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सागर : बंडा शराबकांड में 11 मौतें, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने BMC पहुंचकर मरीजों का जाना हाल; बोले- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। • सभी शराब दुकानों की जांच, उनके स्टॉक की निगरानी और अवैध कारोबार की गहन जांच • शराब कांड में 20 पर FIR: 10 आरोपी पुलिस हिरासत में

सागर : बंडा शराबकांड में 11 मौतें, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने BMC पहुंचकर मरीजों का जाना हाल; बोले- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा

• सभी शराब दुकानों की जांच, उनके स्टॉक की निगरानी और अवैध कारोबार की गहन जांच

• शराब कांड में 20 पर FIR: 10 आरोपी पुलिस हिरासत में



तीनबत्ती न्यूज: 06 सितम्बर, 2026

सागर। सागर जिले की बंडा तहसील में संदिग्ध जहरीली/अवैध शराब के सेवन से हुई  11 मौतों के बाद प्रदेश सरकार और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।अभी करीब 100 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती है। रविवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल सागर पहुंचे। उन्होंने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) और जिला अस्पताल पहुंचकर उपचार करा रहे मरीजों का हाल जाना और चिकित्सकों को बेहतर एवं त्वरित उपचार के निर्देश दिए।

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ICU और क्रिटिकल केयर वार्ड में पहुंचे डिप्टी सीएम

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बीएमसी के ICU और क्रिटिकल केयर वार्ड में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। साथ ही मरीजों के परिजनों से भी चर्चा कर उन्हें ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि इस मुश्किल घड़ी में सरकार उनके साथ है।


डिप्टी सीएम ने अस्पताल प्रबंधन और वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि मरीजों के उपचार में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सर्वोत्तम संभव चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम 24 घंटे उपलब्ध रहे तथा दवाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाए।

अब तक 11 लोगों की मौत

मीडिया से चर्चा करते हुए राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि संदिग्ध जहरीली शराब के सेवन से अब तक 11 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि बीएमसी सहित अन्य अस्पतालों में उपचार करा रहे मरीजों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। गंभीर मरीजों को आवश्यकता के अनुसार उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

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निष्पक्ष जांच और दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की पूरी समीक्षा की जा रही है और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अवैध शराब के कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर उसे ध्वस्त किया जाएगा। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

प्रशासन और पुलिस को भी दिए निर्देश

डिप्टी सीएम ने प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही जिले में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

घटना के बाद जिला प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को आवश्यकता के अनुसार उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए एयरलिफ्ट की व्यवस्था भी की गई है, जबकि बीएमसी सागर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों का उपचार जारी है।


ये अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

निरीक्षण के दौरान सागर विधायक शैलेंद्र जैन, बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह, कमिश्नर अनिल सुचारी, डीआईजी शशिंद्र चौहान, कलेक्टर प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया, BMC के प्रभारी डीन डॉ. गंगवानी, इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉ. सौरभ जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि, चिकित्सक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

अवैध शराब प्रकरण में उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने बीएमसी में की समीक्षा


बंडा क्षेत्र में अवैध व जहरीली शराब सेवन से प्रभावित मरीजों के मामले को लेकर उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बुन्देलखंड मेडिकल कॉलेज के कॉन्फ्रेंस हॉल में प्रभावितों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं एवं पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई कार्यवाही की विस्तृत समीक्षा की।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जिले में अवैध शराब की बिक्री पर पूर्णतः रोक लगाई जाए। सभी शराब दुकानों की जांच, उनके स्टॉक की निगरानी और अवैध कारोबार की गहन जांच की जाए।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले एवं जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कठोर कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पूरे प्रकरण पर नजर बनाए हुए हैं और लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को जिला पुलिस प्रशासन में कसावट और नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी रूप से चलाने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने इलाजरत मरीजों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अवैध शराब से प्रभावित कुल 109 मरीजों का उपचार किया जा रहा है, जिनमें बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 85 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 12 को आईसीयू में रखा गया है। इसके अलावा जिला चिकित्सालय में 17 एवं बंडा सिविल हॉस्पिटल में 7 मरीज उपचाररत हैं।जबकि 1 गंभीर मरीज को एयरलिफ्ट कर एम्स भोपाल भेजा गया है। अधिकांश मरीजों की हालत अब स्थिर है और सभी के लिए आवश्यक दवाएं, डायलिसिस और जांच की सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

