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योग शरीर और मन के लिए संजीवनी है, योग अवश्य करे : मंत्री गोविंद राजपूत ▪️3000 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाग

योग शरीर और मन के लिए संजीवनी है, योग अवश्य करे : मंत्री गोविंद राजपूत


 ▪️3000 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाग 


तीनबत्ती न्यूज : 21 जून ,2025
सागर :  योग शरीर और मन के लिए संजीवनी है, योग अवश्य करें एवं व्यक्ति स्वस्थ रहेगा तो परिवार, समाज, देश स्वस्थ रहेगा साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश में योग का परचम लहराया है। उक्त विचार खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने सागर में 11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में स्थानीय पीटीसी ग्राउंड पर व्यक्त किए।

इस अवसर पर सांसद श्रीमती लता वानखेड़े, विधायक शैलेंद्र जैन, नगर निगम अध्यक्ष  वृंदावन अहिरवार, श्री श्याम तिवारी, वरिष्ठ योगाचार्य  विष्णु आर्य,  भगत सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विवेक के वी, नगर निगम कमिश्नर  राजकुमार खत्री, अपर कलेक्टर रुपेश उपाध्याय, संयुक्त कलेक्टर  देवेंद्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी श्रविंद जैन, जिला परियोजना अधिकारी  गिरीश मिश्रा, संभागीय आयुष अधिकारी डॉक्टर जोगेंद्र सिंह, जिला युवा अधिकारी श्सतोष सोनी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, छात्र-छात्राएं, अधिकारी मौजूद थे। 


11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि जब व्यक्ति स्वस्थ रहता है तो परिवार समाज देश स्वस्थ रहता है इसलिए हमें योग अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के द्वारा पूरे देश में सभी को योग करने के लिए जागरूक किया है और आज सभी जगह योग दिवस पर योग हो रहा है योग करने से मन, शरीर, मस्तिष्क स्वस्थ रहता है इसलिए योग अवश्य करें। उन्होंने कहा कि जब हम सभी सुबह उठते हैं तो आलस रहता है किंतु यदि 25 से 30 मिनट योग कर ले तो शरीर प्रफुल्लित हो जाता है उन्होंने कहा कि दिन रात की भाग दौड़ के बीच हमें 30 मिनट योग अवश्य करना चाहिए। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि योग के लिए कोई संसाधन की आवश्यकता नहीं होती एक चादर पर योग किया जा सकता है। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि योग सबके लिए लाभदायक है इसलिए योग अवश्य करें ।


सांसद श्रीमती लता वानखेड़े ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए योग अति आवश्यक है योग करें स्वस्थ रहें योग से न केवल मन शरीर स्वस्थ होता है बल्कि मस्तिष्क भी स्वस्थ रहता है उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में योग के प्रति जो कार्य किया है इससे पूरा विश्व योग के प्रति जागरूक हुआ है।
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इस अवसर पर विधायक श्री शैलेंद्र जैन ने कहा कि सागर को गौर नगरी के साथ योग नगरी बनाने के लिए हमें आज संकल्प लेना होगा और जब हम सभी योग करेंगे तो हमारा सागर स्वस्थ सागर बनेगा उन्होंने कहा कि सनातनी परंपरा को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के द्वारा आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है सागर में सैकड़ो की संख्या में मास्टर ट्रेनर है और हमें इन मास्टर ट्रेनर की मदद से योग सीखना चाहिए और प्रतिदिन योग करना चाहिए। इस अवसर पर श्री श्याम तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन श्री मनोज श्रीवास्तव ने किया जबकि आभार जिला शिक्षा अधिकारी श्री अरविंद जैन ने माना। इस अवसर पर संचालक लोक शिक्षण सागर संभाग श्री मनीष वर्मा संयुक्त संचालक स्वास्थ्य डॉ नीना गिडियन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री लोकेश सिन्हा बड़ी संख्या में स्कूल के छात्र-छात्राएं एवं अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

छावनी परिषद में हुआ आयोजन


अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2025 के अवसर पर  छावनी परिषद सागर केंट सागर में आयोजित 11 वे अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर प्रसिद्ध योगाचार्य और जिला योग समिति के अध्यक्ष विष्णु आर्य के मार्गदर्शन में सामूहिक योगाभ्यास हुआ । कार्यक्रम के मुख्यअतिथि बिग्रेडियर करण सिंह जी, छावनी परिषद मुख्य अधिकारी मनिषा जाट, प्रभु दयाल पटेल हरिओम केशरवानी, सुबोध आर्य, अमित गुप्ता, विनोद सोनी, संदीप सोनी, अनुराग दुबे, संध्या भार्गव, राजेश जडिया मनोहर सोनी सहित जनप्रतिनिधि, पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे।


