नशे से खुद को बचाइए, देश अपने आप बच जाएगा: डॉ. कमलेश दुबे
•युवा विचारक अविराज सिंह द्वारा आयोजित ‘‘नशे से दूरी है जरूरी‘‘ विषय पर संगोष्ठी में उद्बोधन, सैकड़ों युवाओं ने नशा मुक्ति का संकल्प लिया
तीनबत्ती न्यूज: 19 जुलाई, 2026सागर। नशामुक्त भारत विषय पर आयोजित युवा संगोष्ठी में मुख्य वक्ता एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांताध्यक्ष डॉ. कमलेश दुबे ने कहा कि भारत आज जिन तीन बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनमें गरीबी, बेरोजगारी और इनसे उत्पन्न होने वाली नशे की समस्या सबसे गंभीर है। उन्होंने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति का जीवन बर्बाद नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की शक्ति को भी कमजोर करता है। युवाओं को नशे के विरुद्ध जागरूक करने और सकारात्मक दिशा देने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। डा दुबे सागर में युवा विचारक अविराज सिंह द्वारा ‘‘नशे से दूरी है जरूरी‘‘ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उपस्थित सैकड़ों युवाओं के बीच अपना उद्बोधन दे रहे थे।
डॉ. कमलेश दुबे ने कहा कि संगोष्ठी स्थल पर पहुंचते ही उन्होंने युवाओं की ऊर्जा और जागरूकता को महसूस किया। उन्होंने कहा कि दिन में मीडिया में नशे से जुड़ी घटनाओं की खबरें चल रही थीं, जिनमें युवा अपराधों में शामिल पाए जा रहे थे। सागर सहित विभिन्न क्षेत्रों में नशे के कारण युवाओं द्वारा कटरबाजी जैसी हिंसक घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे समय में इसी शहर में अविराज सिंह द्वारा 500 से अधिक युवाओं को नशे के खिलाफ एकजुट करते देखना एक आशा की किरण है।
डॉ. कमलेश दुबे ने कहा कि भारत की भूराजनीतिक स्थिति भी इस समस्या को और गंभीर बनाती है। एक ओर ‘‘गोल्डन ट्राइएंगल‘‘ (म्यांमार, लाओस और थाईलैंड) और दूसरी ओर ‘‘गोल्डन क्रेसेंट‘‘ (अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान) स्थित हैं। इन दोनों क्षेत्रों के बीच होने के कारण भारत नशीले पदार्थों के बड़े बाजारों में बदलता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को कमजोर करने की एक सुनियोजित चुनौती भी हो सकती है।उन्होंने कहा कि नशे का कारोबार केवल स्वास्थ्य और सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़े आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय हित भी जुड़े होते हैं। कई संगठित गिरोह और नेटवर्क युवाओं को नशे की गिरफ्त में लाने का प्रयास करते हैं। इसलिए युवाओं को सजग रहना होगा और अपने विवेक से सही-गलत का निर्णय करना होगा।

डॉ. कमलेश दुबे ने कहा कि शराब और ड्रग्स के साथ-साथ गुटखा और तंबाकू भी गंभीर सामाजिक समस्या बन चुके हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार ऐसे हैं जहां किसी न किसी रूप में तंबाकू या गुटखे का सेवन किया जाता है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जहां कई आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध नहीं थीं, वहां भी गुटखा ऊंचे दामों पर बिक रहा था। इससे स्पष्ट है कि नशे का कारोबार किस प्रकार लोगों की कमजोरियों का लाभ उठाता है। उन्होंने कहा कि नशे से जुड़े उत्पादों के प्रचार-प्रसार में बड़ी हस्तियों और फिल्मी कलाकारों का उपयोग किया जाता है, जिससे युवाओं के मन में इनके प्रति आकर्षण पैदा होता है। स्कूलों और कॉलेजों के आसपास भी ऐसे उत्पाद आसानी से उपलब्ध हैं। समाज को इसके विरुद्ध जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि केवल यह कह देना पर्याप्त नहीं है कि देश में नशे की समस्या बढ़ रही है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को इसके खिलाफ सक्रिय भूमिका निभानी होगी। समाज को नुकसान बेईमान लोगों की सक्रियता से कम और अच्छे लोगों की निष्क्रियता से अधिक होता है।