शराब का स्त्रोत जांच का विषय

बताया गया कि जहरीली शराब का स्रोत जांच का विषय है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह शराब बाहर से बनकर सप्लाई हुई है, जिसमें मेथेनॉल की मिलावट पाई गई है।

पुलिस अधीक्षक  अनुराग सुजानिया ने बताया कि प्रकरण मे थाना बण्डा मे पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के विभिन्न प्रावधानों के तहत 20 आरोपियों के विरूद्ध नामजद अपराध दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई है जिन पर अवैध लाभ के उद्देश्य से संदिग्ध नकली एवं अवैध शराब के निर्माण, सप्लाई एवं बिक्री से जुड़े होने के संबंध में आरोप हैं। इसके अतिरिक्त थाना विनायका मे भी 10 आरोपियों के विरूद्ध नामजद प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर कार्यवाही की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। पुलिस टीमों द्वारा विभिन्न संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश देते हुए 20 नामजद आरोपियों में से अब तक 10 आरोपियों को अभिरक्षा मे लिया गया है जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि अवैध शराब के स्रोत की जांच एवं संलिप्त अपराधियों की लगातार धर-पकड़ जारी है।

समीक्षा बैठक में जनप्रतिनिधियों ने भी अपना पक्ष रखते हुए विस्तृत जांच और उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग की।

डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि प्रभावित मरीजों का उपचार लक्षणों की तीव्रता के अनुसार किया जा रहा है, प्रभावितों के आने की दर में कमी आई है और गंभीर मरीजों का डायलिसिस जारी है।


बैठक में सागर विधायक श्री शैलेन्द्र जैन, बंडा विधायक श्री वीरेन्द्र सिंह लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हीरा सिंह राजपूत,श्री श्याम तिवारी,  श्रीमती रानी कुशवाहा, कमिश्नर श्री अनिल सुचारी, उप पुलिस महानिरीक्षक श्री एस एस चौहान, कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक श्री अनुराग सुजानिया, जिला पंचायत सीईओ श्री जगदीश कुमार गोमे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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सागर: संदिग्ध जहरीली-नकली शराब मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन, 20 आरोपी नामजद, 10 गिरफ्तार

बंडा एवं शाहगढ़ तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों में संदिग्ध अवैध एवं नकली शराब के सेवन से हुई मौतों और लोगों के बीमार होने के मामले में पुलिस-प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने मामले में 20 आरोपियों के खिलाफ नामजद प्रकरण दर्ज किया है, जिनमें से 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। शेष आरोपियों की तलाश जारी है।

पुलिस-प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार बंडा क्षेत्र के नौराज, गूगरा खुर्द, दलपतपुर, पाटन, चौका, छापरी एवं बमूरा भेड़ा सहित आसपास के गांवों में संदिग्ध शराब के सेवन के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ी। प्रभावित लोगों को बंडा अस्पताल, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) सागर और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक व्यक्ति की हालत गंभीर होने पर उसे बेहतर उपचार के लिए एयर एंबुलेंस से भोपाल भेजा गया।

20 आरोपियों पर नामजद मामला

बंडा थाने में अपराध क्रमांक 0658/2026, दिनांक 06 सितंबर 2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 3(5), 123 तथा मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 49-ए के तहत 20 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार इन पर संदिग्ध नकली एवं अवैध शराब के निर्माण, सप्लाई और बिक्री से जुड़े होने के आरोप हैं।

10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।

शराब कहां बनी और कहां से हुई सप्लाई, जांच जारी

पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के निर्देशन में विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। टीमें संभावित स्थानों पर दबिश देने के साथ यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध शराब कहां तैयार की गई, किन लोगों ने इसे सप्लाई किया और किन क्षेत्रों में इसकी बिक्री हुई।

घटनास्थल एवं संबंधित स्थानों से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। शराब के नमूनों को वैज्ञानिक एवं रासायनिक परीक्षण के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम एवं विसरा जांच के आधार पर मौतों के वास्तविक कारणों की भी जांच की जा रही है।