आयोजन की शुरुआत देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा विशाखापट्टनम में आयोजित योग शिविर के लाइव प्रसारण से की गई इस दौरान योग से शरीर एवं जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

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बिजली उत्पादन में भारत का विश्व में तीसरा स्थान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता का परिणाम: पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह

बिजली उत्पादन में भारत का विश्व में तीसरा स्थान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता का परिणाम: पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह


तीनबत्ती न्यूज: 20 जून ,2025

सागर। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की ताजा रिपोर्ट में भारत के बिजली उत्पादन क्षमता के क्षेत्र में विश्व के तीसरे अग्रणी देश बनने की उपलब्धि पर मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को भेजे गए पत्र में प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री, विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा है कि आपके नेतृत्व में देश को मिली इस उपलब्धि की बड़ी विशेषता यह है कि बिजली उत्पादन क्षमता की इस वृद्धि में बड़ा हिस्सा स्वच्छ अक्षय ऊर्जा और सौर फोटो वोल्टिक ऊर्जा परियोजनाओं का है। विकसित भारत संकल्प अभियान की दिशा में विभिन्न क्षेत्रों में अर्जित हो रही उपलब्धियों के बीच बिजली उत्पादन क्षेत्र में भारत की वैश्विक रैंकिंग बढ़ कर तृतीय स्थान पर आ जाना असाधारण उपलब्धि है। 

पूर्व मंत्री श्री भूपेंद्र सिंह ने पत्र में लिखा है कि वाणिज्यिक, औद्योगिक व आवासीय विस्तार के चलते देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्कताओं की पूर्ति की दिशा में यह उपलब्धि साधारण नहीं है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की सफलता का सूचक है कि वर्ष 2024 में देश के बिजली क्षेत्र में 83 प्रतिशत निवेश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में हुआ है। श्री सिंह ने प्रधानमंत्री श्री मोदी जी को इस उपलब्धि पर आभार व धन्यवाद व्यक्त करते हुए लिखा है कि आपका कर्मठ व श्रमसाध्य नेतृत्व मेरे जैसे भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ताओं व समस्त देशवासियों को गौरव व स्वाभिमान से भर देता है। ऊर्जा क्षेत्र में देश को मिली इस नई उपलब्धि पर आपका हृदय से आभार, धन्यवाद है!


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वेदिका फाउंडेशन जन्मजात बीमार बच्चों का कराएगा इलाज ▪️अभिषेक शिल्पी भार्गव ने फाउंडेशन की रखी नींव, पूरे देश में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए करेगा कार्य

वेदिका फाउंडेशन जन्मजात बीमार बच्चों का कराएगा इलाज

 ▪️अभिषेक शिल्पी भार्गव ने फाउंडेशन की रखी नींव, पूरे देश में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए करेगा कार्य


तीनबत्ती न्यूज : 20 जून, 2025

सागर: मध्यप्रदेश के वरिष्ठ विधायक और  पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक भार्गव एवं धर्मपत्नी श्रीमती शिल्पी भार्गव ने तीन वर्ष पूर्व अपने जुड़वा बच्चों को लेकर जो पारिवारिक एवं मानसिक पीड़ा झेली,  ऐसी पीड़ा किसी और को न हो, इसके लिए उनके दुवारा जन्मजात ह्रदय रोगी बच्चों के निशुल्क इलाज कराने उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वेदिका फाउंडेशन की नींव रखी है । यह फाउंडेशन वेदिका  फाउंडेशन (Vedika Foundation) उन नन्हें मुन्ने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के  लिए समर्पित रहेगा ।जिन्हें जन्मजात हृदय की गंभीर बीमारियां है और जो  आर्थिक तंगी और जानकारी के अभाव में अपना इलाज नहीं करा पा रहे हैं । 

