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रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रभाव पर संसद में सरकार का जवाब: जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया • राज्यसभा में सांसद रजनीश अग्रवाल के प्रश्न पर आया जवाब: 18.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती के दायरे में

रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रभाव पर संसद में सरकार का जवाब: जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया

• राज्यसभा में सांसद रजनीश  अग्रवाल के प्रश्न पर आया जवाब: 18.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती के दायरे में



तीनबत्ती न्यूज: 08 अगस्त, 2026

नई दिल्ली। कृषि योग्य भूमि पर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग के प्रभाव को लेकर राज्यसभा में भाजपा सांसद रजनीश कुमार अग्रवाल द्वारा पूछे गए प्रश्न पर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बताया कि इस संबंध में मंत्रालय द्वारा कोई अध्ययन नहीं कराया गया है। हालांकि, सरकार ने मिट्टी की गुणवत्ता और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को जागरूक करने और वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देने की जानकारी दी।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लिखित जवाब में बताया कि उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत अधिसूचित किए जाने से पहले उर्वरकों की जैव-प्रभावकारिता और विषाक्तता का परीक्षण किया जाता है। इन परीक्षणों की समीक्षा केंद्रीय उर्वरक समिति के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा की जाती है।

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26.26 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए/वितरित

सरकार के अनुसार, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना सहित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मृदा उर्वरता में सुधार के लिए संतुलित एवं एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है।

वर्ष 2014-15 से अब तक 26.26 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए/वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए देशभर में 1,30,627 किसानों को प्रशिक्षण, 7.17 लाख प्रदर्शन तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों को लेकर 7,425 किसान मेले/अभियान आयोजित किए गए हैं।

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कीटनाशकों के उपयोग पर भी नियामक व्यवस्था

सरकार ने बताया कि कीटनाशक अधिनियम, 1968 की धारा 5 के तहत गठित पंजीकरण समिति कीटनाशकों की प्रभावकारिता के साथ-साथ मानव, पशु और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनका पंजीकरण करती है। स्वीकृत लेबल और सूचना पत्र के अनुसार उपयोग किए जाने वाले पंजीकृत कीटनाशकों से नुकसान की संभावना नहीं होने की बात सरकार ने कही है। इनके निरंतर उपयोग के संबंध में समय-समय पर तकनीकी समीक्षा भी की जाती है।

जैविक और प्राकृतिक खेती को मिल रहा बढ़ावा

जवाब में सरकार ने बताया कि एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार ने जैविक खाद, फसल अवशेष, जैव उर्वरक और अन्य जैविक इनपुट के साथ रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया है। साथ ही उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत जैविक उर्वरक, जैव-उर्वरक, सल्फर लेपित यूरिया, जैविक कार्बन संवर्धक और नैनो उर्वरक को अधिसूचित किया गया है।

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18.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती के दायरे में

सरकार के अनुसार, वर्ष 2015-16 से परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 18.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक खेती के अंतर्गत लाया गया है और 33.63 लाख किसानों को इसका लाभ मिला है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट (MOVCDNER) के तहत 2.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती में लाया गया है और 2.74 लाख किसानों को लाभ मिला है।

प्राकृतिक खेती मिशन को भी मंजूरी

केंद्र सरकार ने 25 नवंबर 2024 को रासायनिक मुक्त और ऑन-फार्म इनपुट के उपयोग के जरिए प्रकृति आधारित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF) को मंजूरी दी थी। जवाब के अनुसार, अब तक 23.13 लाख किसान पंजीकृत हो चुके हैं और 11.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के अंतर्गत कवर किया गया है।


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सीएम डॉ. मोहन यादव ने झाबुआ में कृषि सखियों से किया संवाद, प्राकृतिक खेती से बढ़ी किसानों की आय

झाबुआ में कृषि सखियों से मिले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बोले- प्राकृतिक खेती से बढ़ रही किसानों की आय


तीनबत्ती न्यूज: 31 जुलाई, 2026

झाबुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को झाबुआ जिले के दौरे के दौरान प्राकृतिक खेती अपनाने वाली कृषि सखियों और प्रगतिशील किसानों से संवाद कर उनके अनुभव जाने। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल लोगों की सेहत के लिए लाभकारी है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में कृषि क्षेत्र में नए अवसर पैदा हुए हैं और कृषि कल्याण वर्ष के तहत किसानों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

कृषि सखी संगीता डामोर की सराहना

मुख्यमंत्री ने मेघनगर विकासखंड के ग्राम देवीगढ़ की कृषि सखी संगीता डामोर से प्राकृतिक खेती को लेकर चर्चा की। संगीता ने बताया कि उन्होंने पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है और वर्तमान में अपने गांव सहित आसपास के 125 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे रही हैं। वे बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक आदानों के उपयोग की जानकारी किसानों तक पहुंचा रही हैं।

उन्होंने बताया कि लगभग एक हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती करते हुए बेहतर फसल प्रबंधन अपनाने से गेहूं का उत्पादन 35 क्विंटल से बढ़कर 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया है, जिससे उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।



प्रगतिशील किसान विमल भाबोर ने साझा किए अनुभव

मुख्यमंत्री ने झाबुआ विकासखंड के ग्राम खेड़ी निवासी प्रगतिशील किसान विमल भाबोर से भी संवाद किया। भाबोर ने बताया कि उनके पास 25 बीघा कृषि भूमि है और वे खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं। वे पिछले पांच वर्षों से जैविक खेती तथा दो वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अपने खेत पर जैव संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्थापित किया है, जहां जीवामृत, बीजामृत सहित अन्य प्राकृतिक आदान तैयार किए जाते हैं। इनका उपयोग वे स्वयं करने के साथ अन्य किसानों को भी उपलब्ध कराते हैं।

प्राकृतिक खेती से बढ़ी आय, मिला आत्मनिर्भर बनने का अवसर

विमल भाबोर ने बताया कि पहले खेती से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार रुपये का लाभ मिलता था, जबकि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी वार्षिक आय बढ़कर 1 लाख से 1.50 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

इसके अलावा मार्च से जून 2026 के दौरान जैव संसाधन केंद्र, नर्सरी, प्राकृतिक सब्जियों एवं फलों तथा वर्मी कम्पोस्ट से भी उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती उत्पादन लागत कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी कृषि सखियों और किसान बहनों को आगामी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं भी दीं।


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