ग्रामीण विकास के लिए कारगर सिद्ध होगी जी राम जी योजना , मजदूरों की महंगाई वृद्धि के आधार पर वेतन वृद्धि होगी : सवा सौ दिनों का मिलेगा काम : पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल
▪️कांग्रेस योजना को लेकर भ्रम फैलाने में लगी
तीनबत्ती न्यूज: 09 जनवरी, 2025
सागर: ग्रामीण विकास के लिए कारगर सिद्ध होगी जी राम जी योजना, मजदूरों की महंगाई वृद्धि के अनुसार वेतन वृद्धि होगी, मजदूरों के लिए पर्याप्त मजदूरी उपलब्ध होगी किसानों को नुकसान नहीं होगा, जी राम जी योजना रोजगार के अवसर प्रदान के साथ अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, अधिनियम से रोज़गार की वैधानिक गारंटी 125 दिनों तक बढ़ी, भविष्य की अगुवाई पंचायतें करेंगी एवं योजना बनाने की शक्ति ग्राम सभा और पंचायतों के पास होगी। उक्त विचार पंचायत ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने सागर में जी राम जी योजना के संबंध में जानकारी देते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी विधायक शैलेन्द्र कुमार जैन,विधायक इंजी.प्रदीप लारिया,महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत,नगर निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार, जिला मीडिया प्रभारी श्रीकांत जैन,सह मीडिया प्रभारी आलोक केशरवानी, जी राम जी जन जागरण अभियान टोली जिला संयोजक धीरज सिंह सह संयोजक चैन सिंह एवं अर्पित पांडे उपस्तिथ रहें। पत्रकार वार्ता का संचालन जिला मीडिया प्रभारी श्रीकांत जैन एवं आभार अलोक केशरवानी ने व्यक्त किया।
ग्रामीण रोजगार नीति में बदलाव
पंचायत ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने जी राम जी योजना के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना ग्रामीण रोज़गार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष मज़दूरी रोज़गार की वैधानिक गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाता है और सशक्तिकरण, समावेशी विकास, योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेस) तथा परिपूर्ण (सेचूरेशन) तरीके से सेवादृप्रदाय को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है, जिससे समृद्ध, सक्षम और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव मजबूत होती है।
यह भी पढ़ें: मंत्री प्रहलाद पटेल अस्वस्थ योग गुरु विष्णु आर्य के निवास पर जाकर ली स्वास्थ्य की जानकारी
उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से सशक्तिकरण, विकास, कन्वर्जेंस और परिपूर्णता (सेचूरेशन) के सिद्धांतों पर आधारित यह अधिनियम ग्रामीण रोज़गार को केवल एक कल्याणकारी योजना से आगे बढ़ाकर विकास का एक एकीकृत माध्यम बनाता है। यह ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, शासन और जवाबदेही को आधुनिक बनाता है तथा मज़दूरी रोज़गार को टिकाऊ और उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन से जोड़ता है, जिससे समृद्ध एवं सक्षम ग्रामीण भारत की नींव और अधिक मजबूत होती है।
125 दिन मिलेगा काम
मंत्री श्री पटेल ने कहा कि यह अधिनियम प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कम से कम 125 दिनों के मज़दूरी रोज़गार की वैधानिक गारंटी प्रदान करता है, बशर्ते परिवार के वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हों। पूर्व में उपलब्ध 100 दिनों के रोजगार के अधिकार की तुलना में यह वृद्धि ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सुरक्षा प्रदान करती है, काम को पहले से अनुमानित करती है और उनकी आय को अधिक स्थिर बनाती है। इसके साथ ही उन्हें राष्ट्रीय विकास में अधिक प्रभावी और सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाती है।
किसानों को मिलेगी राहत