डॉ. कमलेश दुबे ने कहा कि उन्हें इस बात की अत्यंत प्रसन्नता है कि अवकाश के दिन भी बड़ी संख्या में युवा इस महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उपस्थित हुए। यह इस बात का प्रमाण है कि देश का युवा केवल अपने भविष्य को लेकर ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र से जुड़े संवेदनशील विषयों के प्रति भी जागरूक है। उन्होंने इस विषय पर सार्थक पहल करने के लिए संगोष्ठी के आयोजक युवा नेता अविराज सिंह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत शुरुआत बनते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों और महाविद्यालयों के आसपास नशे से जुड़े उत्पादों की उपलब्धता समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यदि कहीं भी ऐसी स्थिति दिखाई दे तो केवल आलोचना करने के बजाय जिम्मेदार नागरिक के रूप में संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर कार्रवाई सुनिश्चित कराने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को सबसे अधिक नुकसान बुरे लोगों की सक्रियता से नहीं, बल्कि अच्छे लोगों की निष्क्रियता से होता है। डॉ. कमलेश दुबे ने कहा कि यदि किसी पड़ोसी के घर में आग लगी हो और हम यह सोचकर चुप रहें कि इससे हमारा कोई संबंध नहीं है, तो एक दिन वही आग हमारे घर तक भी पहुंच सकती है। इसी प्रकार यदि समाज में फैल रहे नशे के खिलाफ आज आवाज नहीं उठाई गई, तो उसका दुष्प्रभाव प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं का नाम नहीं, बल्कि यहां रहने वाले प्रत्येक नागरिक की चेतना का नाम है। जब हम स्वयं को बेहतर बनाएंगे, तभी देश भी बेहतर बनेगा। प्रत्येक व्यक्ति में प्रतिभा और क्षमता होती है, आवश्यकता केवल सही दिशा, उचित मार्गदर्शन और सकारात्मक संकल्प की होती है। समाज में ऐसे नेतृत्व और योजनाओं की आवश्यकता है जो युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करें। डॉ.कमलेश दुबे ने कहा कि दुनिया को बदलने की चिंता करने से पहले प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं को नशे से बचाना चाहिए। यदि व्यक्ति स्वयं नशामुक्त रहेगा तो उसका परिवार, समाज और राष्ट्र भी मजबूत होगा। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे किसी भी प्रकार के नशे को स्पष्ट रूप से ‘ना’ कहने का साहस विकसित करें। नशा धीरे-धीरे मनुष्य की बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता को समाप्त कर देता है।
आयोजक युवा नेता अविराज सिंह ने कहा नशे को नहीं, जिंदगी को चुनें, देशभक्ति और विकास का नशा अपनाएं
युवा संगोष्ठी के आयोजक युवा नेता अविराज सिंह ने रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘‘नशामुक्त भारत, नशामुक्त युवा‘‘ संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘‘नशे से दूरी है जरूरी‘‘ विषय पर युवा संगोष्ठी आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण युवा शक्ति के हाथों होना है, लेकिन यदि युवा नशे की गिरफ्त में आ जाए तो उसका भविष्य, परिवार, समाज और राष्ट्र सभी प्रभावित होते हैं। इसलिए प्रत्येक युवा का यह संकल्प होना चाहिए कि वह स्वयं भी नशे से दूर रहेगा और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करेगा। अविराज सिंह ने कहा कि नशा केवल किसी एक व्यक्ति का जीवन बर्बाद नहीं करता, बल्कि उसकी शिक्षा, रोजगार, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालता है। साथ ही इसका दुष्प्रभाव समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा तक पहुंचता है। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय अध्ययनों का उल्लेख करते हुए बताया कि महानगरों में बड़ी संख्या में युवा कम उम्र में ही नशे की चपेट में आ रहे हैं, जो पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के जीवन में तीन सबसे बड़े संकट लेकर आता है-अंधकार, विनाश और बर्बादी। इससे शिक्षा में गिरावट आती है, रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं, मानसिक तनाव बढ़ता है, परिवार टूटते हैं तथा अपराध और हिंसा की घटनाओं में वृद्धि होती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष हजारों सड़क दुर्घटनाएं नशे की हालत में वाहन चलाने के कारण होती हैं, जिनमें बड़ी संख्या युवाओं की होती है। अविराज सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार अवैध नशीले पदार्थों का वैश्विक कारोबार लाखों करोड़ रुपये का हो चुका है, जिससे अपराध, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि नशे पर खर्च किया गया धन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को भी मजबूती दे सकता है। इसलिए प्रत्येक युवा का कर्तव्य है कि वह न केवल स्वयं नशे से दूर रहे, बल्कि अपने मित्रों और समाज को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करे।
