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सामाजिक समरसता: सीखने का नहीं, स्वयं के भाव में लाने का विषय : साध्वी प्रज्ञा सिंह ▪️सागर में हिंदू सम्मेलन आयोजित

Sagar: सामाजिक समरसता: सीखने का नहीं, स्वयं के भाव में लाने का विषय : साध्वी प्रज्ञा सिंह

▪️सागर में हिंदू सम्मेलन आयोजित


तीनबत्ती न्यूज: 31 जनवरी, 2026

सागर: पद्माकर सभागार मोतीनगर में सकल हिंदू समाज रवि शंकर बस्ती द्वारा हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह, मुख वक्त श्रीमती वर्षा सिंह अधिवक्ता, संयोजिका श्रीमती शारदा गुरैया, सहसंयोजीका श्रीमती अंजना घोसी, श्रीमती राजराजेश्वरी पाराशर उपस्थित रही।


मुख्य अतिथि साध्वी प्रज्ञा सिंह ने अपने वक्तव्य में बताया कि संघ ने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में कोई उत्सव नहीं मनाया बल्कि संघ की स्थापना से लेकर आज तक 100 वर्षों की कार्यों का मूल्यांकन किया। उन्होंने संघ की समाज में स्वीकारता पर प्रकाश डाला और सामाजिक समरसता के संबंध में श्री गुरु जी के सामाजिक समरसता के भाव पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि  सामाजिक समरसता सीखने का कोई विषय नहीं है समरसता अपने आप में अपने स्वयं के भाव में लाना चाहिए अपने आप को समरस बनना चाहिए । उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए लव कुश के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा दीक्षा तथा उनका पालन पोषण उन्हीं के द्वारा किया गया के बारे में बताया।  उन्होंने बताया कि मां जब अपने बच्चों की गंदगी साफ करती है  तो  वह शुद्र नहीं बन जाती बल्कि उसमें मातत्व का भाव रहता है अर्थात समरसता स्वयं के भाव में पैदा होना चाहिए। 


कुटुंब व्यवस्था पर जोर

उन्होंने कुटुंब व्यवस्था पर जोर देते हुए बताया कि कम से कम सप्ताह में एक बार परिवार के सभी लोगों के साथ बैठकर भोजन करना चाहिए। माता-पिता का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को संस्कार एवं सनातनी संस्कृति को बताएं।

नागरिक कर्तव्यों के बारे में बताया

मुख्य वक्ता श्रीमती वर्षा सिंह अधिवक्ता ने अपने उद्बोधन में संघ की स्थापना की परिस्थितियों का वर्णन करते हुए पांच परिवर्तन के बारे में बताया। नागरिक कर्तव्यों के बारे में विस्तृत रूप से बताते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को शासन द्वारा बनाई गए नियम कानून का पालन करना चाहिए। सरकारी संपत्ति की सुरक्षा तथा पर्यावरण की रक्षा करना भी नागरिकों का कर्तव्य है।मंच संचालन श्रव्य मेहता और आभार प्रदर्शन श्रीमती नंदिनी चौधरी के द्वारा किया गया।





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तीर्थ दर्शन योजना : कामाख्या देवी जा रहे श्रृद्धालुओं पर पुष्प वर्षा कर मंत्री गोविंद राजपूत ने ट्रेन को किया रवाना

तीर्थ दर्शन योजना :  कामाख्या देवी जा रहे श्रृद्धालुओं पर पुष्प वर्षा कर मंत्री गोविंद राजपूत ने ट्रेन को किया रवाना


तीनबत्ती न्यूज:   31 दिसंबर 2026

सागर :  मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत 279 तीर्थ यात्रियों को कामाख्या देवी के दर्शन के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने पुष्प वर्षा कर शुभ कामनाएं देते हुए ट्रेन को रवाना किया। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव श्रवण कुमार की तरह हर बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा करा रहे है। आधुनिक युग में, जहां लोग अपने काम में व्यस्त हैं, इस प्रकार की योजनाएं बुजुर्गों के लिए एक वरदान हैं। मैं आशा करता हूं कि इस योजना का लाभ अधिक से अधिक बुजुर्गों को मिलेगा और वे अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में आकर भी आध्यात्मिक शांति प्राप्त कर सकेंगे। बल्कि उन्हें समाज में सम्मान और आत्मसम्मान भी प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त तीर्थ यात्रा प्रदान करना है। । श्री राजपूत ने कहा कि सरकार, लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, किसान सम्मान निधि, पी.एम.आवास योजना, कन्यादान योजना जैंसी अनेकों योजनाओं से हर व्यक्ति का विकास कर रही है। 


इस अवसर पर सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने सभी यात्रियों को शुभकामनाएं दी। सभी यात्रियों ने मुख्यमंत्री डाॅ.मोहन यादव, मंत्री श्री राजपूत ने सरकार का आभार व्यक्त किया। मंत्री श्री राजपूत ने यात्रियों से कहा कि यात्रा में कोई भी परेशानी हो तो वह उनसे संपर्क कर सकते हैं। सारी सुविधाएं श्रृद्धालुओं के लिए सरकार की तरफ से की गई हैं। 

इस अवसर पर डाॅ.वीरेंद्र पाठक, विनोद कपूर, पार्षद रूपेश यादव, बाबू सिंह, अनिल श्रीवास्तव, शुभम् जैन, रामेंद्र परिहार, अभिमन्यु, अर्पित, राजू पटैल, अजय राजपूत,चंद्रेश ठाकुर टीला सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।


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श्रद्धा और विश्वास है तो जीवन में सब कुछ मिलता है: पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ▪️रुद्राक्ष धाम में सप्त दिवसीय श्री राम कथा शुरू

श्रद्धा और विश्वास है तो जीवन में सब कुछ मिलता है:  पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज

