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21 जून 2026 : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष " योग एक सार्वभौमिक मानव धर्म " ▪️वेद प्रकाश शर्मा, IPS (से.नि) पूर्व अध्यक्ष, मध्य प्रदेश योग आयोग

21 जून 2026 : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष

" योग एक सार्वभौमिक मानव धर्म "

▪️वेद प्रकाश शर्मा, IPS (से.नि) पूर्व अध्यक्ष, मध्य प्रदेश योग आयोग



21 जून को विश्व के सभी राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाते हैं। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से भारतीय प्राच्य विद्या को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ख्याति एवं स्वीकृति प्राप्त हुई है। योग को जन-जन तक पहुँचाने तथा इसे सर्वलोकप्रिय बनाने में योग ऋषि स्वामी रामदेव जी की भी अग्रणी भूमिका रही है। आज योग रूपी आध्यात्मिक सुगंध भारत से निकलकर समस्त विश्व में फैल चुकी है। यह मानवता के अस्तित्व और विकास के लिए अत्यंत सुखद एवं शुभ संकेत है।

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योग दिवस : 93 की उम्र में भी कमाल की ऊर्जा: 70 वर्षों से योग साधना कर रहे योगाचार्य विष्णु आर्य, आज भी सिखा रहे स्वस्थ जीवन का मंत्र ▪️कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद बिना ऑपरेशन हुए स्वस्थ, फिर योग सेवा में सक्रिय; वाकर से चलते है और सिखाते है योग


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वर्तमान समय में प्रायः योग का अर्थ केवल आसन और प्राणायाम करना समझ लिया जाता है, जबकि योग को केवल आसन-प्राणायाम तक सीमित करना उचित नहीं है। योग एक संपूर्ण जीवन-दर्शन, जीवन जीने की कला तथा एक सार्वभौमिक मानवधर्म है।

योग शब्द युज धातु से निष्पन्न होता है जिसका अर्थ है "युजिर योगे जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का नाम योग है। योग का दूसरा अर्थ है अर्थात् योग जोड़ने का नाम है । युज समाधौ योग समाधि है । दूसरे शब्दो में इन्द्रियों का मन मन का आत्मा और आत्मा का परमात्मा से जुड़ना योग है।

"योगश्यचित्तवृति निरोधः चित्त वृत्तियों का निरोध योग है।

"योगः कर्मसु कौशलम" योग से कर्मों में प्रवीणता प्राप्त होती है। यह योग का व्यवहारिक स्वरूप है ।

योगः समाधि समाधि का नाम योग है। यह योग का आध्यात्मिक स्वरूप है। समत्वं योग उच्चयते समता के भाव में रहना योग है।


बहुधा काल के प्रवाह में शब्दों के निहित अर्थ बदल जाते हैं। लोग शब्दों के मूल अर्थ को भूलकर केवल प्रचलित अर्थों को ही स्मरण रखते हैं। "धर्म" शब्द के साथ भी यही हुआ है। आज धर्म को केवल उपासना पद्धति से जोड़ दिया गया है, जबकि यह उसकी संपूर्ण परिभाषा नहीं है।

महर्षि मनु ने धर्म को इस प्रकार परिभाषित किया है- धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः ।धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम ॥ अर्थात् धैर्य, क्षमा, इन्द्रिय संयम, चोरी न करना, शुद्धता, इन्द्रियनिग्रह, बुद्धि, विद्या, सत्य तथा अक्रोध ये धर्म के दस लक्षण हैं।

शास्त्रों में कहा गया है-धारणाद्धर्म इत्याहुः। अर्थात् जो धारण किया जाए, वही धर्म है।

महर्षि दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज के पाँचवे नियम में कहा है कि सभी कार्य धर्मानुसार अर्थात् सत्य और असत्य का विचार करके करने चाहिए। उनके अनुसार सत्य ही धर्म है।

महर्षि पतंजलि ने योगाभ्यास के लिए अष्टांग योग का विधान किया है, जो इस प्रकार है- यम, नियम, आसन प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।