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उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित अनेक रिपोर्टें बताती हैं कि शराब और नशीले पदार्थ अनेक गंभीर बीमारियों तथा असमय मृत्यु का कारण बन रहे हैं। देश में होने वाली कई आत्महत्याओं के पीछे भी नशे की लत प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती भी है। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें शराब या ड्रग्स का नहीं, बल्कि देशभक्ति, सेवा और राष्ट्र निर्माण का नशा करना चाहिए। भगवान के नाम का स्मरण, अच्छे संस्कार और सत्संग जीवन को ऊंचाइयों तक ले जाते हैं, जबकि कुसंग व्यक्ति को पतन की ओर धकेल देता है।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तकनीक से जुड़ी सबसे सक्षम पीढ़ी है। सोशल मीडिया का उपयोग केवल मनोरंजन या दूसरों को देखने के लिए नहीं, बल्कि सकारात्मक संदेश फैलाने और समाज में जागरूकता लाने के लिए किया जाना चाहिए। युवाओं को नवाचार, शोध, उत्पादन और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ना होगा, तभी भारत विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम बनेगा। अविराज सिंह ने कहा कि नशे से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है कि युवा स्वयं को खेल, संगीत, साहित्य, लेखन, कला, विज्ञान, तकनीक और समाज सेवा जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ें। उन्होंने मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के बिचारपुर गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां कभी युवा नशे की गिरफ्त में थे, वहीं खेलों के माध्यम से आज वह गांव राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। इससे स्पष्ट होता है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर युवा किसी भी बुराई से बाहर निकल सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश है कि जीवन में एक महान लक्ष्य चुनो और उसी को अपना जीवन बना लो। जब जीवन का उद्देश्य बड़ा होता है, तब नशे जैसी बुरी आदतों के लिए कोई स्थान नहीं बचता। खाली मन नशे की ओर आकर्षित होता है, जबकि लक्ष्यपूर्ण जीवन राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद एवं माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अंशिका सोनी, क्रांति पटेल एवं पिहू दुबे ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन प्रत्यूषा जोशी और आकाश ने किया। इस अवसर पर संगोष्ठी के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांताध्यक्ष डॉ. कमलेश दुबे का स्वागत आयोजक युवा नेता अविराज सिंह ने हनुमानजी की प्रतिमा भेंटकर किया। वहीं अंश चैकसे ने अविराज सिंह तथा आशीष दुबे ने प्रतीक चैकसे का राधा-कृष्ण की प्रतिमा भेंटकर स्वागत किया। दीपक मेमोरियल एकेडमी की छात्राओं अनुभा जैन, क्रांति पटेल, अंशिका सोनी, पिहू दुबे ने वंदे मातरम और जन-गण-मन राष्ट्र गान की प्रस्तुति दी। अधिराज ने संकल्प पत्र का वाचन कर संकल्प दिलाया। दीपांशु दुबे ने आभार व्यक्त किया।
ये रहे शामिल
कार्यक्रम में डॉ. सुशील तिवारी, अनुराग प्यासी, संतोष रोहित, संध्या भार्गव, वरिष्ठ पार्षद राजकुमार पटेल, रूबी कृष्ण कुमार पटेल, सोमेश जड़िया, शैलेश जैन, सूरज घोसी, लक्ष्मण सिंह लोधी, महेश साहू, यशवंत करोसिया, प्रतीक चैकसे, शुभम घोसी, संतोष दुबे, नवीन भट्ट, अजय तिवारी (देवलचैरी), देवेंद्र सिंह बुंदेला, काशीराम मास्टर, सूर्यांश तिवारी, राजीव सोनी, प्रदीप पांडे, आदित्य सिंह ठाकुर, अजय जैन लंबरदार, राकेश चैबे, मनोज शुक्ला, गोलू प्रताप राय तथा बलराम सिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में युवा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।