▪️रुद्राक्ष धाम में सप्त दिवसीय श्री राम कथा शुरू


तीनबत्ती न्यूज: 31 जनवरी, 2026

सागर। रामचरित मानस का लाभ प्राप्त करने के लिए मनुष्य के अंदर श्रद्धा भाव सबसे आवश्यक है। मानस जी का प्रारंभ भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के प्रसंग से शुरू होता है। इसके पीछे भी यह सबसे बड़ा कारण है कि भगवान शिव  विश्वास के प्रतीक हैं और माता पार्वती श्रद्धा की प्रतीक हैं। जिस मनुष्य में श्रद्धा और विश्वास का भाव उपस्थित होगा वही रामचरितमानस में गोता लगाकर भगवान का दर्शन प्राप्त कर सकेगा। यह उद्गार सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन प्रारम्भ करते हुए पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए व्यक्त किए।  

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सागर: रुद्राक्षधाम में संत श्री प्रेम भूषण जी महाराज के मुखारविंद से श्री राम कथा शुरू

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सरस् श्रीराम कथा गायन के लिए लोक ख्याति प्राप्त प्रेममूर्ति पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह के पावन संकल्प से आयोजित सात दिवसीय रामकथा गायन के क्रम में कहा कि श्रद्धा और विश्वास नहीं है तो कुछ भी प्राप्ति नहीं होती है। जैसे संशय स्वरूपा माता सती श्रीराम कथा सुनने गई लेकिन कथा उनके कान में नहीं उतरी।  जिसकी जितनी श्रद्धा दृढ़ है उसको उतनी ही भगवद् फल की प्राप्ति है। श्रद्धा में अर्पण और समर्पण हो तो श्रद्धा अवश्य फल प्रदान करती है।


खटपट मिटे तो झटपट दर्शन होगा

पूज्यश्री के अनुसार-हम जो करते हैं उस पर हमें ही विश्वास नहीं होता है तो फिर कैसे भगवान का दर्शन होगा। खटपट मिटे तो झटपट दर्शन होगा। लाख कोई समझाए भटकना नहीं है। जो इष्ट हैं उनमें केवट भैया और शबरी मैया की तरह से निष्ठ रहना है। सुग्रीव जी की तरह नहीं बनाना है। भगवान से मिलने के बाद भी संसार में लिपट कर भगवान को ही भूल  गए। पूज्य महाराज जी ने कहा कि हम जिस युग में जी रहे हैं वहां कोई भी मनुष्य विकारों से दूर नहीं रह पाता है। कामनाओं के मैल मन में तरह-तरह के विकार पैदा करते रहते हैं और इससे मनुष्य का जीवन कष्टमय हो जाता है। अगर हम सहज रहना चाहते हैं, सहज जीना चाहते हैं तो हमारे पास इस कलियुग के मैल को काटने और धोने का एकमात्र साधन है श्री राम कथा। काम, क्रोध, लोभ, मद  और मत्सर आदि विकार कलिमल कहे जाते हैं। इससे बचने का एकमात्र सहज साधन श्री राम कथा ही है। मानस जी में लिखा है इस कथा को जो सुनेगा, कहेगा और गाएगा वह सब प्रकार के सुखों को प्राप्त करते हुए अंत में प्रभु श्री राम के धाम को भी जा सकता है।

पूज्यश्री ने कहा कि जब मन पर कलिमल का प्रभाव हो तो चाह कर भी मनुष्य सत्कर्म के पथ पर आगे नहीं बढ़ पाता है। मनुष्य का मन और उसकी बुद्धि उसके अपने कर्मों के अधीन है। हम जो भी कर्म  करते हैं उसे हमारा क्रियमाण बनता है। यही कर्म फल एकत्र होकर संचित कर्म होता है और फिर कई जन्मों के लिए यह प्रारूप प्रारब्ध के रूप में जीव के साथ जुड़ जाता है। सत्कर्मों से जिसने भी अपने प्रारब्ध को बेहतर बना रखा है, इस जन्म में भी सत्कर्मों में उसी की गति बन पाती है। अन्यथा बार-बार विचार करने के बाद भी हम उस पथ पर अपने को आगे नहीं ले जा पाते हैं।

माता पिता ही भगवान

पूज्य श्री ने कहा कि अगर हमारे घर में जीवित माता-पिता हैं तो वही हमारे भगवान हैं। माता-पिता की सेवा करके हम वह सब प्राप्त कर सकते हैं जो हम भगवान से चाहते हैं। श्री रामचरितमानस में यह बताया गया है की माता-पिता की आज्ञा मानने वाले, गुरु और अपने से बड़ों की आज्ञा मानने वाले सदा ही सुखी रहते हैं। उन्होंने बताया कि धरती पर तीन प्रकार के लोग होते हैं। एक तो अपने प्रारब्ध के कारण सब कुछ जानने के कारण उचित कार्य ही करते हैं, दूसरे वह है जो दूसरों के अच्छे कार्य को देखकर समझ के कार्य करते हैं। और तीसरे वह हैं जो गलत करते हैं भुगतते हैं और तब उससे सीखते हैं। हमें तीसरा मार्ग अपनाने से बचना चाहिए। महाराज जी ने कहा कि  सत्य मार्ग पर चलकर धन अर्जित करने वाले लोग ही शाश्वत सुख की प्राप्ति कर पाते हैं। छल प्रपंच से धर्म तो अर्जित किया जा सकता है लेकिन उसे सुख की प्राप्ति कदापि संभव नहीं है। अधर्म के पथ पर चलकर धन अर्जित करने वाले जीवन में कभी भी सुखी नहीं हो सकते हैं।  दूसरों को वह दूर से सुखी तो दिखते हैं लेकिन वास्तव में वह सुखी होते नहीं है अगर उनके हृदय का हाल जाना जाए तो पता चलता है कि उनके दुख की कोई सीमा नहीं है।