अष्टांग योग के प्रथम दो अंग-यम और नियम योगाभ्यासी की आचार संहिता (Code of Conduct) हैं।

यम पाँच हैं- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह।ये पाँच यम समाज में मनुष्य के व्यवहार के मानदण्ड निर्धारित करते हैं।

यदि समाज के सभी लोग अहिंसा का पालन करें तो परस्पर द्वेष, हिंसा और वैमनस्य स्वतः समाप्त हो जाऐंगे। यही द्वेषभाव हिंसा, क्रोध और अपराधों का मूल कारण है। इसलिए जैन दर्शन में कहा गया है- अहिंसा परमो धर्मः ।सत्य का पालन समाज को भ्रष्टाचार से मुक्त कर सकता है। आज भ्रष्टाचार सर्वव्यापी होकर समाज की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इसका स्थायी समाधान सत्य का आचरण है, जिसकी शिक्षा योग देता है।

अस्तेय अर्थात् चोरी न करना। यदि व्यक्ति अचौर्यव्रत धारण कर ले तो आर्थिक अपराध, घोटाले, रिश्वतखोरी और काला बाज़ारी जैसी समस्याएँ समाप्त हो सकती हैं।

अपराधों पर नियंत्रण

बढ़ते हुए यौन अपराधों के मूल में ब्रह्मचर्य की उपेक्षा है। इन अपराधों का संबंध मनोवृत्तियों से है, इसलिए केवल कानून इनके पूर्ण समाधान में सक्षम नहीं हो सकता। इसका वास्तविक समाधान ब्रह्मचर्य का पालन है।

आज का समाज उपभोक्तावाद से प्रभावित है। मनुष्य की इच्छाएँ निरंतर बढ़ती जा रही हैं। उनकी पूर्ति के लिए वह उचित अनुचित सभी प्रकार के साधनों का उपयोग करता है। इससे असंतोष, तनाव और सामाजिक विषमता बढ़ती है। इसका समाधान है अपरिग्रह-अर्थात् अनावश्यक वस्तुओं और विचारों का त्याग तथा जीवन की आवश्यकताओं को सीमित करना, ताकि दूसरों की आवश्यकताएँ भी पूरी हो सकें।

अष्टांग योग का दूसरा अंग है नियम। नियम मनुष्य का स्वयं के प्रति कर्तव्यों का निर्धारण करते है। इनका पालन करने से मनुष्य की आत्मोन्नति का मार्ग प्रशस्त होता हैं। ये पाँच हैं-शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर-प्रणिधान ।

शौच का अर्थ है बाह्य और आंतरिक शुद्धि। बाह्य शुद्धि जल आदि से तथा आंतरिक शुद्धि सत्य, ज्ञान और तप के अनुष्ठान से होती है।

आज लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण अनेक मानसिक और शारीरिक रोग उत्पन्न हो रहे हैं। इसका समाधान है संतोष। संतोष का अर्थ आलस्य नहीं, बल्कि धर्म और न्यायपूर्वक पूर्ण पुरुषार्थ करने के पश्चात जो प्राप्त हो उसमें संतुष्ट रहना तथा निरंतर श्रेष्ठ प्रयास करते रहना है।

तप का अर्थ है-कर्तव्यपालन एवं सत्याचरण में आने वाली कठिनाइयों को सहर्ष सहन करना और उनसे विचलित न होना। वर्तमान समय में बढ़ती असहिष्णुता का समाधान तप का अभ्यास है।

स्वाध्याय आत्म-विकास का महत्वपूर्ण साधन है। प्रत्येक व्यक्ति को उत्तम साहित्य का अध्ययन तथा तपस्वी, धर्मात्मा और परोपकारी विद्वानों का सत्संग करना चाहिए।

नियम का पाँचवाँ अंग है ईश्वर-प्रणिधान। यह मनुष्य को भय, चिंता और अहंकार से मुक्त करता है। अपने समस्त कर्मों को ईश्वर को समर्पित कर देना तथा कर्मफल की इच्छा न करना ही ईश्वर-प्रणिधान है। इससे कर्त्तापन का भाव समाप्त होता है और आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ होता है। यम और नियमों का सम्यक पालन करने के पश्चात ही साधक आसन और प्राणायाम का वास्तविक अधिकारी बनता है। यम और नियम में धर्म के सभी दस लक्षण समाहित हैं ।

