सागर कोर्ट का बड़ा फैसला: फर्जी प्रवेश पत्र बनाकर दूसरे की जगह परीक्षा दिलाने वाले स्कूल प्राचार्य और 3 अन्य आरोपियों को सजा
तीनबत्ती न्यूज: 30 जून, 2026
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले की अदालत ने परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले एक गिरोह को सख्त सजा सुनाई है। माननीय षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश श्री दिलीप सिंह परमार की अदालत ने ठाकुर उदयभान मेमोरियल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिलहरा के प्राचार्य सहित चार आरोपियों को दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
क्या है पूरा मामला?
शासन की ओर से पैरवी करने वाले अपर लोक अभियोजक हरिशंकर विश्वकर्मा ने बताया कि यह घटना 12 फरवरी 2024 की है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिलहरा के केंद्राध्यक्ष विजय कुमार पचौरी द्वारा हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) की परीक्षा के दौरान भौतिक, अर्थशास्त्र तथा पशुपालन विषय की परीक्षा के समय परीक्षा कक्षों का औचक निरीक्षण किया जा रहा था।
निरीक्षण के दौरान परीक्षा केंद्र क्रमांक 241064 के कक्ष क्रमांक 18 में छात्र अंश राजपूत (पिता कृष्णा सिंह राजपूत) और कक्ष क्रमांक 17 में छात्र पवन लोधी (पिता बालकृष्ण लोधी) की उपस्थिति और फोटो संदिग्ध पाई गई।
जब ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों द्वारा सघन जांच की गई, तो एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ:
- छात्र अंश राजपूत की जगह एक अन्य विधि का उल्लंघनकर्ता बालक (नाबालिग) परीक्षा दे रहा था।
- छात्र पवन लोधी की जगह भूपेन्द्र यादव (निवासी ग्राम गढ़ी, पोस्ट गढ़ी गैरतगंज, जिला रायसेन) परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
फर्जी आधार कार्ड और एडमिट कार्ड का हुआ था इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि दोनों फर्जी परीक्षार्थियों के पास जो प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) थे, उन पर असली छात्रों की जगह इन फर्जी व्यक्तियों की फोटो चपकी हुई थी। इतना ही नहीं, परीक्षा दे रहे नाबालिग बालक के पास से जो आधार कार्ड मिला, वह अंश राजपूत के नाम पर था लेकिन उस पर फोटो नाबालिग बालक की लगी हुई थी।
कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों फर्जी परीक्षार्थियों ने लिखित में स्वघोषणा पत्र देकर स्वीकार किया कि वे क्रमशः अंश राजपूत और पवन लोधी के स्थान पर बैठकर परीक्षा दे रहे थे。
प्राचार्य की मिलीभगत से रचा गया था स्वांग
मामले की जांच में यह बात भी साफ हो गई कि इन फर्जी प्रवेश पत्रों पर ठाकुर उदयभान मेमोरियल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिलहरा के स्कूल प्रिंसिपल कृष्णा सिंह राजपूत उर्फ किस्सू मासाब के सील और हस्ताक्षर मौजूद थे। यानी पूरी जालसाजी में स्कूल के प्राचार्य खुद शामिल थे। केंद्राध्यक्ष की रिपोर्ट पर थाना सुरखी में अपराध क्रमांक 76/24 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया था।
अदालत ने सुनाई ये सजा
न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों को आईपीसी की धारा 467, 468, 471, 420, 419, 120बी और 3/4 म.प्र. मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने निम्नलिखित सजा का ऐलान किया:
- सभी आरोपियों (कृष्णा सिंह राजपूत, अंश राजपूत, भूपेन्द्र यादव और पवन लोधी) को 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास।
- मुख्य आरोपी प्राचार्य कृष्णा सिंह राजपूत उर्फ किस्सू मासाब पर 5,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
- अन्य आरोपी अंश राजपूत, पवन लोधी और भूपेन्द्र यादव पर 6-6 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।







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