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सोशल मीडिया पर अप्रमाणित , सनसनीखेज दावों से पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने पर हाईकोर्ट सख्त • मानहानिकारक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश

सोशल मीडिया पर अप्रमाणित , सनसनीखेज  दावों से पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने पर हाईकोर्ट सख्त

• मानहानिकारक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश



तीनबत्ती न्यूज: 12 अगस्त, 2026

सागर। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री एवं खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और प्रकाशनों पर सुनवाई के बाद दिए आदेश में  गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि संबंधित सामग्री में से कई पोस्ट और वीडियो वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने तथा मामले को सनसनीखेज बनाने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तुत सामग्री निष्पक्ष रिपोर्टिंग अथवा तथ्यात्मक आलोचना के बजाय मामले पर समय से पहले निष्कर्ष निकालती हुई प्रतीत होती है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक प्रतिवादियों को श्री भूपेन्द्र सिंह के विरुद्ध इसी प्रकार के या समान मानहानिकारक आरोप वाली पोस्ट प्रकाशित करने से रोकने के साथ सूचीबद्ध आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की आड़ में किसी व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को बदनाम या अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रेस को जनहित से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता निरंकुश नहीं है और मीडिया मंचों को किसी व्यक्ति की चरित्र-हत्या से बचना चाहिए।


इस प्रकरण में प्रतिवादी ‘सबकी खबर’ न्यूज चैनल के संचालक रवीन्द्र जैन, फेसबुक यूजर अभिषेक जैन सहित अन्य पांच प्रतिवादी शामिल हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में प्रतिवादी अभिषेक जैन के फेसबुक प्रोफाइल, ‘सबकी खबर’ यूट्यूब चैनल, ‘नई दुनिया’ के डिजिटल विंग से जुड़े पत्रकार, एक कांग्रेस कार्यकर्ता तथा ‘राजधानी तक’ न्यूज चैनल के संचालकध्मुख्य समाचार एंकर सहित सोशल मीडिया मंचों से जुड़े प्रतिवादियों का उल्लेख किया गया है। उच्च न्यायालय के समक्ष वादी श्री भूपेन्द्र सिंह  की ओर से यह आरोप रखा गया था कि इन माध्यमों से उनके विरुद्ध भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री को लगातार प्रसारित कराया गया।


उच्च उच्च न्यायालय ने आपत्तिजनक वीडियो, लेखों और सोशल मीडिया पोस्टों को प्रथम दृष्टया देखने के बाद कहा कि इनमें से अनेक पोस्ट जानबूझकर वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और मामले को सनसनीखेज बनाने का प्रयास करती प्रतीत होती हैं। उच्च न्यायालय के अनुसार, प्रतिवादी ने सोशल मीडिया पोस्टों और वीडियो श्रृंखला के माध्यम से कथित मानहानिकारक अभियान को आगे बढ़ाया। पत्रकारिता संबंधी जांच के नाम पर पूछे गए सवालों को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया कि उनसे यह धारणा बनती है कि वादी ने सक्रिय रूप से प्रताड़ित किया, जबकि प्रसारित आरोपों और उनसे तैयार किए गए पक्षपाती कथानक के समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण सामने नहीं रखा गया है।


उच्च न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में कहा कि विवादित वीडियो, पोस्ट और प्रकाशनों को प्रथम दृष्टया देखने पर वे निष्पक्ष रिपोर्टिंग अथवा तथ्यात्मक आलोचना प्रस्तुत करते हुए दिखाई नहीं देते। बल्कि इन सामग्रियों में मामले पर समय से पहले ही निष्कर्ष निकालते हुए वादी को बिना किसी तथ्यात्मक आधार या न्यायिक निर्धारण के तानाशाह और उत्पीड़क के रूप में प्रस्तुत किया गया है।