महर्षि पतंजलि कहते हैं- स्थिरसुखमासनम् । अर्थात् जिस स्थिति में स्थिरता और सुखपूर्वक रहा जा सके, वही आसन है।

हठयोग में वर्णित विभिन्न आसनों के अभ्यास से शरीर स्वस्थ, लचीला और निरोग बनता है। आसन-सिद्धि के पश्चात प्राणायाम का अभ्यास किया जाता है। प्राणायाम द्वारा श्वास-प्रश्वास पर नियंत्रण स्थापित कर मन और इन्द्रियों को संयमित किया जाता है।

पतंजलि योगसूत्र में चार प्रकार के प्राणायामों का उल्लेख मिलता है-बाह्य, आभ्यन्तर स्तम्भवृत्ति और बाह्याभ्यन्तर विषयाक्षेपी इनके अभ्यास से चित्त की वृत्तियाँ शांत होती हैं तथा मन पर नियंत्रण प्राप्त होता है।

हठयोग में वर्णित प्राणायाम, जैसे कपालभाति, अनुलोम-विलोम, उज्जायी, भ्रामरी आदि, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। इनके नियमित अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा अनेक रोगों में लाभ प्राप्त होता है। प्राणायाम के माध्यम से प्राणों पर नियंत्रण स्थापित होता है, जिसके परिणामस्वरूप मन और इन्द्रियाँ भी संयमित हो जाती हैं।

मन और इन्द्रियों को उनके विषयों से हटाकर भीतर की ओर मोड़ने को प्रत्याहार कहा जाता है। जब मन को एकाग्र करके किसी एक स्थान या विषय पर स्थिर किया जाता है, तो उसे धारणा कहते हैं। धारणा के स्थान पर ईश्वर के गुण, कर्म और स्वभाव का निरंतर चिंतन-मनन करना ध्यान है। ध्यान की परिपक्वता और निरन्तरता समाधि है। समाधि की अवस्था में साधक को आत्मा और परमात्मा के स्वरूप का यथार्थ ज्ञान प्राप्त होता है। महर्षि पतंजलि ने इस स्थिति का वर्णन करते हुए कहा है-

"तदा द्रष्टुः स्वरूपेऽवस्थानम् ।"


अर्थात् उस अवस्था में जीवात्मा अपने और परमात्मा के स्वरूप में अवस्थित होता है।


समाधि प्राप्त साधक आप्तकाम हो जाता है। उसके लिए कुछ और जानना या प्राप्त करना शेष नहीं रहता। ऐसा साधक ही मुक्ति अथवा मोक्ष का अधिकारी बनता है।


वर्तमान युग में मनुष्य अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश नामक पाँच क्लेशों से ग्रस्त है। वह इन क्लेशों से मुक्त होना चाहता है, किन्तु उसे उचित मार्ग दिखाई नहीं देता। समस्त प्रकार के क्लेशों, दुःखों और मानसिक अशान्ति से पूर्ण मुक्ति का एकमात्र मार्ग योग है। योग प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा का अभिन्न अंग है। इसके नियमित अभ्यास और आचरण से मनुष्य दुःखों से मुक्त होकर सुख, शांति और संतुलन प्राप्त कर सकता है। इतना ही नहीं, योग विश्व में शांति और स‌द्भाव स्थापित करने का भी सशक्त माध्यम है। आज जब अनेक राष्ट्र युद्ध, तनाव और संघर्ष की परिस्थितियों से गुजर रहे हैं, तब योग ही मानवता को एकता, सह-अस्तित्व और शांति शांति का मार्ग दिखा सकता है। इस प्रकार योग केवल आसन प्राणायाम अथवा व्यायाम नहीं है अपितु एक सार्वभौमिक मानव धर्म है जिसके पालन करने से मानव मात्र सम्पूर्ण दुखों से छूट कर सुखमय जीवन व्यतीत कर सकता है और मानव जीवन के परम लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है ।