पूज्यश्री ने बताया कि मनुष्य के जीवन में पूजा पाठ भजन क्यों आवश्यक है? आपने कहा कि जब मनुष्य धर्म कार्यों में पूजा पाठ में संलग्न हो जाता है तो उसके जीवन से भय, विशेषतः मृत्यु का भय बिल्कुल समाप्त हो जाता है क्योंकि तब वह धीरे-धीरे ईश्वर के निकट पहुंचने लगता है। जो व्यक्ति भगवान से संबंध स्थापित कर लेता है तो फिर उसे इस संसार की किसी भी चीज से दुख नहीं पहुंचता। इसीलिए कहा गया है कि जो संत हैं वह दुख या सुख की स्थिति में सम भाव में ही रहते हैं किसी भी परिस्थिति में उनकी मन की स्थिति नहीं बदलती है। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के प्रसंग की चर्चा करते हुए पूज्य महाराज श्री ने कहा कि सनातन धर्म और संस्कृति में विवाह एक मर्यादा महोत्सव है। भगवान को केवल और केवल प्रेम ही प्यारा है बार-बार मानस जी में इसकी चर्चा आई है। यह जरूरी नहीं है कि भगवान भी हम से प्रेम करें हमें भगवान से अवश्य प्रेम करना चाहिए अगर हम भगवान से प्रेम की अपेक्षा करते हैं तो यह व्यापार हो जाएगा, लेनदेन का व्यापार। भगवान से बदले में कुछ चाहना तो व्यापार ही है।उन्होंने कहा कि कल रुद्राक्ष धाम मंदिर में दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा हो जाएगी और स्वयं हनुमान जी कथा श्रवण के लिए प्रांगण में विराजमान रहेंगे।



श्रीराम कथा से भारतीय संस्कृति की आत्मा है : पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह

श्रीराम कथा के प्रारंभ में अपनी बात रखते हुए पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि जब तक भारत में रामकथा जीवित है, तब तक भारतीय संस्कृति सुरक्षित है। कथा सुनने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, क्योंकि जहां-जहां रामकथा होती है, हनुमान जी वहां अदृश्य रूप से उपस्थित रहते हैं। श्रीरामकथा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो पीढ़ियों को जोड़ती है, ‘राष्ट्र चरित्र‘ का आधार है। उन्होंने कहा कि अगर भगवान राम तक पहुंचना है, तो हनुमान जी का पल्ला पकड़ लो। हनुमान जी राम जी के द्वारपाल हैं (‘‘राम दुआरे तुम रखवारे‘‘) उनकी कृपा के बिना राम नहीं मिलते। श्रीराम भारत के आदर्श हैं। वे सत्य के अवतार हैं। सीता भारत की स्त्रियों के लिए धैर्य और पवित्रता का आदर्श हैं। जिस दिन भारत श्री राम और माता सीता के आदर्शों को भूल जाएगा, उस दिन भारत की आत्मा मर जाएगी।‘‘ पूर्व गृहमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रभु श्री राम के बिना भारत की कल्पना करना असंभव है। वे हमारे राष्ट्र-पुरुष हैं। अयोध्या में बना श्री राम मंदिर केवल एक देव मंदिर नहीं, बल्कि ‘राष्ट्र मंदिर‘ है। यह भारत की सांस्कृतिक विजय और स्वाभिमान का सूर्योदय है। हनुमान जी रामकथा के प्राण हैं, बिना उनके कथा अधूरी है। हनुमान जी युवाओं के आदर्श हैं बल, ब्रह्मचर्य, अनुशासन और सेवा का ऐसा संगम कहीं और नहीं मिलता।

धर्मप्रेमी उमड़े कथा सुनने

महाराज श्री ने कई सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी, भजनों का आनन्द लेते हुए झूमते नजर आए। मुख्य यजमान पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह तथा उनके परिवार के सदस्यों ने व्यास पीठ का पूजन किया और भगवान की आरती उतारी। तत्पश्चात पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह,महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, पूर्व मंत्री नारायण कबीर पंथी, एड कृष्णवीर सिंह, प्रभु दयाल पटेल, डॉ. सुशील तिवारी, पूर्व महापौर मनोरमा गौर,अनुराग प्यासी, रिटा. डीएसपी वीरेन्द्र बहादुर सिंह, जिला क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष लखन सिंह ने पं प्रेमभूषण जी महाराज का अभिनंदन किया।

लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री राकेश सिंह होंगे कथा में शामिल

मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री राकेश सिंह का 1 फरवरी 2026 दिन रविवार को सागर आगमन प्रस्तावित। लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री राकेश सिंह 1 फरवरी 2026 को प्रातः 10:45 बजे भोपाल से रवाना होकर दोपहर 1:30 बजे सागर पहुंचेंगे। तत्पश्चात मंत्री श्री सिंह दोपहर 2 बजे बहेरिया रोड बमौरा स्थित रुद्राक्ष धाम मंदिर परिसर में प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होंगे। तत्पश्चात मंत्री श्री सिंह दोपहर 2:45 बजे भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे।



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Sagar: नन्हीं जान, बड़ी जंग और डॉक्टरों का चमत्कार: मौत के दरवाजे से लौट आया मासूम

Sagar: नन्हीं जान, बड़ी जंग और डॉक्टरों का चमत्कार: मौत के दरवाजे से लौट आया मासूम



तीनबत्ती न्यूज: 31 जनवरी, 2026

सागर: बुंदेलखंड संभाग के चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सागर के चैतन्य हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम ने एक मात्र 25 दिन के नवजात शिशु को मौत के मुँह से बाहर निकालकर एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल की है। यह मामला न केवल जटिल था, बल्कि चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सागर संभाग में अपनी तरह का पहला रिपोर्टेड केस है। जब नवजात को अस्पताल लाया गया, तो वह तेज बुखार, पेट में सूजन और गंभीर संक्रमण से जूझ रहा था। विस्तृत जांच में जो सामने आया, उसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया।

शिशु एक साथ चार जानलेवा स्थितियों से लड़ रहा था

मल्टीपल लीवर एब्सेस जिसमें लिवर में मवाद (पस) जमा हो जाना। सेप्टीसीमिया विथ मेनिनजाइटिस जिसमें रक्त में गंभीर संक्रमण के साथ दिमागी बुखार, गंभीर एस्टेट्स (ascites) जिसमें पेट में अत्यधिक तरल पदार्थ का जमा होना जैसी बीमारियों से जूझ रहा था।



सीनियर पीडियाट्रिशियन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने बताया कि दुनिया भर के चिकित्सा साहित्य में इस तरह के बहुत कम मामले दर्ज हैं। ऐसी जटिल स्थिति में जीवित बचने की दर (Survival Rate) महज 50% होती है। 1 माह से छोटे बच्चे पर इतनी जटिल प्रक्रिया करना चिकित्सा टीम के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

कैसे मिली सफलता?