पांच अधिकारी निलंबित, एक मुख्यालय अटैच

मामले में राज्य शासन और आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। आबकारी विभाग की प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी एवं उपायुक्त आबकारी नीरजा श्रीवास्तव को मुख्यालय अटैच किया गया है।

वहीं सहायक आबकारी आयुक्त सागर कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और आबकारी उप निरीक्षक वृत्त बंडा प्रोशनी उरेती को निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस विभाग ने भी घटना के संबंध में लापरवाही के आरोप में बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह कुशवाहा और गूगरा चौकी प्रभारी पूरन लाल लड़िया को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।


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पिकनिक मनाने गये 9 युवक - युवतियां आबचंद गुफा के पास गदेरी नदी में फंसे : पुलिस और SDRF ने किया रेस्क्यू • पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव पहुंचे बचाव कार्य का लिया जायजा

पिकनिक मनाने गये 9 युवक - युवतियां आबचंद गुफा के पास गदेरी नदी में फंसे :  पुलिस और SDRF ने किया रेस्क्यू 

• पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव पहुंचे, बचाव कार्य का लिया जायजा

तीनबत्ती न्यूज: 23 अगस्त 2026

सागर। सागर जिले के  प्रसिद्ध पर्यटन स्थल आबचंद गुफा क्षेत्र में 22 अगस्त की शाम उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब गदेरी नदी का जलस्तर और बहाव अचानक बढ़ने से पिकनिक मनाने पहुंचे सागर शहर के 9 युवक-युवतियां नदी के बीच पानी से घिरे टापू पर फंस गए। एक पत्थर पर ढाई घंटे बैठे रहे । सूचना मिलते ही सागर पुलिस, एसडीआरएफ, होमगार्ड और स्थानीय ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मौके पर पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव पहुंचे और सुरक्षित निकालने के निर्देश दिए।

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सागर में बड़ा हादसा टला: आपचंद गुफा के पास नदी में फंसे 9 युवक-युवतियों का SDRF ने किया रेस्क्यू

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पिकनिक मनाने गये थे

घटना की सूचना 22 अगस्त की शाम करीब 6:50 बजे डायल-112 और पुलिस कंट्रोल रूम के माध्यम से मिली। बताया गया कि आबचंद गुफा क्षेत्र में तेज बहाव के कारण 9 लोग चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं और अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी जोखिम था।

एसपी ने संभाली कमान, वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे

सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक सागर अनुराग सुजानिया ने पूरे घटनाक्रम की पल-पल मॉनिटरिंग शुरू कर दी और संबंधित विभागों से समन्वय करते हुए तत्काल आवश्यक संसाधन मौके पर भेजने के निर्देश दिए। आबचंद गुफा की ओर से सीधे घटनास्थल तक पहुंचना बेहद कठिन और जोखिमपूर्ण था। इसके बाद आबचंद गांव की ओर से वैकल्पिक रास्ते से पहुंचने की रणनीति बनाई गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  नरेंद्र सोलंकी एवं एसडीओपी रहली प्रकाश मिश्रा पुलिस टीम के साथ करीब 4 किलोमीटर घने जंगल और दुर्गम रास्ते से पैदल घटनास्थल की ओर रवाना हुए।

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अंधेरा, घना जंगल और जंगली जानवरों के खतरे के बावजूद टीम ने हिम्मत नहीं छोड़ी। स्थानीय ग्रामीणों की मदद, जीपीएस नेविगेशन और सर्चलाइट की सहायता से रेस्क्यू टीम बच्चों के निकट पहुंची।

तेज बहाव के बीच SDRF ने संभाला मोर्चा

नदी का पानी चारों तरफ से बढ़ रहा था और सभी 9 लोग नदी के बीच टापू पर फंसे हुए थे। स्थिति को देखते हुए होमगार्ड कमांडेंट श्री भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

एसडीआरएफ जवानों ने तेज बहाव और अंधेरे के बीच अत्यंत सावधानी से नदी में उतरकर एक-एक कर सभी 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस, एसडीआरएफ, होमगार्ड और स्थानीय ग्रामीणों के बेहतर समन्वय से ऑपरेशन सफल रहा।


पूर्व मंत्री और क्षेत्रीय विधायक गोपाल भार्गव ने लिया जायजा

घटना की जानकारी मिलने के बाद  पूर्व मंत्री और क्षेत्रीय विधायक  गोपाल भार्गव भी मौके पर पहुंचे और प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य की स्थिति का जायजा लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए।