बेटी का दर्द बना उद्देश्य 

फाउंडेशन की स्थापना को लेकर अभिषेक भार्गव कहते है कि कभी कभी आपके जीवन का सबसे बड़ा दर्द आपके जीवन का असल उद्देश्य  निर्धारित करने में सबसे बड़ा सहयोगी सिद्ध होता है । मेरे भी जीवन में विगत कुछ वर्षों में ऐसा ही कुछ घटित हुआ है ।2021 में  दो जुड़वा बच्चे एक बेटा और एक बेटी के रूप  में मेरे परिवार में आए थे ।शुरू से मेरी बहुत इच्छा रही थी की मुझे एक बेटी ज़रूर हो ।परमात्मा  ने इच्छा पूरी की हम सभी लोग  बहुत प्रसन्न थे खुशियाँ मना रहे थे परंतु जन्म के  अगले ही दिन अस्पताल में डॉक्टरों ने जो  बात कहीं वाह शब्दों में आज तक नहीं भूल पाता हूँ ।उन्होंने मुझे मेरी बिटिया के  जन्मजात हृदय रोग के विषय में बताया और कहा कि इसका इलाज संभव नहीं है ।संभवतः यह बच्चा कुछ दिन ही जीवित रह पाएगा साथ ही इसका इलाज भी पूर्णतःसंभव नहीं है ।डॉक्टरों की कहने के बाद मैं अंदर से बहुत टूट चुका था और भगवान के  ऊपर ही सारी चीज़ों को मैंने छोड़ दिया था परंतु मेरी पत्नी उसने हार नहीं मानी ।और अपने माध्यम से ही बेटी के  उपचार के  लिए डॉक्टरों से संपर्क करती रही ।लगभग एक साल की उम्र में दिल्ली  में एस्कॉर्ट्स फोर्टिस हॉस्पिटल में बिटिया का ऑपरेशन हुआ ।इलाज के दौरान अस्पताल में लगभग एक महीने तक लगातार  आना जाना हुआ ।तो मैंने देखा कि सिर्फ़ मैं ही नहीं मेरे जैसे न जाने कितने माता पिता  अपने छोटे  छोटे  बच्चों को ,जिनमें  छह माह से लेकर दस बारह साल तक के बच्चे शामिल थे , वह सभी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे लगातार अस्पताल में आने जाने के कारण  परिजनों को परेशान होते हुए देखता था आर्थिक तंगी के कारण सही जानकारी न होने के कारण व्यवस्थित अस्पताल में भी परेशानी का सामना करना पड़ता था जब बिटिया स्वस्थ हुई तो मैं उसे वापस लेकर घर  आया तो उसके बाद क्षेत्र में भी मैंने देखा कि कई परिजन अपने छोटे छोटे  बच्चों के इलाज नहीं करवा पा रहा है जब मेरी  उनसे बात होती है तो उनकी पीड़ा निकल कर सामने आती है 

       (बच्चों के साथ अभिषेक भार्गव )

पीड़ित परिवारों के लिए उचित सलाह मार्गदर्शन सहयोग

एक मंत्री का परिवार  बच्चों के जन्म की खुशियाँ मना ही नहीं पाया की मानसिक परेशानियों में घिर गया था जा डॉक्टरों ने जुड़वा बच्चों में से बच्ची के लिए ला इलाज जन्मजात ह्रदय रोग बताया, इसके बाब कितने डॉक्टरों को दिखाया, बड़े बड़े हॉस्पिटलो में दिखाने ले गए, तो उन्हें एहसास हुआ की बच्चों की ऐसी बीमारी को लेकऱ अन्य माता पिता  भी परेशान है कोई पैसो के कारण तो कोई इलाज कँहा हो इसकी जानकारी न होने कारण ! बच्चे अपना बचपन नहीं  देख पा रहे है ।  

 (पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव अपने नाती पोते के      साथ)

