अविराज सिंह युवाओं के लिए आइकान : प्रो एसपी व्यास
▪️शब्द सुमन अर्पण" सम्मान समारोह में श्यामलम् सहित अनेक संस्थाओं ने अविराज सिंह का सम्मान और अभिनन्दन किया
▪️अविराज के महिषासुरमर्दिनी स्त्रोत के कंठस्थ पाठ को सुनकर हतप्रभ हो गया पद्माकर सभागार
तीनबत्ती न्यूज: 05 जुलाई, 2026
सागर। अविराज सिंह जब महिषासुर मर्दिनी स्रोत सुना रहे थे तो हम उनके अंतस के संस्कारों के प्रतिबिम्ब को देख रहे थे। उन्होंने अपने भीतर संस्कारों को सिंचित कर रखा है। अविराज अपने नाम के अनुरूप सूर्य की तरह प्रकाशित हैं। वे युवाओं के लिए आइकान हैं,उनका होना उनके माता पिता के लिए आल्हाद का विषय बना रहेगा। यह उद्गार डा हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, फार्मेसी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो डा एसपी व्यास ने सांस्कृतिक संस्था श्यामलम् द्वारा आयोजित सागर की युवा प्रतिभा श्री अविराज सिंह के सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किए। भारतीय संस्कृति के प्राचीन महामंत्रों श्री महिषासुरमर्दिनी, श्री शिवतांडव स्तोत्र व श्री वेंकटेश्श स्त्रोतम् के कंठस्थ पाठ को युवा पीढ़ी में लोकव्यापीकरण के लिए आयोजित किए गए इस सम्मान समारोह में श्यामलम् के साथ सागर नगर की अनेक सांस्कृतिक, साहित्यिक, सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं ने अविराज सिंह का अभिनंदन और सम्मान किया है।
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महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र के कंठस्थ पाठ से गूंजा सागर, अविराज सिंह का हुआ सम्मान
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर एसपी व्यास ने कहा कि मैं एक वैज्ञानिक होने के नाते कहता हूं कि ईश्वर है। अविराज सिंह के कंठस्थ महिषासुरमर्दिनी स्रोत के पाठसे यहां जो वातावरण निर्मित हुआ वह भी इसका प्रमाण है कि ईश्वर है। महिषासुरमर्दिनी स्रोत की शब्द श्वास और ऋचाओं के प्रभाव से उत्पन्न एनर्जी लेबल पर जाकर हम क्वांटम थ्योरी को महसूस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के वेदों की ऋचाएं और मंत्रों के श्लोक स्वयं ऐसे योग्य पात्रों का आहृवान करते हैं कि आओ और अपने अधरों से मुझे गाकर अमर बना दो। उन्होंने कहा कि जहां संस्कार हैं वहां महिषासुरमर्दिनी हैं। अविराज ने स्वामी विवेकानंद के कथन को उद्धृत किया है कि महिषासुरमर्दिनी स्रोत ज्ञान और प्रज्ञा की प्रार्थना है। यह पुरुष के भीतर विद्यमान नारी की अस्मिता को जगाने और उसका सम्मान करने की प्रार्थना है।
सनातन में जाकर अपनी जड़ों को ढूंढ़ना होगा
प्रो व्यास ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि हमें सनातन में जाकर अपनी जड़ों को ढूंढ़ना होगा। मेरे बच्चो, युवाओ आंखों, ऐसे मंत्रों को गाओ, अपने भीतर की ऋणात्मकता को समापन करो और अपना जीवन ऊर्जा से भर कर सार्थक करो। प्रो व्यास ने कहा कि मैं उस मां की वंदना करना चाहता हूं जिसकी गोद में अविराज जैसा सूर्य के प्रकाश की तरह ऊर्जा बिखेरने वाला युवा बड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आज अविराज की प्रतिभा का सम्मान करने सागर की समस्त सांस्कृतिक हरियाएं प्रवाहित हो कर समुद्र में आकर समाहित हो गई हैं जैसे संपूर्ण सागर सम्मान के लिए यहां उमड़ आया है। उन्होंने अपने संबोधन में अविराज से कहा कि हमारी संस्कृति और हमारा नगर आप पर गर्व करता है। आप आईकानिक हैं। मैं स्वयं आपका फालोअर हूं और आपके वीडियो देखता हूं। आपके माता पिता ने उम्र में आपको कमल की तरह खिला दिया, यह उनके संस्कारों की भी परिणिति है। अआपकी ऊर्जा ऊर्ध्वगामी हो और निरंतर उन्नति करें।
