डॉ. गौर विश्वविद्यालय और जीवाजी विश्वविद्यालय के बीच होगा शैक्षणिक समझौता
• जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद का कार्यभार संभालने के बाद पहली बार सागर पहुंचे प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत, डॉ. गौर को किया नमन
तीनबत्ती न्यूज: 14 सितम्बर, 2026
सागर। डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के समाजशास्त्र एवं समाजकार्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष, डीन एवं अकादमिक अफेयर्स के निदेशक रहे प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलगुरु पद का कार्यभार ग्रहण करने के बाद पहली बार सागर आगमन किया। इस दौरान उन्होंने गौर समाधि पहुंचकर डॉ. हरिसिंह गौर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर स्थित डॉ. गौर की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
विश्वविद्यालय की प्रभारी कुलपति प्रो. वर्षा शर्मा ने भी डॉ. गौर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। इसके बाद विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति की अध्यक्षता में आयोजित संवाद कार्यक्रम में प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत का शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
डॉ. गौर की प्रेरणा से मिली उपलब्धियां
इस अवसर पर प्रभारी कुलपति प्रो. वर्षा शर्मा ने प्रो. राजपूत को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रो. राजपूत का जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद पर पहुंचना डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के लिए गौरव और प्रसन्नता की बात है।
उन्होंने प्रो. राजपूत के मिलनसार एवं सहज व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि डॉ. गौर की प्रेरणा और आशीर्वाद का परिणाम है। उन्होंने दोनों विश्वविद्यालयों के बीच परस्पर संवाद, सहयोग और अकादमिक संबंधों को मजबूत करने की बात कही।
"मैं आज जो कुछ हूं, डॉ. गौर के कारण हूं"
प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने विश्वविद्यालय की प्रभारी कुलपति सहित सभी अधिकारियों एवं शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे आज जो कुछ भी हैं, उसमें डॉ. हरिसिंह गौर का महत्वपूर्ण योगदान है। डॉ. गौर की प्रेरणा से उन्होंने जीवन में अपने लक्ष्यों को हासिल किया है।उन्होंने कहा कि डॉ. गौर को स्मरण करने से कठिन से कठिन रास्ता भी आसान हो जाता है। डॉ. गौर एक प्रेरक पुंज के रूप में हमेशा हमारे सामने विद्यमान हैं। इसी भावना के साथ उन्होंने जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद सबसे पहले अपने कुलगुरु कक्ष में डॉ. गौर की प्रतिमा स्थापित करवाई। प्रो. राजपूत ने कहा कि जीवाजी विश्वविद्यालय में भी डॉ. हरिसिंह गौर को श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। उनके द्वारा किए गए महान कार्य पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी हैं।
दोनों विश्वविद्यालयों के बीच होगा शैक्षणिक समझौता
प्रो. राजपूत ने कहा कि उनकी उपलब्धियों की यात्रा में डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के सभी सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसके लिए वे सदैव आभारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि कुलगुरु के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद भी डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से उनका संवाद, संपर्क और सहयोग निरंतर बना रहेगा।
उन्होंने बताया कि शीघ्र ही डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय और जीवाजी विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक समझौता (एमओयू) किया जाएगा। इससे दोनों विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक गतिविधियों के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी सहयोग और संवाद को बढ़ावा मिलेगा। दोनों संस्थानों के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी इससे लाभान्वित हो सकेंगे।
गौर अध्ययन केंद्र और तीनबत्ती पहुंचकर भी किया नमन
सागर प्रवास के दौरान प्रो. राजपूत ने शहर के तीनबत्ती स्थित डॉ. हरिसिंह गौर की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। इसके अलावा उन्होंने गौर अध्ययन केंद्र पहुंचकर भी डॉ. गौर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान प्रभारी कुलपति प्रो. वर्षा शर्मा, प्रो. आशीष वर्मा और प्रो. राजेंद्र यादव ने भी पुष्प अर्पित किए।
संवाद कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एस.पी. उपाध्याय, संकाय मामलों के निदेशक प्रो. अजीत जायसवाल, प्रो. अनिल जैन, प्रो. यू.के. पाटिल, प्रो. नागेश दुबे, प्रो. रश्मि सिंह, प्रो. अष्मिता गजभिये, प्रो. राजेंद्र यादव, प्रो. एम.एस. पाहवा, उपकुलसचिव सतीश कुमार, दीपक शाक्य, डॉ. पंकज तिवारी, राहुल गिरी गोस्वामी, डॉ. मोहन टी.ए., डॉ. विवेक जायसवाल, डॉ. रूपेंद्र चौरसिया, सचिन सिंह गौतम सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। उपस्थित शिक्षकों एवं अधिकारियों ने प्रो. राजपूत को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की।









