फर्जी अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति एवं मानदेय भुगतान मामले में दो प्राचार्य सस्पेंड
तीनबत्ती न्यूज:18 जून 2026
सागर: कमिश्नर सागर संभाग श्री अनिल सुचारी ने शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चंद्रनगर, जिला छतरपुर में फर्जी अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति एवं मानदेय भुगतान से जुड़े प्रकरण में कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य श्री प्रकाशचन्द्र खरे तथा प्रभारी प्राचार्य एवं तत्कालीन संकुल प्राचार्य श्री राजकुमार रेंजा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
सागर: कमिश्नर सागर संभाग श्री अनिल सुचारी ने शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चंद्रनगर, जिला छतरपुर में फर्जी अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति एवं मानदेय भुगतान से जुड़े प्रकरण में कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य श्री प्रकाशचन्द्र खरे तथा प्रभारी प्राचार्य एवं तत्कालीन संकुल प्राचार्य श्री राजकुमार रेंजा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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कलेक्टर छतरपुर से प्राप्त शिकायत एवं जांच प्रतिवेदन के अनुसार, श्री दुर्गेश कुमार पाठक एवं श्री हर्षित सेन की अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्ति नियमों के विपरीत की गई थी। जांच में पाया गया कि दोनों अभ्यर्थियों के नाम विद्यालय के स्वीकृत पैनल में शामिल नहीं थे, इसके बावजूद तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य श्री प्रकाशचन्द्र खरे द्वारा उनका चयन किया गया। साथ ही, विद्यालय में अध्यापन कार्य नहीं करने के बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज कराई गई तथा शासन की संचित निधि से मानदेय का आहरण एवं भुगतान कराया गया। जांच में इसे गंभीर आर्थिक अनियमितता मानते हुए श्री खरे को इसके लिए उत्तरदायी ठहराया गया है।
कलेक्टर छतरपुर से प्राप्त शिकायत एवं जांच प्रतिवेदन के अनुसार, श्री दुर्गेश कुमार पाठक एवं श्री हर्षित सेन की अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्ति नियमों के विपरीत की गई थी। जांच में पाया गया कि दोनों अभ्यर्थियों के नाम विद्यालय के स्वीकृत पैनल में शामिल नहीं थे, इसके बावजूद तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य श्री प्रकाशचन्द्र खरे द्वारा उनका चयन किया गया। साथ ही, विद्यालय में अध्यापन कार्य नहीं करने के बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज कराई गई तथा शासन की संचित निधि से मानदेय का आहरण एवं भुगतान कराया गया। जांच में इसे गंभीर आर्थिक अनियमितता मानते हुए श्री खरे को इसके लिए उत्तरदायी ठहराया गया है।
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जांच के दौरान यह भी पाया गया कि उक्त अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति तत्कालीन संकुल प्राचार्य श्री राजकुमार रेंजा के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिसे बिना आवश्यक परीक्षण एवं सत्यापन के स्वीकार किया गया। इसके आधार पर मानदेय भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण कराई गई। जांच प्रतिवेदन में इस कृत्य को प्रशासनिक लापरवाही तथा वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में माना गया है, जिसके लिए श्री रेंजा को भी प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया।
कलेक्टर छतरपुर से प्राप्त प्रतिवेदन के अवलोकन एवं परिशीलन उपरांत दोनों अधिकारियों का आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के प्रावधानों के प्रतिकूल पाया गया। इसके फलस्वरूप कमिश्नर सागर संभाग ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि उक्त अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति तत्कालीन संकुल प्राचार्य श्री राजकुमार रेंजा के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिसे बिना आवश्यक परीक्षण एवं सत्यापन के स्वीकार किया गया। इसके आधार पर मानदेय भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण कराई गई। जांच प्रतिवेदन में इस कृत्य को प्रशासनिक लापरवाही तथा वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में माना गया है, जिसके लिए श्री रेंजा को भी प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया।
कलेक्टर छतरपुर से प्राप्त प्रतिवेदन के अवलोकन एवं परिशीलन उपरांत दोनों अधिकारियों का आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के प्रावधानों के प्रतिकूल पाया गया। इसके फलस्वरूप कमिश्नर सागर संभाग ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।
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