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Sagar News: गर्मियों में घर से पानी लाकर की सिंचाई, हराभरा हो गया स्कूल ▪️12 साल पहले शिक्षक ने की थी शुरुआत, जहां घास तक नहीं उगती थी, वहां पेड़ लगाकर सींचा, सुंदर बगीचा बना दिया

Sagar  News: गर्मियों में घर से पानी लाकर की सिंचाई, हराभरा हो गया स्कूल

▪️12 साल पहले शिक्षक ने की थी शुरुआत, जहां घास तक नहीं उगती थी, वहां पेड़ लगाकर सींचा, सुंदर बगीचा बना दिया


तीनबत्ती न्यूज:  18 मार्च 2026

सागर: धर्मश्री माध्यमिक स्कूल परिसर में वर्तमान में औषधीय पेड़-पौधों के साथ फूल व फलों के लगभग 35 पेड़ लगे हैं। स्कूल परिसर हरा-भरा है। स्कूल में बच्चे इन्हीं वृक्षों की छांव में बैठते एवं चहल-पहल करते हैं। सुबह-शाम पक्षियों का कलरव भी होता है,लेकिन यह स्कूल परिसर हमेशा से ऐसा नहीं था। इसे हरा भरा बनाने का काम स्कूल के शिक्षकों और बच्चों ने किया। 10-12 साल में ही शहर का सबसे सुंदर स्कूल बना लिया।


जहां यह स्कूल है वह कभी निगम का डंपिंग क्षेत्र हुआ करता था। स्कूल भवन बनाने के लिए जमीन ढूंढी गई तो यही मिली। भवन बन गया, उसमें स्कूल शुरू भी हो गया लेकिन घास तक नहीं थी। बाउंड्रीवॉल नहीं थी। यह निगम का डंपिंग स्थान था, इस कारण 2013-14 में निगम कर्मियों ने यहां कुछ पौधे डंप कर दिए। ये पड़े-पड़े खराब हो रहे थे। स्कूल के सहायक शिक्षक श्री राकेश श्रीवास्तव ने स्कूल परिसर में पौधे लगाने का विचार किया। स्कूल के अन्य शिक्षकों व बच्चों के साथ इन्हें लगाना शुरू किया। लगाने के बाद सभी पौधे पेड़ बनकर हरे भरे हो गए। लेकिन स्कूल की बाउंड्रीवॉल नहीं थी इसलिए अब इनकी सुरक्षा की चुनौती थी। सुरक्षा के लिए शिक्षकों व बच्चों ने मिलकर बबूल, जरिया आदि काटकर पेड़ों के चारों ओर लपेट दिए। पेड़ों की सुरक्षा हो गई व बढ़ने लगे। इसके बाद पेड़ों की स्थाई सुरक्षा के लिए तार फेन्सिंग कराई गई। सहायक शिक्षक राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि पौधे लगाने व बड़ा करने में सभी शिक्षकों व बच्चों का सहयोग रहा।  

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औषधीय व फल, फूल के पेड़-पौधे लगे

स्कूल परिसर में कचनार, नीम, पीपल, बरगद सहित अमरूद, शहतूत, आम, पैसे फल एवं छायादार पौधे लगाए गए थे जो ब बड़े वृक्ष बन गए हैं। जिस परिसर में कभी घास नहीं उगती थी वहां आज शानदार बगीचा है।



गर्मी में घर से पानी लाकर सींचा

सहायक शिक्षक राकेश श्रीवास्तव ने बताते हैं कि गर्मी में उन्हें जिंदा रखने के लिए पानी चाहिए था। स्कूल में पानी की व्यवस्था नहीं थी, आसपास भी आसानी से पानी उपलब्ध नहीं था। ऐसे में इन्हें जिंदा रखने के लिए उन्होंने ने घर से पानी लाना शुरू किया। हर रोज घर से स्कूल जाते समय प्लास्टिक पीपों में पानी भरकर ले जाते। सभी पौधों में पानी डालते। हर दो दिन में घर से पानी लेकर पेड़ों को सींचते रहे। पहली गर्मी निकल गई। सभी पेड़ सुरक्षित हैं और पेड़ बड़े हो गए। पूरा प्रांगण हरा भरा हो गया।


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