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अटल जी अजातशत्रु थे : रघु ठाकुर समाज के प्रति समर्पण और सेवा भावना ही जीवन को सार्थक बनाती है: शैलेन्द्र जैन

अटल जी अजातशत्रु थे :  रघु ठाकुर 

समाज के प्रति समर्पण और सेवा भावना ही जीवन को सार्थक बनाती है: शैलेन्द्र जैन 


तीनबत्ती न्यूज: 11 जनवरी, 2026

सागर : अटल फाउंडेशन इकाई  सागर द्वारा “शून्य से शतक : एक शताब्दी अटल भारत की” पर आधारित अभिनन्दन एवं सम्मान समारोह संपन्न हुआ। माँ सरस्वती के पूजन अर्चन व देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ प्रारंभ हुए कार्यक्रम में अटल फाउंडेशन के जिला सचिव डा विनोद तिवारी के साथ ही फाउंडेशन के सदस्यों ने अतिथियों का शॉल श्री फल एवं  स्मृति चिन्ह्  से स्वागत किया। इस अवसर पर श्री राजेंद्र कुमार सेन द्वारा अटल गीत का मधुर स्वर में गायन किया। 


इस अवसर पर  विधायक सागर शैलेंद्र कुमार जैन ने कहा कि आज के इस युग में, जब बड़ी संख्या में युवा वर्ग विलासिता और पाश्चात्य सभ्यता के आकर्षण में पड़कर अपने समाज, संस्कृति और परिवार से दूर होता जा रहा है, ऐसे समय में पारंग  जैसे युवा समाज सेवा की दिशा में जो अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं, वह न केवल प्रशंसनीय है बल्कि प्रेरणादायी भी है। पारंग ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सोच सकारात्मक हो और उद्देश्य सेवा का हो, तो युवा अपनी ऊर्जा को समाज निर्माण में लगा सकते हैं। समाज के प्रति समर्पण और सेवा भावना ही जीवन को सार्थक बनाती है, और इस प्रकार का सेवा कार्य वास्तव में अपने जीवन को धन्य करने जैसा होता है। हम सभी के लिए यह गर्व का विषय है कि पारंग हमारे परिवार और समाज का बच्चा है, जो अपने कर्मों से आने वाली पीढ़ी के लिए एक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। ऐसे युवाओं से ही समाज को नई दिशा और नई ऊर्जा मिलती है ।

कार्यक्रम में अध्यक्षीय भाषण देते हुए समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर ने कहा कि मैं अटल फाउंडेशन की जिला इकाई के आज के कार्यक्रम में शामिल होकर अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेई जी के साथ मेरा संबंध 1968 में शुरू हुआ था। जब वह एक आम सभा को संबोधित करने के लिए जो तत्कालीन संविद सरकार के गिरने के बाद भोपाल में आयोजित हुई थी सभा में ही मेरी उनसे पहली मुलाकात हुई थी। मुझे उनका दिया हुआ भाषण आज भी याद है और उनके वे चिंतन पूर्ण शब्द भी मेरे दिमाग में घूमते हैं। अटल जी की भाषण शैली अद्भुत थी और वे श्रोताओं को बांध लेते थे। वे अजात शत्रु थे जिन्होंने किसी के भी साथ  अपनी तरफ से कोई शत्रुता का व्यवहार नहीं किया। बहुत लोगों ने उनके साथ कई प्रकार के भीतरी घात प्रतिघात करने के प्रयास किये परंतु अमूमन उन्होंने चुप रहकर ही उत्तर दिया और मौन उनकी  जीत का बड़ा हथियार  होता था ।

उन्होंने कहा कि अटल जी के भाषण की सभी लोग तारीफ करते हैं  वह लोगों को बांधने वाला होता था। उनके भाषण को न केवल देश पसंद करता था बल्कि  उनके भाषण लोगों को दूर तक  प्रभावित करते थे। न्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए संसद, सरकार और अपने दल को लोकतांत्रिक तरीके से चलाया। वे बगैर आदेश दिए अपनी बात मनवा लेते थे। जब देश में नए रेलवे जोन बन रहे थे तब उनमें बिलासपुर का नाम नहीं था। जब उन्हें यह बताया गया तो उन्होंने एक पर्ची पर लिखकर दिया नीतीश जी (तत्कालीन रेल मंत्री) मैंने बिलासपुर की चुनाव सभा में बिलासपुर में जोन बनाने का समर्थन किया था और दस्तखत कर पर्ची नीतीश जी को देने को दी। नीतीश कुमार जी ने इशारा समझ कर ही बिलासपुर रेलवे जोन की घोषणा कर दी। वे बड़प्पन थोपते नहीं थे बल्कि अपने अपनत्व से लोगों का मन जीतते थे।उन्होंने बताया कि एक बार 1990 में ग्वालियर विश्राम गृह में वे रुके थे। सुबह लौन में टहल रहे थे। उसी समय डबरा से जनता दल के मेरे काफी साथी मेरा नारा लगाते हुए विश्राम गृह में आए। अटल जी का बड़प्पन देखिए कि उन्होंने उन्हें रोक कर कहा रुको, मेरे साथ नारा लगाओ और उन्होंने मेरे नाम का जिंदाबाद का नारा लगाया। मैं संकोच से भर गया और फिर मैने उनके नारे लगवाए। ग्वालियर के अखबारों ने इसे छापा।उनके साथ संबंधों में असहमति आड़े नहीं आती थी। उनकी अनेकों स्मृतियों को में धरोहर के रूप में संजो कर रखता हूं। उन्होंने कहा कि अटल फाउंडेशन की ओर से जिन समाज सेवियों का सम्मान हो रहा है वह एक अच्छा प्रयास है ।अच्छा कदम है। हमारे पारंग जी जो स्व.मुन्ना शुक्ला के भतीजेऔर गुंजन शुक्ला के सुपुत्र हैं उन्होंने पशुओं की सेवा के लिए काफी काम किया है। इन्होंने गरीबों की सेवा के लिए भी काम किया है और यह जो उनका जुनून है वह प्रशंसनीय है। भारत के उपराष्ट्रपति जी ने उन्हें इंदौर में सम्मानित किया था जो सागर के लिए गौरव की बात है और आज अटल फाउंडेशन की सागर शाखा और श्यामलम् संस्था उनका सम्मान कर रही है यह अच्छा कदम है ।आज जिनका सम्मान हो रहा है उन सबको भी मैं अपने ओर से शुभकामनाएं देता हूं। उनके इस सम्मान से न केवल उनका दायित्व बड़ा है बल्कि इससे समाज में एक नई समाज सेवा की प्रेरणा भी पैदा होगी । मुझे उम्मीद है कि उनकी समाज सेवा को देखकर और भी नौजवान और सामाजिक संगठनों को समाज सेवा की प्रेरणा मिलेगी वे प्रभावित होंगे और समाज सेवा का काम आगे बढ़ेगा।


