल होंगे।

मंगल वन यात्रा के प्रसंगों का गायन

सरस् श्रीराम कथा गायन के लिए लोक ख्याति प्राप्त प्रेममूर्ति प्रेमभूषण जी महाराज ने मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह के पावन संकल्प से आयोजित रामकथा के क्रम में भगवान की मंगल वन यात्रा के प्रसंगों का गायन करते हुए कहा कि श्रद्धा में अर्पण और समर्पण हो तो श्रद्धा अवश्य फल प्रदान करती है। हम जो करते हैं उस पर हमें ही विश्वास नहीं होता है तो फिर कैसे भगवान का दर्शन होगा। खटपट मिटे तो झटपट दर्शन होगा। लाख कोई समझाए भटकना नहीं है। जो इष्ट हैं उनमें केवट भैया और शबरी मैया की तरह से निष्ठ रहना है। सुग्रीव जी की तरह नहीं बनाना है। भगवान से मिलने के बाद भी संसार में  लिपट कर भगवान को ही भूल  गए।


महाराज श्री ने कहा कि जीव को मानव शरीर स्वयं की पहचान करने और भगवान का भजन करने के लिए मिला होता है। जैसे-जैसे भगवान के भजन की ओर मनुष्य बढ़ता जाता है, संसार का भौतिक सुख उससे अपने आप दूर होता चला जाता है। वास्तव में संसार के भौतिक सुख का कोई मतलब नहीं होता है। यह बात मनुष्य को तब समझ आता है जब उसका अपना शरीर अक्षम और रुग्ण हो चुका होता है। इसलिए मनुष्य का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपनी बुद्धि को धर्म में लगाए। धर्म  सम्मत जीवन जिए। भगवान ने स्वयं कहा है - निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा, जिसका अर्थ हैः “मुझे (भगवान को) कपट, धोखा, छल और दूसरों में छिद्र (दोष/बुराई) खोजना पसंद नहीं है।“

ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य तो हमारे हैं ही इनको कुछ भी कहो तो कुछ करेंगे नहीं.....

महाराज श्री ने कहा कि ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य तो हमारे हैं ही इनको कुछ भी कहो तो कुछ करेंगे नहीं हमें तो दूसरों को पटा लेना है।  जो अपना है वह कहां जाएगा जब अपना नहीं है उसको जो शो देखकर पटा लेना है। यूजीसी के लिए एक नया नियम जो बना है यह उसी का परिणाम है। राम जी को भी है विश्वास था कि भरत जी तो हमारे कहने में ही रहते हैं, उनसे जो भी कहेंगे वह मान लेंगे। वह व्यक्ति बहुत ही सौभाग्यशाली है जिसके पास कम से कम एक ऐसा व्यक्ति हो जो उसके कहने में रहता हो।महाराज श्री ने कहा कि कथा सबके भाग्य में नहीं होती है। कथा तो मनुष्य के अपने-अपने पुण्य का परिणाम होती है। जो मनुष्य विषयों से स्वयं को दूर ले जाकर भगवान की ओर ले जाने का प्रयास करता है, वही पुण्य एकत्रित करने में सफल हो पाता है। स्नेहा समर्पण से प्राप्त होता है। जिसका जितना अधिक समर्पण होता है भगवान भी उसे उतना ही स्नेह करते हैं। जब हमारे स्वयं के समर्पण में कमी आती है तो हम किसी से भी स्नेह की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं?

साधु - संत और भगत के प्रति अपकार नहीं हो

महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य को यह प्रयास करना चाहिए कि उससे कभी भी किसी साधु - संत और भगत के प्रति अपकार नहीं हो। अगर ऐसा होता है तो परिणाम भी झेलने के लिए तैयार रहना होगा। क्योंकि भगवान किसी को सजा नहीं देते और प्रकृति किसी को क्षमा नहीं करती है। प्रकृति जड़ है। आप जैसा भी कर्म करेंगे उसका उसके अनुसार फल प्राप्त होना निश्चित है। किसी को भी त्रास देने वाला व्यक्ति स्वयं के जीवन में कभी सुखी नहीं रह पाता है।  हमें अपने जीवन में ऐसा व्यवहार रखना चाहिए कि जिससे किसी और को अनजाने में भी दुख नहीं पहुंचे।