 जानकारी का अभाव,इलाज में बाधक     अभिषेक भार्गव ने बताया कि सबसे बड़ा कारण  जानकारी का अभाव है दूसरा आर्थिक तंगी ।इन दोनों कारणों के  चलते ही परिवार अपने नन्हे मुन्ने बच्चों को अपनी आँखों के  सामने दम तोड़ते हुए देखता है ।जब मैंने यह पीड़ा स्वयं  महसूस की  तब मन में विचार आया कि क्यों न एक ऐसी संस्था का निर्माण किया  जाए जिसमें इन नन्हें मुन्ने बच्चों को उचित इलाज की व्यवस्था कर सके ।नि शुल्क इलाज की व्यवस्था कर सकें ।साथ ही परिवार के  लिए उचित सलाह और मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं ।बच्चों का चेकअप हो बच्चों का ट्रीटमेंट हो ,परिवार के  लिए आर्थिक सहयोग हो ,इन सारे विचारों को ध्यान में रखते हुए मैंने और मेरी  पत्नी शिल्पी भार्गव ने  एक फाउंडेशन का निर्माण करने का  विचार किया है ।जिसमें हम अपने निजी साधनों से बच्चों और उनके परिजनों को उचित इलाज और मार्गदर्शन प्रदान कर सके ।हमें इस विचार को आगे बढ़ाने के  लिए विषय विशेषज्ञ चिकित्सक और परिवार का सहयोग करने के लिए वॉलेंटियर्स की आवश्यकता है ।जो  अपना अमूल्य समय और सलाह और मार्गदर्शन इस फाउंडेशन को प्रदान कर सकें । इस फाउंडेशन को जिसका नाम हमने अपनी बिटिया के  नाम पर रखा है वेदिका फाउंडेशन  ।उसे बढ़ाने में विस्तार देने में सहयोग करने वाले समर्पित सहयोगियों की आवश्यकता है ।जल्दी हम अपने फाउंडेशन को मूर्त रूप देने वाले हैं।        हमारा यह वेदिका फाउंडेशन  उन सभी बच्चों के  बेहतर स्वास्थ्य के  लिए कार्य करेगा ।आशा है कि आप सभी भी अपने अपने स्तर पर  ऐसे बच्चों को चिन्हित करके हमसे संपर्क करके उन बच्चों का सहयोग कर सकते हैं ।

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मानवीय मूल्यों, धार्मिक और सामाजिक आदर्शों को आत्मसात करना ही शिक्षा का उद्देश्य है: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ▪️अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें यही सबसे बड़ा धर्म है- पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ▪️डा गौर विश्वविद्यालय का 33 वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न

मानवीय मूल्यों, धार्मिक और सामाजिक आदर्शों को आत्मसात करना ही शिक्षा का उद्देश्य है: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

▪️अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें यही सबसे बड़ा धर्म है- पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य

▪️डा गौर विश्वविद्यालय का 33 वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न


तीनबत्ती न्यूज : 20 जून ,2025

सागर. डॉक्टर हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर का 33वां दीक्षांत समारोह  गौर प्रांगण में आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री नितिन गडकरी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, विशिष्ट अतिथि मध्य प्रदेश के उपमुख्य मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, गौर अतिथि खाद्य मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत एवं सांसद डॉ. लता वानखेड़े समारोह में सम्मिलित हुए. समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कन्हैया लाल बेरवाल ने की. विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. 

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डा गौर विश्वविद्यालय का 33 वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न

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विश्वविद्यालय ने पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी को प्रदान की मानद डी. लिट्. उपाधि


इस अवसर पर प्रख्यात मनीषी, रचनाकार, साहित्य एवं संस्कृत मर्मज्ञ, समाजसेवी पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी को विश्वविद्यालय द्वारा मानद डी. लिट्. उपाधि प्रदान की गई. कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने यह उपाधि प्रदान की और उन्हें प्रशस्ति पत्र भेंट किया. प्रशस्ति-पत्र का वाचन डॉ. शालिनी ने किया.  

भव्यता के साथ पुस्तकालय परिसर से निकली विद्वत शोभायात्रा

कार्यक्रम में लोकवाद्य एवं मंगलाचरण के साथ अकादमिक विद्वत शोभायात्रा समारोह स्थल तक पहुँची. प्रभारी कुलसचिव डॉ. सत्यप्रकाश उपाध्याय ने विश्वविद्यालय ध्वज के साथ शोभायात्रा की आगवानी की. इसमें विश्वविद्यालय कुलाधिपति, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, गौर अतिथि, कुलपति, कार्यपरिषद एवं विद्यापरिषद के सदस्य सम्मिलित हुए. 



अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें यही सबसे बड़ा धर्म है- पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य

पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी ने आशीर्वचन देते हुए उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना की. उन्होंने कहा कि दीक्षांत का अर्थ दीक्षा का अंत नहीं है बल्कि यह एक सुनहरे भविष्य की  शुरूआत है. उन्होंने भारतीय भाषा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को राष्ट्र के लिए समर्पित होना चाहिए. प्रत्येक भारतीय के मन में मेलजोल, भाईचारा और समरसता की भावना होनी चाहिए. यही दीक्षा का अर्थ है. उन्होंने राष्ट्र के लिए कार्य करने पर बल देते हुए कहा कि भारत सोने की चिड़िया ही नहीं सोने का सिंह बनेगा. जिस क्षेत्र में भी कार्य करें अपना सर्वश्रेष्ठ दें. अपने कर्तव्य का निर्वहन करें. यही सबसे बड़ा धर्म है. उन्होंने श्री मद भागवत गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि कर्म करिए. फल की चिंता मत करिये.  प्रत्येक भारतीय को निष्ठा से कार्य करना चाहिए. इसी से व्यक्ति की प्रतिष्ठा होगी. उन्होंने युवाओं से अपील की कि हमें नया इतिहास रचना है. नवाचार करना है और अत्याचार, भ्रष्टाचार, कदाचार को जड़ से समाप्त करना है. ऑपरेशन सिन्दूर के माध्यम से भारत ने पूरे विश्व को एक सन्देश दिया है कि भारत अब महाशक्ति है. कोई इसकी तरफ बुरी नजर से आँख उठाकर नहीं देख सकता. इसीलिये मैं कहता हूँ कि बेटियां लक्ष्मीबाई बनें और बेटे शिवाजी और राणा प्रताप बनें. मैं विद्यार्थियों से राष्ट्र के लिए कार्य करने का कामना के साथ उन्हें शुभकामनाएं देता हूँ.  

मानवीय मूल्यों, धार्मिक और सामाजिक आदर्शों को आत्मसात करना ही शिक्षा का उद्देश्य है:   केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी


समारोह के मुख्य अतिथि नितिन गडकरी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, भारत सरकार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दीक्षांत भाषण देते हुए कहा कि दीक्षांत विद्यार्थियों के जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण अवसर होता है. इस विवि के विद्यार्थी भाग्यशाली हैं जिन्हें डॉ. गौर द्वारा दान की गई संपत्ति से बने विश्वविद्यालय में अध्ययन करने का मौका मिला. उन्होंने पदक एवं उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को जीवन में सदैव बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि शिक्षा से व्यक्ति ज्ञानवान बनता है. हमारे देश की विशेषता रही है कि भारतीय ज्ञान परंपरा ने पूरे विश्व को हमेशा आलोकित किया है. हमारी संस्कृति, हमारी विरासत, ज्ञान एवं विज्ञान हमारी विशेषता है. हमें आज विज्ञान और नवाचार के जरिये समाज को बदलना है. उन्होंने कहा कि भगवान् बुद्ध ने अहिंसा का मार्ग दिखलाया था. भारतीय ऋषियों मुनियों ने धर्म के मार्ग पर चलना सिखाया है. मानवीय मूल्यों, धार्मिक आदर्शों, सामाजिक आदर्शों, त्याग, तपस्या, संस्कार, समन्वय, सौहार्द इन सभी मूल्यों को आत्मसात करना शिक्षा का उद्देश्य है. हम इसी रास्ते आदर्श समाज का निर्माण कर सकते हैं. भारत का मन्त्र सदैव विश्व का कल्याण रहा है. यही हमारी संस्कृति है. स्वामी विवेकानंद, आंबेडकर, गांधी, फुले जैसे विचारकों के विचारों के साथ हमें 21वीं सदी के भारत का निर्माण करना है. उन्होंने कहा कि चरित्र ही व्यक्ति की पहचान है. शिक्षा के माध्यम से ही चरित्र का निर्माण किया जा सकता है. हमें फ्यूचरिस्टिक विजन के साथ प्रत्येक क्षेत्र में कार्य करना है. ऐसा हमारे प्रधानमंत्री जी का भी सपना है. बेस्ट टेक्नोलॉजी हमारे देश में विकसित हो, दुनिया में जो कुछ अच्छा है वो भारत में भी हो, यही हमारा प्रयास है. उन्होंने सीएनजी, बायोफ्यूल, इथेनोल, ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे नवाचारी प्रयोगों के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया. उन्होंने कहा की हमें स्मार्ट शहर के साथ स्मार्ट विलेज भी बनाना है. गाँवों का विकास करना है, स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करनी हैं, किसानों को फसल का सही भाव मिले, यह सब करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए. और यह सब करने के लिए शिक्षा, अनुभव और संशोधन के साथ करना है. आप युवा हैं, देश का भविष्य हैं. आप जीवन में समाज के गरीब तबके, मजदूर, किसानों के लिए काम करें. उन्होंने कहा कि जो मनुष्य के लिए काम करे वही मनुष्य है. उन्होंने भारत को शक्तिशाली बनाने के लिए कार्य करने पर जोर देते हुए कहा कि शक्ति संपन्न व्यक्ति ही सौहार्द ला सकता है. शक्ति इसलिए नहीं कि अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए बल्कि इसलिए जिससे न्याय की रक्षा हो सके, धर्म की रक्षा हो सके, शक्ति का उपयोग लोक कल्याण में हो सके, विश्व कल्याण में हो सके. 