आगे और स्त्रोतों के कार्यक्रम हो
कार्यक्रम के अध्यक्ष डा हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय के देवभाषा संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो शशिकुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अविराज सिंह ने कंठस्थ किए गए तीनों स्त्रोतों से भारत की सांस्कृतिक एकता अखंडता को भी सिद्ध किया है। भारत में सनातन की मुख्य रूप से तीन धाराएं शैव, शाक्त और वैष्णव हैं जिनके प्रतिनिधि स्त्रोत क्रमशः शिवतांडव स्तोत्र, महिषासुरमर्दिनी स्रोत और श्री वैंकटेश स्त्रोत हैं। अविराज सिंह ने तीनों स्त्रोतों को आत्मसात कर भारतीय संस्कृति की आत्मा को आत्मसात कर लिया है। उन्होंने कहा कि अविराज सिंह चारों गुणों स्मृति, बोध, चिंतन और आचरण में पारंगत हैं। ऐसा व्यक्ति ही देश, समाज और संस्कृति को जान पाएगा और आगे ले जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं आग्रह करूंगा कि जैसा अद्भुत कार्यक्रम आज महिषासुरमर्दिनी स्रोत के पाठ के साथ यहां संपन्न हुआ आगे शिवतांडव स्तोत्र तथा श्री वेंकटेश स्त्रोत के भी आयोजित हों।
युवा उपयोगी रील बनाए
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सुश्री डॉ शरद सिंह ने कहा कि अविराज सिंह जी के आयु के ज्यादातर अन्य युवा अनुपयोगी रीलें देखने और सोशल मीडिया पर अपना समय व्यर्थ कर रहे हैं तो भविष्य के प्रति आशंकाएं होती हैं लेकिन जब अविराज सिंह जैसे युवा इस डिजिटल क्रांति के युग में धर्म ध्वजा और संस्कृति की पताका लेकर खड़े दिखाई देते हैं तो एक विश्वास पैदा होता है कि हमारी संस्कृति अजेय है। इतना सब कुछ याद रखना और प्रवाह पूर्ण स्त्रोत का पाठ निर्दोष रूप से करना बहुत ही चुनौती भरा काम है। वह भी इस आयु में । उन्होंने कहा कि महिषासुरमर्दिनी स्त्रोत से संदेश मिलता है कि स्त्री कमजोर नहीं है, स्त्री के अंदर जो शक्ति मौजूद होती है उसको स्मरण रखना चाहिए तो यह समाज में सुधार लाने का भी कार्य करेगा। स्त्रोत का महत्व समझेंगे तो निश्चित रूप से नारी का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि अविराज सिंह युवाओं के प्रतिनिधि हैं, युवाओं के लिए एक आइकन हैं,वे हम सब का भरोसा हम सबके लिए एक भविष्य का प्रतीक हैं।
आत्मशक्ति को जागृत करने वाला दिव्य मंत्र
युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र केवल देवी की स्तुति नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सुप्त पड़ी आत्मशक्ति को जागृत करने वाला दिव्य मंत्र है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक छोटा बालक संकट के समय अपनी मां को पुकारता है और मां तुरंत उसकी रक्षा के लिए दौड़ी चली आती है, उसी प्रकार जब श्रद्धा और विश्वास के साथ महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ किया जाता है तो मां भगवती अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। उन्होंने कहा कि इस