सत्संग की वाणी से मिली अनुभूतियां हमारा सार्मथ्य है - केबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल


केबिनेट मंत्री श् प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि मैं और भूपेन्द्र सिंह जी खानपान के बारे में एक से हैं ,हम दोनों के खानपान में कोई दोष नहीं है। यह हमारे आध्यात्मिक गुरु और माता पिता की कृपा है। उन्होंने कहा कि सत्संग में जो वाणी सुनते हैं उनके कारण मिली अनुभूतियां हमारा सामर्थ्य होती हैं। जब हम सत्संग में आते हैं तो किसी के लिए स्वाध्याय सत्संग है किसी को प्रवचन मिलते हैं वह सत्संग है। विद्वान प्रवचन कर्ताओं के सामने बैठकर हम अपने जीवन की शांति को तलाशते हैं। उन्होंने कहा कि मैं पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह को धन्यवाद देता हूं कि रुद्राक्ष धाम जैसा स्थान उन्होंने बनाया है। यह स्थान हमेशा रहेगा, इसकी उपयोगिता रहेगी, उनका संदेश रहेगा और जिसे इसका लाभ लेना होगा उसे जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैं नर्मदा का परिक्रमावासी हूं। यह सच है की मां नर्मदा की परिक्रमा जब कोई करता है, मेरे परम पूज्य गुरु जी ने नर्मदा जी के नाम की महिमा मद को हरने वाली मां नर्मदा के रूप में बताई है। उन्होंने कहा कि अहंकार सिर्फ पद पर बैठने से नहीं आता, कई बार भक्ति का अहंकार होता है कई बार ज्ञान का अहंकार होता है, कई बार पठन-पाठन का अहंकार होता है, कई बार त्याग और तपस्या का भी अहंकार होता है। जब कभी अहंकार का रूप किसी को लगता है उसके संबंध के लिए मां नर्मदा का स्कंद पुराण इस बात के लिए प्रमाणित करता है कि जिसको भी मन में भी अहंकार हुआ उसे अहंकार से अगर मुक्ति चाहिए तो मां नर्मदा की परिक्रमा करे। उन्होंने बताया कि पूज्य संत ऋषि मार्कंडेय का नाम जानता हूं जिन्होंने नर्मदा पुराण लिखा है। उन्होंने कहा कि गुरु जी ने कभी भी नर्मदा से मिलने वाले नदिया नाला जो छोटा हो या बड़ा हो उसको लांघा नहीं अपितु उसके किनारे से उसके उद्गम तक गए और लौट कर वापस आए और फिर आगे चले। उनकी यात्रा ऐसी यात्रा थी जिसे शायद आज कोई सामान्य पुरुष कर नहीं सकता। उन्होंने कहा कि संत श्री दादा गुरु जी को देखिए नर्मदा के किनारे जाइए 24 घंटे में एक बार पानी पीते हैं और 30 से 40 किलोमीटर हर दिन चल रहे हैं। वह विज्ञान को चुनौती दे रहे हैं लेकिन वह अहंकार में नहीं हैं। वह कहते हैं जहां पर जीने के लिए स्थूल शरीर को भी कुछ नहीं चाहिए सिर्फ जल से काम चल सकता है।

मंत्री प्रहलाद जी की पुस्तक ‘परिक्रमा कृपा सार‘ पर सागर में कार्यक्रम आयोजित होगा



