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जिज्ञासा लाइब्रेरी के स्थापना दिवस पर ‘सेपियन्स’ पुस्तक पर हुआ सारगर्भित विषय-विमर्श

जिज्ञासा लाइब्रेरी के स्थापना दिवस पर ‘सेपियन्स’ पुस्तक पर हुआ सारगर्भित विषय-विमर्श

तीनबत्ती न्यूज: 25 मई, 2026

सागर। संस्था ‘गवेषणा’ द्वारा संचालित ‘जिज्ञासा लाइब्रेरी’ के 5वें स्थापना दिवस के अवसर पर गवेषणा संवाद की 25वीं कड़ी का आयोजन जिज्ञासा लाइब्रेरी हॉल, गिरधारी पुरम मार्ग, तिली चौराहा, में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विश्वप्रसिद्ध इतिहासकार, दार्शनिक एवं लेखक  युवाल नोआ  हरारी की चर्चित पुस्तक  ‘सेपियंस – मानव जाति के संक्षिप्त इतिहास’ पर समीक्षा एवं विषय-विमर्श आयोजित किया गया। पुस्तक पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने ‘संज्ञानात्मक क्रांति’ और ‘कृषि क्रांति’, जैसे प्रमुख अध्यायों पर अपने विचार व्यक्त किए।

डॉ. आदित्य दुबे,(एम.डी.,न्यूरो साइकेट्री) ने ‘संज्ञानात्मक क्रांति’ पर अपने संबोधन में होमो सेपियंस के मानसिक विकास क्रम पर चर्चा करते हुए मानव मन-मस्तिष्क की कल्पनाओं, विश्वासों, सोचने के तरीकों और सुरक्षा बोध जैसे विषयों  पर  प्रकाश डाला । शरीर विज्ञान की दृष्टि से उन्होंने कहा कि - ‘भोजन के पोषक तत्व आदिमानवों के शरीर को बलिष्ठ बनाते थे । इसका बड़ा हिस्सा आज के मनुष्य के जटिल और विकसित मस्तिष्क के पोषण में लग रहा है। इस कारण आधुनिक मनुष्यों का शारीरिक बल  आदिमानवों की तुलना में कम रह गया है ।’

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प्रो. डॉ. चंदन सिंह ने  पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से मानव विकास की सर्वाधिक परिवर्तनकारी ‘कृषि क्रांति’ पर लेखक हरारी के विचारों को बहुत प्रभावशाली और रोचक तरीके से प्रस्तुत किया । उन्होंने कहा कि लेखक ने कृषि के विकास को इतिहास का सब से बड़ा ‘धोखा’ बता कर, अपने लेक्चर्स-लेखन  की ओर विश्व के विचारकों  का ध्यान आकृष्ट किया । हरारी के मत में हंटर गेदर्स या वनचर मनुष्य की आसानी, कृषि की ओर मुड़ने से एक जटिल सामाजिक संरचना, अधिक श्रम साध्य जीवन चर्या में तब्दील हुई । समाज में कृषि भूमि,उपज,संचय, अधिकार ,शासक-शासित ,धर्म उपदेशक, वर्ग विभाजन जैसे पिरामिड तैयार हुए । कृषि से सेपियंस की जनसंख्या वृद्धि ,भोजन आवश्यकताओं की पूर्ति तो सम्भव हुई परन्तु मानव जीवन को दार्शनिक दृष्टि से अधिक संचय धर्मी बनाया । उन्होंने विश्व प्रसिद्ध वाक्य दोहराया - ‘ मनुष्य ने गेहूं को उपजाया, पाला नहीं बल्कि गेहूं ने मनुष्य को पाला।’


अतिथि वक्ता डॉ. राम अवतार शर्मा ने अपने संबोधन में पुस्तक में लिए गए शब्द ‘ क्रांति’ पर अपने विचार रखते हुए कहा कि – ‘जहाँ वस्तु और वस्तु जगत वैज्ञानिक अध्ययन की अनिवार्यता है ।  वैज्ञानिक क्रांति के साथ जैविक और परमाणु जैसे हथियार , मनुष्य जीवन के सौन्दर्य के विरुद्ध विद्रूपता है ।’


