Sagar News: बीड़ी कॉलोनी : आशियानों के चार दशक..: बदलती तस्वीर
▪️रिपोर्ट : डॉ नवनीत धगट
तीनबत्ती न्यूज: 19 मार्च ,2026
सागर: सागर शहर के तिली चौराहे से धर्म श्री होकर मोती नगर मार्ग, राज मार्ग 14, और वार्ड है- ‘बाधराज’ । यहाँ से गुज़रते हुए आप की नज़र सड़क के किनारे लगातार जमे पुराने टायरों के ढेरों पर पड़ती है । जगह कनेरा देव- संजय ड्राइव क्रॉस रोड पुल पास, जीपीएस लोकेशन ‘बीड़ी अस्पताल’ दिखाई देगी । पूछने पर जगह बताई जाएगी - ‘बीड़ी कॉलोनी ‘।
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स्थान के इतिहास तलाशने जाऐंगे तो आप को बताया जाएगा : यह जगह पहले पिपरिया नाका कहलाती थी । तब यहाँ वन विभाग की एक चौकी होती थी, जिस में कोई 'ग्रंटी ' (गार्ड का अपभ्रंश ) ड्यूटी पर होता था, जो वनोपज लाते ले जाते राहगीरों से इकन्नी -दुअन्नी वसूलता । नगर पालिका,सागर का एक कांजी हाउस भी यहीं हुआ करता था ।
बीड़ी उद्योग का सुपर दौर
सन् अस्सी के दशक में (1980-1988) सागर का बीड़ी कुटीर गृह उद्योग अपने उच्चतम स्तर पर था । सागर जिले में लगभग ढाई लाख से अधिक बीड़ी मजदूर थे और सागर का बीड़ी उद्योग प्रदेश में अव्वल नंबर पर था। देश में समाजवादी आंदोलन मुखर था । सागर के स्व.नारायण शंकर त्रिवेदी, रधु ठाकुर और जवाहर अग्निहोत्री जैसे समाजवादी नेता असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों को संगठित कर उनके यूनियन तैयार करा रहे थे । अगरबत्ती,प्रेस, सफाई, पल्लेदार, बीड़ी सट्टेदार और सिविल डिफेंस जैसे,पच्चीसों श्रम संगठन अपने अधिकारों के लिए सक्रिय थे और संघर्ष कर रहे थे । रोटी,कपड़ा और मकान का नारा उस जमाने में प्रासंगिक था ।
बीड़ी कामगार सभा के मुहम्मद इकबाल की जुबानी
उस दौरा में इन्हीं यूनियनों में से एक थी ‘बीड़ी कामगार सभा’ । बीड़ी कॉलोनी में रहने वाले 76 साल के बजुर्ग मुहम्मद इकबाल बताते हैं कि वे बीड़ी कामगार सभा के मंत्री थे । समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्व.नारायण शंकर त्रिवेदी , बीड़ी कामगार सभा के संरक्षक और एडवोकेट जवाहर अग्निहोत्री इसके अध्यक्ष थे । मुहम्मद इकबाल त्रिवेदी जी का नाम बेहद इज्जत से लेते हुए जज्बाती हो जाते हैं । बताते हैं कि अस्सी के दशक में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्य मंत्री अर्जुन सिंह जी का बीड़ी कामगार सभा ने सागर सर्किट हाउस में अपनी मांगों को लेकर घेराव किया था । 1980 के दशक में अर्जुन सिंह जी ने सागर के बीड़ी मजदूरों के लिए आवासीय कॉलोनी के निर्माण की घोषणा की । श्रम कल्याण विभाग और हाउसिंग बोर्ड ने 20 X30 फुट की प्लाट साइज़ में कुल 152 आवास बना कर बीड़ी श्रमिकों को आवंटित किए गए थे । प्रत्येक आवास की कीमत 8000 रुपये रखी गई थी इसमें शासन का अनुदान 1500 रुपये था । 500 रुपयों की राशि जमा करा के आवासों का सन 19 84 में अधिपत्य हितग्राही श्रमिकों को सौंपा गया था। शेष राशि किस्तों में अदा की जानी थी ।
चार दशकों में आ गया बदलाव
सागर शहर की घनी आबादी से श्रमिक परिवार यहाँ आ कर बस गए । गुज़रे चालीस सालों में जहाँ बहुत कुछ बदला, जिले का बीड़ी उद्योग ढलान पर आता चला गया । बीड़ी कॉलोनी का स्वरूप भी बदला । ज्यादातार आवंटियों ने एक कमरे के छोटे मकान को नए सिरे से बनवा लिया । परिवारों ने अपनी आजीविका का क्षेत्र बदला, बहुत से श्रमिक पुराने टायरों को खरीदने बेचने का काम करने लगे हैं । ये पुराने टायर, आगे जाकर क्रम्ब रबर, डामर (एस्फाल्ट), खेल के मैदानों की सतह, रबर मैट,जिम फ्लोरिंग, बच्चों के प्ले ग्राउण्ड और-रि ट्रेडिंग आदि के काम में लिए जाते हैं ।
विधायक शैलेन्द्र जैन ने की मदद
अनेक आवंटियों की हाउसिंग बोर्ड द्वारा तय राशि भुगतान नहीं हो सकी । लगातार बकाया भुगतान पर ब्याज के कारण यह राशि अधिक हो गई । मोहम्मद इकबाल आगे बताते हैं कि नगर विधायक शैलेंद्र जैन ने मध्यस्थता और पहल कर के बकाया राशियों का सेटलमेंट कराया है । आवंटियों ने शहरी आवासों के लिए दी जाने वाली वर्तमान प्रधानमंत्री आवास योजना सहायता स्वीकृत करा के मकानों के पुनर्निर्माण करा लिए हैं । आज बीड़ी कॉलोनी के इन आशियानों में आ कर बसने वाले लगभग डेढ़ सौ रहवासी परिवार अपने घरों की छतों के नीचे राहत की सांस लेते हैं ।
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ग्राउंड रिपोर्ट: डॉ.नवनीत धगट
(नवनीत धगट एक रिटायर्ड अधिकारी है: कला संस्कृति और सामाजिक सरोकारों पर गहरी समझ रखते है : 9827012124 )
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