मनाये योग दिवस

आइए, 21 जून को को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर हम सभी नियमित योगाभ्यास करने, योग के सिद्धांत सिद्धांत को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा योगमय जीवन जीने का संकल्प लें। लें।



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योग दिवस : 93 की उम्र में भी कमाल की ऊर्जा: 70 वर्षों से योग साधना कर रहे योगाचार्य विष्णु आर्य, आज भी सिखा रहे स्वस्थ जीवन का मंत्र ▪️कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद बिना ऑपरेशन हुए स्वस्थ, फिर योग सेवा में सक्रिय; वाकर से चलते है और सिखाते है योग

योग दिवस : 93 की उम्र में भी कमाल की ऊर्जा: 70 वर्षों से योग साधना कर रहे योगाचार्य विष्णु आर्य, आज भी सिखा रहे स्वस्थ जीवन का मंत्र

▪️कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद बिना ऑपरेशन हुए स्वस्थ, फिर योग सेवा में सक्रिय; वाकर से चलते है और सिखाते है योग


International Day Of Yoga 2026

तीनबत्ती न्यूज: 20 जून,2026

सागर: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को पूरी दुनिया में मनाया जायेगा। भारतीय योग संस्कृति को स्थापित करने में देश दुनिया में हजारों लोग जुट है। ऐसे है मध्यप्रदेश के सागर जिले के उम्र के 90 दशक पार कर चुके अद्भुत ऊर्जा और अनुशासन की मिसाल बने योगाचार्य विष्णु आर्य आज भी लोगों को योग सिखा रहे हैं। पिछले 70 वर्षों से योग साधना में जुटे विष्णु आर्य न केवल योग प्रशिक्षण दे रहे हैं, बल्कि योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवन की राह भी दिखा रहे हैं। सागर में स्थापित उनके ‘योग निकेतन’ में आज भी सैकड़ों लोग योग सीखने पहुंचते हैं।


कई संस्थाओं से जुड़े है

जिले के वरिष्ठ योगाचार्य विष्णु आर्य 93 साल की उम्र में भी पूरी सक्रियता के साथ योग सेवा में लगे हुए हैं। मध्यप्रदेश योग परिषद के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष और मध्यप्रदेश आयुर्वेद सम्मेलन के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके विष्णु आर्य पिछले सात दशकों से योग के प्रचार-प्रसार में जुटे हैं। उन्होंने आर्मी स्कूल और पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में भी योग प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं दी हैं।


पिछले साल टूटी कूल्हे की हड्डी : अब वाकर के सहारे योग साधना

हाल ही में दिसंबर 2025 में कूल्हे की हड्डी टूटने के कारण वे अस्वस्थ हो गए थे और करीब ढाई महीने तक बेड रेस्ट पर रहे। खास बात यह रही कि बिना ऑपरेशन के उनकी हड्डी जुड़ गई। दृढ़ इच्छाशक्ति, नियमित उपचार और योग अनुशासन के दम पर वे पूरी तरह स्वस्थ होकर फिर से योग साधना और प्रशिक्षण में जुट गए हैं। वाकर के सहारे चलकर संस्थान पहुंचते है और योग सिखाते है खुद भी योगाभ्यास करते है। इन दिनों अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के तहत वे सागर स्थित योग निकेतन योग प्रशिक्षण संस्थान में लोगों को नियमित योगाभ्यास करा रहे हैं।



1968 में रखी योग निकेतन की नींव

योगाचार्य विष्णु आर्य ने वर्ष 1968 में सागर में योग निकेतन की स्थापना की थी। बिहार के मुंगेर में स्थित योग केंद्र शिवानन्द मठ की परंपरा को आगे सागर में बढ़ा रहे है। तब से यहां निरंतर योग साधना और प्रशिक्षण जारी है। वे दावा करते हैं कि योग के माध्यम से डायबिटीज, अस्थमा, सर्वाइकल, सायटिका और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं में लोगों को राहत मिलती है। उनके पास कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए पहुंचते हैं।



