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MP: डाक विभाग में फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले 8 अभ्यर्थी सेवा से बर्खास्त: CBI ने दर्ज किया केस : एक आरोपी सागर का

MP: डाक विभाग में फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले 8 अभ्यर्थी सेवा से बर्खास्त: CBI ने दर्ज किया केस : एक आरोपी सागर का 


तीनबत्ती न्यूज: 30 सितम्बर, 2026

जबलपुर। ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती में कथित फर्जी 10वीं की अंकसूची का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल करने के मामले में सागर जिले के राजा बाबू अहिरवार भी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच के घेरे में हैं। CBI ने जबलपुर डाक विभाग से जुड़े इस मामले में राजा बाबू अहिरवार समेत आठ अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि भर्ती के दौरान प्रस्तुत की गई शैक्षणिक अंकसूचियां संबंधित शिक्षा बोर्डों के सत्यापन में फर्जी पाई गईं। राजा बाबू अहिरवार सुरखी, जिला सागर के निवासी बताए गए हैं। उनकी नियुक्ति पाटन सब पोस्ट ऑफिस (जबलपुर) में ग्रामीण डाक सेवक के रूप में हुई थी। उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के मुताबिक उन्होंने जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन बोर्ड की अंकसूची प्रस्तुत की थी, जिसका सत्यापन संबंधित स्तर पर कराने के बाद उसे फर्जी बताया गया। 

10वीं के अंकों के आधार पर हुआ था GDS चयन

मामला ग्रामीण डाक सेवक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। GDS भर्ती में अभ्यर्थियों की 10वीं कक्षा के अंकों के आधार पर चयन प्रक्रिया होती है। संबंधित भर्ती चक्र में अभ्यर्थियों ने डाक विभाग के पोर्टल पर अपनी सेल्फ-अटेस्टेड 10वीं की अंकसूची अपलोड की थी। इन्हीं दस्तावेजों में दर्ज अंकों और अन्य विवरणों के आधार पर चयन के बाद अभ्यर्थियों को अलग-अलग डाकघरों में नियुक्तियां दी गईं।

बाद में डाक विभाग ने अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों का संबंधित शिक्षा बोर्डों और सक्षम प्राधिकारियों से सत्यापन कराया। इसी प्रक्रिया में आठ अभ्यर्थियों की अंकसूचियों में गड़बड़ी सामने आने की बात जांच में सामने आई है। 


राजा बाबू अहिरवार की नियुक्ति पाटन डाकघर में हुई थी

जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार राजा बाबू अहिरवार निवासी सुरखी, सागर की नियुक्ति जुलाई 2024 के GDS भर्ती चक्र में पाटन सब पोस्ट ऑफिस, जबलपुर में डाक सेवक के पद पर हुई थी। रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 6 नवंबर 2024 से 23 जुलाई 2025 तक सेवा की। बाद में उनके द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, जिसमें उनकी 10वीं की अंकसूची को फर्जी पाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। 

आठ अभ्यर्थी CBI के रडार पर

इस मामले में CBI ने जिन आठ अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उनमें शामिल हैं—अभ्यर्थी निवासी नियुक्ति स्थल संबंधित अंकसूची

•मानवेंद्र सिंह सिकरवार मुरैना कुंडम बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड

• बद्री प्रसाद यादव , टीकमगढ़ संसारपुर, कटन मध्य प्रदेश राज्य ओपन

• देवेंद्र सिंह चौहान देवास उमरिया पान जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन

• राजा बाबू अहिरवार सुरखी, सागर पाटन, जबलपुर जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन

• रमाकांत शर्मा मुरैना मोहतरा, कटनी बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड

• प्रदीप खरे मुरैना कुड़ारी-उमरिया बरेला बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड

• सौरभ शर्मा मुरैना पाटन बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड

• नयन कुमार बिहार रामखिरिया-शहपुरा झारखंड एकेडमिक काउंसिल

इनमें पांच अभ्यर्थियों की पोस्टिंग जबलपुर और तीन की कटनी जिले में हुई थी। 

अलग-अलग राज्यों के बोर्ड की अंकसूचियों का इस्तेमाल

मामले की खास बात यह है कि कथित तौर पर फर्जी पाई गई अंकसूचियां अलग-अलग राज्यों के ओपन एवं शिक्षा बोर्डों से संबंधित थीं।

जांच में सामने आए बोर्डों में—बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, मध्य प्रदेश राज्य ओपन स्कूल, जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन, झारखंड एकेडमिक काउंसिल के नाम सामने आए हैं।

इससे जांच एजेंसी को यह पता लगाने का आधार मिला है कि क्या इन दस्तावेजों को तैयार कराने और भर्ती में इस्तेमाल कराने के पीछे एक से अधिक लोगों का नेटवर्क था। हालांकि इस नेटवर्क की पूरी तस्वीर CBI की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी

18 सितंबर को डाक विभाग ने की CBI से शिकायत

मामले में जबलपुर सब डिवीजन नंबर-1 के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट लवकुश पारेते की ओर से 18 सितंबर 2026 को CBI को लिखित शिकायत दिए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में आठ अभ्यर्थियों द्वारा कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हासिल करने की जानकारी दी गई। इसके बाद CBI ने मामले की जांच शुरू करते हुए आठों अभ्यर्थियों तथा अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। 

सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच

मामला केवल आठ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहने के संकेत हैं। शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, उन्हें हासिल करने या भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल कराने में अन्य सरकारी कर्मचारियों की भूमिका हो सकती है।

CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जी अंकसूचियां कहां तैयार हुईं? इन्हें अभ्यर्थियों तक किसने पहुंचाया? भर्ती पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं? दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई? क्या इस मामले से जुड़े और भी अभ्यर्थी हैं?

जांच एजेंसी दस्तावेजों और नियुक्ति रिकॉर्ड के आधार पर इन बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। 


आठों की सेवाएं पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं


सत्यापन के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने के बाद डाक विभाग ने संबंधित आठ अभ्यर्थियों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इसके बाद मामला CBI तक पहुंचा और अब आपराधिक जांच चल रही है।  राजा बाबू अहिरवार की सेवा अवधि भी उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक करीब नौ महीने रही। उनकी नियुक्ति 6 नवंबर 2024 को हुई थी और 23 जुलाई 2025 तक सेवा में रहे। 


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जबलपुर मेडिकल कॉलेज में ₹1.63 करोड़ का घोटाला, 5 पर केस; 3 गिरफ्तार

जबलपुर मेडिकल कॉलेज में ₹1.63 करोड़ का वित्तीय घोटाला, पांच पर केस; तीन आरोपी गिरफ्तार




तीनबत्ती न्यूज: 19 अगस्त, 2026

जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में करीब 1 करोड़ 63 लाख 78 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता और कथित गबन का मामला सामने आया है। मामले में गढ़ा पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है।

गढ़ा सीएसपी आशीष जैन के अनुसार, मेडिकल कॉलेज की कैश शाखा में छात्रों की फीस, आईपीडी, ओपीडी सहित विभिन्न मदों से नकद राशि मनी रसीद बुक के माध्यम से प्राप्त की जाती है। कैश शाखा में वित्तीय अनियमितता की शिकायत सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने जांच के लिए आंतरिक कमेटी गठित की थी।

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मनी रसीद और बैंक जमा राशि में मिला बड़ा अंतर

आंतरिक कमेटी ने 1 अप्रैल 2020 से 30 नवंबर 2025 तक की अवधि में कैश शाखा के रिकॉर्ड और बैंक खातों में जमा राशि की जांच की। जांच के दौरान मनी रसीद बुक से प्राप्त राशि और निर्धारित बैंक खातों में जमा कराई गई राशि में बड़ा अंतर पाया गया।

जांच के अनुसार, इस अवधि में करीब ₹1,63,78,000 की शासकीय राशि संबंधित बैंक खातों में जमा नहीं कराई गई। कमेटी ने प्रथम दृष्टया इसे आपराधिक षड्यंत्र के तहत राशि के गबन से जुड़ा मामला माना।

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कैश शाखा में पदस्थ थे आरोपी

मेडिकल कॉलेज की जांच कमेटी के अनुसार संबंधित अवधि में कैश शाखा में मनोहर केवट, सेवानिवृत्त कैशियर, साधना चंद्रोल, कैशियर, भानू सिंह शाक्यवार, सहायक ग्रेड-3, अरविंद धुर्वे, सह-प्रभारी और विशाल सराठे, सहायक ग्रेड-3 सहित अन्य कर्मचारी पदस्थ रहे थे।

कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने वित्तीय अनियमितता के संबंध में गढ़ा थाने में शिकायत दर्ज कराई।

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पांच आरोपियों पर मामला दर्ज, तीन गिरफ्तार

गढ़ा पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 316, 318 और 61 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

पुलिस अब वित्तीय अनियमितता से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों, मनी रसीद बुक और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कथित गबन में किन-किन लोगों की भूमिका रही और शासकीय राशि किस तरह बैंक खातों में जमा होने से रोकी गई।


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जबलपुर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: 19 हजार की रिश्वत लेते ग्राम रोजगार सहायक दिलीप साहू रंगेहाथ गिरफ्तार

जबलपुर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: 19 हजार रुपये की रिश्वत लेते ग्राम रोजगार सहायक रंगेहाथ गिरफ्तार



तीनबत्ती न्यूज: 27 जुलाई, 2026

जबलपुर: भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाते हुए जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने बरगी क्षेत्र के ग्राम तिनसी में पदस्थ ग्राम रोजगार सहायक दिलीप कुमार साहू को 19 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी जमीन के पट्टे के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने के एवज में यह रिश्वत मांग रहा था।

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क्या है पूरा मामला?