शिशु की जान बचाने के लिए लिवर से पस निकालना अनिवार्य था। अस्पताल की सर्जिकल और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिकल टीम, जिसमें डॉ. विशाल गजभिये, डॉ. श्रेया ठाकुर और डॉ. सनी गुप्ता शामिल थे, ने एक साहसिक निर्णय लिया। टीम ने यूएसजी (USG) गाइडेंस के तहत लिवर में 'पिगटेल कैथिटर' डालकर सफलतापूर्वक मवाद को बाहर निकाला। यह प्रक्रिया इतने छोटे बच्चे के लिए अत्यंत जोखिम भरी थी, जिसे टीम ने निपुणता से अंजाम दिया। गहन निगरानी और समर्पित उपचार के बाद, बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। परिजनों ने चैतन्य हॉस्पिटल की टीम को 'देवदूत' बताते हुए आभार व्यक्त किया है। 

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संत रविदास जंयती : सागर में अध्योध्या धाम के राम मंदिर में लगे वंशीपहाड़पुर के पत्थरों से देश का प्रथम संत रविदास मंदिर ले रहा है पूर्ण आकार

संत रविदास जंयती : सागर में  अध्योध्या धाम के राम मंदिर में लगे वंशीपहाड़पुर के पत्थरों से देश का प्रथम संत रविदास मंदिर ले रहा है पूर्ण आकार


तीनबत्ती न्यूज 31 जनवरी 2026 
सागर: अध्योध्या धाम के भगवान श्री राम लला मंदिर में लगे राजस्थान के धोलपुर वंशीपहाड़पुर के लाल पत्थरों से देश का प्रथम 101 करोड़ रू. की लागत का संत रविदास मंदिर पूर्ण मूर्तरूप ले रहा है संत रविदास मंदिर 66 फुट ऊंचा होगा। मंदिर के गर्भगृह में किसी भी प्रकार के लोहे का उपयोग नहीं होगा, केवल पत्थर, रेत, गिटटी का उपयोग करते हुए मंदिर को भव्य एवं दिव्य रूप दिया जा रहा है।मंदिर के शुरू होने से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इसके भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। 


कलेक्टर संदीप जी आर ने बताया कि विगत वर्ष संत रविदास जंयती के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के द्वारा 101 करोड रू. की लागत से संत रविदास मंदिर, संग्राहालय की घोषणा की गई थी। जिसका भूमि पूजन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था। उन्होंने बताया कि संत रविदास मंदिर के निर्माण की केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा सतत् मॉनिटरिंग की जा रही है।
कलेक्टर संदीप जी आर ने बताया कि संत रविदास मंदिर एवं संग्रहालय में जो प्रमुख रूप से विशेषताएं रहेगी, उनमें बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी का समय भारत में भक्ति आंदोलन का समय था। मध्यकाल में कई संतों ने सामाजिक समानता और जाति आधारित भेदभाव उन्मूलन पर बल दिया। इनमें रविदासजी महान सुधारक और सत्य के उपदेशक बनकर प्रमुख संत के रूप में प्रतिष्ठित हुए। अपनी रचनाओं के माध्यम से रविदासजी ने ईश्वर के एक रूप का स्वीकार किया, जाति भेद की आलोचना की और समानता का समर्थन किया। ’संत शिरोमणि’ उपाधि प्राप्त गुरु संत रविदास को लोग ’रैदास’ के नाम से भी जानते हैं। संवत 1377, काशी में माघ पूर्णिमा के दिन जन्मे संत रैदास की रचनाएँ आध्यात्मिक एवं सामाजिक रूप से काफी प्रगतिशील रही। रैदासजी ने अपने आचरण तथा व्यवहार से प्रमाणित किया कि मनुष्य जन्म से नहीं अपने कर्मों से महान बनता है।


संत रविदास मन्दिर और संग्रहालय

मध्यप्रदेश सरकार, संत रैदास के सामाजिक परिष्कार एवं एकता के विचार और लोक- परिमार्जन एवं मानवता की वाणी को रक्षित करने का प्रयास करने जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार ने संत रविदास के सराहनीय कार्यों को महान श्रद्धांजलि देने का विचार किया है। साथ ही, संत रविदास की वाणी-विरासत को सुरक्षित रखकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने हेतु मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ’संत रविदास मन्दिर और संग्रहालय’ का निर्माण करने जा रही है। सागर जिले में मन्दिर एवं संग्रहालय का निर्माण श्रद्धेय कवि व समाज सुधारक संत रविदासजी के सत्कार्यों को अंजली देना एवं उनके जीवन-मूल्य व विरासत को उजागर करना है। समानता एवं ईश्वर के प्रति समर्पण भाव इस मन्दिर और संग्रहालय का केन्द्र बिंदु बनेगा।



संत रविदास मंदिर एवं संग्रहालय का भवन 
संत रविदास मन्दिर एवं संग्रहालय’ परिसर विभिन्न सुविधाओं के साथ देश-विदेश के कई साधक, संशोधक एवं भक्तों को आकर्षित करेगा। आधुनिक संसाधन, रोशनी, पेड़-पौधों से परिसर का वातावरण ज्ञान के साथ सुकून का अनुभव करायेगा। साथ ही, इस परिसर की डिज़ाइन वास्तुकला के आधार से तैयार की जायेगी।
संत रविदास मन्दिर एवं संग्रहालय’ 12 एकड भूमि में आकार लेगा। जिसका प्रारूप इस प्रकार है

