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सीएम डॉ. मोहन यादव ने झाबुआ में कृषि सखियों से किया संवाद, प्राकृतिक खेती से बढ़ी किसानों की आय

झाबुआ में कृषि सखियों से मिले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बोले- प्राकृतिक खेती से बढ़ रही किसानों की आय


तीनबत्ती न्यूज: 31 जुलाई, 2026

झाबुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को झाबुआ जिले के दौरे के दौरान प्राकृतिक खेती अपनाने वाली कृषि सखियों और प्रगतिशील किसानों से संवाद कर उनके अनुभव जाने। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल लोगों की सेहत के लिए लाभकारी है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में कृषि क्षेत्र में नए अवसर पैदा हुए हैं और कृषि कल्याण वर्ष के तहत किसानों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

कृषि सखी संगीता डामोर की सराहना

मुख्यमंत्री ने मेघनगर विकासखंड के ग्राम देवीगढ़ की कृषि सखी संगीता डामोर से प्राकृतिक खेती को लेकर चर्चा की। संगीता ने बताया कि उन्होंने पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है और वर्तमान में अपने गांव सहित आसपास के 125 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे रही हैं। वे बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक आदानों के उपयोग की जानकारी किसानों तक पहुंचा रही हैं।

उन्होंने बताया कि लगभग एक हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती करते हुए बेहतर फसल प्रबंधन अपनाने से गेहूं का उत्पादन 35 क्विंटल से बढ़कर 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया है, जिससे उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।



प्रगतिशील किसान विमल भाबोर ने साझा किए अनुभव

मुख्यमंत्री ने झाबुआ विकासखंड के ग्राम खेड़ी निवासी प्रगतिशील किसान विमल भाबोर से भी संवाद किया। भाबोर ने बताया कि उनके पास 25 बीघा कृषि भूमि है और वे खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं। वे पिछले पांच वर्षों से जैविक खेती तथा दो वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अपने खेत पर जैव संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्थापित किया है, जहां जीवामृत, बीजामृत सहित अन्य प्राकृतिक आदान तैयार किए जाते हैं। इनका उपयोग वे स्वयं करने के साथ अन्य किसानों को भी उपलब्ध कराते हैं।

प्राकृतिक खेती से बढ़ी आय, मिला आत्मनिर्भर बनने का अवसर

विमल भाबोर ने बताया कि पहले खेती से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार रुपये का लाभ मिलता था, जबकि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी वार्षिक आय बढ़कर 1 लाख से 1.50 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

इसके अलावा मार्च से जून 2026 के दौरान जैव संसाधन केंद्र, नर्सरी, प्राकृतिक सब्जियों एवं फलों तथा वर्मी कम्पोस्ट से भी उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती उत्पादन लागत कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी कृषि सखियों और किसान बहनों को आगामी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं भी दीं।


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