1954 से शुरू हुआ योग का सफर


विष्णु आर्य बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें योग, व्यायाम और अखाड़े का शौक था। वर्ष 1954 में आर्य समाज के संतों के संपर्क में आने के बाद योग के प्रति उनकी रुचि और बढ़ी। बाद में वर्ष 1968 में रायगढ़ में आयोजित विश्व योग सम्मेलन में स्वामी सत्यानंद सरस्वती से योग दीक्षा प्राप्त की और उनके साथ देशभर में भ्रमण कर लोगों को योग सिखाया।

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चार सीएम कर चुके पुरस्कृत


उम्र के सैकड़ा पूरा करने के इच्छुक योगाचार्य विष्णु आर्य को उनके योग के क्षेत्र में उपलब्धि परमध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा, शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित अनेक राजनीतिक सामाजिक संगठन सम्मानों से नवाज चुके है

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 योग सिर्फ व्यायाम नहीं, जीवन जीने की कला

योगाचार्य विष्णु आर्य का मानना है कि योग केवल आसन और प्राणायाम तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की कला और विज्ञान है। उनका कहना है कि बढ़ता मानसिक तनाव, नशे की प्रवृत्ति और बदलती जीवनशैली लोगों को बीमार बना रही है, जबकि योग मानसिक और शारीरिक संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है।




राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुका सम्मान

योग के क्षेत्र में लंबे योगदान के लिए विष्णु आर्य को अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें मध्यप्रदेश सरकार के रामजी महाजन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही राज्य सरकार द्वारा योग के क्षेत्र में घोषित स्वामी विवेकानंद योग पुरस्कार के लिए भी उनको चयनित किया गया।  





पिछले वर्ष केंद्र सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से संबद्ध संगठन Yogasana Bharat द्वारा गोवा में आयोजित राष्ट्रीय खेल महोत्सव के दौरान उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।




योग दिवस को लेकर उत्साह

योगाचार्य विष्णु आर्य का कहना है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की पहल से योग को वैश्विक पहचान मिली है। उनका मानना है कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया भर में लोग योग अपनाकर स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।


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रिश्वतखोर नायब तहसीलदार और चौकीदार को रिश्वत के मामले में अदालत ने सुनाई सजा ▪️सागर लोकायुक्त पुलिस ने 25 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा था

रिश्वतखोर नायब तहसीलदार और चौकीदार को रिश्वत के मामले में अदालत ने सुनाई सजा

▪️सागर लोकायुक्त पुलिस ने 25 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा था


तीनबत्ती न्यूज: 20 जून, 2026

पन्ना। पन्ना जिले के गुनौर में पदस्थ रहे तत्कालीन प्रभारी नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला को भ्रष्टाचार के एक मामले में अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के न्यायाधीश सुरेंद्र मेश्राम की अदालत ने रविशंकर शुक्ला और उनके सहयोगी चौकीदार देवीदयाल दहायत को दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा से दंडित किया है।

यह ही पढ़ेSagar News: कर्मचारी संघ की अध्यक्ष गांधाली कदम 2500 रुपये रिश्वत लेते ट्रैप किया लोकायुक्त पुलिस सागर ने : शिक्षक से एरियर्स निकलवाने के एवज में ली रिश्वत

क्या है पूरा मामला?

​सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि यह मामला वर्ष 2020 का है। सिली गांव के निवासी किसान ब्रजबिहारी प्रजापति अपने खेत से ईंट निर्माण के लिए मिट्टी ट्रैक्टर में भरकर ले जा रहे थे। इसी दौरान तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला ने उनका ट्रैक्टर जब्त कर थाने में खड़ा करवा दिया था। ट्रैक्टर छोड़ने के एवज में उन्होंने किसान से 35 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

यह भी पढ़ें: Sagar News: नामांतरण के बदले 10 हजार की रिश्वत लेते पटवारी को रंगे हाथों पकड़ा लोकायुक्त पुलिस सागर ने