इस अवसर पर पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रहलाद पटेल जी संत राजनेता हैं, ऐसे नेता राजनीति में दुर्लभ होते हैं। 5 बार सांसद के रूप में प्रतिनिधित्व किया, भारतरत्न श्रद्धेय अटल जी और प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में उन्हें काम करने का अवसर उन्हें मिला। उन्होंने कहा कि केबिनेट मंत्री  प्रहलाद पटेल ने दो बार मां नर्मदा जी की परिक्रमा की है और अब उनकी बिटिया प्रतिज्ञा जी नर्मदा परिक्रमा कर रही हैं। उन्होंने अपनी मां नर्मदा परिक्रमाओं के गहन अनुभवों पर जो पुस्तक “परिक्रमा कृपा सार“ लिखी है वह देश के आध्यात्मिक साहित्य की बड़ी रचना है जिसका विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी ने किया है। श्रद्धेय सरसंघचालक ने इस पुस्तक पर कहा है कि पुस्तक से यह बोध मिला कि मैं और मेरा छोड़ो, अंतःकरण पवित्र रखो और स्वार्थ छोड़ो। यह आध्यात्मिक ज्ञान का संकलन है जो अहंकार को मिटाने पर केंद्रित है। इसका संदेश है कि जीवन और साधना में आगे बढ़ने के लिए ’मैं और मेरा’ छोड़ना पड़ता है। कर्ता भाव से कोई भी तपस्या के मार्ग पर आगे नहीं जा सकता। पूर्व गृहमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रहलाद पटेल जी की पुस्तक पर सागर में एक कार्यक्रम आयोजित करना है, उनसे आग्रह है कि उस कार्यक्रम में वे पुस्तक “परिक्रमा कृपा सार“ के  बारे में सभी को अवगत कराएंगे।

उन्होंने कहा कि जो भी मां नर्मदा के किनारे जाएगा वह खाली हाथ वापस नहीं आएग उसी प्रकार इस सत्संग में जो आएगा मेरा यह अटूट विश्वास है श्री राम के चरणों में आप आए हैं खाली हाथ आप वापस नहीं जाएंगे। हम क्या लेकर जाना चाहते हैं मन में यह जरूर हमें तय करना पड़ता है। मांगते समय बुद्धि से गई विवेक और ज्ञान का उपयोग करेंगे तो हमें जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि श्री भूपेंद्र जी को, उनके चिरंजीव अभिराज को अन्य सभी सहयोगी मित्रों को हृदय से आभार देता हूं कि आपने इतना नियमित और इतना अनुशासित आयोजन किया से और इतना आध्यात्मिक वातावरण बनाया है, इस बात के लिए मैं परिक्रमावासी होने के नाते आपको साधुवाद देता हूं। आपके शुभ के प्रति शुभकामना है।



केंद्रीय कृषि कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान का आगमन 06 फरवरी को

रूद्राक्ष धाम में चल रहे श्रीराम कथा आयोजन में केंद्रीय कृषि कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल 6 फरवरी को समापन दिवस पर पूर्ण आहूति कथा में शामिल होंगे। पूर्व मंत्री एवं विधायक पन्ना बिजेन्द्र सिंह भी समापन दिवस पर 6 फरवरी को शामिल होंगे। 6 फरवरी को पूर्ण आहुति कथा प्रातः 10 बजे से 1 बजे तक होगी तथा दोपहर 1 बजे से विशाल भंडारा प्रसादी आरंभ होगी।