विशेष वक्ता डॉ. रामहेत गौतम, संस्कृत विभाग,  डॉ.हरीसिंह गौर वि.वि ने समिति के नाम ‘गवेषणा’ के निहितार्थों पर प्रकाश डालते हुए  संस्कृत श्लोकबद्ध विवेचन कर, बहुत ओजस्वी  सन्देश दिया । उन्होंने शब्द ‘गवेषणा’ की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘गो’ से व्यक्त करते हुए बताया कि ‘गो’ के शब्दार्थों में चलन,गमन,पंचेन्द्रियाँ आदि लिया जाता है । ‘गवेषणा’ केवल शोध और ज्ञान पिपासा के अर्थों  तक सीमित नहीं है । ‘गवेषणा’ मनुष्य और मनुष्यता को अधिकाधिक सुन्दर, अर्थपूर्ण,गरिमायुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है । उन्होंने प्रस्तुत  श्लोकों में सामाजिकों को संबोधित करते हुए इन पवित्र दिशाओं में गमन करने का आह्वान किया  ।


विषय प्रवर्तक डॉ. राजेश गौतम, मानव विज्ञान विभाग, डॉ.हरीसिंह गौर वि.वि. ने अपने बीज वक्तव्य के साथ मध्यवर्ती सञ्चालन  संबोधनों में पुस्तक सेपियंस की खूबियाँ  और सीमायें  बताते हुए इसे  सदी की श्रेष्ठ  रचनाओं में से एक व्यक्त किया । उन्होंने कहा – ‘‘सेपियन्स’  केवल मानव जाति विकास गाथा की पुस्तक नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के विकास, विचार-प्रक्रिया, सामाजिक संरचनाओं और आधुनिक चुनौतियों को समझने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।’



संस्था का ध्येय गीत अंगीकार हुआ

आयोजन में ‘गवेषणा’ संस्था में इंग्लिश-एंथम ‘आल दो वी हेल फ्रॉम डिफेरेंट लैंड्स’  के इंजी. सारांश गौतम द्वारा  सृजित/भाषांतरित गीत ‘भले ही हम जुदा जुदा मुल्कों से आते हैं , एक ही धरा ,एक गगन और एक आफताब पाते हैं’ ’  ध्येय गीत के रूप में अंगीकार हुआ । 


संस्था अध्यक्ष  डॉ. मनोहर चौरसिया ने रखा प्रतिवेदन 

कार्यक्रम के अंत में ‘गवेषणा’ के अध्यक्ष डॉ. मनोहर चौरसिया ने ‘जिज्ञासा’ लाइब्रेरी की पांच वर्षीय ज्ञान-यात्रा, उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया  । साथ ही  ‘गवेषणा’ के अंगदान, देहदान,वाचनालय विकास, वृक्षारोपण,  सामाजिक-बौद्धिक सरोकारों और गतिविधियों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया गया। जिज्ञासा लाइब्रेरी की वर्षगांठ पर उपस्थित जनों को स्वल्पाहार करा कर मुंह मीठा कराया गया  ।



सहयोगी टीम आभार प्रदर्शन

आयोजन को सफल बनाने में ‘गवेषणा’ / ‘जिज्ञासा लाइब्रेरी’  के डॉ.तरुण,लोकेश, सोनू, जीतेन्द्र कबीर आदि की टीम का योगदान रहा  । समिति सचिव इंजी.रमेश चौरसिया ने उपस्थित बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं नागरिकों का आभार प्रदर्शन किया।

ये उपस्थित रहे

 कार्यक्रम में  कैलाश चौरसिया, गौरी,देवसिंह, लोकेश सिंह, अनुकृति चौरसिया, वासु शर्मा, तुलसी राम ,राहुल अहिरवार , शोभा चौरसिया, नीलेश राजपूत, महिमा नामदेव, मनमोहन चौरसिया, सुरेन्द्र कुमार सोनी, डॉ.चित्तिबसु, डॉ.शिवकुमार चौरसिया,बाबूलाल रजक,सलिल यादव,शिवकुमार यादव, मुकेश कुमार चौरसिया डी.आर. बसंत, डॉ.अभय कुमार, वृन्दावन राय, बी.डी.साहू , शोभा चौरसिया, अरुणा चौरसिया आदि की  उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।


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एडिटर : विनोद आर्य

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