मन्दिर - इस परियोजना के मध्यस्थ 5500 वर्ग फिट में मुख्य मन्दिर आकार लेगा। मन्दिर नागर शैली से बनाया जा रहा है। मन्दिर में गर्भगृह, अन्तराल मन्डप तथा अर्धमन्डप का सुंदर निर्माण होगा। मन्दिर केवल पूजा का स्थान न बनकर सांस्कृतिक-आध्यात्मिक चर्चाओं का केन्द्र स्थान बनेगा। आगंतुक भारतीय संस्कार व संस्कृति के विषय में विस्तार से जान पायेंगे। आध्यात्मिक विश्वासों पर चिंतन एवं मनन के लिए यह केन्द्र मुख्य आकर्षण बनेगा।



जलकुंड - ’संत रविदास संग्रहालय’ (म्यूज़ियम) के प्रवेश द्वार के सामने बड़ा सा जलकुंड आकार लेने वाला है। सुन्दर नक्काशी और मूर्तियों के साथ इस जलकुंड के आसपास पेड़ पौधों की रमणियता प्रदान की जायेगी। जल से पवित्रता का अनुभव होता है, इसलिए कुंड के पास विहार करने योग्य विशाल स्थान बन रहा है।

संग्रहालय - मन्दिर के आसपास वर्तुलाकार की भूमि पर चार गैलेरी बनेगी जिसमें, संत रविदासजी के जीवन को विस्तृत रूप से एवम् आधुनिक संसाधनों की सहायता से प्रस्तुत किया जायेगा। संत रविदास की वाणी, उनके कार्य, सामाजिक प्रदान, भक्ति आंदोलन, आंदोलन में संत रविदास की भूमिका आदि विषयों को कलात्मक रूप से आधुनिक तकनिकों के साथ दर्शाया जायेगा।

पुस्तकालय - दस हजार वर्गफुट में पुस्तकालय और संगत सभाखंड आकार ले रहा है। यहाँ संत रविदास की उपलब्धियाँ और शिक्षाओं को संग्रहीत किया जायेगा। संत रविदासजी के कृतित्व के साथ यहाँ आध्यात्मिक, धार्मिक पुस्तकें भी रखी जायेगी। यह पुस्तकालय एक तरह साहित्य संसाधनों का भंडार बनकर सामने आयेगा। यहाँ संत रविदास के साथ अन्य महान गुरुओं एवं दार्शिनकों के विचार व वाणी को संभाला जायेगा। आगंतुक इस स्थान पर बैठकर पुस्तक पढ़ सके ऐसी व्यवस्था उपलब्ध होगी।

संगत सभाखंड - संगत सभाखंड का आकार फूलों की पंखुडियों जैसा बनेगा। नवीन रूप से निर्माण होनेवाले इस विशाल सभाखंड में संत रविदासजी की वाणी के साथ कई अन्य धार्मिक, आध्यात्मिक, संशोधनलक्षी कार्य होंगे, जैसे व्याख्यान, कार्यशाला, संगोष्ठियाँ। इस स्थान पर आकर लोग अपने विचारों का सरलतम तरीके से आदान- प्रदान कर पायेंगे। संगत सभाखंड सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन स्त्रोत बनेगा


भक्त निवास - भक्त निवास, 12,500 वर्गफुट में निर्मित हो रहा है। यह क्षेत्र विश्वभर से पधारें साधक, भक्त, संशोधक, विद्वान, यात्रियों के निवास की व्यवस्था करेगा। आरामदायक एवं आवश्यक रहने की व्यवस्थाएँ यहाँ उपलब्ध होगी। एयर कंडीशनिंग कमरें, साफ बिस्तर, संलग्न बाथरूम वाले पंद्रह कमरे होंगे। साथ ही, पचास व्यक्तियों के लिए छात्रावास सुविधाएँ भी प्राप्त होगी।

अल्पाहार गृह - मुलाकातियों के लिए पंद्रह हजार वर्गफुट में विशाल अल्पाहार गृह का निर्माण होगा। तम्बू-आकार की डिज़ाइन वाले यह अल्पाहार गृह में नाश्ते-भोजन के साथ अन्य सामग्री परोसी जायेगी। बैठने के लिए पारंपरिक मेज एवं कुर्सियों के साथ बाहरी बैठक व्यवस्था भी बनाई जायेगी। गजेबों - आल्पाहार-गृह के पास दो बैठने योग्य स्थान बनेंगे। मुलाकाती इस स्थान का उपयोग बैठने, पढ़ने, नास्ता करने, विचारों का आदान-प्रदान करने हेतु कर पायेंगे। 1940 वर्गफुट में निर्मित यह क्षेत्र खुला होने के कारण आसपास का प्राकृतिक दृश्य का आनंद लेना सरलतम एवं सुकूनदेह होगा।

संत रविदास मन्दिर एवं संग्रहालय’ के माध्यम से आधुनिक विकास एवं कलात्मकता के साथ संत रविदासजी की शिक्षाएँ व दिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचेगी। यह आध्यात्मिक स्थान समग्र विश्व के विभिन्न संस्कृति के साधकों का स्वागत करेगा और साथ ही रहस्यवाद पथ की गहरी समझ व्यापक बनायेगा।