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सभी 9 लोग सुरक्षित

रेस्क्यू किए गए सभी 9 लोगों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। सभी के स्वस्थ पाए जाने के बाद उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

रेस्क्यू किए गए लोगों में रिया पिता संजय अहिरवार, उम्र 19 वर्ष, उपासना पिता प्रकाश अहिरवार, उम्र 20 वर्ष, सानिया पिता प्रकाश अहिरवार, उम्र 18 वर्ष, निक्की उर्फ निकिता पिता प्रकाश अहिरवार, उम्र 19 वर्ष, डाली पिता संजय अहिरवार, उम्र 16 वर्ष, राज पिता सीताराम अहिरवार, उम्र 18 वर्ष राजा पिता सीताराम अहिरवार, उम्र 17 वर्ष, नीरज अहिरवार पिता संतोष अहिरवार, उम्र 18 वर्ष, सिया पिता संजय अहिरवार, उम्र 17 वर्ष शामिल है। सभी इंजीनियरिंग कॉलेज रोड, बहेरिया, जिला सागर के निवासी बताए गए हैं।

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पुलिस और SDRF टीम की सराहनीय भूमिका

रेस्क्यू ऑपरेशन में हवलदार भागवती पटेल, एसडीआरएफ आरक्षक मुकुल यादव, मनोज देशमुख, धर्मेंद्र चौहान, नीरज सौर, प्रयास तिवारी, एसके जितेंद्र पटेल, एसके राकेश विश्वकर्मा सहित पुलिस एवं एसडीआरएफ के जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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इसके अलावा थाना प्रभारी गढ़ाकोटा गौरव तिवारी एवं उनकी टीम, थाना प्रभारी रहली संजय ऋषीश्वर एवं उनकी टीम, चौकी शाहपुर प्रभारी उप निरीक्षक मनीषा एवं उनकी टीम, थाना प्रभारी बहेरिया शशिकांत गुर्जर एवं उनकी टीम तथा कंट्रोल रूम प्रभारी आर.के.एस. चौहान एवं उनकी टीम ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

कंट्रोल रूम द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से विभिन्न टीमों के बीच लगातार समन्वय और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

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कटनी जमीन घोटाला: सीएम मोहन यादव का बड़ा एक्शन, CSP नेहा पच्चीसिया निलंबित, कार्यालय सील • 80 लाख की जमीन 18 लाख में ट्रांसफर कराने का आरोप : सीएसपी सहित तीन पर FIR

कटनी जमीन घोटाला: सीएम मोहन यादव का कड़ा एक्शन, CSP नेहा पच्चीसिया तत्काल निलंबित, दफ्तर सील

• 80 लाख की जमीन 18 लाख में ट्रांसफर कराने का आरोप : सीएसपी सहित तीन पर FIR 


तीनबत्ती न्यूज: 21 अगस्त , 2026

भोपाल/कटनी: कटनी जिले में सामने आए चर्चित जमीन घोटाला मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। सीएम के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय (PHQ) के आदेश पर नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही कटनी स्थित सीएसपी कार्यालय को भी सील कर दिया गया है।

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कार्यालय सील, केस डायरी व डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित

 एफआईआर (FIR क्र. 0738/2026) दर्ज होने के बाद पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशों पर कटनी सीएसपी दफ्तर को सील करने की कार्रवाई की गई। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कंहवारा जमीन सौदे से जुड़ी केस डायरी, सीएसपी दफ्तर के रिकॉर्ड्स और डिजिटल साक्ष्यों को पूरी तरह सुरक्षित रखना है, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो सके। निलंबन आदेश के साथ ही गृह विभाग ने विभागीय और एसआईटी (SIT) जांच की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।

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82.86 लाख की जमीन मात्र 18.20 लाख में कराई ट्रांसफर

यह पूरी कार्रवाई हत्या के नामजद आरोपी रमेश लोधी पर दबाव बनाकर उसकी कंहवारा स्थित जमीन को कौड़ियों के दाम में हस्तांतरित कराने के आरोपों के तहत की गई है।

जमीन का गाइडलाइन मूल्य: ₹82.86 लाख

बेची गई कीमत: मात्र ₹18.20 लाख (मारूफ अहमद हनफी 'फ्रंटमैन' के नाम पर)

