Jain News : जैन सिद्ध क्षेत्र मुक्तागिरी में आचार्य श्री समय सागर महाराज ने दी 22 एलक व क्षुल्लको को मुनिदीक्षा
तीनबत्ती न्यूज : 19 फरवरी ,2026
सागर: जैनेश्वरी दीक्षा जैन सिद्ध क्षेत्र मुक्तागिरी मैं आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की समाधि के बाद आचार्य श्री समय सागर महाराज के द्वारा पहली बार मुनि दीक्षा 19 फरवरी को 22 एलक और क्षुल्लको को दीक्षा दी गई।लाखों रुपए का पैकेज छोड़ा और वैराग्य के मार्ग पर चलने के लिए आतुर 22 मुनिराजो की मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की बॉर्डर पर स्थित प्रसिद्ध जैन तीर्थक्षेत्र मुक्तागिरी जिला बैतूल में दीक्षा है। इन दीक्षाथियों में से चार दीक्षार्थी सागर जिले के निवासी हैं।
दोपहर में शुरू हुआ कार्यक्रम
आज गुरुवार को पौने दो बजे दीक्षा संस्कार शुरू हुए । सबसे पहले सभी 22 ऐलक और छुल्लक महाराजो ने लगभग 1 घंटे में आचार्य भगवान से दीक्षा लेने का निवेदन किया और सभी से क्षमा मांगी और सबको क्षमा किया। इस भाव के साथ सभी दीक्षार्थियों ने आचार्य श्री समय सागर जी के चरणों में पहुंचकर दीक्षा का निवेदन किया। इसके पश्चात दीक्षा विधि संस्कार में दीक्षाथियों के सिर पर आचार्य श्री ने गंदोदक छिडका । उसके पश्चात सिर पर अक्षत और केसर का क्षेपण किया।फिर आचार्य श्री ने सभी नव दीक्षित हो रहे दीक्षार्थियों के केश लोंच किए। सिर का प्रछालन किया। आचार्य श्री के आशीर्वाद के बाद सभी दीक्षार्थियों ने अपने वस्त्रो का त्याग शरीर से कर दिया और निर्गंथ मुद्रा धारण की।
13 ऐलक और 9 छुल्लक महाराजो को मुनि दीक्षा
मुकेश जैन ढाना ने बताया कि 13 ऐलक और 9 छुल्लक महाराजो को मुनि दीक्षा दी गई है। आचार्य संघ का कुछ दिनों का प्रवास अभी सिद्ध क्षेत्र मुक्तागिरी में ही रहने की संभावना है। कार्यक्रम का संचालन मुनि श्री प्रशस्त सागर महाराज और ब्रह्मचारी विनय भैया बंडा ने किया। आचार्य श्री समय सागर महाराज के द्वारा भक्ति पढ़ने के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई प्रतिभास्थली की दीदियों ने मंगलाचरण किया। आचार्य श्री का पादप्रच्छलान सलिल बड़जात्या इंदौर ने किया। ध्वजारोहण प्रशांत जी मुम्बई संजय जैन ने किया। शास्त्र भेंट अशोक पाटनी, प्रदीप जैन, चक्रेश जैन पीएनसी आगरा, विनोद बड़जात्या, संजना जैन रायपुर ने किया। मंडप उद्घाटन अजय दनगसिया अजमेर ने किया।
दीक्षा के बाद भी कर्म उदय परेशान कर सकते हैं
प्रथम जैनेश्वरी दीक्षा जैन सिद्ध क्षेत्र मुक्तागिरी मैं संपन्न हुई इस अवसर पर आचार्य श्री समय सागर महाराज ने गुरुदेव के उपदेशों को दोहराया कि दीक्षा के बाद भी कर्म उदय परेशान कर सकते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि आज सभी को मोक्ष मार्ग देखने का स्वरूप मिल रहा है। किसी से भी नहीं डरो, सिर्फ पाप से डरना चाहिए। मोह की अंत्येष्टि करने का नाम मोक्ष है।मुक्तागिर पवित्र स्थान पर आते समय लगता है कि हमे मोक्ष मिल रहा है हमें दूसरो के साथ युद्ध नहीं करना है। कुंद कुंद को आप ने नहीं देखा है। लेकिन गुरुदेव ने उनका नाम चरित्रार्थ किया है। गुरुदेव ने सब कुछ आगम के अनूरूप किया है। आगम के विरूद्ध कभी नहीं वोले। आगम से हटकर नहीं बोलना चाहिए। मात्र बोलने से प्रभावना नहीं होती वचनों में कठोरता है तो सत्यता उद्घाटित नहीं होगी। गुरु देव के बताये मार्ग पर ही प्रभावना हो रही है मोक्ष मार्ग जटिल है लेकिन कुटिल नहीं गुरुदेव ने अद्भुत साधना की है उन्होंने कहा कि मार्ग कभी कलंकित नहीं करना श्रमण और श्रावक का मार्ग अलग है गुरुदेव सबके हृदय में विराजमान हैं गुरु का वचन प्रथम उपकरण है। गुरु का आदेश पालने वाला सौभाग्यशाली हैं गुरुदेव के वचनों का उल्लघंन करता है कभी कुछ कभी कुछ बोलता उससे प्रभावना नहीं होती हैं। विरोध वचनों से अहिंसा धर्म का पालन नहीं होता है शत्रु के प्रति भी कल्याण की भावना होनी चाहिए। सागर नगर और जिले से लगभग 2000 लोग 25 वसो और सैकड़ो फोर व्हीलर से पहुंचे





