सौ करोड़ से बन रहा है मंदिर

संत रविदास जी के भव्य मंदिर एवं कला संग्रहालय आदि के निर्माण 11 एकड़ भूमि में किया जावेगा। इस सम्पूर्ण योजना की लागत राशि रु 101 करोड़ प्रस्तावित है। योजना के अंतर्गत विभिन्न घटकों का समायोजन किया गया है, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है- मंदिर - संत रविदास जी का नागर शैली से पत्थरों का एक भव्य मंदिर का निर्माण लगभग 10000 वर्गफिट क्षेत्रफल में किया जा रहा है। इंटरप्रिटेशन म्यूजियम संस्कृति एवं रचनात्मक विशेषता के साथ साथ संत जी के दर्शन को प्रदर्शित करने वाली एक विशेष शैली के इंटरप्रिटेशन म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा म्यूजियम का कुल क्षेत्र फल 14000 वर्गफुट में हो रहा है, जिसके अंतर्गत म्यूजियम में चार गैलरियाँ निर्मित की जा रही है।
 
प्रथम गैलरी- संत रविदास जी के महान जीवन का प्रदर्शन।

द्वितीय गैलरी- संत रविदास जी के भक्ति मार्ग तथा निर्गुण पंथ में योगदान।

तृतीय गैलरी- संत रविदास के दर्शन का विभिन्न मतों पर प्रभाव तथा रविदासिया पंथ।

चतुर्थ गैलरी- संत रविदास की काव्योंचित, साहित्य एवं समकालीन विवरण।
संत रविदास जी के जीवन वृतांत का चित्रण समस्त परिसर में म्युरल स्कल्प्चर के माध्यम से किया जावेगा, मंदिर परिसर में दो भव्य प्रवेश द्वार एवं भव्य पार्किंग, सी.सी.टी.वी., फायर फाइटिंग, लाइटिंग इत्यादि की समुचित व्यवस्थाएँ निर्मित की जावेगी।
श्री मनीष डेहरिया असि. इंजीनियर टूरिजम ने बताया कि मंदिर निर्माण का कार्य शीघ्रता से चल रहा है, जिसमें अभी तक निर्माण एंजेसी यूनिट इंजीवेन्चर कसोटियम एलएलपी नोयडा के द्वारा 25 प्रतिशत किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि मंदिर का फाउंडेशन कार्य पूर्ण तथा म्यूजियम फाउंडेशन का कार्य प्रगति पर है। डोरमेट्री के दो तल, भक्त निवास के दो तल, बाउंड्रीवॉल, कुण्ड कालोनेड स्ट्रक्चर फाउंडेशन का कार्य प्रगति पर है। टायलेट ब्लॉक स्ट्रक्चर, लाईब्रेरी एवं कैफेटेरिया का कार्य पूर्ण हो रहा है।



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Sagar : शहर कांग्रेस कमेटी की जिला कार्यकारिणी घोषित : 08 उपाध्यक्ष, 23 महामंत्री, 21 सचिव बनाए गए

Sagar : शहर कांग्रेस कमेटी की जिला कार्यकारिणी घोषित : 08 उपाध्यक्ष, 23 महामंत्री, 21 सचिव बनाए गए


तीनबत्ती न्यूज: 30 जनवरी, 2026

भोपाल: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी की स्वीकृति उपरांत जिला कांग्रेस कमेटी सागर शहर की जिला कार्यकारिणी नियुक्त की गई है। इसमें  एक कोषाध्यक्ष 08 उपाध्यक्ष, 23 महामंत्री, 21 सचिव और कार्यकारिणी सदस्य आदि बनाए गए है। 

कार्यकारिणी इस प्रकार है
अध्यक्ष : महेश जाटव
जिला संगठन महासचिव : राम कुमार पचौरी
कोषाध्यक्ष :  प्रिंस जैन, 
उपाध्यक्ष : शरद पुरोहित,आनंद हैला, सुल्तान कुरैशी ,समीर खांन
बब्बू यादव,जितेन्द्र रोहण , इम्तियाज (चमन) अंसारी , राहुल चौबे
महामंत्री : 
चेतन्य कृश्ण पांडे ,वसीम खॉन, रिशभ जैन, हरिशचंद सोनवार, प्रीतम यादव, वीरेन्द्र महावते, साजिद राईन,श्रीमति सुधा रजक, संजय कटारे, उमर खॉन, गंगाराम अहिरवार,भोर खान, शाहबाज कुरैशी,जितेन्द्र चौधरी, एड. अकील सिददीकी,कल्लु गुप्ता, नदीम कुरैशी, रवीकांत अग्रवाल ,नौशाद अब्बासी अरविन्द्र सिंह ठाकुर ,सुनील ठाकुर,अशोक साहू, श्री फिरदोश कुरैशी
सचिव :
रोहित मॉडले,आदिल राईन,नीरज रैकवार,अलीम खॉन (तज्जू)
रसीद राईन, मुबीन खान,पवन जाटव, मीरा अहिरवार, जाहिद ठेकेदार, प्रियंक जैन बहेरिया ,तारिक कुरैशी, देवेन्द्र बाल्मीकि
कुंदन विश्वकर्मा, समीर चौरसिया
सोमेश चौरसिया,नरेश संनकत
स्वप्नल गुप्ता, बादशाह खान, अजय सिंह राजपूत,अरूण साहू
श्रीमती रंजीता राणा

कार्यकारिणी सदस्य
सुनील पाबा,कुंजीलाल लड़िया
पप्पू गोस्वामी,नरेन्द्र अहिरवार अशोक नागवानी,अरविन्द मंछदर मनोज सोनी, निखिल जैन
संरक्षण सदस्य
श्री अरविन्द भाई पटैल ,श्री प्रेमनारायण मिश्रा, श्री स्वदेश जैन
श्री कैलाश सिंघई,श्री सतीश चंद रावत एड.,श्री चुतुर्भज सिंह राजपूत,श्री अवध बिहारी बिल्थरे
श्री भोलेश्वर तिवारी,श्री शुकदेव तिवारी,श्री के.के. सिलाकारी
श्री भूपेन्द्र गुप्ता