उन्होंने कहा कि यह बात अक्सर होती थी कि किसानों को समय पर मजदूर नहीं मिले थे और महंगे मिलते थे । इस योजना में राज्य सरकारों को कहा गया है कि बोनी/ कटाई आदि के वक्त 60 दिनों के लिए योजना को रोका जाए और यही मजदूर खेती किसानी का कार्य करे ।इससे नुकसान भी नहीं होगा। उन्होंने बताया कि बुवाई और कटाई के चरम सीजन के दौरान कृषि से संबंधित गतिविधियों हेतु कृषि श्रम की उपलब्धता आसान करने के लिए, यह अधिनियम राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की समेकित विराम अवधि अधिसूचित करने का अधिकार प्रदान करता है। (धारा 6) श्रमिकों को मिलने वाले कुल 125 दिनों के रोज़गार के अधिकार यथावत बनी रहेगी, जिसे शेष अवधि में प्रदान किया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादकता और श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के मध्य संतुलित समायोजन सुनिश्चित होता है। यह अधिनियम मज़दूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा किसी भी स्थिति में कार्य की समाप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर किए जाने को अनिवार्य करता है। आजीविका मिशन को जोड़ा
उन्होंने कहा कि यह योजना टिकाऊ और उपयोगी ग्रामीण अवसंरचना से जुड़ा रोजगार उपलब्ध कराएगी। जिसमें जल सुरक्षा एवं जल से संबंधित कार्य, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से संबंधित अवसंरचना, प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभी कार्य ‘विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं’ से प्रारंभ होते हैं, जिन्हें ग्राम पंचायत स्तर पर सहभागितापूर्ण प्रकियाओं के माध्यम से तैयार किया जाता है तथा ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित किया जाता है। इन योजनाओं को पीएम गति शक्ति सहित राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ डिजिटल एवं स्थानिक रूप से एकीकृत किया जाता है, जिससे संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण के अंतर्गत कन्वर्जेंस संभव होता है, जबकि स्थानीय स्तर पर विकेन्द्रीकृत निर्णय निर्माण को यथावत बनाए रखा जाता है।
पारदर्शिता रहेगी
मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि पिछली योजना में भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती थी। इनको लेकर भी कई कारगर कदम उठाए गए है। काम की मानिटरिंग होगी। जियो टैगिंग, पोर्टल पर अपडेटिंग और थंब नेल से राशि का भुगतान होगा । कार्ययोजना को मंजूरी आवश्यक होगी।
मंत्री श्री पटेन ने कहा कि योजना रोज़गार की गारंटी और रोज़गार की मांग का अधिकार प्रदान करती है। यह अधिनियम रोज़गार की मांग के अधिकार को कमज़ोर नहीं करता है। इसके विपरीत सरकार पर पात्र ग्रामीण परिवारों को कम से कम 125 दिनों के गारंटीकृत मज़दूरी रोज़गार प्रदान करने का स्पष्ट वैधानिक दायित्व निर्धारित करती है। गारंटीकृत दिनों में की गई यह वृद्धि, सुदृढ़ की गई जवाबदेही और शिकायत निवारण तंत्र के साथ मिलकर, इस अधिकार की प्रवर्तनीयता को और मज़बूत करती है।
कांग्रेस भ्रम फैलाने में लगी
मंत्री श्री पटेल ने कहा कि विगत सरकारें एवं राजनीतिक दल जी राम जी योजना के संबंध में अनेक भ्रांतियां फैलाने का कार्य कर रही हैं जबकि योजना पूर्णरूप से स्पष्ट एवं मजदूरों एवं देश के विकास के लिए सुदृढ योजना है। इस योजना में 60 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार एवं 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकारें व्यय करेंगी। उन्होंने कहा कि मजदूरों का वेतन मेंहगाई सूचकांक के अनुसार बढ़ता रहेगा जिससे मजदूर हमेशा लाभ में रहेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा भ्रम फैलाने और प्रोपेगंडा का काम करती है। इस योजना को लेकर भी भ्रम ही फैला रही है। जी राम जी योजना ग्रामीण विकास की धूरी बनेगी। इसमें पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा गया है। पिछली योजना में भ्रष्टाचार की अक्सर शिकायतें आती थी। नई योजना में भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं रहेगी।ऐसे प्रावधान किए गए है।








0 comments:
एक टिप्पणी भेजें