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बंडा जहरीली शराब कांड : भगवती मानव कल्याण संगठन ने CBI जांच और 25 लाख मुआवजे की मांग, भाकपा ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज से जांच कराने की उठाई मांग

बंडा जहरीली शराब कांड : भगवती मानव कल्याण  संगठन ने CBI जांच और 25 लाख मुआवजे की मांग, भाकपा ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज से जांच कराने की उठाई मांग


तीनबत्ती न्यूज: 8 सितंबर 2026

सागर। सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में अब राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने जांच और कार्रवाई को लेकर आवाज तेज कर दी है। भगवती मानव कल्याण संगठन, शाखा सागर ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की सीबीआई जांच, मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने सहित आठ प्रमुख मांगें रखी हैं। वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने पूरे घटनाक्रम की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में गठित समिति से कराने की मांग की है।

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भगवती मानव कल्याण संगठन ने उठाए सवाल

संगठन ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि बंडा विधानसभा क्षेत्र में अवैध शराब के सेवन से अब तक 30 से 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 150 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि लाइसेंसी दुकानों से गांवों तक पहुंचाई गई कथित अवैध शराब के सेवन से यह घटना हुई।


संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि आबकारी विभाग ने 5 सितंबर को बिना फोरेंसिक जांच के संबंधित शराब को पीने योग्य बताते हुए क्लीनचिट दे दी थी। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, 7 सितंबर को सानौधा थाना क्षेत्र में कार्यकर्ताओं ने एक पेटी कथित जहरीली शराब पकड़कर आबकारी विभाग को सूचना दी थी। संगठन का कहना है कि नौराज गांव, जहां चार मौतें हुई हैं, वहीं से शराब बरामद हुई।

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ज्ञापन में संगठन ने सागर पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और पूर्व में मुरैना में उनके कार्यकाल के दौरान हुई शराब से मौतों का उल्लेख करते हुए जांच की मांग की।

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संगठन की आठ प्रमुख मांगें


मृतक परिवारों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।

पीड़ित परिवारों का एक वर्ष तक निःशुल्क इलाज कराया जाए।

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका की जांच की जाए।

दोषी अधिकारियों को निलंबित करने के बजाय बर्खास्त किया जाए।

निलंबित पुलिस एवं आबकारी अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।

सागर कलेक्टर और एसपी को तत्काल हटाया जाए।

जिले की सभी लाइसेंसी शराब दुकानों को स्थायी रूप से बंद किया जाए।

मामले की सीबीआई जांच के साथ पांच आईएएस अधिकारियों और पांच समाजसेवियों की टीम से भी जांच कराई जाए।


संगठन ने चेतावनी दी कि 15 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित परिवारों और आमजन के साथ चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।


भाकपा ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज से जांच की मांग की

इधर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला परिषद के नेतृत्व में भी मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया। पार्टी ने कहा कि नकली शराब से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है और मामले की जांच की दिशा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी ने आशंका जताई कि यदि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है।

भाकपा ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में गठित समिति से कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।


पार्टी ने अवैध शराब के उत्पादन और बिक्री में संलिप्त लोगों की चल-अचल संपत्तियां राजसात करने, आबकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से उनके पद के अनुरूप कार्यों की समयबद्ध रिपोर्ट लेने, आबकारी विभाग के खुफिया तंत्र को मजबूत करने और अवैध व नकली शराब के उत्पादन-विक्रय के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की मांग की।


इसके अलावा पीड़ित परिवारों को समुचित इलाज और मानवीय सहायता तत्काल उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में की गई।


भाकपा के प्रतिनिधिमंडल में जिला सचिव कामरेड चन्द्रकुमार, अधिवक्ता देवेंद्र सिंघई, गोवर्धन पटेल और आशीष भायजी सहित अन्य लोग शामिल रहे।



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