लोकायुक्त से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम तिनसी की रहने वाली 36 वर्षीया राजकुमारी परस्ते ने मकान निर्माण के उद्देश्य से पंचायत में जमीन का पट्टा दिए जाने के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि नियमानुसार आवेदन पर कार्रवाई करने के बजाय रोजगार सहायक दिलीप साहू ने आवेदक से कहा कि पहले NOC बनेगी और इसके लिए ₹20,000 देने होंगे।

पट्टा प्राप्त करने के लिए मांगी जा रही इस अवैध राशि से परेशान होकर पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त जबलपुर से कर दी।

सत्यापन के बाद बिछाया जाल

शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस द्वारा इसका सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान आरोप सही पाए गए, जिसमें आरोपी पहले मांगी गई ₹20,000 की राशि को घटाकर ₹19,000 लेने पर सहमत हो गया।

सत्यापन के आधार पर लोकायुक्त टीम ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को ट्रैप की योजना बनाई। जैसे ही ग्राम पंचायत भवन तिनसी में आरोपी दिलीप साहू ने शिकायतकर्ता से ₹19,000 की रिश्वत ली, वहां पहले से मौजूद लोकायुक्त पुलिस ने उसे मौके पर ही रंगेहाथों दबोच लिया।

कानूनी कार्रवाई व टीम

रंगेहाथ गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 13(1)(बी) एवं 13(2) के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

इस कार्रवाई का कुशल नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक रेखा प्रजापति ने किया। ट्रैप टीम में निरीक्षक राहुल गजभिये समेत लोकायुक्त संगठन के अन्य अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे।

लोकायुक्त की अपील

लोकायुक्त संगठन ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी किसी भी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो उसकी शिकायत तुरंत लोकायुक्त कार्यालय या हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं, ताकि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई की जा सके।

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जबलपुर: लोकायुक्त ने ₹40 हजार की रिश्वत लेते सब इंजीनियर शुभम जैन को पकड़ा

जबलपुर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: पनागर नगर पालिका का सब इंजीनियर ₹40 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार



तीनबत्ती न्यूज: 07 जुलाई, 2026

​जबलपुर।मध्य प्रदेश के जबलपुर में लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। टीम ने पनागर नगर पालिका में पदस्थ सब इंजीनिर शुभम जैन को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी सब इंजीनियर एक ठेकेदार का अंतिम भुगतान (बिल) जारी करने के एवज में कमीशन की मांग कर रहा था। लोकायुक्त की इस अचानक हुई कार्रवाई से नगर पालिका कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।

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​कीटनाशक दवाओं की आपूर्ति का था ठेका

​लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ठेकेदार राजेंद्र सतनामी ने पनागर नगर पालिका में कीटनाशक दवाओं की आपूर्ति करने का ठेका लिया था। उनके कार्य का अधिकांश भुगतान पहले ही किया जा चुका था, लेकिन अंतिम बिल का भुगतान लंबे समय से लंबित था।

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​₹50 हजार मांगी थी रिश्वत, ₹40 हजार पर हुआ सौदा

​ठेकेदार राजेंद्र सतनामी का आरोप था कि उनका लंबित बिल पास करने के बदले सब इंजीनियर शुभम जैन ₹50 हजार की रिश्वत मांग रहा था। ठेकेदार द्वारा काफी अनुरोध किए जाने के बावजूद आरोपी अपनी मांग पर अड़ा रहा। परेशान होकर राजेंद्र सतनामी ने इसकी लिखित शिकायत जबलपुर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक से की। लोकायुक्त टीम ने जब शिकायत का सत्यापन कराया, तो आरोप सही पाए गए। इसके बाद लोकायुक्त ने सब इंजीनियर को पकड़ने के लिए एक जाल (ट्रैप की योजना) बुना।

​कार्यालय में ही दबोचा गया आरोपी

​योजना के मुताबिक, मंगलवार दोपहर जब आरोपी सब इंजीनियर शुभम जैन अपने कार्यालय में ठेकेदार से ₹40 हजार की रिश्वत ले रहा था, तभी पहले से घात लगाए बैठी लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।

​वैधानिक कार्रवाई जारी

​लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी सब इंजीनियर शुभम जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल लोकायुक्त की टीम द्वारा मामले की विस्तृत जांच और आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई की जा रही है।

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