उच्च न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति की सार्वजनिक आलोचना की सीमा सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक व्यापक होती है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के नाम पर किसी व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को बदनाम या अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा कि मानहानि और सार्वजनिक आलोचना के बीच बहुत महीन अंतर है और इस संतुलन को बनाए रखना न्यायालयों का महत्वपूर्ण दायित्व है। आदेश में लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी बनाम साकेत गोखले मामले की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सोशल मीडिया के दौर में किसी सार्वजनिक व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना बेहद आसान हो गया है तथा वर्षों की निस्वार्थ सेवा से अर्जित प्रतिष्ठा को एक विचारहीन टिप्पणी भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। उच्च न्यायालय ने कहा कि मीडिया की स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यक्ति के जीवन, गरिमा और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के बीच नाजुक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। प्रेस को जनहित के विषयों पर रिपोर्टिंग करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता निरंकुश नहीं है और इसका प्रयोग सावधानी एवं जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। मीडिया मंचों को किसी व्यक्ति की चरित्र-हत्या से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जनता के मन में पूर्वाग्रह पैदा होने के साथ उसकी प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।


उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी कहा कि जब समाचार रिपोर्टिंग समय से पहले किसी निष्कर्ष को व्यक्त करने लगे और प्रभावी रूप से उस न्यायिक प्रक्रिया का स्थान लेने लगे, जो केवल न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में है, तो ऐसी स्थिति ‘मीडिया ट्रायल’ का रूप ले लेती है। उच्च न्यायालय के अनुसार, मीडिया द्वारा इस प्रकार समानांतर जांच और अन्वेषण किया जाना न्याय के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है। इसलिए अप्रमाणित आरोपों के गंभीर परिणामों से नागरिकों की रक्षा के लिए ऐसी प्रवृत्ति पर उचित नियंत्रण आवश्यक है, विशेषकर तब जब आरोपों को सनसनीखेज रूप देकर प्रस्तुत किया जा रहा हो।


उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद उच्च न्यायालय प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि प्रतिवादियों द्वारा प्रसारित और प्रकाशित पोस्ट तथा वीडियो अप्रमाणित दावों को सनसनीखेज बनाते हैं और वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। उच्च न्यायालय ने इन परिस्थितियों में प्रतिवादियों को अगली सुनवाई तक वादी के खिलाफ इस तरह के अथवा इसी प्रकार के मानहानिकारक आरोप वाली कोई पोस्ट प्रकाशित करने से रोकने का आदेश दिया है। साथ ही प्रतिवादी रविन्द्र जैन, अभिषेक जैन तथा आशुतोष शर्मा को तालिका में सूचीबद्ध यूट्यूब पर प्रसारित मानहानिकारक पोस्ट और वीडियो तत्काल हटाने तथा अगली सुनवाई तक उस स्थिति को बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने सभी प्रतिवादियों को दो हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने का आदेश देते हुए सुनवाई के लिये 5 नवम्बर 2026 की तारीख नीयत की है।



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सागर में भाजपा की मासिक बैठक: प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा- तिरंगा यात्रा राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता का जनअभियान

सागर में भाजपा की मासिक बैठक: तिरंगा यात्रा को जनअभियान बनाने का आह्वान, प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने वर्चुअल किया संबोधित

सागर भाजपा की मासिक बैठक में  संबोधित करते जिला प्रभारी लोकेंद्र पाराशर और भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी

तीनबत्ती न्यूज: 07 अगस्त, 2026

सागर। भारतीय जनता पार्टी की मासिक बैठक संभागीय भाजपा कार्यालय सागर में आयोजित की गई। बैठक को उपमुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान है।

राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक प्रगति के साथ देश की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना भी आवश्यक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर तक पूरे उत्साह के साथ हर घर तिरंगा अभियान और तिरंगा यात्रा को सफल बनाने का आह्वान किया।



बैठक को प्रदेश मंत्री एवं सागर जिला प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के अभियान केवल संगठनात्मक गतिविधियां नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, जनजागरण और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता के माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि सागर भाजपा संगठन हमेशा प्रदेश में अनुकरणीय कार्य करता आया है और इस बार भी हर घर तिरंगा अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ सफल बनाकर नया उदाहरण प्रस्तुत करना है।

लोकेंद्र पाराशर ने कहा कि तिरंगा देश की अस्मिता, स्वाभिमान, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और 140 करोड़ भारतीयों की एकता का प्रतीक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से घर-घर संपर्क कर नागरिकों को अपने घरों, प्रतिष्ठानों और कार्यालयों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित करने की अपील की। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।

उन्होंने विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और युवाओं के बीच संविधान, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और राष्ट्र निर्माण में योगदान जैसे विषयों पर संवाद कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया।

भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी ने कहा कि सागर जिले ने पूर्व में भी विभिन्न संगठनात्मक अभियानों में प्रदेश स्तर पर पहचान बनाई है। यह कार्यकर्ताओं की एकजुटता और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने के लिए बूथ स्तर तक जिम्मेदारियां तय कर पूरी ऊर्जा और अनुशासन के साथ कार्य किया जाएगा।

बैठक में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुधा जैन, जिला महामंत्री चैन सिंह ठाकुर, चेतराम अहिरवार, सुमित यादव सहित जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, मोर्चा अध्यक्ष, प्रकोष्ठ संयोजक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

बैठक का संचालन जिला मंत्री अर्जुन पटेल ने किया, जबकि आभार जिला उपाध्यक्ष संतोष सिंह ने व्यक्त किया। जिला मीडिया प्रभारी श्रीकांत जैन ने जानकारी दी।


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हाईकोर्ट से कांग्रेस को झटका, मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के खिलाफ दायर याचिका खारिज •कांग्रेस नेता नीरज शर्मा की रिट पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा - याचिका पूर्णतः भ्रांतिपूर्ण

हाईकोर्ट से कांग्रेस को झटका, मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के खिलाफ दायर याचिका खारिज

•कांग्रेस नेता नीरज शर्मा की रिट पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा - याचिका पूर्णतः भ्रांतिपूर्ण 



तीनबत्ती न्यूज: 01अगस्त ,2026

सागर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत को बड़ी राहत देते हुए कांग्रेस नेता एवं पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी नीरज शर्मा द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका मंत्री राजपूत के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रस्तुत किए गए चुनावी शपथपत्र में संपत्ति संबंधी जानकारी छिपाने के आरोपों को लेकर दायर की गई थी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया एवं न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए नीरज शर्मा की याचिका को 29 जुलाई 2026 को यह कह कर निरस्त कर दिया कि दायर याचिका पूर्णतः भ्रांतिपूर्ण है। इसी विषय से संबंधित कांग्रेस नेता राजकुमार धनोरा की याचिका पर भी संयुक्त रूप से सुनवाई हुई।

04 अगस्त को सुनवाई

इस संबंध में निर्वाचन आयोग ने भी अपनी तरफ से उच्च न्यायालय में अपना जवाब प्रस्तुत किया है। हालांकि, धनोरा की ओर से उनके अधिवक्ता ने बहस के लिए समय मांगा, जिसके बाद न्यायालय ने याचिका की पोषणीयता (मेंटेनेबिलिटी) पर सुनवाई के लिए 4 अगस्त की तिथि निर्धारित की है।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने अपने परिवार से संबंधित एक शिक्षा समिति की संपत्तियों का विवरण चुनावी हलफनामे में शामिल नहीं किया। इस पर मंत्री की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विवेक रंजन पाण्डेय ने न्यायालय में पक्ष रखते हुए कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार प्रत्याशी को केवल अपनी तथा अपने आश्रितों की संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य है। मंत्री राजपूत ने अपने तथा अपनी आश्रित पत्नी की सभी संपत्तियों का पूर्ण विवरण शपथपत्र में प्रस्तुत किया था और किसी प्रकार की जानकारी नहीं छिपाई गई।

अधिवक्ता पाण्डेय ने बताया कि दोनों याचिकाएं विधानसभा चुनाव संपन्न होने के लगभग दो वर्ष बाद दायर की गईं, जो निर्वाचन कानूनों की भावना के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने भी न्यायालय से इन याचिकाओं को निरस्त किए जाने का आग्रह किया है। 

छवि धूमिल करने असत्य एवं भ्रामक याचिकाएं दायर की : मंत्री श्री राजपूत

फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि उन्होंने अब तक सात विधानसभा चुनाव लड़े हैं और कभी भी अपने चुनावी शपथपत्र में कोई जानकारी नहीं छिपाई। उन्होंने कहा कि उनके विरुद्ध आज तक कोई चुनाव याचिका भी प्रस्तुत नहीं हुई है। उनके अनुसार केवल मीडिया में सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से असत्य एवं भ्रामक तथ्यों के आधार पर रिट याचिकाएं दायर की गई थीं। उन्होंने कहा कि समान आधार वाली एक याचिका उच्च न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी है, जबकि दूसरी याचिका पर अभी सुनवाई शेष है। मंत्री ने न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिलने का पूरा भरोसा है।

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