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MP High Court : जिला पंजीयक निधि जैन के विरुद्ध पद के दुरुपयोग का मामला: हाईकोर्ट ने राज्य शासन को थमाया अल्टीमेटम, 6 सप्ताह में जांच कर कार्रवाई के निर्देश

MP High Court: सागर जिला पंजीयक निधि जैन के विरुद्ध पद के दुरुपयोग का मामला:  हाईकोर्ट ने राज्य शासन को थमाया अल्टीमेटम, 6 सप्ताह में जांच कर कार्रवाई के निर्देश



तीनबत्ती न्यूज: 04 अप्रैल, 2026

सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग में पदस्थ कलेक्टर स्टाम्प एवं जिला पंजीयक निधि जैन की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। उनके खिलाफ एक मामले में हाईकोर्ट में लगी एक याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य शासन को विस्तृत जांच कर, निर्धारित समय सीमा में निर्णय लेने का आदेश दिया है। 


हाईकोर्ट जबलपुर में अधिवक्ता व सागर निवासी मयंक प्रजापति ने रिट पिटीशन दाखिल की थी, जिसमें जबलपुर में पदस्थ तत्कालीन रजिस्ट्रार जबलपुर व वर्तमान वरिष्ठ जिला पंजीयक अधिकारी सागर निधी जैन के खिलाफ जबलपुर में अपने पद का दुरुपयोग कर मां के नाम खरीदी गई प्रापर्टी में पद का दुरुपयोग करते हुए भवन को प्लाट दिखाया गया था। इस मामले में पूर्व में उच्च स्तर पर जांच भी कराई गई थी। 


हाईकोर्ट के अधिवक्ता मयंक प्रजापति ने बताया कि उन्होंने निधि जैन के मामले में जनवरी महीने में प्रमुख सचिव को शिकायत की थी। इसमें वर्तमान में सागर में पदस्थ वरिष्ठ पंजीयक सह स्टॉम्प कलेक्टर निधि जैन के खिलाफ जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई करने का निवेदन किया गया था, लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 


हाईकोर्ट जबलपुर ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन के प्रमुख सचिव वित्त विभाग को स्पष्ट आदेश दिया है कि मामले की विधिवत जांच कर निर्धारित समयसीमा में की जाए। कोर्ट ने अधिकतम छह सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जांच और कार्रवाई से याचिकाकर्ता अधिवक्ता मयंक प्रजापति को भी अवगत कराया जाए और सूचना दी जाए। 


यह है पूरा मामला 

हाईकोर्ट में दाखिल रिट पिटीशन के अनुसार सागर में पदस्थ वरिष्ठ रजिस्ट्रार निधि जैन ने साल 2019—20 में जबलपुर में जिला पंजीयक रहते हुए,अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शासकीय प्रक्रिया की अवहेलना की गई थी। जिससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति उत्पन्न हुई तथा स्टाम्प शुल्क से संबंधित नियमों में गंभीर अनियमितताएं की गईं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि उक्त प्रकरण एक विभागीय जांच प्रतिवेदन (दिनांक 09/07/2020) पर आधारित है, जिसमें कथित रूप से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए थे।


रजिस्ट्री के दौरान संपति से जुड़े तथ्य छिपाए 

मामले में कोर्ट के सामने तथ्य रखे गए थे कि निधि जैन ने जबलपुर में एक निर्माणाधीन मकान को खाली प्लाट दिखाकर अपनी मां के नाम रजिस्ट्री कराई थी। रजिस्ट्री के दौरान तथ्यों को छिपाकर उसे प्लाट दिखाया गया था। उन पर शासन को राजस्व हानि पहुंचाने तथा अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्यवाही करने जैसे आरोप लगे थे।  याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पूरे प्रकरण में शासकीय अभिलेखों के साथ कथित छेड़छाड़ एवं प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया। इस मामले में डीजी स्टॉम्प की जांच में दोषी पाया गया था।

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