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गलत इलाज: मासूम की आंखों की गई रोशनी और झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से युवती की हुई मौत : अब होगी जांच : CMHO ने किया डाक्टरों का जांच दल गठित

गलत इलाज: मासूम की आंखों की गई रोशनी और झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से युवती की हुई मौत : अब होगी जांच : CMHO ने किया डाक्टरों का जांच दल गठित



तीनबत्ती न्यूज; 29 जून 2026

सागर: सागर जिले केसिविल अस्पताल बण्डा में इलाज के दौरान डेढ़ साल के मासूम की आंखों की रोशनी जाने एवं बण्डा तहसील अंतर्गत विनायका थाना क्षेत्र के चक्रभारती में झोलाछाप डॉक्टर प्रिंस वाला के उपचार के बाद 19 वर्षीय युवती की मृत्यु होने संबंधी घटनाओं की सूक्ष्मता से जांच हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के आदेशानुसार जांच दल का गठन किया गया है।

जांच दल में शामिल अधिकारी

डॉ अदिति दुबे नेत्ररोग विशेषज्ञ इन्द्रा नेत्र चिकित्सालय सागर। (अध्यक्ष) अशोक कुमार नेत्र सहायक इन्द्रा नेत्र चिकित्सालय। (सदस्य) और  बालाराम अहिरवार बी.ई.ई. सिविल अस्पताल बण्डा जिला सागर। (सदस्य) बनाए हुए है।  उक्त दल को दो दिवस में जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

मासूम की गई रोशनी
परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने बच्चे को एक आई ड्रॉप, पैरासिटामोल सिरप, एक इंजेक्शन और अन्य दवाइयां दीं। दवा देने के बाद वे करीब तीन से चार घंटे तक अस्पताल में ही रुके रहे, लेकिन बच्चे की हालत में सुधार नहीं हुआ। उनका आरोप है कि ड्रॉप डालने के बाद बच्चे की आंखों में जलन शुरू हो गई। इसके बाद बच्चे को सागर रेफर किया गया। सागर में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को भोपाल एम्स ले जाने की सलाह दी। परिजन बच्चे को इलाज के लिए भोपाल एम्स लेकर पहुंचे। उनका कहना है कि वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि इलाज में लापरवाही के कारण बच्चे की आंखों की रोशनी गई।

आई ड्रॉप की जगह नोजल ड्रॉप देने का आरोप

बच्चे के पिता का दावा है कि जिस ड्रॉप को उन्होंने बच्चे की आंखों में डाला, वह आई ड्रॉप नहीं बल्कि नोजल ड्रॉप (नॉर्मल सलाइन) था। उनका कहना है कि डॉक्टर की पर्ची के आधार पर ही अस्पताल के दवा काउंटर से यह ड्रॉप मिला था। आरोप है कि इसे डालने के बाद ही बच्चे की आंखों में जलन शुरू हुई और उसकी रोशनी चली गई।



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