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“गौर बब्बा मुझे क्षमा करना…” डॉ. गौर विश्वविद्यालय की स्थिति पर पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे और भाजपा नेता अभिषेक भार्गव का दर्द छलका

“हम अपराधी हैं डॉ. गौर साहब के…”: भाजपा नेता अभिषेक भार्गव ने डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थिति पर उठाए सवाल

• बुंदेलखंड के विद्यार्थियों को प्रवेश में प्राथमिकता देने की मांग को लेकर 2009-10 में किए आंदोलन का किया जिक्र, बोले—स्थानीय छात्रों से आबाद होगा विश्वविद्यालय, तभी पूरा होगा गौर साहब का सपना



तीनबत्ती न्यूज: 25 अक्टूबर, 2026

सागर। डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति और बुंदेलखंड के विद्यार्थियों की भागीदारी को लेकर भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट लिखी है। उन्होंने पोस्ट में विश्वविद्यालय की स्थापना के उद्देश्य, केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद स्थानीय विद्यार्थियों के साथ कथित तौर पर कमजोर हुए जुड़ाव और बुंदेलखंड के युवाओं के लिए शिक्षा के अवसरों पर सवाल उठाए हैं।

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डॉ. गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय पर अभिषेक भार्गव के सवाल, बोले- हम अपराधी हैं डॉ. गौर साहब के

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अभिषेक भार्गव ने अपनी पोस्ट की शुरुआत “हम अपराधी हैं डॉ. गौर साहब के” शब्दों से करते हुए कहा कि डॉ. सर हरिसिंह गौर ने अपनी पूरी संपत्ति और जीवनभर की कमाई सागर में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए समर्पित कर दी थी। उनका उद्देश्य बुंदेलखंड के गरीब विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर, सस्ती और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूसरे प्रदेशों में न जाना पड़े।

केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद स्थानीय विद्यार्थियों से दूरी का आरोप

अभिषेक भार्गव ने लिखा कि जब सागर विश्वविद्यालय राजकीय विश्वविद्यालय था, तब बुंदेलखंड के हजारों छात्र-छात्राएं यहां विभिन्न विभागों में अध्ययन करते थे। क्षेत्र के अनेक महाविद्यालय इससे संबद्ध थे और छात्रावासों में बड़ी संख्या में स्थानीय विद्यार्थी रहते थे। विश्वविद्यालय से पढ़कर निकले विद्यार्थियों ने राजनीति, प्रशासन, समाज सेवा, साहित्य, संस्कृति, उद्योग, फिल्म और खेल सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई।

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उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद बुंदेलखंड के विद्यार्थियों की संख्या और स्थानीय समाज का विश्वविद्यालय से भावनात्मक जुड़ाव कम हुआ है। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय में स्थानीय विद्यार्थियों की भागीदारी को लेकर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।


बुंदेलखंड के विद्यार्थियों के प्रवेश के लिए किया था आंदोलन

अभिषेक भार्गव ने अपनी पोस्ट में बताया कि सागर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के लिए बुंदेलखंड के विद्यार्थियों और जागरूक नागरिकों ने अपने स्तर पर प्रयास किए थे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने स्वयं तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री और प्रधानमंत्री के नाम रक्त से हजारों पोस्टकार्ड लिखे थे। इसके साथ ही हजारों विद्यार्थियों के हस्ताक्षर वाला करीब एक किलोमीटर लंबा ज्ञापन प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा था।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद वर्ष 2009-10 में उन्होंने सागर सहित पूरे बुंदेलखंड के विद्यार्थियों को साथ लेकर विश्वविद्यालय में स्थानीय विद्यार्थियों के प्रवेश में आरक्षण अथवा प्राथमिकता की मांग को लेकर आंदोलन किया था।

उनके मुताबिक, उस समय कई बुद्धिजीवियों ने इस आंदोलन का विरोध किया था। उनका मानना था कि केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। लेकिन अभिषेक भार्गव के अनुसार, समय के साथ इन उम्मीदों पर सवाल खड़े हुए हैं।

विश्वविद्यालय की सुविधाओं और उपलब्धियों पर भी उठाए सवाल

भाजपा नेता ने विश्वविद्यालय की सुविधाओं, उपलब्धियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विश्वविद्यालय के खेल मैदान की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि परिसर की मौजूदा हालत से विश्वविद्यालय के स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले समय-समय पर मीडिया में सामने आते रहे हैं।

“गौर साहब को भारत रत्न की मांग के साथ उनके सपने को भी याद करें”

अभिषेक भार्गव ने लिखा कि डॉ. हरिसिंह गौर को भारत रत्न देने की मांग करना उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक तरीका है, लेकिन उनके वास्तविक सपने को पूरा करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि डॉ. गौर ने बुंदेलखंड के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना की थी और इस उद्देश्य को पूरा करने की जिम्मेदारी पूरे क्षेत्र की है।

उन्होंने भावुक अंदाज में लिखा कि जब तक बुंदेलखंड के विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय आबाद नहीं होगा, तब तक डॉ. गौर का सपना अधूरा रहेगा। पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “गौर बब्बा मुझे क्षमा करना, क्योंकि मैं भी इस पाप में भागीदार हूं।”

पोस्ट पर विचार निजी

अभिषेक भार्गव ने अपनी पोस्ट को व्यक्तिगत विचार बताते हुए यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। यदि विश्वविद्यालय में सागर संभाग सहित बुंदेलखंड के विद्यार्थी बहुसंख्यक हैं, तो उनकी पोस्ट को नजरअंदाज करने की बात भी उन्होंने कही।

उनकी इस पोस्ट ने डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्थानीय विद्यार्थियों की भागीदारी, प्रवेश के अवसरों, सुविधाओं और विश्वविद्यालय के मूल उद्देश्य को लेकर चर्चा का मुद्दा सामने रखा है।

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