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अनुशासनहीनता के आरोप में प्राचार्य निलंबित : छात्राओं ने की थी शिकायत: प्राचार्य करते थे बालिका टायलेट का उपयोग : सागर कमिश्नर अनिल सुचारी ने की कार्रवाई

छतरपुर : ईशानगर स्कूल के प्राचार्य बसंत लाल प्रजापति निलंबित, अनुशासनहीनता के आरोपों पर संभागायुक्त ने की कार्रवाई


तीनबत्ती न्यूज : 09 अगस्त 2026

सागर । सागर संभागायुक्त  अनिल सुचारी ने छतरपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ईशानगर के प्राचार्य बसंत लाल प्रजापति को अनुशासनहीनता के आरोपों पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई छतरपुर कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव और जांच प्रतिवेदन के परीक्षण के बाद की गई। स्कूल की छात्राओं और कर्मचारियों ने प्राचार्य की शिकायत की थी।

प्राचार्य श्री प्रजापति के विरुद्ध प्राप्त शिकायत की जांच जिला शिक्षा अधिकारी छतरपुर द्वारा गठित जांच समिति से कराई गई थी। संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, सागर संभाग के 15 जुलाई 2026 को छतरपुर प्रवास के दौरान भी प्राचार्य के विरुद्ध शिकायत प्राप्त हुई थी।

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जांच में सामने आए गंभीर आरोप

जांच प्रतिवेदन के अनुसार विद्यालय में पुरुष टॉयलेट उपलब्ध होने के बावजूद प्राचार्य द्वारा बालिका टॉयलेट का उपयोग किया जाना पाया गया। इसके अलावा संस्था में पदस्थ महिला कर्मचारियों को परेशान करने और मानसिक प्रताड़ना देने के आरोपों से जुड़े तथ्य भी जांच में सामने आए।

जांच में अन्य कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, कर्मचारियों का अकारण वेतन रोकने तथा शासकीय योजनाओं की मुखालफत करने संबंधी तथ्य भी पाए गए।

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प्रथम दृष्ट्या दोषी पाए गए प्राचार्य

छतरपुर कलेक्टर से प्राप्त प्रस्ताव और जांच प्रतिवेदन के अवलोकन के बाद संभागायुक्त श्री अनिल सुचारी ने श्री बसंत लाल प्रजापति को प्रथम दृष्ट्या दोषी पाया। उनके कृत्यों को पदीय दायित्वों के निर्वहन में स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता का द्योतक माना गया।

संभागायुक्त ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 के प्रावधानों का उल्लंघन माना है।

तत्काल प्रभाव से निलंबन

मामले में संभागायुक्त ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ईशानगर, जिला छतरपुर के प्राचार्य बसंत लाल प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

निलंबन अवधि के दौरान श्री प्रजापति का मुख्यालय कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, जिला छतरपुर निर्धारित किया गया है।

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छतरपुर: फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र पर प्राथमिक शिक्षक की नौकरी निरस्त, मेडिकल बोर्ड में केवल 23% दिव्यांगता

छतरपुर: फर्जी दिव्यांगता का मामला, जिला शिक्षा अधिकारी ने प्राथमिक शिक्षक की सेवा की निरस्त


तीनबत्ती न्यूज: 05 जुलाई, 2026

छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ दिव्यांग आरक्षण के तहत नियुक्त एक प्राथमिक शिक्षक की सेवा को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई शिक्षक की दिव्यांगता प्रतिशत मानक से काफी कम पाए जाने के बाद की गई है।

​क्या है पूरा मामला?

​डीईओ कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, दमोह जिले की बटियागढ़ तहसील के ग्राम लुकायन (पोस्ट बकायन) निवासी सुरेंद्र पटेल (पिता श्री ऋषि कुमार पटेल, रोल नंबर 22769673) की नियुक्ति 30 मार्च 2023 को शासकीय केंद्रीय प्राथमिक शाला, बक्सवाहा में प्राथमिक शिक्षक के पद पर हुई थी। सुरेंद्र पटेल को यह नियुक्ति दिव्यांग श्रेणी के अंतर्गत श्रवण बाधित (HH - Hearing Handicapped) कोटे से मिली थी।

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​जांच में खुली पोल: केवल 23% पाई गई दिव्यांगता

​नियुक्ति आदेश के प्रावधानों के तहत जब संबंधित शिक्षक का मेडिकल बोर्ड से परीक्षण कराया गया, तो मामला संदिग्ध पाया गया। जिला मेडिकल बोर्ड, छतरपुर द्वारा मामला संभागीय मेडिकल बोर्ड, सागर को रेफर किया गया था।

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​संभागीय मेडिकल बोर्ड, सागर द्वारा 18 जून 2026 को प्रस्तुत की गई प्रमाणीकरण रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि सुरेंद्र पटेल की श्रवण बाधित दिव्यांगता केवल 23 प्रतिशत ही है। इसके साथ ही मेडिकल बोर्ड ने उन्हें शासकीय सेवा के लिए 'अनफिट' प्रतिवेदित किया।

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नियम क्या कहता है?

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के नियमों और शासकीय प्रावधानों के अनुसार, दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेने के लिए अभ्यर्थी में कम से कम 40 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता होना अनिवार्य है। सुरेंद्र पटेल की दिव्यांगता निर्धारित न्यूनतम सीमा से 17% कम पाई गई।


​सुनवाई में नहीं दे पाए संतोषजनक जवाब

​मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग द्वारा अभ्यर्थी सुरेंद्र पटेल को 29 जून 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने (सुनवाई का) अवसर दिया गया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान शिक्षक अपनी दिव्यांगता के संबंध में कोई ठोस या संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर सके।

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​तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त

​शिक्षक द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषजनक न होने और दिव्यांग श्रेणी में पात्रता की शर्तों को पूरा न करने के कारण, जिला शिक्षा अधिकारी (और डिप्टी कलेक्टर) कौशल सिंह ने आदेश जारी कर सुरेंद्र पटेल की प्राथमिक शिक्षक पद पर की गई नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। विभाग की इस सख्त कार्रवाई से फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने वाले तत्वों में हड़कंप मच गया है।

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