लोकायुक्त की जाल में फंसे आरोपी

​किसान ब्रजबिहारी प्रजापति रिश्वत नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इसकी शिकायत सागर लोकायुक्त पुलिस से कर दी। लोकायुक्त टीम ने शिकायत के आधार पर जाल बिछाया। बातचीत के दौरान 35 हजार रुपये की डील तय हुई, जिसमें से 10 हजार रुपये पहले ही दिए जा चुके थे।


यह भी पढ़ें: जमीन सीमांकन के बदले 80 हजार की रिश्वत लेते राजस्व निरीक्षक गिरफ्तार: लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई

​शेष 25 हजार रुपये देने के लिए जब शिकायतकर्ता सरकारी आवास पर पहुंचा, तो रविशंकर शुक्ला ने वह रकम अपने पास खड़े चौकीदार देवीदयाल दहायत को देने के लिए कहा। जैसे ही रिश्वत की राशि चौकीदार को सौंपी गई, लोकायुक्त टीम ने मौके पर छापा मारकर दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया और केमिकल टेस्ट में उनके हाथ रंगीन पाए गए।

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कलेक्टर का CMHO कार्यालय में औचक निरीक्षण, 42 में से 21 कर्मचारी मिले गायब; 3 दिन का वेतन काटने के निर्देश


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अदालत ने दिया सख्त संदेश

​मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि समाज में भ्रष्टाचार को रोकने और कड़ा संदेश देने के लिए ऐसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों को दोषी माना और निम्नलिखित सजा सुनाई:

  • पूर्व नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 3 वर्ष और 5 वर्ष के कठोर कारावास के साथ क्रमशः 10 हजार और 15 हजार रुपये का जुर्माना।
  • चौकीदार देवीदयाल दहायत: रिश्वतखोरी में सहयोग करने के जुर्म में 5 वर्ष और 3 वर्ष के कठोर कारावास तथा 15 हजार और 10 हजार रुपये का जुर्माना
  • अदालत के आदेशानुसार दोनों आरोपियों की ये सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

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रानी अवंतीबाई लोधी राजकीय विश्वविद्यालय, सागर में 6 नए डीन नियुक्त

रानी अवंतीबाई लोधी राजकीय विश्वविद्यालय, सागर में 6 नए डीन नियुक्त


तीनबत्ती न्यूज: 19 जून,2026

सागर। मध्यप्रदेश के राज्यपाल तथा प्रदेश के समस्त शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति द्वारा रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर में छः संकायाध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई है। राज्यपाल के उपसचिव द्वारा 19 जून 2026 को जारी पत्रों के माध्यम से मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 27 की उपधारा 4 के प्रथम प्रावधान अन्तर्गत कला संकाय का डीन डॉ. विनय कुमार शर्मा (प्राध्यापक- अंग्रेजी) शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर (समाज विज्ञान संकाय का डॉ. नवीन कुमार गिडियन (प्राध्यापक- इतिहास) शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्‍तर उत्कृष्टता महाविद्यालय, सागर (विज्ञान संकाय का डॉ. आलोक कुमार जैन (प्राध्यापक- भौतिकी) ज्ञानचंद्र श्रीवास्तव शासकीय स्नातकोत्‍तर महाविद्यालय, दमोह (जीवविज्ञान संकाय का डॉ. गोपा जैन (प्राध्यापक- प्राणीशास्त्र) शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर( वाणिज्य- संकाय का डॉ. सुभाष कुमार अग्रवाल (प्राध्यापक-वाणिज्य) शासकीय स्नातकोत्‍तर महाविद्यालय दमोह तथा गृह विज्ञान संकाय का डॉ. पद्मा आचार्य (प्राध्यापक-गृह विज्ञान) शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्‍तर उत्कृष्टता महाविद्यालय सागर को संकायाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।


