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सागर में ‘एकात्म मानव दर्शन और विकसित भारत 2047’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, विधायक शैलेंद्र जैन बोले- यही विकसित भारत का मार्ग

सागर में ‘एकात्म मानव दर्शन और विकसित भारत 2047’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, विधायक शैलेंद्र जैन बोले- यही विकसित भारत का मार्ग



तीनबत्ती न्यूज: 15 जुलाई, 2026

सागर। उच्च शिक्षा विभाग की पीएम-ऊषा परियोजना (सॉफ्ट कंपोनेंट तृतीय चरण) के अंतर्गत पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा "पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रणीत एकात्म मानव दर्शन और विकसित भारत 2047" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन अवसर पर महाविद्यालय की शोध पत्रिका 'शोध क्षितिज' के पंडित दीनदयाल उपाध्याय विशेषांक का भी विमोचन किया गया।



मुख्य अतिथि विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का 'एकात्म मानव दर्शन' ही विकसित भारत 2047 के निर्माण का सशक्त मार्ग है। उन्होंने कहा कि पंडित जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और अंत्योदय की भावना को समर्पित रहा। उन्होंने विद्यार्थियों की मांग पर महाविद्यालय परिसर में विधायक निधि से शेड निर्माण कराने की घोषणा भी की।

श्री राम दरबार मंदिर मकरोनिया के महंत केशव गिरी महाराज ने कहा कि एकात्म मानव दर्शन परिवार, समाज और राष्ट्र को जोड़ने वाला दर्शन है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सभी के प्रति समान दृष्टि रखकर राष्ट्र कल्याण के लिए कार्य करता है, वही सच्चे अर्थों में दीनदयाल के विचारों का प्रतिनिधि बनता है।



महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानव दर्शन आज वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुका है। उन्होंने युवाओं से इस विचारधारा को आत्मसात कर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

विशिष्ट वक्ता एवं उच्च शिक्षा विभाग के पूर्व क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ. राधावल्लभ शर्मा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद, आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन की ही व्यावहारिक अभिव्यक्ति है। वहीं मुख्य वक्ता डॉ. विश्वास चौहान ने भारतीय ऋषि परंपरा, आश्रम व्यवस्था तथा व्यष्टि और समष्टि के संतुलन पर प्रकाश डाला।

सारस्वत वक्ता डॉ. श्रीजी सेठ ने कहा कि एकात्म मानववाद पूंजीवाद और साम्यवाद की सीमाओं से आगे बढ़कर भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित समग्र विकास का दर्शन प्रस्तुत करता है।



संगोष्ठी की संयोजक डॉ. संगीता मुखर्जी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी पांच वैचारिक सत्रों में आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर के शिक्षाविद और शोधकर्ता विकसित भारत-2047 की अवधारणा पर मंथन कर रहे हैं। पीएम-ऊषा परियोजना की समन्वयक डॉ. इमराना सिद्दीकी ने परियोजना के अंतर्गत किए गए कार्यों की जानकारी दी।

तकनीकी सत्रों में हुआ गहन मंथन

प्रथम तकनीकी सत्र में शासकीय राजीव गांधी महाविद्यालय, बंडा के प्राचार्य डॉ. कुलदीप यादव ने एकात्म मानव दर्शन के चार आधार—व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि और परमेष्ठी—पर विस्तार से विचार रखे। अध्यक्षता कर रहीं डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की डॉ. अनुपम शर्मा ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में इस दर्शन की प्रासंगिकता बताई।

द्वितीय एवं तृतीय तकनीकी सत्र में ओएसडी आर.के. गोस्वामी ने विजन डॉक्यूमेंट-2047 का उल्लेख करते हुए उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। ओएसडी डॉ. भावना यादव ने कहा कि एकात्म मानव दर्शन जीवन मूल्यों और सिद्धांतों के समन्वय पर आधारित राष्ट्रीय व्यवस्था का आधार है।

मुख्य वक्ता डॉ. सर्वेश्वर उपाध्याय ने इसे वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का संतुलित मॉडल बताया, जबकि डॉ. अमर कुमार जैन ने कहा कि यह दर्शन भारतीय मूल्यों के साथ विकास की नई दिशा प्रदान करता है। इस दौरान शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में डॉ. नीरज दुबे, डॉ. गोपा जैन, डॉ. विनय शर्मा, डॉ. शुचिता अग्रवाल, डॉ. शैलेंद्र राजपूत, डॉ. प्रज्ञा दुबे, डॉ. संदीप तिवारी, डॉ. अंकुर गौतम सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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