फंडिंग: जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस जमीन सौदे में सीएसपी के करीबी क्षितिज राज बारापत्रे के खातों से फंडिंग की गई थी।

इनके खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज 

कुठला थाने में आरोपी सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 198, 199(b), 308(7) और 318(4) के तहत गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने ट्वीट कर दी चेतावनी 

मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।



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सोशल मीडिया पर अप्रमाणित , सनसनीखेज दावों से पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने पर हाईकोर्ट सख्त • मानहानिकारक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश

सोशल मीडिया पर अप्रमाणित , सनसनीखेज  दावों से पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने पर हाईकोर्ट सख्त

• मानहानिकारक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश



तीनबत्ती न्यूज: 12 अगस्त, 2026

सागर। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री एवं खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और प्रकाशनों पर सुनवाई के बाद दिए आदेश में  गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि संबंधित सामग्री में से कई पोस्ट और वीडियो वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने तथा मामले को सनसनीखेज बनाने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तुत सामग्री निष्पक्ष रिपोर्टिंग अथवा तथ्यात्मक आलोचना के बजाय मामले पर समय से पहले निष्कर्ष निकालती हुई प्रतीत होती है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक प्रतिवादियों को श्री भूपेन्द्र सिंह के विरुद्ध इसी प्रकार के या समान मानहानिकारक आरोप वाली पोस्ट प्रकाशित करने से रोकने के साथ सूचीबद्ध आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की आड़ में किसी व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को बदनाम या अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रेस को जनहित से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता निरंकुश नहीं है और मीडिया मंचों को किसी व्यक्ति की चरित्र-हत्या से बचना चाहिए।


इस प्रकरण में प्रतिवादी ‘सबकी खबर’ न्यूज चैनल के संचालक रवीन्द्र जैन, फेसबुक यूजर अभिषेक जैन सहित अन्य पांच प्रतिवादी शामिल हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में प्रतिवादी अभिषेक जैन के फेसबुक प्रोफाइल, ‘सबकी खबर’ यूट्यूब चैनल, ‘नई दुनिया’ के डिजिटल विंग से जुड़े पत्रकार, एक कांग्रेस कार्यकर्ता तथा ‘राजधानी तक’ न्यूज चैनल के संचालकध्मुख्य समाचार एंकर सहित सोशल मीडिया मंचों से जुड़े प्रतिवादियों का उल्लेख किया गया है। उच्च न्यायालय के समक्ष वादी श्री भूपेन्द्र सिंह  की ओर से यह आरोप रखा गया था कि इन माध्यमों से उनके विरुद्ध भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री को लगातार प्रसारित कराया गया।


उच्च उच्च न्यायालय ने आपत्तिजनक वीडियो, लेखों और सोशल मीडिया पोस्टों को प्रथम दृष्टया देखने के बाद कहा कि इनमें से अनेक पोस्ट जानबूझकर वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और मामले को सनसनीखेज बनाने का प्रयास करती प्रतीत होती हैं। उच्च न्यायालय के अनुसार, प्रतिवादी ने सोशल मीडिया पोस्टों और वीडियो श्रृंखला के माध्यम से कथित मानहानिकारक अभियान को आगे बढ़ाया। पत्रकारिता संबंधी जांच के नाम पर पूछे गए सवालों को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया कि उनसे यह धारणा बनती है कि वादी ने सक्रिय रूप से प्रताड़ित किया, जबकि प्रसारित आरोपों और उनसे तैयार किए गए पक्षपाती कथानक के समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण सामने नहीं रखा गया है।


उच्च न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में कहा कि विवादित वीडियो, पोस्ट और प्रकाशनों को प्रथम दृष्टया देखने पर वे निष्पक्ष रिपोर्टिंग अथवा तथ्यात्मक आलोचना प्रस्तुत करते हुए दिखाई नहीं देते। बल्कि इन सामग्रियों में मामले पर समय से पहले ही निष्कर्ष निकालते हुए वादी को बिना किसी तथ्यात्मक आधार या न्यायिक निर्धारण के तानाशाह और उत्पीड़क के रूप में प्रस्तुत किया गया है।