विशेष आमंत्रित सदस्य
श्री बुन्देल सिंह बुंदेला,श्री सिद्धगोपाल तिवारी,श्री विमल जैन,श्रीमति निधि सुनील जैन
श्री गुरजीत सिंह अहलूवालिया
श्री अरूण मिश्रा,श्री राम शर्मा
श्री रामनाथ यादव,श्री अब्दुल रफीक गनी,श्रीमति रेखा चौधरी
श्री अवधेश तोमर,श्री राजकुमार पचौरी,राजू राठौर,श्री गोविन्द प्रसाद बक्सी (राजू),श्री शेलेन्द्र तोमर,श्री अनिल कोठारी,श्री लखन राठौर,श्री प्रभात जैन,श्री जमना प्रसाद सोनी,श्री रिंकू 
केशरवानी,श्री रूप नारायण यादव,श्री शालू खान,श्री बलराम साहू,श्री राजू ठाकुर,श्री गोपाल तिवारी ,श्री राकेश छावड़ा
श्री भारद मिश्रा,श्रीमति रंजीता राणा,श्री मनोज पांडे,श्री मुरलीधर अहिरवार,राजेश उपाध्याय, श्रीमति चंद्रप्रभा दुबे,श्री दुलीचंद सकवार,श्री आनंद अहिरवार,श्री डॉ. संदीप सबलोक,प्रेमनारायण विश्वकर्मा,राजेश यादव,अभिलाश जैन,कल्लू गुप्ता,सुरेन्द्र चौबे,डॉ अंकलेश्बर दुबे,राजकुमार कोरी

स्थायी आमंत्रित सदस्य
श्री संतोश पांडे,श्री त्रिलोकीनाथ कटारे,श्री अशोक श्रीवास्तव
श्री सुनील जैन पूर्व विधायक,श्री अमित राम जी दुबे,श्री मुकुल पुरोहित,श्री सुरेन्द्र सुहाने,श्री निधी सुनील जैन,श्री पुरूशोत्तम मुन्ना चौबे,श्री जगदीश यादव,श्री प्रशांत समैया,गुड्डू राजा बुंदेला,रेखा चौधरी,राजकुमार पचौरी,जितेन्द्र सिंह चाबला,रामकुमार पचौरी
मुन्नालाल चौरसिया (पालक)
अखिलेश मोनी केशरवानी,नरेन्द्र सोनी,मदन सोनी,राजकुमार कोरी
राकेश राय,पप्पू गुप्ता
स्थायी कार्यालय मंत्री
श्री दीनदयाल तिवारी
प्रवक्ता
श्री कमलेश तिवारी
श्री लक्ष्मीनारायण सोनकिया
सोशल मीडिया अध्यक्ष
श्री नीलेश अहिरवार
निर्वाचन प्रभारी
श्री चक्रेश सिंघई







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शासकीय चिकित्सा अधिकारी को सजा: फर्जी मूल निवासी बनाकर मेडिकल सीट पर लिया था एडमिशन ▪️ पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने की थी STF में शिकायत व्यापम घोटाले की

शासकीय चिकित्सा अधिकारी को सजा: फर्जी मूल निवासी बनाकर मेडिकल सीट पर लिया था एडमिशन 

▪️ पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने की थी STF में शिकायत व्यापम घोटाले की


तीनबत्ती न्यूज: 30 जनवरी, 2026

भोपाल: भोपाल की एक अदालत ने फर्जी मूल निवासी का प्रमाणपत्र लगाकर मेडिकल सीट पर प्रवेश लेने वाले डाक्टर को सजा सुनाई है। वर्तमान में वह शासकीय चिकित्सा अधिकारी है। इसकी STF में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने फर्जीवाड़े की शिकायत दर्ज कराई थी। 

एडीपीओ, भोपाल अकील खान ने बताया कि आज 30 जनवरी को  माननीय न्‍यायालय श्री अतुल सक्‍सेना 23वे अपर सत्र न्‍यायाधीश, द्वारा कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र का उपयोग कर मेडिकल सीट पर प्रवेश लेने वाले आरोपी डॉक्‍टर सीताराम शर्मा पिता श्री नत्‍थीलाल शर्मा को दोषसिद्ध  पाते हुये धारा 420 भादवि मे  03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500रू अर्थदण्‍ड एवं धारा 467 भादवि मे  03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500रू अर्थदण्‍ड धारा 468 भादवि मे  03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500रू अर्थदण्‍ड एवं धारा 471 भादवि मे  02 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500रू अर्थदण्‍ड से दण्डित किये जाने का निर्णय पारित किया है । उक्‍त प्रकरण में शासन द्वारा की ओर से विशेष लोक अभियोजक एसटीएफ भोपाल आकिल खान एवं श्रीमती सुधाविजय सिंह भदौरिया द्वारा पैरवी की गई है। 

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पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने की थी शिकायत

घटना का विवरण इस प्रकार है कि पूर्व मुख्‍यमंत्री  दिग्‍विजय सिंह तत्‍कालीन राज्‍य सभा सासंद द्वारा एसटीएफ भोपाल को शिकायत की गई थी कि व्‍यापम वर्ष 2006 के बाद जो परीक्षाएं आयोजित हुई है और जो घोटाला हो रहा है उसमे उत्‍तर प्रदेश के मूल निवासी मध्‍यप्रदेश मे मेडिकल सीट प्राप्‍त करने के लिये मध्‍यप्रदेश का कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर कर मध्‍यप्रदेश कोटे की मेडिकल सीट पर प्रवेश ले रहे है।  पुलिस थाना एसटीएफ भोपाल को वर्ष 2009 मे प्राप्‍त शिकायत व्‍यावसायिक परीक्षा मण्‍डल भोपाल द्वारा आयोजित पीएमटी परीक्षा मे आरोपी सीताराम शर्मा द्वारा वर्ष 2009 मे उत्‍तीर्ण होने पर म.प्र. राज्‍य कोटा का लाभ प्राप्‍त करने के लिये कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र का उपयोग कर सदोष लाभ प्राप्‍त करने से उक्‍त कृत्‍य का अपराध पंजीबद्ध किया गया।  उक्‍त सूचना के आधार पर पुलिस थाना एसटीएफ के अपराध 35/2019 धारा 420, 467, 468, 471 भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना मे लिया गया । 