विद्यार्थी मानवीय मूल्यों के साथ स्वयं को जनकल्याणकारी कार्यो में लगायें- कुलाधिपति

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कन्हैयालाल बेरवाल ने अध्याक्षीय उद्बोधन देते हुए कहा कि उपाधि मिलना किसी भी विद्यार्थी के जीवन का सबसे सुखद क्षण होता है. विद्या से ही व्यक्ति योग्य बनता है. उन्होंने कहा कि हम कोई भी कार्य करें अपने धर्म का ध्यान रखें. धर्म का मतलब मानवीय मूल्यों के साथ समाज के कल्याण में स्वयं को लगाना. आप अपने भावी जीवन में अपनी भारतीय विचार संस्कृति के साथ जीवन चलायें. आपके योगदान से देश आगे बढ़ेगा. देश के लिए कार्य करें. यही आपकी शिक्षा की सबसे बड़ी उपलब्धि है. शिक्षा के साथ संस्कार एवं पात्रता अति आवश्यक है तभी व्यक्ति को सफलता मिलती है. पाश्चात्य संस्कृति से दूर रहकर भारतीय संस्कृति के आदर्शों एवं विचारकों के पथ के अनुगामी बनें.  

विद्यार्थी समाज के उत्थान के लिए शिक्षा का सदुपयोग करें- उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल


विशिष्ट अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश के उपमुख्य मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह इक्कीसवीं सदी का भारत है. हम विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनोमी बनने जा रहे हैं. भारत 2047 तक सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभरेगा. यही नया भारत है. भारत विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुम्बकम की संकल्पना पर कार्य करने वाला राष्ट्र है. आप सभी इस देश के लिए कार्य करें. आप सबके सामने सुनहरा भविष्य है. शिक्षा का समाज के उत्थान के लिए सदुपयोग करें. 

दीक्षांत का यह अवसर भावुकता, खुशी और आत्मविश्वास का क्षण है -मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत


गौर अतिथि गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि आज का दिन बहुत ही भावुकता का का दिन है जिनको डिग्री मिल रही है बह बहुत ही भाग्यशाली है. एक ज़माने में लोग कहते थे कि यहाँ स्याही नहीं मिलती थी. डॉ. गौर ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना की. मेरे छात्र जीवन में यहाँ कभी दीक्षांत समारोह नहीं हुआ करता था. आप भाग्यशाली हैं कि आप एक इतने बड़े और भव्य आयोजन का हिस्सा बन रहे हैं. उन्होंने डॉ. गौर के बारे में लिखी गई कवी मैथिली शरण गुप्त की पंक्तियों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर था, है और रहेगा. उन्होंने कहा कि आप सभी ज्ञान प्राप्त करने के साथ ही साथ देश एवं समाज की सेवा करने का संकल्प लें और देश का नाम रोशन करें.


विद्यार्थी जहाँ भी रहें अपने विश्वविद्यालय और शिक्षकों का मान बढ़ाएं- डॉ. लता वानखेड़े

गौर अतिथि सागर लोक सभा क्षेत्र की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने सभी विद्यार्थियों को उपाधि एवं पदक प्राप्त करने की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विद्यार्थी जहाँ भी रहें अपने विश्वविद्यालय और शिक्षकों का मान बढ़ाएं. जहाँ भी रहें अपने मूल्यों को न खोएं. समाज व राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का पालन करें. जिज्ञासु बनें. तकनीक का सदुपयोग करें. सफलता केवल पद से नहीं, योगदान से मापी जाती है. अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान राष्ट्र को समर्पित करें. 

