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सुखी होने का एकमात्र उपाय 'स्वाध्याय' : डॉ. एस. पी. भारिल्ल ▪️ 'हम दुखी हो ही नहीं सकते' विषय पर व्याख्यान

सुखी होने का एकमात्र उपाय 'स्वाध्याय' : डॉ. एस. पी. भारिल्ल

▪️ 'हम दुखी हो ही नहीं सकते' विषय पर व्याख्यान


तीनबत्ती न्यूज: 19 जनवरी, 2026

सागर। "जीवन की सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि हम पूरी जिंदगी दोनों हाथों से साधन समेटते रहते हैं, जबकि जाना खाली हाथ ही है। मनुष्य भव दुर्लभ है, इसका सही उपयोग आत्म-चिंतन में है।" यह  सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. एस. पी. भारिल्ल ने व्यक्त किए। वे यहाँ महावीर जिनालय के 20वें वार्षिक महोत्सव के समापन अवसर पर "हम दुखी हो ही नहीं सकते" विषय पर संबोधित कर रहे थे।

700 की क्षमता वाले पद्माकर सभागृह में अनुशासन का अद्भुत नजारा दिखा। श्रोताओं की भारी भीड़ के कारण बालकनी और मंच पर अतिरिक्त 275 कुर्सियां लगानी पड़ीं। बड़ी संख्या में युवाओं ने जमीन पर बैठकर डॉ. भारिल्ल के 110 मिनट के व्याख्यान को एकाग्रता से सुना और अपनी जिज्ञासाओं का त्वरित समाधान पाया।

डॉ भारिल्ल ने कहा कि, स्वाध्याय ही सुख का मार्ग है। संसार की झंझटों के बीच सुखी होने का एक ही उपाय है—स्वाध्याय शुरू कर देना। भीतर की शांति- "जिसके भीतर युद्ध होता है, वह बाहर शत्रु ढूँढ ही लेता है।" परिस्थितियां कैसी भी हों, यह हम पर निर्भर करता है कि हम उनसे कैसे गुजरते हैं। मोक्ष का लक्ष्य- हमने मनुष्य भव पाकर मुश्किल काम तो कर लिया, अब 'भव का अभाव' (मोक्ष) करना सरल है, लेकिन हम पुण्य की चकाचौंध में अपनी असली मंजिल भूल गए हैं।

गरिमामयी उपस्थिति एवं सम्मान

कार्यक्रम प्रारंभ में मीडिया प्रभारी अखिलेश समैया ने डॉ. भारिल्ल का परिचय दिया। स्वागत भाषण  सुनील सराफ ने दिया और आदित्य जैन ने आभार व्यक्त करते हुए डॉ. भारिल्ल को भारत के सबसे लोकप्रिय वक्ताओं में से एक बताया। विधायक शैलेन्द्र जैन के नेतृत्व में 'आनंद यात्रा' का आयोजन हुआ। इस अवसर पर सागर की धरा पर प्रथम आगमन पर डॉ. भारिल्ल का अभिनंदन करने वालों में प्रमुख रूप से महेश विलहरा, स्वदेश जैन (गुड्डू भैया), गुलज़ारी लाल, राजा भैया, बीएमसी के छय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ जैन, सौम्या समैया ( जनसंपर्क अधिकारी ), श्रीमंत सुरेश उदय सेठ, बी. एस. जैन, मनीष (सुभाष ट्रांसपोर्ट), भीष्म जैन, नरेन्द्र भंडारी, राजीव मानक चौक, संजीव दिवाकर, संजय सराफ, और मनोज बांगेला आदि शामिल थे।

सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला

सहज समाधि शतक विधान के समापन पर विभिन्न कार्यक्रम हुए। महिला मंडल ने 'सुंदर श्रविका सभा' की आकर्षक प्रस्तुति दी, वहीं पाठशाला के बच्चों ने 'जम्बू स्वामी का विवाह एवं वैराग्य' प्रसंग का सजीव मंचन किया।

कार्यक्रम में आगम, सिद्धार्थ, अतुल सतभैया, टोनू निर्मल, श्रेयांश, पराग, संजय कहांन, मुकेश ट्रांसपोर्ट, विनय जैन, राजेश चौधरी, राजू बनारसी, रजनीश बटिका, आशीष जैन, नीरज जैन, विकास मोदी, हितेश भंडारी, राहुल जैन, राकेश पंप, विवेक मोदी, प्रश्म भंडारी, अभिषेक, सत्येन्द्र, शैलेन्द्र, शाश्वत और अनूप उपस्थित रहे। साथ ही तारण तरण दिगंबर जैन चैत्यालय के साधर्मी, अखिल भारतीय जैन युवा (महिला) फेडरेशन, मुमुक्षु मंडल टीकमगढ़, जबलपुर, जबेरा सहित आसपास के अंचलों से आए बड़ी संख्या में जैन बंधु इस आध्यात्मिक समागम के साक्षी बने।

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