दलबदल मामला: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बीना विधायक निर्मला सप्रे पर MP विधानसभा अध्यक्ष को 2 महीने में फैसला लेने का निर्देश
तीनबत्ती न्यूज: 04 नवंबर, 2026
भोपाल/नई दिल्ली:मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीतने वाली विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एमपी विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को इस मामले में जुलाई 2024 से लंबित याचिका पर दो महीने के भीतर अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
निर्मला सप्रे ने वर्ष 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीना सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करना शुरू कर दिया और पार्टी के पक्ष में प्रचार भी किया।
लोकसभा चुनाव के दौरान 5 मई 2024 को निर्मला सप्रे सागर जिले के राहतगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच पर पहुंचीं और भाजपा में शामिल होने का औपचारिक ऐलान किया।
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विधानसभा अध्यक्ष से सदस्यता रद्द करने की मांग
निर्मला सप्रे द्वारा पाला बदलने के बाद 30 जून 2024 को मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को आवेदन सौंपा था। उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता खत्म करने और उनके निर्वाचन को शून्य घोषित करने की मांग की थी।
कांग्रेस का आरोप था कि 90 दिनों का समय बीत जाने के बाद भी विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इस याचिका पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण पार्टी को न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने याचिकाकर्ता का पक्ष रखा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान की दसवीं अनुसूची से जुड़े मामलों का निपटारा बिना किसी देरी के जल्द से जल्द होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जल्द कार्रवाई तब भी आवश्यक है, जब हाईकोर्ट को मामले में कोई तत्काल जरूरत नजर न आई हो।
इस निर्देश के बाद अब विधानसभा अध्यक्ष को अगले दो महीनों के भीतर दलबदल याचिका पर फैसला सुनाना होगा। कानूनी जानकारों और मीडिया प्लेटफॉर्म 'बार एंड बेंच' द्वारा साझा की गई इस जानकारी को वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने भी री-पोस्ट कर पुष्टि की है।







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