कथा के छठे दिवस यह अतिथि रहे शामिल

महाराज जी ने श्रीराम के वन में निवास और भ्रमण की कथा गाते हुए कई सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हजारों की संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी भजनों का आनन्द लेते और झूमते नजर आए। इस आयोजन के मुख्य यजमान भूपेंद्र सिंह, अविराज सिंह व उनके परिजनों के साथ केबिनेट मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, सिरोंज विधायक  उमाकांत शर्मा, देवरी विधायक  बृजबिहारी पटेरिया, बंडा विधायक  वीरेन्द्र सिंह, महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, पूर्व विधायक शमशाबाद रूद्रप्रताप सिंह, पूर्व विधायक जौरा सुबेदार सिंह सिकरबार, पं.  रमाकांत शास्त्री बरमानघाट, पूर्व विधायक प्रद्युम्न सिंह, पूर्व विधायक सुनील जैन, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दीपक तिवारी, नवदुनिया भोपाल के संपादक धनंजय प्रताप सिंह, बंसल न्यूज के चैनल हेड शरद द्विवेदी, बंसल न्यूज प्रबंधन से कुणाल बंसल वरिष्ठ पत्रकार मनोज शर्मा, श्रीमती निधि जैन, नगर पालिका पथरिया अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह, खुरई न.प. अध्यक्ष नन्ही बाई अहिरवार, गंजबासौदा नपा उपाध्यक्ष संदीप सिंह, स्वदेश जैन गुड्डू भैया, श्रीमती रेखा जगदीश साहू, सुश्री श्वेता यादव, अशोक श्रीवास्तव, लक्ष्मीकांत पाठक, श्याम सुंदर पचौरी, कथा वाचक लखन तिवारी, मनोहरदास जी जूनाखाड़ा मालथौन, सरवजीत सिंह, पं. अजय दुबे विहिप जिला अध्यक्ष, राजेन्द्र सोनकिया, हीरेश सिंह उमरिया, लाल बहादुर जायसवाल अनूपपुर, श्रीमती संध्या भार्गव, श्रीमती शारदा खटीक, श्रीमती रूवी पटेल, श्रीमती रानी अहिरवार, पूर्व महापौर अभय दरे, देवेन्द्र सिंह केसली, जगदीश सिंह पाटई, यशवंत सिंह इमलिया, साहब सिंह सागौनी, पूर्व डीएसपी इन्द्राज सिंह खिरिया एवं वीरेन्द्र बहादुर सिंह, शिवराज सिंह बेरखेडी, रविन्द्र सिंह गौर, लोकेन्द्र सिंह लोहारी, रामजी लोहारी, बलवीर सिंह राजपूत, अरविन्द लोधी मालथौन, अनिल पाराशर, श्रीमती मीना कश्यप, लक्ष्मीकांत संतू पोप्तानी हरेमाधव सेवा समिती संचालक, आरएस राजपूत, रामकुमार बघेल, राजेश मेहतेल, संजय समुद्रे, शंभूशंकर खरे, अशरफ खान बरोदिया कलां, अविनाश रावत, शैलेन्द्र लोधी, उमेश यादव, शुभम घोषी, अजय तिवारी देवलचोरी, धीरेन्द्र मिश्रा, महेश साहू अध्यक्ष तिलहनसंघ, विनोदगुरु पटकुई, विनोद पहलवान, जगन्नाथ गुरैया, राजू तिवारी, परागजी जबलपुर, अगरजी जबलपुर, श्रीराम शर्मा, अतुल नेमा, भरत तिवारी, पप्पू तिवारी, डॉ. विवेक तिवारी, राजेश पटेरिया खुरई, रामशास्त्री शुक्ला, बृजेश दुबे सिलोधा, पप्पी नायक, मुकेश कौशिक, हरीश सिवलानी, सवइन्सपेक्टर लक्ष्मी मिश्रा, रामाधार चौबे, महेश शर्मा, अजीत सिंह अजमानी, नीरज मुखारया, पंकज मुखारया, मनोज शुक्ला, अंकित विश्वकर्मा, विक्रम सोनी, गोलू श्रीवास्तव, अभय राजवीर, अवधेश जैन जैसीनगर, लक्ष्मीकांत मुढोतिया, प्रतीक चौकसे, सुरज घोषी, अनिल पाराशर, पार्षद राजकुमार पटेल, सूर्यांश तिवारी, संदीप साहू, केके गुर्जर, पुष्पेन्द्र तौमर हटा, नवीन शिंदे, अनिल लैहरिया, राघवेन्द्र यादव सहित अनेक गणमान्यों ने व्यास पीठ का पूजन किया और भगवान की आरती उतारी।