प्रावधान अनुसार सभी संकायाध्यक्षों की नियुक्ति दो वर्ष के लिए की गई है। कुलगुरू प्रो. विनोद कुमार मिश्रा ने विश्वविद्यालय में डीन की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि इन सभी का सक्रिय सहयोग विश्वविद्यालय के अकादमिक उन्नयन के लिए परिणाम मूलक साबित रहेगा। कुलसचिव प्रो. शक्ति जैन ने सभी का अभिनंदन करते हुए कहा कि सभी नियुक्त डीन विश्वविद्यालय को श्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थान बनाने में अपना योगदान देंगे।

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विधायक शैलेन्द्र जैन और कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इंडस्ट्रियल एरिया का किया निरीक्षण : बहुउपयोगी प्रोजेक्ट्स विकसित करने पर हुई विस्तृत चर्चा

विधायक शैलेन्द्र जैन और कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इंडस्ट्रियल एरिया का किया निरीक्षण :  बहुउपयोगी प्रोजेक्ट्स विकसित करने पर हुई विस्तृत चर्चा


तीनबत्ती न्यूज :19 जून 2026 

सागर: सागर के नियोजित विकास और औद्योगिक क्षेत्रों के पुनरुद्धार की दिशा में आज विधायक श्री शैलेन्द्र जैन एवं कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने खुरई रोड स्थित इंडस्ट्रियल एरिया का संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों के साथ नक्शे के माध्यम से क्षेत्र की शासकीय भूमि और जर्जर अधोसंरचना की बिंदुवार समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त एवं सागर स्मार्ट सिटी के सीईओ श्री राजकुमार खत्री, अनुविभागीय अधिकारी श्री अमन मिश्रा, जीएम डीआईसी श्रीमती मंदाकिनी पांडे सहित अन्य अधिकारियों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

कलेक्टर का CMHO कार्यालय में औचक निरीक्षण; 42 में से 21 अधिकारी-कर्मचारी मिले गायब : 3 दिन का वेतन काटने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश


70 हजार वर्ग फीट के जर्जर क्षेत्र को नया रूप देने की तैयारी

समीक्षा के दौरान बताया गया कि खुरई रोड इंडस्ट्रियल एरिया में मुख्य मार्ग से लगी लगभग 70 हजार वर्ग फीट भूमि पर मार्कफेड के पुराने गोदाम, पुराना वृद्धाश्रम और लंबे समय से बंद पड़ी फैक्ट्रियों के जर्जर भवन व खाली प्लॉट स्थित हैं। इस बेशकीमती शासकीय भूमि को पुनः उपयोगी बनाने और शहर हित में इसके विकास के लिए प्रोजेक्ट्स स्थापित करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

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पुराने भवनों का उपयोग

निरीक्षण के दौरान विधायक  शैलेन्द्र जैन ने कहा कि पुराने वृद्धाश्रम और उससे लगे जर्जर भवनों व खाली प्लॉट की करीब 34 हजार वर्ग फीट भूमि विभिन्न विकास कार्यों और निर्माण के लिए बेहद उपयुक्त है। उन्होंने बताया कि पूर्व में सागर को दो अत्याधुनिक ऑडिटोरियम की सौगात मिली थी, जिनमें से एक तिली चौराहे पर निर्माणाधीन है। दूसरे ऑडिटोरियम के लिए यहां अनुकूलताएं तलाशी जा रहीं हैं। जिससे इस क्षेत्र के नागरिकों को सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों के लिए एक बेहतरीन सुविधा मिल सकेगी।

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने उद्योग विभाग के अधिकारियों से उक्त क्षेत्र की समस्त शासकीय भूमि का रिकॉर्ड तलब किया। उन्होंने मार्कफेड के 4 भवनों, 2 प्राइवेट इंडस्ट्रीज के जर्जर ढांचों, शासकीय प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र के अनुपयोगी भवनों और कन्या छात्रावास की भूमि की 'गूगल अर्थ' (Google Earth) के माध्यम से तत्काल डिजिटल मैपिंग कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर श्रीमती पाल ने कहा कि खुरई रोड स्थित यह पूरी बेल्ट मुख्य मार्ग से जुड़ी होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण है और यहां  आधुनिक उपक्रम स्थापित करना  बेहतर विकल्प होगा। उन्होंने कहा कि मेट्रो शहरों की तर्ज पर अब सागर जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में भी आईटी पार्क विकसित करने की योजना है। चूंकि आईटी सेक्टर एक सर्विस-बेस्ड हब होता है, इसलिए शहर के नजदीक होने से युवाओं को रोजगार के बड़े अवसर मिलेंगे।