डॉ. गौर विश्वविद्यालय भारत केंद्रित ज्ञान संस्थान के रूप में लगातार प्रगति कर रहा है- कुलपति


विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए  शिक्षकों, विद्यार्थियों की उपलब्धियों को रेखांकित किया. उन्होंने विश्वविद्यालय के नवीन छात्रावासों, अकादमिक भवनों, प्रयोगशालाओं, होटल मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, शारीरिक-शिक्षा जैसे नवीन पाठ्यक्रमों और शैक्षणिक समझौतों का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय की अकादमिक एवं अधोसंरचनात्मक प्रगति को साझा करते हुए कहा कि आज विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर के शैक्षिणक मानकों पर अपनी प्राचीन भारतीय विरासत को संजो का आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारत केंद्रित ज्ञान संस्थान के रूप में लगातार आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि हम अपनी गौरवपूर्ण यात्रा को समय एवं समाज के तारतम्य के साथ-साथ आगे बढ़ा रहें है. विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुपालन में अपना श्रेष्ठ योगदान दे रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा एवं अनुसन्धान हेतु माननीय प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में चलाये जा रहे विभिन्न नवोन्मेषी एवं गुणवत्तापूर्ण योजनाओं को विश्वविद्यालय में क्रियान्वित कर रहा है जिसके तहत एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट की स्थापना, डिग्रियों का डिजीलाकर में अपलोड, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों से सम्बंधित पाठ्यक्रमों का सञ्चालन, राष्रीकाय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन, स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम, कौशल विकास और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के संचालन जैसे महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहा है.

कार्यक्रम का संचालन डॉ. शालनी चौइथरानी ने किया. दीक्षांत की औपचारिक कार्यवाही प्रभारी कुलसचिव डॉ. सत्यप्रकाश उपाध्याय ने संचालित की और आभार व्यक्त किया. राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, उपाधि पाने वाले विद्यार्थी, पत्रकारगण, सागर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण, शहर के सम्माननीय नागरिक गण उपस्थित रहे.  




विभिन्न अध्ययनशालाओं के मेधावी विद्यार्थियों को अतिथियों ने प्रदान किये स्वर्ण पदक एवं प्रमाण पत्र 

विश्वविद्यालय के विभिन्न अध्ययनशालाओं के मेधावी विद्यार्थियों को अतिथियों ने स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्र प्रदान किया. इस दीक्षांत समारोह के लिए 1225 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था जिसमें स्नातक के 482 , पीजी 426 एवं पीएच.डी. के 49 छात्रों सहित कुल 957 छात्रों ने उपस्थित होकर उपाधि प्राप्त की. इसके अतिरिक्त शेष विद्यार्थियों को ‘इन अब्सेंशिया’ उपाधि प्रदान की गई. 

अतिथियों ने किया तीन नवीन भवनों का किया लोकार्पण

दीक्षांत समारोह के अवसर पर अतिथियों द्वारा मंच से विश्वविद्यालय के तीन नवीन भवनों आचार्य सुश्रुत भवन, आचार्य पी. सी. रे भवन एवं स्वदेशी भवन का लोकार्पण किया गया. 




डिजीलाकर पर भी रिलीज हुई उपाधि, स्मारिका का किया, विमोचन  समारोह का हुआ लाइव प्रसारण

सभी विद्यार्थियों की डिग्री डिजीलाकर पर भी रिलीज हुई. अतिथियों ने दीक्षांत स्मारिका का भी विमोचन किया.   दीक्षांत समारोह के सम्पूर्ण कार्यक्रम का लाइव प्रसारण विश्वविद्यालय के ईएमआरसी सागर के यूट्यूब चैनल से किया गया. देश के कई हिस्सों से जो विद्यार्थी सहभागिता नहीं कर सके साथ ही उनके अभिभावकों ने लाइव प्रसारण देखा. 


दीक्षांत समारोह के आरम्भ होने से पूर्व अतिथियों ने गौर समाधि पहुंचकर पर डॉ. गौर को पुष्पांजलि अर्पित की.  दीक्षांत समारोह के आयोजन में विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स और अनुशासन व्यवस्था समिति के सदस्यों ने सहयोग किया.


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Editor: Vinod Arya
संपादक :विनोद आर्य
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