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आरोपी यूपी का मूल निवासी 

विवेचना मे पाया गया है कि आरोपी सीताराम शर्मा द्वारा मध्‍यप्रदेश की अम्‍बाह तहसील से निर्मित कथित मूल निवासी बना होना दर्शाकर मेडिकल सीट पर प्रवेश लिया जबकि आरोपी मूल रूप से उत्‍तरप्रदेश को रहने वाला है और उसने माध्यिमक शिक्षा परिषद उत्‍तरप्रदेश से 1984 हाईस्‍कूल की परीक्षा एवं 2001 मे इंटरमीडियेट की परीक्षा उत्‍तीर्ण की थी। अभियुक्‍त वर्तमान मे जिला भिण्‍ड मे शासकीय चिकित्‍यालय मे चिकित्‍सा अधिकारी के शासकीय पद पर पदस्‍थ है। जब उसके कथित मूल निवासी प्रमाण पत्र की जॉच की गई तो उक्‍त प्रमाण पत्र तहसील अम्‍बाह जिला मुरैना से जारी होना नही पाया गया। उपरान्‍त अभियोग पत्र माननीय न्‍यायालय के समक्ष प्रस्‍तुत किया गया माननीय न्‍यायालय के समक्ष अभियोजन द्वारा प्रस्‍तुत तर्क, साक्ष्‍य, दस्‍तावेजों एवं न्‍यायाद़ष्‍टात से सहमत होते हुए आरोपी सीताराम शर्मा को उक्‍त धाराओं मे दोषसिद्ध का निर्णय पारित किया गया है। 

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न्‍यायालय के निर्णय के पैरा 143 मे लेख किया गया है विद्वान विशेष लोक अभियोजक ने मामले की पृष्‍ठ भूमि पर प्रकाश डालकर यह प्रकट किया कि अभियुक्‍त द्वारा किया गया अपराध इसलिए गंभीर प्रकृति का है क्‍योकि मध्‍यप्रदेश का मूल निवासी ना होकर एक प्रतियोगी परीक्षा मे अवास्‍तविक कूटरचित दस्‍तावेज का उपयोग कर बेईमानीपूर्वक आशय से स्‍थान सुनिश्चित किया गया जिसके आधार पर वास्‍तविक प्रतियोगी परीक्षार्थी का अधिकार प्रभावित हुआ है और वर्तमान मे अभियुक्‍त एक शासकीय चिकित्‍सालय मे एक चिकित्‍सीय अधिकारी है। इसलिए अभियुक्‍त का अपराध गंभीर प्रकृति को होकर अभियुक्‍त को कठोर दण्‍ड से दण्डित किये जाने की प्रार्थना की गई ।

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नगर परिषद बक्सवाहा की महिला CMO व उपयंत्री को EOW सागर ने 30 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा ▪️आवासीय पट्टा एवं प्रधानमंत्री आवास देने के एवज में रिश्वत ली

नगर परिषद बक्सवाहा की महिला CMO व उपयंत्री को EOW सागर ने 30 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

▪️आवासीय पट्टा एवं प्रधानमंत्री आवास देने के एवज में रिश्वत ली


तीनबत्ती न्यूज: 31 जनवरी ,2026

सागर: EOW सागर ने छत्तरपुर जिले के बक्सवाहा नगर परिषद की CMO नेहा शर्मा तथा उपयंत्री शोभित मिश्रा को आवासीय पट्टा एवं प्रधानमंत्री आवास देने हेतु रिश्वत लेने के आरोप में  30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। इस कार्यवाही से विभाग में हड़कंप मच गया। 

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ई०ओ०डब्ल्यू०) इकाई-सागर में आवेदक  हरिओम पिता बहोरा अहिरवार निवासी बक्सवाहा, जिला-छतरपुर ने बक्सवाहा नगर परिषद सीएमओ सुश्री नेहा शर्मा द्वारा आवेदक को आवासीय पट्टा एवं प्रधानमंत्री आवास स्वीकृति के लिए चालीस हजार की रिश्वत मांगे जाने के सम्बन्ध में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था। आवेदन का सत्यापन करने पर नगर परिषद सीएमओ द्वारा 30000 रूपये रिश्वत की मांग करने की पुष्टि होने पर आरोपी नगर परिषद सीएमओ के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत ई०ओ०डब्ल्यू० में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।



आवेदक की सूचना पर ई०ओ०डब्ल्यू० सागर की टीम द्वारा ट्रैप कार्यवाही की गई। कार्यवाही के दौरान आरोपिया नेहा शर्मा द्वारा रिश्वत की रकम आवेदक से स्वयं ना लेते हुए रिश्वत की रकम उपयंत्री शोभित मिश्रा को दिलवाई गई। जैसे ही उपयंत्री द्वारा रिश्वत की रकम ली गई ई०ओ०डब्ल्यू० की टीम द्वारा उपयंत्री को रंगे हाथ पकड़ा गया। पंचसाक्षी के समक्ष विधिवत उपयंत्री के हाथ केमिकल से धुलवाने पर गुलाबी रंग के हो गए। आवेदक के आवासीय पट्टे एवं प्रधानमंत्री आवास का आवेदन नगर परिषद में लंबित है। दोनों आरोपियों के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है।

ये रही ट्रैप टीम

ट्रैप टीम में ई०ओ०डब्ल्यू० सागर से उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती उमा नवल आर्य, निरीक्षक  प्रशांत मिश्रा,  आदेश जैन, उप निरीक्षक श्रीमती सोनल पाण्डेय, उनि (अ)  अतुल पंथी, प्रधान आरक्षक  आसिफ खान,  रामसजीवन यादव, राकेश बेन, प्रधान आरक्षक (चालक) श्री अफसर अली, आरक्षक  गोविन्द अवस्थी, श्री अंकित मिश्रा, श्री आकाश दीक्षित, महिला आरक्षक श्रीमती स्वाति दुबे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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