स्तोत्र का प्रत्येक शब्द साधक के भीतर साहस, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करता है तथा जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की नई ऊर्जा प्रदान करता है। अविराज सिंह ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी मंत्रों और स्तोत्रों के उच्चारण का मानव मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब कोई श्रद्धापूर्वक महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ करता है तो उसके मस्तिष्क में सकारात्मक कंपन (वाइब्रेशन) उत्पन्न होते हैं। यही सकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति के मन, बुद्धि और आत्मा को नई शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इन आध्यात्मिक कंपन के प्रभाव से मनुष्य का मन अधिक स्थिर, साहसी और आत्मविश्वासी बनता है तथा उसके भीतर से भय, निराशा और कायरता जैसी नकारात्मक भावनाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं।
कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती पूजन व मुकेश तिवारी द्वारा प्रस्तुत मां सरस्वती वंदना से हुआ। संतोष पाठक ने अधिराज सिंह का जीवन परिचय वाचन किया। तत्पश्चात् अविराज सिंह ने महिषासुरमर्दिनी स्रोत का कंठस्थ सस्वर पाठ कर सबको अभिभूत कर दिया। अभिनंदन पत्र वाचन वरिष्ठ साहित्यकार हरिसिंह द्वारा किया गया। तत्पश्चात् श्यामलम्, श्रुति मुद्रा सांस्कृतिक समिति, बुनियाद संस्थाओं की ओर से अध्यक्ष उमाकांत मिश्र व कविता शुक्ला द्वारा अविराज सिंह का सम्मान का क्रम प्रारंभ किया गया।
विशिष्ट अतिथि सुश्री शरद सिंह, योगाचार्य विष्णु आर्य, डा राजेंद्र चऊदा, इंजीनियर प्रकाश चौबे, विहिप नेता अजय दुबे, ज्ञानी गुरबचन सिंह, अंबिका प्रसाद यादव, सुनीला सराफ, सुरजीत सिंह, प्रवाह संस्था के अध्यक्ष संतोष रोहित ने सम्मान किया। सम्मान करने के लिए क्रमशः सरस्वती वाचनालय एवं पुस्तकालय की ओर से सचिव शुकदेव तिवारी एवं रिंकू सरवैया, सरस्वती मंदिर बड़ा बाजार की ओर से यशोवर्धन चौबे मनोज शुक्ला, डा वंदना गुप्ता, बुंदेलखंड हिंदी साहित्य संस्कृति विकास मंच की ओर से कवि पूरन सिंह राजपूत, योगेन्द्र राजपूत, अनाज व्यापारी संघ की ओर से अध्यक्ष महेश साहू , सागर इंजीनियर फोरम की ओर से अभिजीत जड़िया व राजकुमार नामदेव, एकता समिति की ओर से चंपक भाई, नगर परिषद खुरई की ओर से अध्यक्ष श्रीमती नन्हीं बाई अहिरवार, बर्रीटोरिया समिति की ओर से पूर्व विधायक कुरवाई वीर सिंह पवार ने ने सम्मान किया। संचालन अंजना चतुर्वेदी तिवारी ने तथा आभार प्रदर्शन रमाकांत शास्त्री ने किया।
ये हुए शामिल
कार्यक्रम की दर्शक दीर्घा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रमुख डा जीएस चौबे,पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह, महापौर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, श्रीमती संध्या भार्गव, पार्षदगण राजकुमार पटेल, नरेश यादव, सोमेश जड़िया, शैलेन्द्र ठाकुर, सूरज घोसी, अमन चौरसिया, वरिष्ठ वकील रश्मि ऋतुजैन, वीरेन्द्र सिंह, एड दीपा तिवारी, लक्ष्मण सिंह लोधी, नवीन भट्ट्, पारंग शुक्ला ,राजीव सोनी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य जन, साहित्यकार, समाज सेवी संगठनों के सदस्य कार्यक्रम में शामिल हुए।