उच्च न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति की सार्वजनिक आलोचना की सीमा सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक व्यापक होती है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के नाम पर किसी व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को बदनाम या अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा कि मानहानि और सार्वजनिक आलोचना के बीच बहुत महीन अंतर है और इस संतुलन को बनाए रखना न्यायालयों का महत्वपूर्ण दायित्व है। आदेश में लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी बनाम साकेत गोखले मामले की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सोशल मीडिया के दौर में किसी सार्वजनिक व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना बेहद आसान हो गया है तथा वर्षों की निस्वार्थ सेवा से अर्जित प्रतिष्ठा को एक विचारहीन टिप्पणी भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। उच्च न्यायालय ने कहा कि मीडिया की स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यक्ति के जीवन, गरिमा और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के बीच नाजुक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। प्रेस को जनहित के विषयों पर रिपोर्टिंग करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता निरंकुश नहीं है और इसका प्रयोग सावधानी एवं जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। मीडिया मंचों को किसी व्यक्ति की चरित्र-हत्या से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जनता के मन में पूर्वाग्रह पैदा होने के साथ उसकी प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।


उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी कहा कि जब समाचार रिपोर्टिंग समय से पहले किसी निष्कर्ष को व्यक्त करने लगे और प्रभावी रूप से उस न्यायिक प्रक्रिया का स्थान लेने लगे, जो केवल न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में है, तो ऐसी स्थिति ‘मीडिया ट्रायल’ का रूप ले लेती है। उच्च न्यायालय के अनुसार, मीडिया द्वारा इस प्रकार समानांतर जांच और अन्वेषण किया जाना न्याय के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है। इसलिए अप्रमाणित आरोपों के गंभीर परिणामों से नागरिकों की रक्षा के लिए ऐसी प्रवृत्ति पर उचित नियंत्रण आवश्यक है, विशेषकर तब जब आरोपों को सनसनीखेज रूप देकर प्रस्तुत किया जा रहा हो।


उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद उच्च न्यायालय प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि प्रतिवादियों द्वारा प्रसारित और प्रकाशित पोस्ट तथा वीडियो अप्रमाणित दावों को सनसनीखेज बनाते हैं और वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। उच्च न्यायालय ने इन परिस्थितियों में प्रतिवादियों को अगली सुनवाई तक वादी के खिलाफ इस तरह के अथवा इसी प्रकार के मानहानिकारक आरोप वाली कोई पोस्ट प्रकाशित करने से रोकने का आदेश दिया है। साथ ही प्रतिवादी रविन्द्र जैन, अभिषेक जैन तथा आशुतोष शर्मा को तालिका में सूचीबद्ध यूट्यूब पर प्रसारित मानहानिकारक पोस्ट और वीडियो तत्काल हटाने तथा अगली सुनवाई तक उस स्थिति को बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने सभी प्रतिवादियों को दो हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने का आदेश देते हुए सुनवाई के लिये 5 नवम्बर 2026 की तारीख नीयत की है।



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सागर सड़क हादसा: खड़े ट्रक से टकराई बोलेरो, 2 महिलाओं की मौत, 2 गंभीर घायल

सागर में भीषण सड़क हादसा: खड़े ट्रक में घुसी तेज रफ्तार बोलेरो, 2 महिलाओं की मौत, 2 गंभीर घायल


तीनबत्ती न्यूज: 6 अगस्त 2026

सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के कैंट थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चालक सहित दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा गढ़पहरा रोड स्थित भैंसा नाका के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार बोलेरो सड़क किनारे खड़े ट्रक से जा टकराई।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कृषि उपज मंडी की ओर से आ रही बोलेरो (एमपी 15 सीए 1093) तेज गति में थी। अचानक चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और बोलेरो सीधे सड़क किनारे खड़े ट्रक (एमपी 15 एचए 1077) में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बोलेरो के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए।

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दो महिलाओं की मौके पर मौत

हादसे के समय बोलेरो में कुल चार लोग सवार थे। दुर्घटना में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चालक समेत दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही कैंट थाना पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया। शुक्रवार को शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।


प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतकों में से एक महिला की पहचान नेहा बसंत निवासी शिवनगर के रूप में हुई है। पुलिस अन्य मृतक की पहचान और परिजनों की जानकारी जुटाने में लगी है। दुर्घटना के कारणों की भी जांच की जा रही है।


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