विभिन्न व्यवस्थाओं में ये रहे शामिल

राजकुमारसिंह ढाना वाले ढाना, राजपालसिंह राजपूत सिंगपुर, सिरनामसिंह तोमर अटाकर्नेलगढ, राहुल चौधरी खुरई, अजयसिंह राजपूत रोडा, नीतेश यादव प्रेमपुरा, सुरपाल यादव सागौनी, निरंजनसिंह ठाकुर बरोदियाकलां, राकेश चौबे सागर, सुरेन्द्रसिंह ठाकुर बांदरी, बलरामसिंह ठाकुर बरोदियाकलां, प्रवीण जैन, गढौला खुरई, नरेन्द्र द्विवेदी वनहट, पुष्पेन्द्रसिंह तोमर अटाकर्नेलगढ, रविन्द्रसिंह राजपूत नरोदा, राहुलसिंह ठाकुर बाहरपुर, कृपालसींग राय (गोलू) मालथौन, कोमल यादव बरोदियाकलां, पुष्पेन्द्र परिहार मालथौन, अंशुल नामदेव खुरई, अंकितसिंह ठाकुर बरोदियानौनागिर, विक्रम सिंह ठाकुर बरोदियानौनागिर, राजकुमार राय मडैयामाफी, दयाराम चौरसिया बरोदियाकलां, मनोज राय खुरई, राजेन्द्र यादव कल्लू खुरई, इन्द्रपालसिंह राजपूत बंटी पिठौरिया, राजासिंह ठाकुर गढ़ौलाजागीर, सौरभ साहू बांदरी, चुन्नीलाल कुशवाहा, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि बरोदियाकलां, महेन्द्रसिंह मोनू राजपूत खुरई, अरिवन्द सिंह बम्होरीहुड्डा, सुरेन्द्र सिंह झौलसी, उमेश राय बांदरी, सचिन साहू बांदरी, सुरपाल यादव सागौनी, रामजी तिवारी हरदौट, विक्रम सिंह राजपूत हरदौट, मनोज कुर्मी हिरनछिपा, भरत सिंह ठाकुर गोदूविजयपुरा, सौरभ ठाकुर पलौआ गोदूविजयपुरा, जगपालसिंह खिरियाकलां, रामक्रेश सिंह चारोदा खिरियाकलां, सुखपाल सिंह बम्होरीलाल, भानुप्रताप सिंह लोधी रामछायरी, निर्भय सिंह लोधी रामछायरी, रामभरत चाचौदिया इमलियाखुर्द, पुष्पेन्द्र बघेल खैराई , सुनील चौबे मंगूस, आधारसिंह सेमरालोधी, देवेन्द्र सिंह पीपरखिरिया, गोविन्द सिंह बरोदियागुसांई, वृजेन्द्र सिंह पडरिया, रविन्द्र यादव कुलुआखास धौरईखास (कुलुआ), मलखान सिंह धौरईखास, बालकिशन कुशवाहा सीपुर, यशवंत बघेल गीधा, मंगलसिंह, रूपेश बुन्देला सेमराकाछी, रामकेश राजपूत चारोंदा, लल्लूराजा राजपूत कुआखेडा, नरेन्द्र सिंह ठाकुर बमनोरा, धर्मेन्द्र अहिरवार मालथौन, दिनेश ठाकुर ललोई, रनधीर सिंह ठाकुर, राधेश्याम सोनी सागौनी, सुरपाल यादव, उदयभान सिंह बिसराहा, रहीसराम सिंह, कुलदीप मिश्रा तिगरा, प्रकाश सेन, अनिल पाराशर झींकनी, गोविन्द अहिरवार पार्षद, शोभाराम राय भैलैंया, विक्रम सिंह लोधी, हेमंत ठाकुर मुहलीबुजुर्ग खुरई, राहुल चौधरी खुरई, राम शास्त्री खुरई, गब्बर सिंह खुरई, मनोज राय खुरई, राजेन्द्र यादव कल्लू खुरई, विनोद राजहंस खुरई, केशव राजहंस खुरई, मोनू राजपूत खुरई, इन्द्रकुमार राय खुरई, राजू चंदेल खुरई, इन्द्राज सिंह खुरई, विक्रम अहिरवार पार्षद खुरई, सुनील राज खुरई, काशीराम अहिरवार टेलर खुरई, गोविन्द कुर्मी खुरई, मुकेश आदिवासी खुरई, काशीराम अहिरवार इंजी खुरई, ऋषभ राय खुरई, धर्मेन्द्र सिंह निर्तला खुरई, द्वारका आदिवासी गौड खुरई, श्रीमती रश्मि सोनी खुरई, प्रमोद चंदेल खुरई, राजू चंदेल खुरई, सोनू चंदेल खुरई, गनेश कुशवाहा खुरई, मनोज दुबे पार्षद खुरई, प्रवीण जैन गढौला खुरई, रविन्द्र सिंह राजपूत खुरई, राजपाल सिंह राजपूत खुरई विभिन्न व्यवस्थाओं में ये रहे शामिल।



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