Editor: Vinod Arya | 94244 37885
Bundelkhand Medical College लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Bundelkhand Medical College लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सागर: मां की अंतिम इच्छा पूरी कर बेटियों ने कराया मरणोपरांत नेत्रदान, दो लोगों की जिंदगी में लौटेगा उजाला


सागर: मां की अंतिम इच्छा पूरी कर बेटियों ने कराया मरणोपरांत नेत्रदान, दो लोगों की जिंदगी में लौटेगा उजाला


तीनबत्ती न्यूज: 06 जुलाई, 2026

सागर। सागर में सड़क दुर्घटना में 52 वर्षीय श्रीमती भारती जैन के आकस्मिक निधन के बाद उनकी बेटियों ने मां की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए मरणोपरांत नेत्रदान कराकर मानवता की मिसाल पेश की। इस प्रेरणादायी निर्णय से दो दृष्टिहीन लोगों के जीवन में नई रोशनी लौटने की उम्मीद जगी है।

यह भी पढ़ें: बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय में सफल नेत्र प्रत्यारोपण:8 नेत्रदान से तीन मरीजों की जिंदगी में लौटी रोशनी : अब तक 25 को मिला उजाला

स्थानीय चकराघाट स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर के पास रहने वाली श्रीमती भारती जैन का सड़क हादसे में निधन हो गया। शोक की इस घड़ी में उनकी बेटियों प्रियांशी, गुंजन और मिनी ने बताया कि उनकी मां जीवनभर नेत्रदान करने की इच्छा व्यक्त करती थीं। उनके निधन के तुरंत बाद परिजनों और दामाद प्रखर जैन ने बिना विलंब किए मोहन फाउंडेशन को सूचना दी।

यह भी पढ़ेंसिंघई परिवार ने पेश की नेत्रदान- देहदान की मिसाल: श्रीमती किरण सिंघई का नेत्रदान और देहदान : तीन साल पहले पति प्रकाश चंद सिंघई का भी हुआ था देहदान

सूचना मिलते ही मोहन फाउंडेशन ने बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय (बीएमसी), सागर के आई बैंक की प्रभारी डॉ. सारिका चौहान को अवगत कराया। इसके बाद आई बैंक की टीम तत्काल बीएमसी की मोर्चरी पहुंची और परिजनों की लिखित सहमति तथा सभी चिकित्सीय मानकों का पालन करते हुए कॉर्निया सुरक्षित निकालकर आई बैंक में संरक्षित किया गया।

यह भी बढ़ेपुनीत कार्य: निधन के बाद परिजनों ने कराया कामता प्रसाद का नेत्रदान : बीएमसी आई बैंक की टीम ने सुरक्षित किया कॉर्निया

परिवार का निर्णय समाज के लिए प्रेरणा

बीएमसी के अधिष्ठाता डॉ. पी. एस. ठाकुर ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि अपार दुख के समय भी जैन परिवार ने जिस संवेदनशीलता का परिचय दिया, वह समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि मां की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए बेटियों द्वारा लिया गया यह निर्णय दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला लाने का माध्यम बनेगा।

वहीं नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे ने भी परिवार के इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे सामाजिक जागरूकता और मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

यह भी पढ़ेंमानवता की सर्वोच्च सेवा: सुगंधी बाई जैन ने मरणोपरांत किया नेत्रदान और देहदान : गार्ड ऑफ ऑनर देकर किया सम्मानित

इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में आई बैंक की टीम के डॉ. अंजलि वीरानी पटेल, डॉ. पुरवा, डॉ. मोदी, डॉ. अजय, डॉ. हर्षिता सहित नर्सिंग स्टाफ राम लखन मीणा, ओमप्रकाश कुमावत एवं अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

क्या है नेत्रदान?

चिकित्सकों के अनुसार नेत्रदान वास्तव में कॉर्निया दान होता है। यह पूरी तरह स्वैच्छिक प्रक्रिया है और मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर इसे पूरा करना आवश्यक होता है। बीएमसी सागर के आई बैंक में यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है।

नेत्रदान से संबंधित जानकारी या आकस्मिक सूचना के लिए आई बैंक हेल्पलाइन: 7697271108 पर संपर्क किया जा सकता है।


Share:

www.Teenbattinews.com

Archive