वार्डों में खेल परिसर और सामुदायिक भवनों के लिए भूमि चिह्नित करने के निर्देश




कलेक्टर ने निर्देशित किया कि शहर के विभिन्न वार्डों में उपलब्ध अन्य शासकीय भूमियों को भी चिह्नित करें। इन जमीनों पर जनोपयोगी विकास कार्यों जैसे- स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स (खेल परिसर), सामुदायिक भवन और पार्कों की योजना बनाकर उनका त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।


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कलेक्टर का CMHO कार्यालय में औचक निरीक्षण; 42 में से 21 अधिकारी-कर्मचारी मिले गायब : 3 दिन का वेतन काटने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश

कलेक्टर का CMHO कार्यालय में औचक निरीक्षण;  42 में से 21 अधिकारी-कर्मचारी मिले गायब : 3 दिन का वेतन काटने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश



तीनबत्ती न्यूज:  19 जून 2026

सागर: स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और शासकीय कार्यों में प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने आज मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में भारी लापरवाही सामने आई, जहां उपस्थिति पंजी देखने पर 42 अधिकारियों व कर्मचारियों में से 21 लोग अनुपस्थित पाए गए। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने सभी अनुपस्थित स्टाफ का तत्काल 3 दिन का वेतन काटने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी श्री अमन मिश्रा, सीएमएचओ डॉ. जी.पी. राय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक स्टाफ उपस्थित था।

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कलेक्टर का CMHO कार्यालय में औचक निरीक्षण, 42 में से 21 कर्मचारी मिले गायब; 3 दिन का वेतन काटने के निर्देश


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एक-एक शाखा पहुंचकर जांची व्यवस्थाएं

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने सीएमएचओ कार्यालय परिसर का भ्रमण कर वहां संचालित हो रही सभी शाखाओं का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने स्थापना शाखा (जिसमें कर्मचारियों के अवकाश, क्लेम्स और सर्विस बुक आदि का संधारण होता है), लिपिक शाखा तथा नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) यूनिट सहित विभिन्न विभागों की टेबल पर जाकर फाइलों और रिकॉर्ड की स्थिति देखी।



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कलेक्टर ने निर्देश दिए कि शासकीय कर्मचारियों के अवकाश, क्लेम और सर्विस बुक से जुड़े मामलों का निपटारा समय-सीमा में किया जाए, इसमें किसी भी स्तर पर लेटलतीफी न की जाए। इसके साथ ही एनएचएम यूनिट के तहत जिले में चल रही स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।


निरीक्षण में स्थिति मिली निराशाजनक

निरीक्षण के दौरान जब कलेक्टर ने कार्यालय के उपस्थिति रजिस्टर (Attendance Register) की सघन जांच की, तो स्थिति अत्यंत निराशाजनक मिली। दफ्तर के 42 अधिकारियों-कर्मचारियों में से 21 लोग बिना किसी पूर्व सूचना या स्वीकृत अवकाश के ड्यूटी से नदारद थे। इस घोर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर श्रीमती पाल ने सीएमएचओ को निर्देशित किया कि सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को तत्काल 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया जाए और उनका 3 दिन का वेतन काटने की दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

आम जनता को न हो परेशानी: कलेक्टर

कलेक्टर ने सीएमएचओ को स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य विभाग सीधे तौर पर आम जनता और मरीजों से जुड़ा हुआ है। कार्यालय में आने वाले नागरिकों और दूर-दराज से आने वाले लोगों को किसी भी काम के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने पूरे दफ्तर में साफ-सफाई बनाए रखने, फाइलों का सुव्यवस्थित रखरखाव करने और सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्धारित समय पर दफ्तर में उपस्थित रहने की कड़ी हिदायत दी।


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