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सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- सुशासन का वास्तविक आधार न्याय, सरकार सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध • इंदौर में 'इंहेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित, CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- संवाद, गरिमा और समावेशन से ही न्याय की पहुंच होगी समान

सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- सुशासन का वास्तविक आधार न्याय, सरकार सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध

• इंदौर में 'इंहेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित, CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- संवाद, गरिमा और समावेशन से ही न्याय की पहुंच होगी समान

इंदौर में Access to Justice कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और CJI जस्टिस सूर्यकांत


तीनबत्ती न्यूज: 08 अगस्त, 2026

इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार न्यायपालिका की भावना के अनुरूप अपने सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध है। न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व लोकतंत्र के आधार हैं। मध्यस्थता के माध्यम से छोटे-छोटे मामलों का समाधान कर केस पेंडेंसी जैसी गंभीर समस्या को कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 'इंहेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' विषय पर आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत सहित सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।

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कार्यक्रम में 'Ensuring Access Protecting Rights Building Futures' पुस्तक, निवारक एवं रणनीतिक विधिक सेवा योजनाएं, 'न्याय सबके लिए', ब्रेल लिपि में मार्गदर्शिका और 'न्याय के स्वर' का विमोचन किया गया। नालसा का थीम सॉन्ग भी प्रस्तुत किया गया। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने नालसा शिक्षा स्कीम तथा थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लॉन्च किया।

इंदौर में Access to Justice कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


अंग्रेजों के बनाए कई कानून खत्म किए

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में बदलाव का स्वर्णिम समय चल रहा है। अंग्रेजों के दौर के अनेक गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त कर न्याय व्यवस्था को अधिक सरल और सुलभ बनाया गया है। ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, डिजिटल डेटा संग्रह और आधुनिक न्याय प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं न्याय प्रक्रिया को आधुनिक बना रही हैं।

उन्होंने कहा कि छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की दिशा में भी काम हुआ है। मध्यप्रदेश सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि युवाओं से जुड़े पेपर लीक और धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से कार्रवाई के लिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए गए हैं।

'न्याय में देरी भी अन्याय'

डॉ. यादव ने कहा कि न्याय में देरी भी अन्याय के समान है। मध्यप्रदेश में साइबर सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वचालित प्रणाली और ई-जीरो एफआईआर जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से पुलिस प्रणाली को वर्तमान समय की जरूरतों के अनुरूप मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने मालवा की न्याय परंपरा का उल्लेख करते हुए लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और सम्राट विक्रमादित्य के उदाहरण प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर ने लगभग 250 वर्ष पहले सुशासन और न्याय की उत्कृष्ट परंपरा स्थापित की। उनके शासन में न्याय करते समय पुत्र और प्रजा में भेदभाव नहीं किया जाता था।



CJI जस्टिस सूर्यकांत बोले- संवाद से ही संभव है समाधान

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सशक्त भविष्य, गरिमा और समावेशन केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि विधिक सहायता की वास्तविक परिभाषा हैं। न्याय की पहुंच केवल कानून बनाने से सुनिश्चित नहीं हो सकती, इसके लिए संवाद आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि किसी पीड़ित को न्याय मिलने से पहले यह विश्वास होना जरूरी है कि उसकी समस्या को कोई सुन रहा है। मध्यस्थता की प्रक्रिया भी सामने वाले को सुनने से शुरू होती है। न्यायपालिका, विधिक सेवा संस्थाओं और समाज के सभी वर्गों को मिलकर न्याय की पहुंच को आसान बनाना होगा।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अलग-अलग समुदायों की समस्याएं अलग होती हैं, इसलिए उनके समाधान भी उनकी परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों के अनुसार होने चाहिए। गरीब, आर्थिक रूप से पिछड़े और महिलाओं की सहायता करना चैरिटी नहीं, बल्कि उन्हें उनके अधिकार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है।

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अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे न्याय

उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने में ही समानता का वास्तविक भाव छिपा है। पैरा लीगल वॉलेंटियर्स समाज और विधिक व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं।

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी पहुंच होना जरूरी है। संविधान के अनुच्छेद 39A के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को नि:शुल्क न्याय उपलब्ध कराने की भावना व्यक्त की गई है।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्याय प्रक्रिया को बहुभाषीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को देखते हुए यहां न्याय की पहुंच को और व्यापक बनाना जरूरी है।

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मध्यस्थता से विवादों का समाधान

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने मध्यस्थता को विवादों के समाधान का प्रभावी माध्यम बताया। सम्मेलन में 'विवाद से सहमति' मध्यस्थता सर्टिफिकेट कोर्स और जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम का शुभारंभ किया गया।

ब्रेल लिपि में विधिक मार्गदर्शिका के विमोचन को दृष्टिबाधित लोगों के लिए न्याय की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। इंडियन साइन लैंग्वेज में नालसा थीम सॉन्ग के शुभारंभ से दिव्यांगजनों तक विधिक जागरूकता पहुंचाने की पहल को भी बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस विजय बिश्नोई, जस्टिस आलोक आराधे, जस्टिस शील नागु, जस्टिस संजीव सचदेवा, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल, न्यायाधीश आनंद पाठक सहित विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश, विधिक सेवा प्राधिकरणों के अधिकारी एवं इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश आनंद पाठक ने आभार व्यक्त किया।


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सीएम डॉ. मोहन यादव के फैसले के बाद एमपी में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट: हाईकोर्ट ने जारी की अधिसूचना, 3 महीने में मामलों के निपटारे का लक्ष्य

सीएम डॉ. मोहन यादव के फैसले के बाद एमपी में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट: हाईकोर्ट ने जारी की अधिसूचना, 3 महीने में मामलों के निपटारे का लक्ष्य



तीनबत्ती न्यूज: 25 जुलाई, 2026

जबलपुर/भोपाल, 25 जुलाई 2026। सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन), अनुचित साधनों के प्रयोग और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश में चार विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा चार फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय नामित करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहल किए जाने के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने तत्काल निर्णय लेते हुए चार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्णयों को लागू करने में मध्यप्रदेश हमेशा अग्रणी रहा है।

हाईकोर्ट ने फास्टट्रैक कोर्ट के लिए किया नामित 

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की पहल पर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों को विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय के रूप में नामित किया गया है।

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सीएम डॉ. मोहन यादव ने की घोषणा : MP में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे....

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इन शहरों में होंगे विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट

  • भोपाल: श्री प्रवीण पटेल (18वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश)
  • इंदौर: डॉ. (श्रीमती) शुभ्रा सिंह (26वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश)
  • ग्वालियर: श्री विशाल अखण्ड (8वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश)
  • जबलपुर: श्री आनंद कुमार सेहलाम (27वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश)

ये न्यायालय लोक परीक्षाएँ (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के अंतर्गत दर्ज मामलों के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों से जुड़े अपराधों की भी सुनवाई करेंगे। इनका क्षेत्राधिकार संबंधित संभागों और निर्धारित जिलों तक रहेगा।

तीन महीने में फैसला सुनाने का प्रयास

उच्च न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन माह के भीतर मामलों का विचारण पूरा कर निर्णय सुनाने का हरसंभव प्रयास किया जाए, ताकि परीक्षा संबंधी अपराधों का शीघ्र निस्तारण हो सके।

सीएम बोले- युवाओं के भविष्य की रक्षा सरकार की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसी पर एहसान नहीं कर रही, बल्कि यह उसकी जिम्मेदारी है कि छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने कांग्रेस सरकार की तुलना में प्रदेश में अधिक मेडिकल कॉलेज स्थापित किए हैं, जिससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

नई व्यवस्था से प्रश्नपत्र लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों का त्वरित निपटारा होने की उम्मीद है। इससे भर्ती परीक्षाओं और सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होगी।


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