विगत दिसंबर माह में अटल फाउंडेशन की मुख्य शाखा द्वारा इंदौर में आयोजित इसी “शून्य से शतक : एक शताब्दी अटल भारत की” पर आयोजित पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जन्म शताब्दी समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति  श्री सी पी राधाकृष्णन द्वारा पशु सेवा समिति, सागर के श्री पारंग शुक्ला को अटल अलंकरण से सम्मानित किया गया था, अटल फाउंडेशन इकाई सागर द्वारा श्री पारंग शुक्ला के अभिनंदन व पशु सेवा समिति के सदस्य वासु चौबे, सिद्धार्थ शुक्ला, अमन भारद्वाज, चित्रांश कन्हौआ, अंशुल तिवारी, लकी जैन आदि का सम्मान किया गया। 

इनका हुआ सम्मान

इसी प्रकार सागर जिले में मानव एवं पशु सेवा के प्रति निरंतर निस्वार्थ भाव से कार्यरत सुरखी पठा के जंगली क्षेत्र में आवारा पशुओं की लगभग 23 वर्षों से सेवारत संत श्री राम बाबा, सुरखी से ही दीदी वंदना मिश्रा शिक्षिका, वीरेंद्र मालथौन, दयोदय गौशाला, रतौना एवं  श्री शैलेंद्र शाह (शाह मेडिकल), को पशु सेवा के लिए अटल सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया।  मानव सेवा के क्षेत्र में निरंतर सेवा करने के लिए सुश्री प्रीति यादव, घरौंदा आश्रम, सागर, श्री सुगम कोठारी, भाग्योदय ट्रस्ट सागर, श्री जितेंद्र जैन (आदिनाथ मेडिकल), सागर का सम्मान शाल,स्मृति चिन्ह, पुस्तक "सदा अटल", कैलेंडर, सम्मान पत्र व श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। 

अटल फाउंडेशन की संभागीय सचिव डॉ सुजाता मिश्र द्वारा सम्मान पत्रों का वाचन किया गया । इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन डॉ सर्वेश्वर उपाध्याय सहायक प्राध्यापक द्वारा एवं आभार प्रदर्शन सुश्री डॉ.शरद सिंह, संभागीय अध्यक्ष,अटल फाउंडेशन द्वारा किया गया ।

ये रहे शामिल

इस अवसर पर शहर के गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इनमें शिवरतन यादव बी के मिश्रा, उमाकांत मिश्रा, हरी सिंह ठाकुर,आर के तिवारी , पी एन मिश्रा, गुंजन शुक्ला, सपना शुक्ला , मनोरमा शर्मा, इंदौर से सुरेश राजौरे, अनीता राजौरे, अंविका यादव, हरि शुक्ला, कुंदन पाराशर ,संतोष पाठक, अर्चना प्यासी, डा प्यासी ,प्रदीप पांडेय ,ममता भूरिया, सुरेन्द्र शुक्ला, शकुन शुक्ला, नायक सर ,माघव चन्द्रा, राजेन्द्र ठाकुर, पवन रजक ,गप्पू जी तोमर , मनोज पांडे ,विशु तिवारी, जयदीप खटीक, मोतीराम सचदेव, बालकृष्ण अग्रवाल, कृष्ण मुरारी नायक,  चंद्रशेखर चौबे ,बाबूलाल चौरसिया, संगीता दुबे, सविता महेश्वरी, कविता शुक्ला, अलका शुक्ला, डॉ शशिकुमार सिंह, दामोदर प्रजापति, शारदा प्रसाद चौरसिया, ललित जैन, डॉ नौनिहाल गौतम , अमर कुमार जैन, अनुज भट्ट , आलोक तिवारी, राकेश बजाज, उषा मिश्रा, प्रोफेसर दिनेश अत्री,मुकेश तिवारी, रामरत्न पाण्डेय आदि थे।

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